/गाँधी ने बताया, कैसे 500-1000 के नोटों के साथ बाहर हुए ‘गाँधी’

गाँधी ने बताया, कैसे 500-1000 के नोटों के साथ बाहर हुए ‘गाँधी’

8 नवंबर 2017 को भारत की अर्थव्यवस्था से 500 व 1000 रुपए के नोटों के साथ एक तरह से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की भी विदाई हो गयी थी। नोटबंदी की इस पूरी प्रक्रिया के कटु आलोचक रहे आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के दावों की पुष्टि करते हुए इस पूरी प्रक्रिया के अंग रहे आरबीआई के तत्कालीन डिप्टी गवर्नर आर. गांधी ने पूरी कहानी पेश की है।

पेश है : नोटबंदी (विमुद्रीकरण) की तैयारियों और इसमें हुई चूक की पूरी कहानी, आरबीआई के तत्कालीन डिप्टी गवर्नर आर गांधी की जुबानी :

“8 नवंबर 2016 का दिन, भारत सरकार ने विमुद्रीकरण का ऐलान करते हुए महात्मा गांधी सीरीज के ₹500 और ₹1000 के नोट बंद कर दिए। इस बात को आज एक साल बीत चुका है। पूरे देश के लिए यह फैसला बेहद अहम था, लेकिन इस फैसले के पीछे की सोच, प्लानिंग और इसे लागू करना आसान नहीं था।

इस तरह हुई प्लानिंग : मूलतः यहाँ देखें..

हम किस प्रयोग को पूरी तरह ‘योजनाबद्ध’ कहते हैं? जब उस प्रयोग में आए हुए सभी विचारों का विश्लेषण हो, इसकी कोई परिभाषा हो, इसके विस्तार की गुंजाइश का विश्लेषण, कानूनी वैधता, प्रस्ताव के गुण और दोष, विचारों के विकल्प, कार्यक्रम के लिए प्रभावी समय सीमा और पूरा मैनेजमेंट हो।
नोटबंदी कार्यक्रम में ये सभी बिंदु थे। जब नोटबंदी शुरू की गई तो इसके कोर ग्रुप के अलावा किसी को इसकी बहुत जानकारी नहीं थी। यह अचानक और ऐसा फैसला था, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। यहां तक कि नए नोटों के बारे में भी किसी को जानकारी नहीं थी। जबकि इसे लेकर सभी प्रक्रियाएं इससे पहले ही चल रही थी, चाहे वह नोटों का साइज हो, रंग हो या डिजाइन हो। ऐसे में आलोचकों ने इसे बगैर योजना के जबरन थोपा गया फैसला करार दिया। इन आलोचकों की संख्या काफी बड़ी थी। पूर्व आरबीआई गवर्नर डॉ. रघुराम राजन ने भी अपनी किताब ‘आई डू वॉट आई डू’ में प्रभावी ढंग से इस पर बात करते हुए कहा था कि विमुद्रीकरण के फैसले पर चर्चा फरवरी 2016 में ही शुरू हो गई थी। बैंक ने इसे लेकर विस्तार से अपना विश्लेषण सरकार के सामने पेश किया था। इस रिपोर्ट में बैंक ने प्लान के गुण और दोष, इसके प्रभाव और दुष्प्रभाव, वैकल्पिक विचार, क्या फैसला लेना चाहिए और फैसला लेने से पहले क्या सावधानियां बरतनी चाहिए जैसी तमाम बातों की जिक्र किया। यानी हफ्तों तक कई दौर की चर्चा, इसके प्रभाव और दुष्प्रभाव पर बात और हर पहलू पर हर तरह से विचार किया गया। क्या इसके बाद भी कोई कह सकता है कि यह फैसला बगैर किसी योजना के लिए लिया गया था।
9 नवंबर और 30 दिसंबर के बीच कैश निकालने पर प्रतिबंध था। लोगों को पैसे जमा करने और पुराने नोट बदलने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा था। शुरुआती दिनों में एटीएम बंद थे, जिसके बाद कहा जाने लगा कि आरबीआई इस फैसले के लिए तैयार नहीं था।
नोटबंदी के फैसले के बाद 500 और 1000 रुपये के हर एक नोट को बदला जाना था। मतलब आरबीआई और पूरे बैंकिंग सिस्टम को पुराने नोटों को नई सीरीज के नोटों से बदला जाना था, जिनकी कीमत करीब 15 लाख करोड़ रुपये थी। इसका मतलब होगा कि कम से कम 23 अरब नोटों को बदला जाना था (2 अरब 2000 के नोटों को 4 अरब 1000 के नोटों के स्थान पर बदला जाना था और 21 अरब 500 के नए नोटों को पुराने नोटों से बदला जाना था।) क्या इतने नोटों की छपाई महज कुछ दिनों में संभव थी।
इसका मतलब साफ है कि नोटबंदी के फैसले के करीब 15 महीने पहले ही नोटों के डिजाइन, साइज, पेपर, इंक और अन्य चीजों की व्यवस्था का काम शुरू हो गया था, ताकि वक्त पर नए नोटों को उतारा जा सके। प्रिंटिंग प्रेस में छपाई का काम जोर शोर से शुरू हो गया। नए नाटों को छपाई के लिए प्रेस में तीन शिफ्टों में लगातार काम हुआ। नोटों की तेजी से सप्लाई के लिए हब, सब-हब और कई मॉडल अपनाए गए। जिस तेजी से पुराने नोटों के हटाने का काम हो रहा था, उसी तेजी से नए नोटों को सर्कुलेशन में लाने का काम भी किया जाना था।
इसमें एटीएम की अपनी अलग कहानी थी। प्लानिंग के समय में हमने इस बात को साफ-साफ समझ लिया था कि नए नोटों को एटीएम तक पहुंचाने पर हमे इस पूरे प्रोग्राम में बड़ी सफतला मिल जाएगी। इसके उलट देश भर के करीब 2 लाख से ज्यादा एटीएम को नए नोटों की सीरीज के लिए तैयार करना, इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत थी। ऐसे लोग जो खुद जाकर पहले एटीएम को नए नोटों के लिए तैयार करने वाले थे, और फिर उनमें नए नोटों को डाला जाना था। नोटबंदी के ऐलान के पहले ही इस पूरी प्रकिया पर लंबी चर्चा के बाद काम शुरू हो गया था। एटीएम की उपलब्धता को लेकर मीडिया में कई तरह की गलत खबरें भी आईं। ऐसे में मैं कहना चाहता हूं कि हमने एटीएम के मुद्दे को अलग ढंग से संभाला। हमारी योजना को अगला झटका जनता के डिजिटल पेमेंट को लेकर स्वभाव को लगने वाला था।
यहाँ हुई चूक :
हमने इस बात का आंकलन किया कि पुराने नोटों के बैंक में जमा होने पर और नए नोट निकालने पर प्रतिबंध होने की स्थिति में ज्यादातर लोग डिजिटल पेमेंट की तरफ आगे बढ़ेंगे। लोग आरटीजीएस, एनईएफटी, इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के जरिए लेनदेन करेंगे। दुर्भाग्य से इस मामले में हमें निराशा हाथ लगी।लोग डिजिटल पेमेंट की तरफ बड़ी मात्रा में आगे बढ़े, लेकिन यह उतनी बड़ी संख्या नहीं थी जो नए नोटों और पुराने नोटों के बीच के अंतर को पूरा कर सके।
योजना का क्रियान्वयन
योजना को लागू करने के लिए उसी प्लान पर हम लोग आगे बढ़े, जिस पर अब तक चर्चा कर रहे थे। रिजर्व बैंक की करंसी विंग और अन्य बैंकों के कर्मचारियों को हफ्तों तक ज्यादा समय के लिए काम करने के लिए कहा गया। यहां तक कि इसके लिए और लोगों की जरूरत हुई। प्रेस में भी अतिरिक्त लेबर को काम पर लगरया गया। कैश डिलिवरी के लिए डायरेक्ट टच पॉइंट की संख्या को तीन गुना किया गया। लॉजिस्टिक्स के मामले में थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा। प्रॉडक्शन, सप्लाई, डिलिवरी, डिमांड, विड्रॉल और स्टॉक को कई स्तर पर रोजाना मॉनिटर किया गया। बड़ी संख्या में छोटे नोट मार्केट में लाए गए। आरबीआई को इस दौरान अपनी प्लानिंग में कई बार कई-कई परिवर्तन करने पड़े। इसके बाद कई बार यह बात भी सामने आई कि आरबीआई ने 50 दिन में 50 से ज्यादा परिवर्तन किए। इसमें यह बताना जरूरी है कि कई नियमों में परिवर्तन पूर्वनियोजित था, जबकि कुछ नियम समय की जरूरत को देखते हुए भी किए गए। इनमें सिर्फ एक फैसला था जिस पर हम लोग विचार नहीं कर पाए थे कि जिन लोगों के घरों में शादी है, वे पैसे का इंतजाम कैसे करेंगे। इसके बाद कुछ और चर्चाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने पुराने नोट बदलने के लिए लोगों को काम पर रख लिया, प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खुले बैंक खातों का मिसयूज किया जा रहा था, नोट बदलने के काम में बैंक कर्मचारियों ने भी गड़बड़ी शुरू की आदि बातें सामने आने लगीं। इसके बाद ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए नियमों में कुछ और बदलाव किए गए। इन फैसलों में नोट बदलने वालों की उंगलियों पर वोटिंग इंक लगाने का फैसला भी काफी अहम था।”
इस पूरी प्रक्रिया के बाद साफ है कि यह एक विस्तार से तैयार किया गया प्लान था। इसे लागू करने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की गई थी। तय प्लान के मुताबिक ही इसे लागू किया गया। इस दौरान कई छोटे-बड़े बदलाव भी किए गए।

यह भी जानिये  : नोटबंदी के दौरान फूट-फूटकर रोने वाले बूढ़े नंद लाल अब क्या है कहना..?

राजेश दत्त, नई दिल्ली
नोटबंदी के दौरान बैंकों और एटीएम्स के आगे लंबी लाइनें आम हो गई थीं। कई लोगों को बहुत कष्ट हुआ। खासकर बुजुर्गों को। इन्हीं में एक हैं नंद लाल। गुरुग्राम स्थित स्टैट बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच में चार घंटे खड़ा रहने के बाद भी जब 80 वर्ष के इस रिटायर्ड आर्मी मैन को पैसे नहीं मिले तो ये फूट-फूट कर रो पड़े। तब नंद लाल की तस्वीरें वायरल हो गईं जिनमें ये बेहद असहाय दिख रहे थे। तब नोटबंदी के आलोचकों ने नंद लाल को पोस्टर बॉय बना डाला था। इनका हवाला देते हुए सरकार के खिलाफ हमले और तेज हो गए। आलोचकों ने कहा कि सरकार का यह दावा गलत है कि नोटबंदी से सिर्फ भ्रष्ट अमीर निशाने पर आए हैं। नोटबंदी की घोषणा के एक साल पूरा होने के मौके पर ‘इकनॉमिक टाइम्स (ET)’ ने नंद लाल से मुलाकात की और उनसे जानना चाहा कि नोटबंदी को लेकर अब उनकी राय क्या है।

मूलतः  ‘इकनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट यहाँ देखें..
अपने किराये के छोटे से कमरे में दीन-हीन अवस्था में नन्द लाल

नंद लाल पुराने गुरुग्राम स्थित भीम नगर इलाके में 8×10 के किराए के रूम में रह रहे हैं। इस छोटे से रूम में उनके सामानों से भरा एक ट्रंक, एक छोटा सा बिस्तर, प्लास्टिक की एक कुर्सी, एक बाल्टी, एक ऐस्ट्रे, पानी की कुछ बोतलें और भगवान शिव और गणेश की एक-एक तस्वीर है। विभाजन के वक्त वह पाकिस्तान के डेरा गाजी खान से भारत आए थे। उन्हें 1991 में आर्मी से रिटायरमेंट मिली थी। उनकी एक गोद ली हुई बेटी है जिसका ब्याह हो चुका है। वह कभी-कभार मिलने के लिए आती है। नंद लाल को देश की सेवा करने का गर्व है। वह कम सुनते हैं। इस वजह से उनसे किसी सवाल का जवाब पाने के लिए एक ही सवाल बार-बार बोलना पड़ता है।

ईटी ने उनसे पूछा- पिछले साल नोटबंदी के बाद कैश लेने में उनको किस मुश्किल से गुजरना पड़ा था? इस सवाल पर नंद लाल बताते हैं कि वह बैंक में घंटों खड़े रहे, फिर भी उन्हें जरूरत की रकम नहीं मिली। उन्होंने बताया कि उन्हें किराया और मेड को मासिक वेतन देने के लिए पैसे की जरूरत थी। वह फफक-फफकर रो क्यों पड़े थे? इस सवाल के जवाब में वह कहते हैं कि जब वह बैंक के बाहर कतार में खड़े थे तो किसी ने उन्हें धक्का दे दिया। इस क्रम में एक महिला ने उनके पैर कुचल दिए। उन्होंने कहा, ‘इसके सिवा मुझे कुछ खास समस्या नहीं हुई।’ लाल ने कहा, ‘शुरू-शुरू में उन्हें पैसे निकालने में मुश्किल हुई, लेकिन बाद में सब सही हो गया।’ अब उनका कहना है, ‘अब मैं अपनी मेड को बैंक भेज देता हूं और वह मेरी ओर से पैसे निकालकर मुझे थमा देती है।’
लाल कहते हैं कि अब वह नोटबंदी से खुश हैं। लेकिन, सवाल यही है कि क्या नोटबंदी सही फैसला था? इस पर लाल का कहना है कि वह सरकार के हर फैसले का समर्थन करेंगे क्योंकि वह एक सर्विसमैन हैं। एक सच्चे राष्ट्रवादी नंद लाल ने कहा कि वह 20 सालों तक देश की आर्मी के लिए काम किया और वह सरकार के हर फैसले का पालन करेंगे। उन्होंने कहा, ‘सरकार जो भी करती है, वह देश की भलाई के लिए होता है।’ उन्होंने कहा, ‘मैं एक सैनिक हूं और मैं सरकार के हर फैसले के साथ हूं।’ 
पूर्व आलेख : रिजर्व बैंक ने जारी किए नोटबंदी के आंकड़े, बंद हुए 1000 रुपये के 99 फीसदी नोट लौटे

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट को जारी कर नोटबंदी के बाद पहली बार मार्च 2017 तक की स्थिति की जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार  नोटबंदी के दौरान बैन किए गए 1000 रुपये के पुराने नोटों में से करीब 99 फीसदी बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट आए हैं। 1000 रुपये के 8.9 करोड़ नोट (1.3 फीसदी) नहीं लौटे हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई से वर्ष 2016-17 में नोटों की छपाई की लागत दोगुनी होकर 7,965 करोड़ रुपये हो गई जो 2015-16 में 3,421 करोड़ रुपये थी। नोटबंदी के बाद बैंकिंग सिस्टम में नोटों का सर्कुलेशन 20.2 फीसदी घटा है। इस साल सर्कुलेशन में नोटों की वैल्यू 13.1 लाख करोड़ है जबकि पिछले साल (मार्च) यह 16.4 लाख करोड़ थी।

2000, 500 रुपये की नई डिजाइन के भी नकली नोट पकड़े गए
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बैंकिंग सिस्टम में मार्च 2017 तक 7,62,072 नकली नोट पकड़े गए। सबसे बड़ी चिंता की बात 2000 और 500 रुपये की नई डिजाइन के भी नकली नोटों के सामने आने की है। आरबीआई के मुताबिक 2000 रुपये के नोट की नई डिजाइन के 638, और 500 रुपये के नोट की नई डिजाइन के 199 नकली नोट पकड़े गए।

कांग्रेस ने बोला हमला, कहा नोटबंदी शर्मनाक
नोटबंदी के बाद करीब-करीब सारा पैसा बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गया है। कांग्रेस ने इसे लेकर केंद्र पर हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रह चुके पी चिदंबरम ने ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है। चिदंबरम ने अपने ट्वीट में लिखा है कि नोटबंदी के बाद 15,44,000 करोड़ के नोटों में से केवल 16000 करोड़ नोट नहीं लौटे। यह एक फीसदी है। नोटबंदी की अनुशंसा करने वाले RBI के लिए यह शर्मनाक है।

प्रिय रविश कुमार जी, एनडीटीवी वाले,

महोदय, आज आपने लिखा कि नोटबंदी विफल हुई, 14 लाख 44 हज़ार करोड़ करेंसी में से 16 हज़ार करोड़ ही नहीं आएँ। 8 हज़ार करोड़ नए नोट छापने में लगे। नोटबंदी का कोई फ़ायदा नहीं हुआ, सबको लम्बी लम्बी क़तारों में लगवाने से देश का घाटा हुआ, आदि आदि,

रविश बाबू, मुझे नहीं पता कि आप किसके लिए काम करते हैं, मुझे नहीं पता कि नोटबंदी के बहुआयामी लाभ आपको क्यों नहीं दिख रहे हैं, फिर भी आपके एवं आपके प्रसंशकों के लिए, जो आपको बड़ा भारी पत्रकार मानते हैं, उनके लिए निम्न तथ्य प्रस्तुत हैं-

जैसा कि जगज़ाहिर है कि अर्थव्यवस्था में 15 लाख 44 हज़ार के अलावा जाली नोटें भी थीं, जिसका सही सही अनुमान किसी के पास में नहीं है। एक लाख करोड़ थी या 2 लाख करोड़ थी। लेकिन जो भी थी वो नोटबंदी के दौरान नष्ट हो गई, इतना तो आप जानभूझ के भले न लिखे लेकिन इसे इनकार तो क़तई नहीं कर सकते हैं। ये आप भी जानते हैं।

फिर भी बैंकों में रोज़मर्रा के कैश गणना के दौरान मिलने वाली जाली नोटों की प्रायिकता से पाया कि कुल मूल्य की कोई कम से कम 6% जाली नोटें होनी चाहिए अर्थ व्यवस्था में। माने कोई 1 लाख करोड़ के आस पास। ये जाली नोटें नष्ट हो गई। माने यदि 16000 करोड़ नहीं लौटी और साथ साथ 1 लाख करोड़ नष्ट भी हुई। तो कुल आँकड़ा बनता है 1 लाख 16 हज़ार करोड़। माने इतना न्यूनतम है, इससे ज़्यादा भी हो सकता है। आशा है आप समझ रहे होंगे। हम ये मानकर चल रहे हैं कि पत्रकार होते हुए भी आपको थोड़ी बहुत गणित आती होगी !

दूसरी बात, सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो ये एक लाख 16 हज़ार करोड़ रुपया किसके पास था, ये भी मैटर करता है। माने आतंकी के पास था, या नक्सल के पास था, अपराधी के पास था। आम आदमी जिन्हें घोषित आय से ज़्यादा रक़म जमा करने पे पकड़े जाने का डर तो था लेकिन उन्हें केवल अर्थदंड देना था, उन्होंने बिना डरे नोट जमा किये, क्योंकि अर्थदंड के बाद भी उन्हें लाभ था। ऐसी बड़ी आबादी थी।

अब ये जो एक लाख 16 हज़ार करोड़ हैं, ज़ाहिर है कि ये पैसा उन्ही के पास था, जिनके आपराधिक कारणों से पकड़े जाने का डर था, माने अपराधी, आतंकी, नक्सली, अतः ये वापस नहीं आए। इससे उनकी शक्ति कम हुई। माने शैतानों के पास से 1 लाख 16 हज़ार करोड़ लूट जाना कोई छोटी मोटी बात नहीं है। शैतानी शक्तियाँ कमज़ोर हुई हैं। मुझे नहीं पता आपके शैतानों के साथ अवैध सम्बंध हैं या नहीं !

तीसरी बात नोटबंदी से देश में कितने अमीर हैं, कितने ग़रीब ये सरकार को पता चल गया है, 60 लाख ऐसे बड़े नाम सामने आएँ हैं जिनकी इंकम तो बहुत ज़्यादा है लेकिन कभी इंकम टैक्स नहीं दिया। उन्हें Operation Clean Money के तहत नोटिस जा रहा है, नए टैक्स पेयर बन रहे हैं, टैक्स बेस बढ़ रहा है, GST सही सही लागू करने में ये मिल का पत्थर है, माने अब जीवन भर इसका फ़ायदा मिलेगा। और साथ ही डाटा माइनिंग के साथ नए नाम आते जा रहे हैं जिनकी संख्या करोड़ों में हैं, माने इनकम टैक्स विभाग को लम्बा प्रोजेक्ट मिल गया है राजस्व बढ़ाने व टैक्स चोरी रोकने का। ये लंबा चलेगा, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे। जिससे इनकम टैक्स दर कम होने की सम्भावना प्रबल हो गई है।

चौथी बात अब अर्थव्यवस्था में छोटे नोटों का चलन बढ़ रहा है, 50, 100, 200 के नोटों का प्रतिशत बढ़ रहा है, साथ ही सरकार सारे नोट नहीं छापेगी, बाक़ी सॉफ़्ट करेंसी का चलन रहेगा, जिससे करप्शन में कमी आएगी।

अब ज़रा आप ही बतायिए क्या ये सब बिना नोट बंदी सम्भव था ? मुझे नहीं पता कि आप किस पार्टी की पत्रकारिता करते हैं, लेकिन आप जो भी करते हैं उसे पत्रकारिता नहीं अपितु दलाली कहते हैं। (हंसराज हंस की पोस्ट से)

नोटबन्दी से देश में राम राज व समाजवाद एक साथ !

2009 में नैनीताल में जनसभा को संबोधित करते नरेन्द्र मोदी
2009 में नैनीताल में जनसभा को संबोधित करते नरेन्द्र मोदी

एक 9/11  (यानी 11 सितंबर 2001) को हुए आतंकवादी हमले से न सिर्फ यह महाशक्ति अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया न्यूयॉर्क स्थित वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ‘ट्विन टावर्स’ पर हुए आतंकवादी हमले से दहल गई थी। वहीँ इस 9/11  यानी नौ सितम्बर 2016 को भी वाकई बड़ा अद्भुत हुआ है। यहाँ भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवम्बर की रात (इससे पूर्व 28 सितम्बर 2016 की रात्रि पाक अधिकृत कश्मीर में की गयी सर्जिकल स्ट्राइक की तर्ज पर,) काले धन पर ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ की तो वहां अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ‘वर्ल्ड आर्डर’ को बदलते हुए राष्ट्रपति निर्वाचित हो गए।

कुछ भी कहिये, आज देश में साम्यवाद आ गया..
सबकी जेब में बराबर पैसे ! 😄

आज देश में रामराज भी आ गया !
जेल के दरवाजे भी खोल दो तो कोई बाहर जाने को तैयार नहीं 😜
तिजोरी खोल कर रख दो, कोई लूटने को तैयार नहीं 😝

कुछ लोग कह रहे हैं ‘उन’ मुट्ठी भर बेईमान कालाबाजारियों का काला धन बाहर निकालने के लिए हम (पूरे देश के) ईमानदार लोगों को क्यों लाइन में खड़ा कर दिया…?
वे आंकड़े नोट करें-134 करोड़ जनसंख्या के देश में 1% से भी कम, केवल 1.24 करोड़ लोग ही टैक्स देते हैं।
और दिल ठोक के बोलें कि क्या वे सच में ईमानदारी से टैक्स देते हैं ?
मेरा जवाब है-मैं भी बेईमान हूँ।
देखें और कितने लोग ईमानदारी से जवाब देते हैं…

हाँ, यह भी बताएं कि इन टैक्स न चुकाने वाले 133 करोड़ ‘इमानदार’ देशवासियों की वार्षिक आय 2.5 लाख से कम यानी करीब 21 हजार रुपये मासिक से कम है। फिर उन्हें प्रति हफ्ते मिलने वाली 24 हजार रुपये की धनराशि कम क्यों लग रही है ???

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2009 में नैनीताल में नरेन्द्र मोदी को जनसभा के बाद प्रतीक स्वरुप 'नंदा देवी' की प्रतिमा भेंट करते स्थानीय भाजपा नेता
2009 में नैनीताल में नरेन्द्र मोदी को जनसभा के बाद प्रतीक स्वरुप ‘नंदा देवी’ की प्रतिमा भेंट करते स्थानीय भाजपा नेता

प्रधानमंत्री मोदी के इस क्रन्तिकारी व अभूतपूर्व ‘मास्टर स्ट्रोक’ के बाद, आजादी के बाद 9/11/2016 शायद पहला दिन, जब किसी रिश्वतखोर ने रिश्वत न ली हो….चोर ने चोरी न की हो… किसी बहु को दहेज़लोभियों की मांग पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ा हो…अपहरणकर्ताओं ने फिरौती और हत्यारों ने सुपारी न मांगी हो…पत्थरबाजों ने पत्थर न फेंके हों और आतंकियों ने गोली चलाने से मना कर दिया हो…।

वहीं, पिछले माह जियो का 4जी सिम लेने के लिये पूरे-पूरे दिन लाइन में खड़े रहने वाले और इधर नमक खत्म होने की अफवाह के बाद पूरे महीने एक किलो खर्च होने वाली नमक की पूरी बोरी कब्जाने के लिये देर रात्रि तक खड़े रहने वाले लोग भी ऐसा व्यवहार कर रहे हैं, मानो एटीएम या बैंक के सामने नये नोट लेने या पुराने अमान्य नोट जमा करने के लिये नहीं वरन सीमा पर खड़े हों, और सामने से नोट नहीं दुश्मन की गोलियां दागी जा रही हों।

नोट बदले जाने के नए नियम

नोटबंदी के चलते आम लोगों को हो रही भारी परेशानी के मद्देनजर सरकार ने 1000-500 के पुराने नोटों को जरूरी सेवाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने की सीमा 14 नवंबर से बढ़ाकर 24 नवंबर की मध्यरात्रि तक कर दी है। बैंकों को कम से कम 50 हजार रुपये तक कैश लिमिट बढ़ाने की सलाह दी गई है। वहीँ 14 नवम्बर से एटीएम से एक बार में धन निकासी की सीमा 2000 से बढ़ाकर 2500 कर दी गई है। वहीं कैश एक्सचेंज की लिमिट को 4000 से बढ़ाकर 4500 कर दी गई है। बैंक से साप्ताहिक धन निकासी की सीमा को भी 20 हजार से बढ़ाकर 24 हजार कर दिया गया है। वहीं रोज 10 हजार धन निकासी की सीमा को भी बढ़ाया गया है। वित्त मंत्रालय के विश्लेषण के मुताबिक, पहले 4 दिनों (नवंबर 10 से नवंबर 13, शाम 5 बजे तक) बैंक सिस्टम में 3 लाख करोड़ के 500 और 1000 के नोट्स जमा किए गए हैं।

अंजाम बहुत खतरनाक भी हो सकता है।

नोट बंदी के तीसरे ही दिन जिस तरह कमोबेश पूरे उत्तरी भारत में नमक के ख़त्म हो जाने की ‘एक वर्ग’ ने अफवाह फैलाई, उस पर देश में उच्च स्तर पर सुरक्षा के बाबत कान खड़े हो जाने चाहिए। प्रधानमंत्री की इस मुहिम से अरब-खरबपति से कंगाल हुए लोग देश में अस्थिरता फ़ैलाने सहित किसी भी हद पर जा सकते हैं। वहीँ प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं में एक फ़कीर-वजीर की तरह अपने इस बेहद साहसिक फैसले से अपनी पार्टी के वोट बैंक कहे जाने वाले व्यवसायी वर्ग के हितों को भी अपने इस कदम से बड़ी आर्थिक चोट पहुंचाई है, इसलिए आने वाला चुनाव परिणाम बताएगा कि उनका यह कदम उनकी पार्टी के लिए आत्मघाती तो साबित नहीं होगा।

पर अंजाम चाहे जो भी हो, 500-1000 के पुराने नोट बंद करना वाकई 56 इंच के सीने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 9 नवंबर 2016 (यानी 9+11+20+16=56) (इससे पूर्व 29 सितम्बर 2016 (2+9+9+20+16=56) को भी, जब पाक अधिकृत कश्मीर पर सर्जिकल स्ट्राइक की खबर आई थी, तब भी मोदी का 56 इंच का सीना दिखा था।) को बेहद साहसिक व ऐतिहासिक निर्णय ही कहा जायेगा। जब पूरा देश मोदी की एक आवाज पर अपने कष्टों को भूलकर ‘एक’ हो गया। नोटबंदी के फैसले से देश में रही 86 प्रतिशत मुद्रा (1000 और 500 के नोट ) बेकार साबित हुई है, जबकि अब लोगों को बाकी बची 14 प्रतिशत मुद्रा में ही लेनदेन करना पड़ा रहा है। इससे मोदी के कई धुर वैचारिक व राजनीतिक विरोधी-बामपंथी भी साथियों से स्वयं की आलोचना को झेलने के बावजूद ‘लेफ्ट से राईट करते हुए’ उनके मुरीद हो गए हैं।

एक हजार रुपये के नोट का इतिहास :
1954 में 1000 रुपये का नोट पहली बार जारी हुआ, जिसे जनवरी 1978 में बंद कर दिया गया।
2000 में दूसरी बार 1000 रुपये का नोट जारी हुआ था, जोकि 8 नवम्बर 2016 की मध्यरात्रि बंद कर दिया गया।
पांच सौ रुपये के नोट का इतिहास :
500 रुपये का नोट पहली बार अक्तूबर 1987 में जारी हुआ, 2005 में सुरक्षा की दृष्टि से मशीन द्वारा पढ़े जाने वाले सुरक्षा धागे,, इलेक्ट्रोटाइप वाटर मार्क  व नोट जारी होने का साल आदि के साथ छापा गया। और इधर 8 नवम्बर 2016 की मध्यरात्रि इसे बंद कर दिया गया। इधर 13 नवम्बर 2016 को यह नए सुरक्षा प्रबंधों व आकार में छापा गया है।

बाजार की कुल नकदी में 1000-500 के नोट की हिस्सेदारी 84 फीसदी, 1000 के नोट की हिस्सेदारी 39 फीसदी और 500 के नोट की हिस्सेदारी  45 फीसदी है।

क्या हुआ ऐलान

  • 8 नवंबर की रात 12 बजे से 500 और 1000 के नोट बंद
  • 9-10 नवंबर को देशभर के ATM बंद
  • 9 नवंबर को देश के सभी बैंक बंद
  • 24 नवंबर तक अस्पताल, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड पर नोट चलेंगे

500-1000 के नोट का क्या करें

  • 30 दिसंबर तक बैंक और पोस्ट ऑफिस में बदले जा सकते हैं नोट
  • एक दिन में सिर्फ 10 हज़ार तक के नोट बदले जा सकते हैं
  • 31 मार्च 2017 तक रिज़र्व बैंक में बदले जा सकते हैं नोट

ATM से पैसा निकालने का नया नियम

  • 1 दिन में सिर्फ 2500 रुपए निकाल सकते हैं
  • बाद में एक दिन में 4000 रुपए तक निकाल सकते हैं
  • बैंक से पहले सिर्फ दस हजार नोट बदलने की इजाजत थी, अब यह सीमा समाप्त कर दी गयी है

अब आगे क्या होगा

  • सरकार 500 और 2000 हजार के नए नोट लाएगी
  • रिजर्व बैंक ने कहा- 10 नवंबर से बाजार में 500 और 2 हजार के नए नोट आएंगे

फैसले का असर

  •  बाज़ार से नकदी कम हो जाएगी
  • रोज़मर्रा की खरीददारी में मुश्किल होगी

इंटरनेट बैंकिंग, चेक और ड्राफ्ट पर कोई असर नहीं

  • 11 नवंबर की रात 12 बजे तक पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशनों पर 500 और 1000 रुपये के नोट चलेंगे।
  • 11 नवंबर की रात तक दवाई की दुकान पर डॉक्टर की पर्ची पर 500 या 1000 की नोट चलेंगे।
  • रेलवे बुकिंग काउंटर पर 11 नंवबर तक 500 और 1000 का नोट चलेगा।

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ऐसे में कुछ इस तरह के गंभीर सुझाव भी आ रहे हैं :

1.जिस किसी के पास अथाह सम्पति है , वह उसका सही उपयोग करते हुए बेझिझक समाज के जरुरतमन्द लोगों की मदद करें।

2. देश की सेना के नाम एक बैंक खाता खोल दिया जाये, जिसमें कोई अपनी मनचाही धनराशि जमा कर पायें।

आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक की यह इनसाइड स्टोरी भी जानें : तो राहुल गांधी भी कर चुके होते यह ‘अर्थक्रांति’

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह फैसला पुणे के इंजीनियरों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की संस्था- ‘अर्थक्रांति संस्थान’ के सुझाव पर लिया। संस्थान ने अर्थक्रांति के इस प्रस्ताव को पेटेंट कराया है। संस्थान का दावा है कि यह प्रस्ताव काले धन, मंहगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, रिश्वतखोरी, आतंकियों की फंडिंग रोकने में पूरी तरह कारगर होगा। फर्स्टपोस्ट की खबर के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले मेकेनिकल इंजीनियर अनिल बोकिल अपने डेलिगेशन के साथ प्रस्ताव लेकर राहुल गांधी से मिलने गए थे। लेकिन घंटों सिक्युरिटी चेक के बाद राहुल ने उन्हें सिर्फ 10-15 सेकेंड का वक्त दिया था। ब्लैक कैट कमांडो ने उन्हें प्रस्ताव वाली सीडी साथ लेकर जाने की भी इजाजत नहीं दी थी। उन्हें सीडी में ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं होने का भी शक था। तब राहुल ने उन्हें सिर्फ सिर्फ 10 से 15 सेकंड का वक्त दिया था, और केवल इतना कहा था कि प्लीज आप राजीव गांधी फाउंडेशन के डायरेक्टर डॉ. मोहन गोपाल से मिल लें, वे पहले इसे देखेंगे।

इसके बाद अर्थक्रांति संस्थान ने यह प्रस्ताव बीजेपी नेताओं को दिया था। इस संस्थान का दावा है कि अनिल बोकिल ने मोदी के साथ कुछ महीनों पहले मीटिंग की थी। बोकिल को मोदी से मुलाकात के लिए सिर्फ 9 मिनट का वक्त दिया गया था, लेकिन बड़े नोट बंद करने का प्रस्ताव जानने के बाद उन्होंने इसमें गहरी रूचि दिखाई और पूरे 2 घंटे तक चर्चा की। संस्था ने अपने प्रपोजल में कहा था कि इंपोर्ट ड्यूटी छोड़कर 56 तरह के टैक्स वापस लिए जाएं। बड़ी करेंसी 1000, 500 और 100 रुपए के नोट वापस लिए जाएं। सभी तरह के बड़े ट्रांजेक्शन सिर्फ बैंक से जरिए चेक, डीडी और ऑनलाइन हों। कैश ट्रांजेक्शन के लिए लिमिट फिक्स की जाए। इन पर कोई टैक्स न लगाया जाए। सरकार के रेवेन्यू जमा करने का एक ही बैंक सिस्टम हो। क्रेडिट अमाउंट पर बैंकिंग ट्रांजेक्शन टैक्स (2 से 0.7%) लगाया जाए।

उल्लेखनीय है कि फिलहाल देश में 2.7 लाख करोड़ का बैंकिंग ट्रांजेक्शन रोज होता है। सालाना 800 लाख करोड़। सिर्फ 20% ट्रांजेक्शन बैंक के जरिए होता है। बाकी 80% नगद होता है, जिसे ट्रेस नहीं किया जा सकता। देश की 78% आबादी रोज सिर्फ 20 रुपए खर्च करती है। ऐसे में उन्हें 1000 रुपए के नोट की क्या जरूरत। इस संस्थान ने सरकार को दिए प्रपोजल में कहा था कि कैश ट्रांजेक्शन से होने वाला भ्रष्टाचार पूरी तरह खत्म होगा। ब्लैकमनी व्हाइट हो जाएगी या फिर बेकार। 1000 और 500 के नोट कागजी टुकड़े बन जाएंगे। प्रॉपर्टी, जमीन, ज्वेलरी और घर खरीदने में ब्लैकमनी के इस्तेमाल से कीमत बढ़ जाती है। मेहनत से कमाई रकम की वैल्यू घट रही है। इस पर फौरन लगाम लगेगी। कुछ क्राइम जैसे किडनैपिंग, रिश्वतखोरी, सुपारी लेकर मर्डर पर रोक लगेगी। कैश ट्रांजेक्शन के जरिए आतंकवाद की फंडिंग पर रोक लगेगी। कोई भी मंहगी प्रॉपर्टी कैश में खरीदते वक्त रजिस्ट्री में घालमेल नहीं कर पाएगा। जाली नोटों के लेनदेन पर रोक लगेगी। नौकरीपेशा लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा होगा और परिवारों की खरीदारी कैपिसिटी बढ़ेगी। पेट्रोल, डीजल, एफएमसीजी के साथ सभी कमोडिटीज 35 से 52 फीसदी तक सस्सी होंगी। टैक्स भरने का कोई सवाल नहीं होगा तो लोग ब्लैकमनी जमा नहीं कर पाएंगे। बिजनेस सेक्टर में उछाल आएगा और लोगों के पास खुद के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अर्थक्रांति के मुताबिक, सभी चीजों की कीमत घटेगी, नौकरीपेशा लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा होेगा। सोसाइटी की खरीदारी की कैपिसिटी बढ़ेगी। मांग और प्रोडक्शन बढ़ेगा तो कंपनियों में रोजगार बढ़ेगा। बैंकों से आसान और सस्ता लोन मिलेगा। इंटरेस्ट रेट घटेगा। राजनिती में ब्लैकमनी का इस्तेमाल भी बंद होगा। जमीन और प्रॉपर्टी की कीमत कम होगी। व्यापार घाटे को पूरा करने के लिए बीफ एक्पोर्ट की जरूरत नहीं होेगी। रिसर्च और डेव्लपमेंट के लिए पर्याप्त धन मौजूद होगा। आसामाजिक तत्वों पर लगाम कसेगी।

रुपयों और सिक्कों के बारे में तथ्य

भारत विश्व की उन प्रथम सभ्यताओं में से है जहाँ पहले सिक्के 2500 और 1750 ईसा पूर्व के बीच कभी जारी किए गए थे। लेकिन दस्तावेजी प्रमाण सातवीं/छठी शताब्दी ईसा-पूर्व के बीच सिक्कों की ढलाई के ही मिले हैं। कुछ विद्वान मानते हैं कि भारत में सिक्के 800 ईसा पूर्व प्रकाश में आये। वहीं डा. डी. आर. भण्डारकर तथा विटरनित्ज जैसे विद्वान भारत में सिक्कों की प्राचीनता 3000 ईसा पूर्व के आस-पास बताते हैं। रुपए शब्द का अर्थ, शब्द ‘रूपा’ से जोडा जा सकता है जिसका अर्थ होता है चाँदीसंस्कृत में ‘रूप्यकम्’ का अर्थ है ‘चाँदी का सिक्का’। रुपया शब्द सन् 1540 – 1545 के बीच शेरशाह सूरी के द्वारा जारी किए गए चाँदी के सिक्कों के लिए उपयोग में लाया गया। मूल रुपया चाँदी का सिक्का होता था, जिसका वजन 11.34 ग्राम था। यह सिक्का ब्रिटिश भारत के शासन काल में भी उपयोग में लाया जाता रहा। 
भारत में काग़ज़ के नोटों को सबसे पहले जारी करने वालों में से थे ‘बैंक ऑफ हिन्दुस्तान’ (1770-1832), ‘द जनरल बैंक ऑफ बंगाल एंड बिहार’ (1773-75, वारेन हॉस्टिग्स द्वारा स्थापित) और ‘द बंगाल बैंक’ (1784-91)। शुरुआत में बैंक ऑफ बंगाल द्वारा जारी किए गए काग़ज़ के नोटों पे केवल एक तरफ ही छपा होता था। इसमें सोने की एक मोहर बनी थी और यह 100, 250, 500 आदि वर्गों में थे। बाद के नोट में एक बेलबूटा बना था जो एक महिला आकृति, व्यापार का मानवीकरण दर्शाता था। यह नोट दोनों ओर छपे होते थे, तीन लिपिओं उर्दू, बंगाली और देवनागरी में यह छपे होते थे, जिसमें पीछे की तरफ बैंक की छाप होती थी। 1800 सदी के अंत तक नोटों के मूलभाव ब्रितानी हो गए और जाली बनने से रोकने के लिए उनमे अन्य कई लक्षण जोडे गए।

भारतीय रुपयों और सिक्कों के बारे में दिलचस्प तथ्य

  • ‘रुपया’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द ‘रुपयक’ से हुई जिसका अर्थ ‘चांदी’ है और रुपया का संस्कृत में अर्थ ‘चिन्हित मुहर’ है।
  • रुपये का इतिहास 15 वीं सदी तक का है जब शेरशाह सूरी ने इसकी शुरुआत की थी। उस समय तांबे के 40 टुकड़े एक रुपये के बराबर थे।
  • मूलतः रुपया चांदी से बनाया जाता था जिसका वजन 11.34 ग्राम था। ब्रिटिश शासन के दौरान भी चांदी का रुपया चलन में रहा।
  • सन 1815 तक मद्रास प्रेसिडेंसी ने फनम आधारित मुद्रा जारी कर दी थी। तब 12 फनम एक रुपये के बराबर था।
  • सन 1835 तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की तीन प्रेसिडेंसियों बंगाल, बाॅम्बे और मद्रास ने अपने अपने सिक्के जारी कर दिए थे।
  • सन 1862 में नए सिक्के जारी किये गए जिन्हें शाही मुद्रा कहा गया। इन पर महारानी विक्टोरिया की एक छवि और भारत का नाम था। आजादी के बाद भारत में पहला सिक्का सन् 1950 में जारी किया गया।
  • सन 1861 में 10 रुपये के नोट के रुप में कागजी मुद्रा बैंक आॅफ हिंदुस्तान, जनरल बैंक आॅफ बंगाल और बिहार और बंगाल बैंक ने जारी किए। सन् 1864 में 20 रुपये का नोट आया। सन् 1872 में 5 रुपये का नोट आया। सन् 1900 में 100 रुपये का नोट आया। सन् 1905 में 50 रुपये का नोट आया। सन् 1907 में 500 रुपये का नोट आया और सन् 1909 में 1000 रुपये का नोट जारी हुआ।
  • रिजर्व बैंक ने जनवरी 1938 में पहली कागजी मुद्रा छापी थी, जो 5 रुपए नोट की थी। इसी साल 10 रुपए, 100 रुपए, 1,000 रुपए और 10,000 रुपए के नोट भी छापे गए थे। हालांकि, 1946 में 1,000 और 10 हजार के नोट बंद कर दिए गए थे। लेकिन 1954 में एक बार फिर से 1,000 और 10,000 रुपए के नोट छापे गए। साथ ही 5,000 रुपए के नोट की भी छपाई की गई। लेकिन, 1978 में 10,000 और 5,000 के नोट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया।
  • सन् 1947 में रुपये का दशमलवकरण हुआ। इसमें रुपये को 100 नए पैसे में बांटा गया। सन् 1964 में नया शब्द हटा दिया गया।
  • भारतीय रुपया 1957 तक तो 16 आनों में विभाजित रहा, आने को फिर 4 पैसों और 12 पाई में बांटा गया। परन्तु उसके बाद (1957 में ही) उसने मुद्रा की दशमलव प्रणाली अपना ली और एक रुपये की गणना 100 समान पैसों में की गई।
  • आजादी के बाद सिक्के ताम्र-निकल के बनते थे। उसके बाद एल्यूमिनियम के सिक्के सन् 1964 में आए। सन् 1988 में स्टेनलेस स्टील के सिक्के जारी किए गए।

    इस मुलाकात के बाद नोटों पर छपी गांधी जी की तस्वीर, ये हैं इससे जुड़े फैक्ट्स
    (फोटो: कोलकाता स्थित वायसराय हाउस में फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस के साथ गांधीजी (ऊपर) और भारतीय नोट पर अंकित वो गांधी जी की तस्वीर)
  • सन् 2010 में भारतीय रुपये का प्रतीक अपनाया गया जो डी उदय कुमार ने बनाया था। इस प्रतीक को बनाने में लैटिन अक्षर ‘आर’ और देवनागरी के अक्षर ‘र’ का उपयोग हुआ है जिसमें दो लाइनों से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का प्रतिनिधित्व होता है।
  • बैंक नोटों की वर्तमान श्रृंखला को महात्मा गांधी श्रृंखला कहा जाता है। इसे सन् 1966 में 10 रुपये के नोट से शुरु किया गया जिस पर महात्मा गांधी की छवि थी।
  • भारत में पहली बार 75, 150 और 1,000 रुपये के सिक्कों को ढाला गया। यह भारतीय रिजर्व बैंक की प्लैटिनम जुबली, रवीन्द्रनाथ टैगौर की 150वीं जयंती और बृहदेश्वर मंदिर के 1000 साल होने के उत्सव में क्रमशः जारी किए गए थे।
  • हर भारतीय रुपये के नोट के भाषा पटल पर भारत की 22 सरकारी भाषाओं में से 15 में उनका मूल्य मुद्रित है। ऊपर से नीचे इनका क्रम इस प्रकार है – असमिया, बंगला, गुजराती, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु और उर्दू
  • हर भारतीय नोट पर इंसानों, जानवरों, प्रकृति से लेकर आजादी के आंदोलन से जुड़ी तस्वीरें छपी होती है। 20 रुपए के नोट पर अंडमान द्वीप की तस्वीर है। वहीं, 10 रुपए के नोट पर हाथी, गैंडा और शेर छपा हुआ है, जबकि 100 रुपए के नोट पर पहाड़ और बादल की तस्वीर है। इसके अलावा 500 रुपए के नोट पर आजादी के आंदोलन से जुड़ी 11 मूर्ति की तस्वीर छपी है।
  • 1917 में एक रुपए की कीमत 13 अमेरिकी डॉलर और 1947 में 1 डॉलर थी।
  • बीसवीं शताब्दी के शुरुआत में रुपया अदन, ओमान, कुवैत, बहरीन, कतर, केन्या, युगांडा, सेशल्स और मॉरीशस की भी करंसी थी। हालांकि, अभी भी सात देशों-इंडोनेशिया, मॉरीशस, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका में भी रुपया चलता है।

इस विषय पर और अधिक जानकारी पाने के लिए रिजर्व बैंक की इस साइट पर जाएं: https://www.rbi.org.in/currency/FAqs.html

1818 का ईस्ट इंडिया कम्पनी का ॐ व कमल के फूल युक्त 2 आने का सिक्का
1818 का ईस्ट इंडिया कम्पनी का ॐ व कमल के फूल युक्त 2 आने का सिक्का

प्राचीन भारतीय मुद्रा प्रणाली का इतिहास यह भी :

फूटी कौड़ी से कौड़ी,
कौड़ी से दमड़ी,
दमड़ी से धेला,
धेला से पाई,
पाई से पैसा,
पैसा से आना,
आना से रुपया।
256 दमड़ी = 192 पाई = 128 धेला = 64 पैसा (पुराना) = 16 आना = 1 रुपया
3 फूटी कौड़ी – 1 कौड़ी
10 कौड़ी – 1 दमड़ी
2 दमड़ी – 1 धेला
1.5 पाई – 1 धेला
3 पाई – 1 पैसा ( पुराना)
4 पैसा – 1 आना
16 आना – 1 रुपया
प्राचीन मुद्रा की इन्हीं इकाइयों से सम्बंधित कई कहावतें अब भी प्रचलित हैं:
●एक ‘फूटी कौड़ी’ भी नहीं दूंगा।
●’धेले’ का काम नहीं करती हमारी बहू !
●चमड़ी जाये पर ‘दमड़ी’ न जाये।
●’पाई-पाई’ का हिसाब रखना।
●सोलह ‘आने’ सच

1978 में हुई नोट बंदी की कुछ तस्वीरें :

आइए आपको बताते हैं कि कब-कब नोट वापिस लिए गए-

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों अनुसार वर्ष 1938 और 1954 में 10,000 रुपए के नोट छापे गए थे, लेकिन इन नोटों को पहले जनवरी 1946 में और फिर जनवरी 1978 में वापस ले लिया गया।

जनवरी 1946 से पहले 1,000 और 10,000 रुपए के बैंक नोट प्रचलन में थे। 1954 में 1,000 रुपए,  5000 रुपए और 10,000 रुपए के बैंक नोट फिर से जारी किए गए। इन सभी को जनवरी 1978 में वापस ले लिया गया।

किस डर से सरकार लायी डिस्क्लोजर योजना ? क्या ब्लैक मनी के तेजी से वाइट होने से डर गयी है सरकार ?

सरकार की नयी डिस्कलोजर स्कीम के जरिये कोई भी व्यक्ति अपने ब्लैक मनी का खुलासा कर सकता है। सरकार कुल ब्लैक मनी का 50 फीसदी टैक्स लेगी। 25 फीसदी राशि सरकार चार साल के लिए लॉकइन रखेगी। बाकी 25 फीसदी राशि ही व्यक्ति को दी जाएगी। 
नोटबंदी के 20 दिन बाद सरकार ने ब्लैक मनी पर डिस्क्लोजर स्कीम पेश कर सबको चौंका दिया। इसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर किन कारणों से सरकार को यह स्कीम लॉन्च करनी पड़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह हैं कारण…
तेजी से वाइट हो रही ब्लैक मनी
देश के मार्केट में इस वक्त 17 लाख करोड़ रुपये की करंसी है। इसमें 14 लाख करोड़ रुपये की करंसी 500 और 1,000 रुपये के नोट में थी। इन नोटों को सरकार ने बाहर कर दिया। सरकार के अनुसार, इन 14 लाख करोड़ रुपये में करीब 3 से 4 लाख करोड़ रुपये ब्लैक मनी है। नोटबंदी के जरिए सरकार ब्लैक मनी को मार्केट से बाहर करना चाहती है। मगर नोटबंदी के बाद जिस तरह से ब्लैकमनी को वाइट बनाने की रफ्तार तेज हुई, उससे सरकार को झटका लगा। लोग अपनी ब्लैकमनी को वाइट बनाने के लिए अधिक मात्रा में गोल्ड खरीद रहे है। 30 से 40 फीसदी कमीशन पर ब्लैक मनी को वाइट किया जा रहा है।

पढ़ें: जन-धन खातों से निकाल सकेंगे इतना ही पैसा

अगर पूरी ब्लैकमनी वाइट हो गई तो नोटबंदी के जरिए ब्लैकमनी को बाहर ले आने के सरकार के दावों का क्या होगा। ऐसे में सरकार पर सवालों की बौछार होगी कि अगर ऐसा ही होना था तो नोटबंदी क्यों की गई। क्यों आम आदमी को यह कहकर परेशानी में डाला गया कि देश के लिए कुछ परेशानियां सहो, क्योंकि इससे पूरे सिस्टम से ब्लैक मनी निकल जाएगी।

आरबीआई को यह डर
नोटबंदी के बाद आरबीआई को करीब 5 लाख करोड़ रुपये अनक्लेम्ड करंसी रह जाने की आशंका है। क्योंकि जिनके पास ब्लैक मनी है, वे या तो इसे नष्ट कर देंगे या फिर उसको क्लेम नहीं करेंगे। ऐसे में सरकारी खजाने में करीब 4 से 5 लाख करोड़ रुपये सीधे तौर पर आने की संभावना है। ऐसे में आरबीआई फिर इतने नोटों की छपाई कर सकेगा। यह सरकारी खजाने की शोभा बढ़ाएंगे। मगर जो परिस्थितियां बन रही हैं, उसमें अनक्लेम्ड करंसी की संख्या कम होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। अब यह राशि 2 से 3 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है।

अफरा-तफरी के माहौल ने बिगाड़ा समीकरण
नोटबंदी के बाद जिस तरह से अफरा-तफरी का माहौल बन रहा है, उसने भी सरकार को ब्लैक मनी डिस्कलोजर स्कीम लाने के लिए शायद बाध्य किया। सबसे अधिक परेशानी की बात यह रही कि जनधन योजना के तहत खुले बैंक खातों में ब्लैक मनी खपाई गई। यह सिलसिला अब भी जारी है।

पढ़ें: सैलरी की तारीख, लाइन में लगने को रहें तैयार

बैंकों में फर्जी खाते खोलकर ब्लैक मनी को जमा कराया गया। इसके लिए दूसरे के बैंक खातों के इस्तेमाल करने की खबरें सरकार को मिलीं। रियल एस्टेट्स में भी ब्लैक मनी को वाइट कराने की बातें सामनें आईं। इन सब पर सरकार ने कार्रवाई भी की। मगर मैनपावर की कमी ने सरकार के हाथों को बांध दिया है। इनकम टैक्स विभाग के पास मैनपावर कम है और काम ज्यादा है। ऐसे में सरकार को यह भी आशंका है कि कहीं ब्लैक मनी बाहर की बजाय मार्केट में ही वाइट न बन जाए।

क्या कुछ पेंच भी हैं इस स्कीम में
एक पेंच यह है कि ब्लैक मनी खुलासा करने के बाद बेशक उसके कुल राशि का 50 फीसदी वाइट बन जाएगा। बेशक उस व्यक्ति पर ब्लैक मनी को लेकर कोई मुकदमा नहीं चलेगा। मगर वह इनकम टैक्स विभाग की राडार में रहेगा। रेवेन्यू सेक्रेटरी सचिव हंसमुख अधिया के अनुसार अगर कोई डिस्क्लोजर स्कीम के तहत ब्लैक मनी की घोषणा करता है तो टैक्स विभाग उस आय के सोर्स के बारे में नहीं पूछेगा। अघोषित धन पर संपत्ति कर, दिवानी कानून तथा टैक्स से जुड़े अन्य कानून से छूट प्राप्त होगी लेकिन उसे फेमा, पीएमएलए, नारकोटिक्स और कालाधन कानून से कोई रियायत नहीं मिलेगी।

कल तक आरोप था कि मोदी राज में गरीबों के पास खाने तक के पैसे नहीं हैं, आज नेता लोग उन्हीं गरीबों के लिए परेशान हैं कि वे 500 और 1000 के नोट कैसे बदलेंगे…?

देशवासियों को आज तक कभी शराब, सिनेमा के टिकट व राशन लेने तो कभी बिजली, पानी, टेलीफोन के बिल जमा करने, वोट देने और गैस की लाइन में खड़े कराने वाले नेता भी नोट के लिए लाइन लगने से परेशान हैं। अभी जियो का 4जी सिम लेने के लिए लाइन में लगने से भी उन्हें गुरेज नहीं रहा। मंदिरों में लाखों की लाइन और उसमें होने वाली भगदड़ों से होने वाली सैकड़ों-हजारों मौतों से भी भयावह उन्हें यह लाइनें लग रही हैं, तो उनकी मंशा पर जरूर सवाल उठते हैं।

अति दुर्लभ तस्वीरें जब 1978 में भी जनता पार्टी की मोरारजी देसाई सरकार द्वारा किये गए विमुद्रीकरण के बाद लोगो ने लाइन में लग कर बदले थे नोट:

विदेशी मीडिया भी कर रही प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ :

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सिंगापूर के अखबार ने सिंगापूर को एक नाविकों के शहर से वैश्विक आर्थिक पावरहाउस बनाने वाले ली कुआन यू से की प्रधानमंत्री मोदी की तुलना..

यह भी पढ़ें : नोटबंदी के फैसले पर चीनी मीडिया ने भी की पीएम नरेंद्र मोदी की सराहना

बॉलिवुड ने नोटबंदी का किया स्वागत

नोट बंदी के साइड इफेक्ट : बैंक-एटीएम हुए ‘कैश लेस”, व्यापार में ‘घूम रहा” कैश ही

note-bandiनवीन जोशी, नैनीताल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीती आठ नवंबर को 1000 और 500 रुपयों के नोटों को चलन से बाहर किये जाने की घोषणा और इधर देश वासियों से ‘कैश लेस’ होने यानी नगदी के कम से कम इस्तेमाल करने की अपील की है, किंतु होता इसका उल्टा नजर आ रहा है। बैंकों से लगातार नगदी निकल तो रही है, किंतु आठ नवंबर से पहले जैसे लोग अपनी जरूरत से अधिक होने वाली नगदी को वापस बैंकों में जमा करते थे, वैसा अब नहीं हो रहा है। बल्कि बाजार में नगदी हस्तांतरण के प्रमुख अंग व्यापारी वर्ग के लोग नगदी को बैंक में जमा नहीं कर रहे हैं, और एक से दूसरे व्यापारी को देकर ‘घुमा’ रहे हैं।
not-bandiहमने नोट बंदी के बाद नगदी की समस्या को समझने के लिये कई व्यापारियों से बात की। कई व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि अभी भी वे पुराने नोटों में लेन-देन कर रहे हैं। उनके पास जितने भी पुराने नोट आ रहे हैं, उन्हें आगे बड़े सप्लायर नि:संकोच ले रहे हैं। वहीं अन्य का कहना है कि वे अपने पास आ रही नयी नगदी को पूर्व की तरह बैंकों में जमा नहीं कर रहे हैं, क्योंकि यदि वे इसे जमा करते हैं तो फिर जरूरत पड़ने पर इसके निकालते समय लाइन में लगना पड़ेगा और धनराशि निकालने की सीमा के भीतर ही धनराशि निकल पाएगी। वैसे भी बैंकों में जिस तरह का नगदी संकट है, वैसे में सरकार की ओर से तय प्रति सप्ताह प्रति व्यक्ति के लिये 24 व प्रति प्रतिष्ठान 50 हजार की तथा जमा करने पर बढ़ने वाली धनराशि बैंक से मिलनी नामुमकिन है, इसलिये वे नगदी को अपने पास ही रखकर एक से दूसरे व्यापारी में घुमा रहे हैं। बड़े व्यापारी अभी भी चेकों के माध्यम से भुगतान नहीं ले रहे हैं। वहीं मुख्यालय स्थित करेंसी चेस्ट व भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक मनीश चौधरी ने बताया कि आठ नवंबर के बाद से 61.2 करोड़ रुपये के नये नोट बांटे जा चुके हैं, किंतु नयी व चलन योग्य मुद्रा में बेहद सीमित धनराशि ही जमा हो रही है। सरकारी बिलों व चालानों तथा पुराने आरडी खातों में जमा हुई धनराशि को छोड़ दें तो बचत व क्रेडिट व ओडी खातों में जमा हुई धनराशि नगण्य है। ऐसे में करेंसी चेस्ट में नगदी की मात्रा शून्य के स्तर पर पहुंच गयी है, और अगले दो दिनों में यदि आरबीआई से नयी नगदी नहीं आती है तो जनपद के पर्वतीय क्षेत्रों में एसबीआई सहित अनेक बैंक बंद हो सकते हैं।

पुराने नोटों का भी व्यापारियों, और कुछ वर्गों में अभी भी हो रहा है लेनदेन

नैनीताल। सुनने में अजीब लग सकता है, किंतु ऐसी जानकारी है कि व्यापारियों और समाज के एक वर्ग में अभी भी एक हजार और 500 रुपये के पुराने, चलन से बंद हो चुके नोटों में बिना किसी चिंता के लेन-देन हो रहा है। वहीं समाज के एक वर्ग में भी यह प्रवृत्ति देखी जा रही है। इसका कारण क्या है, यह तो ठीक से नहीं पता, किंतु कुछ लोगों का यहां तक कहना है कि भले इस माह के आखिर में पूरी तरह पुराने नोट चलन से बाहर हो जायेंगे, इन्हें खातों में भी जमा नहीं किया जा सकेगा, किंतु एक वर्ग आपस में लेन-देन में इसका वैध मुद्रा की तरह प्रयोग करता रहेगा। वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जिसे अभी भी लगता है कि पुराने नोट एक बार फिर चलन में लौट सकते हैं।

चेकों से भुगतान में भी आ रही अलग-अलग समस्याएं

नैनीताल। मुख्यालय में नगदी की समस्या को देखते हुए चेकों से व ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा तो मिल रहा है, परंतु इसमें कई समस्याएं भी आ रही हैं। पेटीएम जैसी ऑनलाइन ट्रांजेक्सन साइटों में कंजेसन एवं इंटरनेट की गति व उपलब्धता की वजह से धनराशि बार-बार फंस रही है, जिससे तत्काल भुगतान नहीं हो पा रहा है। इससे समय भी नष्ट हो रहा है, व असुविधा भी हो रहा है। मसलन पेट्रोल पंप पर पेटीएम से भुगतान करने में वाहनों का जाम लग जा रहा है। वहीं नगर के सुलभ शौचालय में छोटी नगदी न होने की स्थिति में सैलानियों द्वारा पांच-पांच रुपये के चेक दिये जाने का मामला प्रकाश में आया है, जिसमें शौचालय संचालक को इन पांच-पांच रुपये के बड़ी संख्या में चेकों को बैंक खाते में जमा करने में परेशानी हुई है, वहीं मल्लीताल स्थित नागपाल कम्युनिकेशन के स्वामी नागपाल कम्युनिकेशन के स्वामी सुशील नागपाल ने बताया कि अब उपभोक्ता चेकों के माध्यम से मोबाइल फोन खरीद रहे हैं, वहीं एक अनजान उपभोक्ता 14 हजार का मोबाइल लेकर चेक और अपनी आईडी आदि भी दे गया, किंतु पता चला कि उसके बैंक खाते में केवल 62 रुपऐ शेष हैं। अब वह फोन भी नहीं उठा रहा है।

डिजिटल तरीके से पेमेंट करने पर मिलेगी कई प्रतिशत की छूटः जेटली

नोटबंदी के ऐलान के 1 महीने के बाद केंद्र सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार को कई बड़े ऐलान किए। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वाले लोगों के लिए 11 छूटों की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने डिजिटल मोड से पेट्रोल और डीजल खरीदने वाले लोगों के लिए 0.7 प्रतिशत के डिस्काउंट का ऐलान किया। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी कैशलेस ट्रांजैक्शन बढ़ाने के लिए 1 लाख गांवों में पॉइंट ऑफ सेल मशीनें इंस्टॉल करने की बात कही। यह सभी छूटें 1 जनवरी, 2017 से लागू होंगी।

आइए हम आपको बताते हैं कि वित्त मंत्री ने किन ट्रांजैक्शंस पर किया है छूट का ऐलानः

1. डिजिटल मोड से पेट्रोल, डीजल खरीदने वाले लोगों को 0.7 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा।

2. 10,000 तक की आबादी वाले देश के 1 लाख गांवों में सरकारी फंड से दो पॉइंट ऑफ सेल मशीनें लगेंगी। विशेष तौर पर ऐग्रिकल्चर क्रेडिट सोसायटी और सहकारी संस्थाओं को इस डिस्ट्रब्यूशन के लिए चुना जाएगा। यदि एक गांव की औसत आबादी 7,500 मानें तो 75 करोड़ लोगों तक इसकी पहुंच होगी।

3. नाबार्ड के जरिेए क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंक 4 करोड़ 32 लाख किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों को रूपे कार्ड देंगे।

2,000 रुपए तक के कैशलेस ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा कोई सर्विस टैक्स

4. उपनगरीय रेलवे नेटवर्क में डिजिटल मोड से मासिक कार्ड बनवाने वाले लोगों को 0.5 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा। पहली शुरुआत मुंबई से होगी।

5. रेलवे में सफर करने वाले लोगों में 58 प्रतिशत बुकिंग ऑनलाइन होती है। ऑनलाइन बुकिंग पर 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा।

6. रेल कैटरिंग, रिटायरमेंट रूम जैसी सुविधाओं के लिए डिजिटल पेमेंट करने पर भी 5 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा।

पेटीएम से बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी कर सकेंगे भुगतान

7. पब्लिक सेक्टर इंश्योरेंस कंपनियों के कस्टमर पोर्टल से ऑनलाइन पॉलिसी लेने और प्रीमियम चुकाने वालों को 10 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा। जनरल इंश्योरेंस पर 10 प्रतिशत और लाइफ इंश्योरेंस पर 8 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा।

8. केंद्रीय विभाग और पीएसयू सुनिश्चित करेंगे कि ट्रांजैक्शन फीस और एमटीआर चार्जेज का बोझ न पड़े।

9. पीएसयू बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि माइक्रो, एटीएम, पीओएस टर्मिनल और मोबाइल पीओएस का किराया 100 रुपये से अधिक न हो।

10. 2000 रुपये के सभी डिजिटल ट्रांजैक्शंस पर सर्विस टैक्स लागू नहीं होगा।

11. टोल प्लाजा और नैशनल हाईवे में फास्ट टैग और आरएफआईडी कार्ड का इस्तेमाल करने वालों को भी 10 प्रतिशत का डिस्काउंट मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि कैश के कालाबाजारियों पर आयकर विभाग ने नकेल कसते हुए कैश स्कैम के मामलों में 3,000 करोड़ की अघोषित आय का पता चला है। वहीँ बैंकों में कुल 15.44 लाख करोड़ के 500 व 1000 के पुराने चलन से बंद हुए नोट जमा हुए, जबकि बैंकों ने 4.61 लाख करोड़ के नए नोट जारी किये हैं।

कैशलेस पेमेंट्स के लिए सरकार द्वारा किए गये उपाय :

मोदी सरकार फरवरी 2016 से डिजिटल और कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए तमाम उपाय कर रही है। आइए जानते हैं कि सरकार ने अबतक कौन-कौन से ठोस उपाय किए हैं…

1.सरकारी विभागों में नागिरकों द्वारा डिजिटल या कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है। कैशलेस पेमेंट करने वालों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।

2.फ्यूल और पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स खरीदने के लिए डेबिट/क्रेडिट/प्रीपेड माध्यम से किए गए पेमेंट्स पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज/फी नहीं लिया जाएगा। डिजिटल पेमेंट करने पर पेट्रोल-डीजल 0.75 प्रतिशत सस्ता मिलेगा। पेट्रोलियम कंपनियां आगे भी ऐसे पेमेंट्स को प्रोत्साहन प्रदान करने पर विचार करेंगी।

3.केंद्रीय सरकार के 70 विभागों पर विभिन्न डिजिटल पेमेंट्स जैसे नेट बैंकिंग, डेबिट/क्रेडिट/प्रीपेड कार्ड्स, इंटरबैंक मोबाइल पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) स्वीकार किए जा रहे हैं।

4.सरकार ने केंद्र के विभागों में बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के डिजिटल पेमेंट्स स्वीकार करने की व्यवस्था के लिए लिए अलग से व्यय राशि को भी स्वीकृत कर दिया है।

5.विद्युत वितरण कंपनियों और राज्य सरकारों को उपभोक्ताओं द्वारा बिजली बिल आदि के डिजिटल भुगतान को ट्रांजैक्शन चार्ज/फी से मुक्त करने के लिए राजी किया गया है।

6.एक गैर-कर रसीद पोर्टल bharakosh.gov.in डिवेलप किया गया है। लोग इसकी मदद से बिना बैंक या सरकारी विभागों में गए 237 अलग-अलग कैटिगरी (आरटीआई, ऐप्लिकेशन फी) जैसे नॉन-टेक्स पेमेंट्स ऑनलाइन कर सकेंगे। इस पेमेंट पर भी ट्रांजैक्शन चार्ज/फी नहीं लगेगा।

7.सभी सरकारी संगठनों, पीएसयू को सुझाव दिया गया है कि वे डिजिटल पेमेंट्स को सपॉर्ट करने वाले नियमों का रीव्यू करें। अगर Pay Gov India पेमेंट सुविधा से नहीं जुड़े हैं, तो जुड़ें।

8.केंद्र सरकार के विभागों की सैलरी का भुगतान पब्लिक फाइनैंस मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) द्वारा किया जा रहा है। दूसरे फंड और पेमेंट्स के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

9.31 दिसंबर तक डेबिट कार्ड पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट खत्म कर दिया गया है। यानी डिजिटल पेमेंट की स्थिति में भी कारोबारी को पूरा पैसा मिलेगा, चार्ज नहीं लगेगा। उम्मीद है कि इस वजह से छोटे व्यापारी भी अपने ग्राहकों के लिए डिजिटल पेमेंट्स की व्यवस्था प्रभावी करेंगे।

10.फीचर फोन पर मोबाइल बैंकिंग की व्यवस्था देने के लिए USSD चार्ज भी 1.50 रुपये प्रति मेसेज से घटाकर 0.50 रुपये कर दिया गया है। मोबाइल फोन पेमेंट के लिए चार भाषाओं में एक ऐप्लिकेशन (*99#) डिवेलप किया गया है। सर्विस प्रोवाइडर्स ने कुछ समय के लिए इसपर से चार्ज हटा लिए हैं।

11.स्मार्ट फोन पर मोबाइल बैंकिंग को प्रोत्साहन देने के लिए यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ऐप्लिकेशन लाया गया है और 27 बैंकों ने इसे लागू भी कर लिया है।

12.12 बैंकों के 81,000 एटीएम पर इंटरऑपरेबल एटीएम से मोबाइल बैंकिंग की व्यवस्था शुरू है। अन्य 15,000 मशीनों में भी जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा।

13.देश के सभी प्रमुख 45 पुरातात्विक स्थलों पर डिजिटल पेमेंट्स स्वीकार किए जा रहे हैं। 80 फीसदी विजिटर्स को इसमें कवर भी किया जा रहा है।

 14.डिजिटल पेमेंट्स को लोकप्रिय बनाने के लिए आधारभूत संसाधनों को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। मार्च 2017 तक पॉइंट्स ऑफ सेल (PoS)/ मोबाइल PoS मशीन की संख्या 14 लाख से बढ़ाकर 25 लाख कर दी जाएगी।

15.ग्रामीण बैंकिंग को प्रोत्साहन देने के लिए पोस्ट ऑफिसों के ग्रामीण डाक सेवक बिजनस कॉरसपॉन्डेंट के रूप में काम करेंगे। 1,25,000 पोस्ट ऑफिस में ये बिजनस कॉरसपॉन्डेंट ग्रामीण इलाकों में काम करेंगे।

16.कार्ड लेस और पिन लेस बैंकिंग के लिए आरबीआई ने आगे से आधार नंबर से जुड़े पॉइंट ऑफ सेल्स टर्मिनल्स अनिवार्य कर दिए हैं।

 17.देश के सभी हिस्सों तक बैंक/बैंक मित्रों की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। भविष्य में VSAT के माध्यम से कनेक्टिविटी देने पर भी विचार किया जाना है।

18.डिजिटल पेमेंट्स से रेलवे टिकट लेने पर सीमित अवधि के लिए सर्विस चार्ज माफ कर दिया गया है। ऑनलाइन टिकट खरीदने पर 10 लाख रुपये का बीमा कवर मुफ्त मिलेगा।

19.5.5 लाख राशन दुकानों पर माइक्रो एटीएम/ Pos टर्मिनल्स लगाए जा रहे हैं। इसकी मदद से यहां डिजिटल पेमेंट्स भी होंगे और ये बैंक कॉरसपॉन्डेंट के रूप में भी काम करेंगे।

20.सभी टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक कलेक्शन सिस्टम प्रभावी कर दिया गया है। यहां क्रेडिट/डेबिट/प्रीपेड कार्ड से पेमेंट्स किया जा सकता है।

21.स्मार्ट शहरों के लिए मल्टिमॉडल नैशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड पायलट टेस्टिंग के लिए तैयार हैं। इसकी मदद से कैशलेस पब्लिक ट्रांसपॉर्टेशन प्रभावी होगा।

22.भारतीय डाक को पेमेंट बैंक का लाइसेंस दिया गया है। पोस्ट ऑफिसों में 1000 एटीएम इंस्टॉल किए गए हैं। ये एटीएम बैंको के साथ भी जुड़े हुए हैं। वित्तीय समावेशन के लिए 1.5 लाख पोस्ट ऑफिसों में भी ऐसी व्यवस्था वाले माइक्रो-एटीएम लगाए जा रहे हैं।

 23.33 चिह्नित स्मार्ट शहरों के स्टेट मिशन डायरेक्टर्स को शहरों की डिजाइनिंग करते वक्त डिजिटल पेमेंट सर्विस देने का निर्देश दिया गया है।

कैशलेस पेमेंट पर मिलेंगे ढेरों इनाम

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने 15 दिसंबर 2016 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 25 दिसंबर से अगले 100 दिन तक लकी ग्राहक योजना के तहत 15,000 उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 1,000 रुपये का इनाम दिए जाने का ऐलान किया। इसके अलावा व्यापारियों को भी डिजि धन व्यापारी योजना के तहत 50,000 रुपये दिए जाने की घोषणा की। घोषणा के अनुसार डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों को एक सप्ताह में 7,000 अवॉर्ड दिए जाएंगे। क्रिसमस डे से शुरू हो रही इस लकी ग्राहक योजना के तहत एनपीसीआई यानी नैशनल पेमेंट्स कमिशन ऑफ इंडिया की ओर से 25 दिसंबर से अगले 100 दिन तक लकी ग्राहक योजना के तहत 15,000 विजेताओं को प्रतिदिन 1,000 रुपये का इनाम दिया जाएगा। इसके अलावा 14 अप्रैल को तीन मेगा ड्रॉ भी होंगे। इसमें विजेताओं को 1 करोड़, 50 लाख और 25 लाख का इनाम दिया जाएगा। 15,000 उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 1,000 रुपये का इनाम दिए जाने का ऐलान किया। इसके अलावा व्यापारियों को भी डिजि धन व्यापार योजना के तहत 50,000 रुपये दिए जाने की घोषणा की गयी है। एक सप्ताह में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों को एक सप्ताह में 7,000 अवॉर्ड दिए जाएंगे।
ये हैं नई योजनाएं

-डिजिटल पेमेंट्स करने वाले ग्राहकों को मिलेगा इनाम
-हर दिन 1,000 रुपये का कैश बैक प्राइज जीतने का रहेगा मौका
-एक लाख, 10,000 और 5,000 रुपये के साप्ताहिक इनाम जीतने का भी रहेगा मौका
-एक करोड़, 50 लाख और 25 लाख रुपये के 3 मेगा प्राइज ग्राहकों के लिए

डिजि धन व्यापार योजना
-डिजिटल ट्रांजैक्शन करने वाले व्यापारियों को मिलेंगे इनाम
-हर सप्ताह 50,000, 5,000 और 2,500 रुपये के इनाम मिलेंगे
-इस योजना के तहत 7,000 व्यापारियों को मिलेंगे इनाम
-व्यापारियों के लिए 3 मेगा प्राइज का भी ऐलान
-50 लाख, 25 लाख और 12 लाख रुपये के तीन मेगा प्राइज व्यापारियों के लिए