177 साल के नैनीताल में कुमाउनी रेस्टोरेंट की कमी हुई पूरी

-पूरी तरह कुमाउनी थीम पर स्थापित किया गया है 1938 में स्थापित अनुपम रेस्टोरेंट -अब यहां लीजिये कुमाउनी थाली के साथ ही पहाड़ी शिकार सहित अनेक पहाड़ी जड़ी-बूटी युक्त व्यंजनों का भी स्वाद नवीन जोशी, नैनीताल। 1841 में अपनी बसासत से ही अंग्रेजी रंग में रंगी ‘छोटी बिलायत’ भी कहलाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल में अंग्रेजी

सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत है कुमाउनी शास्त्रीय होली

रामलीला कमेटी हल्द्वानी के व्यास पंडित गोपाल दत्त भट्ट जी के अनुसार इस बार होली के लिए चीर बंधन 26 फरवरी 2018 एकादशी को 11:10 बजे से 12:16 बजे तक व होलिका दहन 1 मार्च 2018 7:10 बजे से 8:30 बजे तक होगा। पौष माह के पहले रविवार से ही शुरू हो जाती हैं शास्त्रीय रागों

जानें कुमाऊं-उत्तराखंड में कैसे मनाई जाती है बसंत पंचमी

कुमाऊं में ‘श्री पंचमी’, ‘सिर पंचमी’ व ‘जौं पंचमी’ के रूप में मनायी जाती है बसंत पंचमी सभी मित्रों को फूलों के इस त्योहार की बधाइयाँ। आपके जीवन में भी इसी तरह फूलों के रंग-बिरंगे रंग खिलें। -कुमाऊं में अलग उत्साह से मनाया जाता है ऋतुराज बसंत के आगमन का त्योहार नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं

कुमाऊं का लोक पर्व ही नहीं ऐतिहासिक व सांस्कृतिक ऋतु पर्व भी है घुघुतिया-उत्तरायणी

1921 में इसी त्योहार के दौरान बागेश्वर में हुई प्रदेश की अनूठी रक्तहीन क्रांति, कुली बेगार प्रथा से मिली थी निजात घुघुतिया के नाम से है पहचान, काले कौआ कह कर न्यौते जाते हैं कौए और परोसे जाते हैं पकवान नवीन जोशी, नैनीताल। दुनिया को रोशनी के साथ ऊष्मा और ऊर्जा के रूप में जीवन

नैनीताल विंटर कार्निवाल-2017: बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल ने गाये उत्तराखंडी गाने

बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल ने गाया अपनी उत्तराखंडी-जौनसारी बोली में गीत बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल-एसएसपी ने गाए उत्तराखंडी गीत -नैनीताल विंटर कार्निवाल की आखिरी शाम एडीएम ने गाए गीत नैनीताल। सरोवनगरी में आयोजित हुए नैनीताल विंटर कार्निवाल में रविवार की आखिरी शाम यूं तो बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल के ‘रिमिक्स स्टाइल’ कमोबेश चीखते हुए गाए

कुमाऊं के लोक देवी-देवता

देवभूमि उत्तराखंड की दो में से से एक व पुरानी कमिश्नरी कुमाऊं अंचल की अपनी अनेक विशिष्टताएं हैं। उत्तर में उत्तुंग हिमाच्छादित नंदादेवी, नंदाकोट व त्रिशूल की सुरम्य पर्वत मालाएं, पूर्व में पशुपति नाथ व गोरखों की धरती नेपाल, पश्चिम में उत्तराखंड की दूसरी कमिश्नरी व चार धामों का गढ़ गढ़वाल तथा दक्षिण में मैदानी

आस्था के साथ ही सांस्कृतिक-ऐतिहासिक धरोहर भी हैं ‘जागर’

इस तरह ‘जागर’ के दौरान पारलौकिक शक्तियों के वसीभूत होकर झूमते हें ‘डंगरिये’ कुमाऊं के जटिल भौगोलिक परिस्थितियों वाले दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में संगीत की मौखिक परम्पराओं के अनेक विशिष्ट रूप प्रचलित हैं। उत्तराखंड के इस अंचल की संस्कृति में बहुत गहरे तक बैठी प्रकृति यहां की लोक संस्कृति के अन्य अंगों की तरह यहां

कुमाउनी समग्र

कुमाउनी समग्रः चंद शासन काल में राजभाषा रही कुमाउनी, गढ़वाली व जौनसारी सहित उत्तराखंड की समस्त लोक भाषाओं को उनकी पहचान लौटाने का एक प्रयास… आप भी चाहें तो अपनी प्रविष्टियां इस पेज के लिए भेजें @ saharanavinjoshi@gmail.com और कुमगढ़ के लिए @ kumgarh@gmail.com पढ़ें कुमाऊनी कवितायेँ, हिंदी भावानुवाद के साथ : दशहराक दिनाक तें खास कविता: भैम

बिन पटाखे, कुमाऊं में ‘च्यूड़ा बग्वाल’ के रूप में मनाई जाती थी परंपरागत दीपावली

-कुछ ही दशक पूर्व से हो रहा है पटाखों का प्रयोग -प्राचीन लोक कला ऐपण से होता है लक्ष्मी का स्वागत और डिगारा शैली में बनती है महालक्ष्मी नवीन जोशी, नैनीताल। वक्त के साथ हमारे परंपरागत त्योहार अपना स्वरूप बदलते जाते हैं, और बहुधा उनका परंपरागत स्वरूप याद ही नहीं रहता। आज जहां दीपावली का

राजुला-मालूशाही और उत्तराखंड की रक्तहीन क्रांति की धरती, कुमाऊं की काशी-बागेश्वर

पौराणिक काल से ऋषि-मुनियों की स्वयं देवाधिदेव महादेव को हिमालय पुत्री पार्वती के साथ धरती पर उतरने के लिए मजबूर करने वाले तप की स्थली बागेश्वर कूर्मांचल-कुमाऊं मंडल का एक प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। नीलेश्वर और भीलेश्वर नाम के दो पर्वतों की उपत्यका में सरयू, गोमती व विलुप्त मानी जाने वाली सरस्वती नदी

कुमाउनी ऐपण: शक, हूण सभ्यताओं के साथ ही तिब्बत, महाराष्ट्र, राजस्थान व बिहार की लोक चित्रकारी की भी मिलती है झलक

नवीन जोशी, नैनीताल। लोक कलाएं संबंधित क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ ही उस संस्कृति के उद्भव और विकास की प्रत्यक्षदर्शी भी होती हैं। उनकी विकास यात्रा में आने-जाने वाली अन्य संस्कृतियों के प्रभाव भी उनमें समाहित होती हैं इसलिए वह अपनी विकास यात्रा की एतिहासिक दस्तावेज भी होती हैं। कुमाऊं के लोकशिल्प के

प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी शक्तिपीठ दूनागिरि

हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। जम्मू के प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ की तरह ही यहां भी वैष्णवी माता की स्वयंभू सिद्ध पिंडि विग्रह मौजूद हैं। कहते हैं कि इन दोनों स्थानों पर अन्य शक्तिपीठों की तरह माता के कोई

1830 में मुरादाबाद से हुई कुमाउनी रामलीला की शुरुआत

-कुमाऊं की रामलीला की है देश में अलग पहचान नवीन जोशी, नैनीताल। प्रदेश के कुमाऊं मंडल में होने वाली कुमाउनी रामलीला की अपनी मौलिकता, कलात्मकता, संगीत एवं राग-रागिनियों में निबद्ध होने के कारण देश भर में अलग पहचान है। कुमाउनी रामलीला में 1943 में नृत्य सम्राट उदयशंकर के कल्चरल सेंटर ने पंचवटी का सेट लगाकर

सच्चा न्याय दिलाने वाली माता कोटगाड़ी: जहां कालिया नाग को भी मिला था अभयदान

नवीन जोशी, नैनीताल। कण-कण में देवत्व के लिए प्रसिद्ध देवभूमि उत्तराखंड में कोटगाड़ी (कोकिला देवी) नाम की एक ऐसी देवी हैं, जिनके दरबार में कोर्ट सहित हर दर से मायूस हो चुके लोग आकर अथवा बिना आए, कहीं से भी उनका नाम लेकर न्याय की गुहार लगाते (स्थानीय भाषा में विरोधी के खिलाफ ‘घात’ डालते)

साफ-सफाई का सन्देश देता ‘खतडु़वा’ आया, सर्दियां लाया

-विज्ञान व आधुनिक बौद्धिकता की कसौटी पर भी खरा उतरता है यह लोक पर्व, साफ-सफाई, पशुओं व परिवेश को बरसात के जल जनित रोगों के संक्रमण से मुक्त करने का भी देता है संदेश नवीन जोशी, नैनीताल । उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों, खासकर कुमाऊं अंचल में चौमांस-चार्तुमास यानी बरसात के बाद सर्दियों की शुरुआत एवं

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