/उत्तराखंड को बीसीसीआई की मान्यता दिलाने के लिए चलेगी मुहिम

उत्तराखंड को बीसीसीआई की मान्यता दिलाने के लिए चलेगी मुहिम

  • पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल ने कहा इस कारण राज्य के खिलाड़ियों को पूर्ववर्ती यूपी की तरह नहीं मिल पा रही हैं नौकरियां
  • लेटलतीफी होने पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की कही बात
वार्ता करते पूर्व सांसद डा. महेंद्र पाल।

नवीन जोशी, नैनीताल। जनता दल एवं कांग्रेस पार्टी से दो बार नैनीताल लोक सभा संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे डा. महेंद्र पाल उत्तराखंड को बीसीसीआई यानी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से उत्तराखंड को मान्यता दिलाने के लिए संघर्ष छेड़ेंगे। शनिवार को मुख्यालय में उन्होंने ‘राष्ट्रीय सहारा’ के समक्ष यह ऐलान किया। कहा कि उत्तराखंड को मान्यता मिलने में 17 वर्ष बीत गए हैं, जबकि इसके साथ बने शेष दोनों राज्यों-झारखंड व छत्तीसगढ़ को मान्यता मिल चुकी है। बीसीसीआई से मान्यता का मुद्दा केवल क्रिकेट से ही नहीं बल्कि रोजगार से भी जुड़ा है। पूर्व में जब उत्तराखंड पूर्ववर्ती राज्य उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, तब राज्य के अनेकों खिलाड़ियों को खेलों में प्रदर्शन के बल पर सरकारी एवं बैंकिंग क्षेत्र में नौकरियां मिली थीं। लेकिन उत्तराखंड बनने के बाद और मान्यता न होने के कारण राज्य के खिलाड़ियों को नौकरियां नहीं मिल पा रही हैं। उत्तराखंड को मान्यता मिलने में यदि और विलंब होता है तो इस संबंध में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे।

Cricket Match in Nainital -1899

उत्तराखंड के नैनीताल में तो 19वीं सदी से क्रिकेट खेला जाता रहा है। नगर के ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान की 1899 की यह तस्वीर गवाह है कि उत्तराखंड के नैनीताल में तो 19वीं सदी से क्रिकेट खेला जाता रहा है।

नैनीताल के फ्लैट्स मैदान में देश के तत्कालीन गृह मंत्री भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त क्रिकेट मैच के दौरान

डा. पाल ने शनिवार को नगर स्थित ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान में एक विशेष भेंट में पाल ने दावा किया कि उत्तराखंड के 29 क्रिकेट खिलाड़ी अन्य राज्यों से प्रथम श्रेणी के व रणजी ट्रॉफी में खेल रहे हैं, जबकि पूर्व भारतीय कल्पान महेंद्र सिंह धौनी, अंडर-19 के कप्तान रहे उन्मुक्त चंद, ऋषभ पंत व मनीश पांडे के अलावा आईपीएल में सबसे महंगे बिके स्पिनर पवन नेगी और महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट व मानसी जोशी जैसे अनेक खिलाड़ी उत्तराखंड से हैं। प्रदेश के गौलापार हल्द्वानी व देहरादून में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम भी बन चुके हैं। बावजूद उत्तराखंड को क्रिकेट में पहचान नहीं मिल पाई है। कहा कि इस कोशिश में ही ‘हिमालयन क्रिकेट एसोसिएशन’ नाम की नई पंजीकृत क्रिकेट एसोसिएशन बनाई गयी है। तथा राज्य की सभी क्रिकेट एसोसिएशनों से भी संपर्क कर बीसीसीआई से संयुक्त तौर पर वार्ता करने की कोशिश की जाऐगी।

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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और बीसीसीआई में लोढ़ा समिति की सिफारिशों से बन रही है उम्मीद

नैनीताल। गौरतलब है कि सर्वाेच्च न्यायालय की बीसीसीआई पर बरती गई सख्ती और बीसीसीआई में लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू होने के बाद उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता मिलने की उम्मीद बीते कुछ समय से बलवती हो गयी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अब जल्द ही प्रदेश में क्रिकेट एसोसिएशन का गठन किया जाएगा। इसके बाद इसे बीसीसीआई से मान्यता मिल जाएगी। गौरतलब है कि लोढ़ा समिति ने हर राज्य में क्रिकेट एसोसिएशन और हर राज्य को एक वोट का अधिकार देने की सिफारिश की है। वहीं उत्तराखंड बनने के बाद राज्य में क्रिकेट की छह से अधिक एसोसिएशनों के अस्तित्व में आने और उनके बीच की खींचतान को अब तक मान्यता नहीं मिलने का प्रमुख कारण माना जाता है। बताया जाता है कि बीसीसीआई ने सभी एसोसिएशनों से मिलकर साथ आने को कहा था, लेकिन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड और उत्तरांचल क्रिकेट एसोसिएशन के बीच खींचतान से मान्यता का मामला लटका रहा।