सीजन शुरू होते ही सरोवरनगरी के घरों में पानी के लिए हाहाकार

-पिछले वर्ष हर दिन होती थी 14 एमएलडी पानी की आपूर्ति, इस वर्ष दिसंबर से नैनी झील बचाने के उद्देश्य से केवल 8 एमएलडी की आपूर्ति, सीजन में भी नहीं बढ़ाई जा रही आपूर्ति
-होटलों एवं अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में अधिक पानी देने व नियत 8 एमएलडी पानी की आपूर्ति भी न किये जाने के आरोप में एडीबी व जल संस्थान कार्यालयों को घेरा
नैनीताल, 25 मई 2018। सामने नैनी सरोवर और पानी की बूंद के लिए तरसते सरोवरनगरी वासी। मौका ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन का, और हजारों सैलानियों को भोजन-पानी खिलाने-पिलाने के बावजूद होटलों को पानी की कोई दिक्कत नहीं, और नगरवासी एडीबी व जल संस्थान के कार्यालयों में पानी की बूंद दिलाने को भटक रहे। तस्वीर के यह पहलू शुक्रवार को उभर कर आये, जब नगर के बारापत्थर में घोड़ा संचालक एवं सात-नंबर स्नोव्यू, आल्मा कॉटेज व पुराना राजभवन क्षेत्र के लोगों ने पहले एडीबी और फिर जल संस्थान के अधिशासी कार्यालय का घेराव किया।

राष्ट्रीय सहारा, 26 मई 2018

नेतृत्व कर रहे टैक्सी-ट्रेवल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जोशी ने एडीबी व जल संस्थान पर एक-दूसरे पर समस्या को टालने एवं कुछ संस्थानों के दबाव में कार्य करने, वहां 24 घंटे की आपूर्ति करने व झील को बचाने के नाम पर पिछले वर्ष के 14 की जगह इस बार तय 8 एमएलडी पानी भी न देने के जबकि प्रशांत दीक्षित ने समस्या के समाधान के लिए एडीबी व जल संस्थान के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से क्षेत्र का भ्रमण कर समाधान करने की मांग की। वहीं घोड़ा मालिक चालक संघ के लियाकत अली, अब्दुल सत्तार आदि का कहना था कि रमजान का महीना होने के बावजूद पानी नहीं मिल रहा है। 94 घोड़े हैं, उनके लिए करीब 15 किमी का फेरा लगाकर रूसी बाइपास के स्रोत से पानी लाना पड़ रहा है। इस मौके पर अब्दुल मालिक, मो. उमर, अब्दुल रहमान, जुल्फिकार, रेखा, हेमा, बबली, मनीशा, मीना, हिमानी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।

आरोपः राजभवन में गोल्फ कोर्स की सिचाई, और पुराने राजभवन में बूंद नहीं

नैनीताल। प्रदर्शन के दौरान पुराना राजभवन क्षेत्रवासी महिलाओं ने यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया कि एक ओर राजभवन में नैनी झील के पानी के गोल्फ कोर्स में सिचाई व तरावट कर गवर्नर्स गोल्फ टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है, वहीं पुराना राजभवन, आल्मा कॉटेज क्षेत्र में लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। पानी न आने से बच्चे स्कूल और बड़े अपने कार्यालय नहीं जा पा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस बाबत एक दिन पूर्व प्रदेश के राज्यपाल डा. केके पाल से भी मीडिया के द्वारा सवाल पूछा गया था, जिस पर उन्होंने कहा कि राजभवन में काफी वर्षा जल संग्रह किया जा रहा है, जिसका उपयोग सिचाई व तरावट के लिए किया जा रहा है, अलबत्ता साफ तौर पर नैनी झील के जल का उपयोग किये जाने से इंकार भी नहीं किया था। गौरतलब है कि राज्यपाल नैनी झील के जल संरक्षण के प्रति काफी संवेदनशील भी हैं।

होटलों में लगे टुल्लू पंप, पुराने टैंक को एडीबी बता रहा नया, जांच होगी

डीएम को ज्ञापन सोंपते भाजपाई।

-भाजपाइयों ने पानी व अन्य समस्याओं पर डीएम को दिया ज्ञापन
नैनीताल। सरोवरनगरी में पानी की समस्या पर विपक्ष कुछ कहे, इससे पहले सत्तारूढ़ भाजपाई ही मुखर हो गये हैं। शुक्रवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने नगर अध्यक्ष मनोज जोशी के नेतृत्व में इस मुद्दे पर डीएम विनोद कुमार सुमन से मुलाकात की, एवं उन्हें ज्ञापन सोंपा। उनका कहना था कि नगर के होटलों में जल संस्थान के अधिकारियों की शह पर टुल्लू पंप चलाए जा रहे हैं, तथा कई पाइप जुड़वा कर भारी मात्रा में पानी का भंडारण किया जा रहा है। साथ ही नगर में नई पाइप लाइन व टैंक बनाने वाले एडीबी पर भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए भाजपाइयों ने टिफिन टॉप में पुराने अंग्रजी दौर के टैंक को ही एडीबी द्वारा नया बताये जाने जैसे आरोप लगाये गए।

राष्ट्रीय सहारा, 26 मई 2018

डीएम ने कहा कि मामले की जांच कराएंगे। इसके अलावा नगर में साफ-सफाई व सड़कों पर गड्ढों की भी शिकायत की गयी। डीएम ने नालों में लगातार आ रही गंदगी, खासबर मलबे की समस्या से निजात के लिए नगर के बाहर मलबे के डंपिंग जोन बनाने की बात कही, जिसका उपयोग बाद में पार्किंग के रूप में हो सकता है। शिष्टमंडल में बिमला अधिकारी, गोपाल रावत, अरविंद पडियार, भूपेंद्र बिष्ट, मनोज जगाती, डीएसए महासचिव सोनू बिष्ट, हरीश राणा, अनिल गड़िया व विकास जोशी आदि भाजपाई मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : 50 फीसद तक कटौती किये जाने के बावजूद ‘शून्य’ पर पहुंच गया नैनी झील का जल स्तर

7 मई 2018 को शून्य पर पहुंचने के बाद नैनी झील की स्थिति।

-अलबत्ता पिछले वर्ष आज की तिथि पर 6.2 फिट और 2016 में 5.35 फिट कम था नैनी झील का जल स्तर
नैनीताल, 7 मई 2018। नैनी झील और इसके चाहने वाले पर्यावरण प्रेमियों के लिये यह बुरी खबर है। नगर वासियों के लिए पिछले दिसंबर माह यानी सर्दियों से ही पेयजल की 40 से 50 फीसद तक कटौती किये जाने के बावजूद नैनी झील का जल स्तर सोमवार सात मई को इस वर्ष में पहली बार शून्य पर पहुंच गया है। अलबत्ता, संतोष की बात यह है कि आज की तिथि में वर्ष 2017 में जल स्तर 6.2 फिट और 2016 में 5.35 फिट कम था।
उल्लेखनीय है कि नगर में आम तौर पर सुबह और शाम 4 से पांच यानी दिन में कुल 8 से 10 घंटे तक 14 एमएलडी (मीट्रिक लीटर पर डे) तक पानी की आपूर्ति की जाती थी। किंतु इस वर्ष झील के जल स्तर को बनाए रखने के लिए दिसंबर माह से सुबह शाम केवल 3-3 घंटे ही और दिन में कुल 8 एमएलडी ही आपूर्ति की जा रही है। इससे इस वर्ष झील का जल स्तर अंग्रेजी दौर के तल्लीताल स्थित झील नियंत्रण कक्ष में बने मापक पर सोमवार को शून्य पर पहुंच गया। इससे पूर्व 2017 में यह स्थिति 25 जनवरी को ही, जबकि 2016 में 16 फरवरी को आई थी, तथा वर्ष 2015 में आई ही नहीं थी। 2015 में अप्रैल तक ही एक हजार मिमी से अधिक शीतकालीन बारिश के साथ सात मई को भी झील का जल स्तर 4.5 फिट के अच्छे स्तर पर था। गौरतलब है कि इस वर्ष दिखने में अच्छी और काफी ओलावृष्टि होने के बावजूद अब तक इस वर्ष में केवल 166.6 मिमी ही बारिश दर्ज की गयी है। इसमें से जनवरी माह में केवल 6 मिमी, फरवरी में 32 मिमी, मार्च में 15.4 मिमी, अप्रैल में 101.4 मिमी और इधर 7 मई तक मई माह में 11.8 मिमी बारिश हुई है। आगे ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में बढ़ते पर्यटन के दबाव के साथ नैनी झील का जल स्तर कितना और गिरता है, यह देखने वाली बात होगी।

नैनी झील का जल स्तर 7 मई को 0 पर था।प्रशासन ने जल रोस्टिंग के द्वारा इसको नियन्त्रित करने का प्रयास किया है।आप सभी की सूचना के लिए यह बताना भी जरूरी होगा कि सामान्यतया आदर्श दशाओं मे इसको इस समय 7 फ़ीट होना चाहिए था परंतु केवल वर्ष 2015 को छोड़कर जबकि झील 4 फ़ीट 8 इंच भरी थी ,अन्य सालों के 1 मई को जल स्तर का विवरण निम्नवत है।
2010- 3 फ़ीट
2011-1’8इंच
2012- (-1इंच)
2013-2फीट6’5इंच
2014-1फ़ीट5इंच
2016-(-4फ़ीट7इंच)
2017-(-5फ़ीट6इंच)
2018-3’5इंच
यह भी जाने कि अलग अलग वर्ष मे झील कब 0 स्तर पर थी—-
1923-जून
1980-जून
2002,2004,2006-जून
2009-मई
2010-जून
2011-मई
2012-30 अप्रैल
2013-26मई
2014-17मई
2016-17फरवरी
2017-12फरवरी
2018-7मई
ये सूचनाये नियन्त्रण कक्ष से उपलब्ध डेटा कर आधार पर संकलित हैं।

डॉ०जी०एल०साह
नैनीताल

चिंताजनक: राज्य बनने के बाद चार से पांच गुना गति से घट रहा है नैनी झील का जल स्तर

जनवरी माह के आखिर में ऐसी है नैनी झील के जल स्तर की स्थिति।

-1999 की शुरुआत में कमोबेश समान कम बारिश की स्थितियों में प्रतिदिन औसतन 5.3 मिमी की गति से गिरा था जल स्तर, जबकि इधर नवंबर में 23.3 व दिसंबर में 20.2 मिमी गिरा
-इधर जनवरी माह में पानी की रोस्टिंग के बाद भी प्रतिदिन 12.7 मिमी की दर से गिरा है जलस्तर
नवीन जोशी, नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध सरोवरनगरी की नैनी झील विश्व भर के सैलानियों को आकर्षित करने के साथ वैश्विक पहचान रखती है, साथ ही पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इसका बड़ा महत्व है। इसलिए हमेशा से केंद्र एवं राज्य सरकारें भी इसके प्रति गंभीर होने का जुबानी दावा भी करती रहती हैं। हालिया दौर में भी इस पर केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार के मुखिया और राज्यपाल चिंता जता चुके हैं। करोड़ों रुपए भी झील के संरक्षण के लिए खर्च होते हैं, लेकिन यह भी असलियत है कि वास्तव में झील के संरक्षण के लिए जरूरी, मूल व ठोस कार्य अंग्रेजी दौर के बाद से नहीं हो पाये हैं। आंकड़े गवाह हैं कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद झील का जल स्तर गिरने की दैनिक औसत दर चार से पांच गुना तक बढ़ चुकी है। 1999 की शुरुआत में कमोबेश समान कम बारिश की स्थितियों में प्रतिदिन औसतन 5.3 मिमी की गति से इसका जल स्तर गिरा था, जबकि इधर नवंबर 2017 में 23.3 व दिसंबर में 20.2 मिमी की दर से जल स्तर गिरा। वहीं इधर जनवरी 2018 में पानी की बड़े स्तर पर हुई रोस्टिंग के बाद भी प्रतिदिन 12.7 मिमी की दर से जलस्तर गिर रहा है।

राष्ट्रीय सहारा, 1 फरवरी 2018
यह भी पढ़ें : पहली बार जनवरी में शून्य पर पहुंचा नैनी झील का जलस्तर,  क्या रूठ गयी हैं माता नंदा !

नैनी झील के जल स्तर गिरने पर अध्ययन करने पर पाया गया कि राज्य बनने के ठीक पहले 1999 में कमोबेश आज की तरह ही कम शीतकालीन वर्षा के हालात रहे। इस वर्ष जनवरी माह में मात्र 2.03 तथा फरवरी व मार्च माह में शून्य बारिश रिकार्ड की गयी। इसके साथ ही जनवरी माह के अंत में जल स्तर 10.14 फिट, फरवरी अंत में 9.6 फिट व मार्च अंत में 9 फिट रहा। इस प्रकार देखते हैं कि जनवरी 1999 में प्रतिदिन औसतन 5.38 मिमी की दर से जल स्तर गिरा। वहीं इस वर्ष नवंबर माह में 23.3 व दिसंबर माह में 201.2 तथा इधर जनवरी माह में अत्यधिक चिंताओं के बीच पेयजल की आपूर्ति प्रतिदिन 14 एमएलडी से घटाकर केवल 8 एमएलडी कर दिये जाने के बाद यह दर भी आधी होकर 12.7 मिमी रही है। इस प्रकार इस वर्ष शीतकालीन वर्षा के नाम पर जनवरी माह में केवल 6 मिमी वर्षा व 4 सेमी बर्फ गिरने की स्थितियों में माह के आखिर में नैनी झील का जल स्तर साढ़े तीन फिट के स्तर पर बना हुआ है, जबकि 2017 में यह इतिहास में पहली बार 25 जनवरी को शून्य के स्तर पर आ गया था।

….तो नहीं हो रहा नैनी झील से अतिरिक्त रिसाव
नैनीताल। नैनी झील के गिरते जल स्तर और इधर हाल में इस दिशा में किए गए प्रयासों के अध्ययन में यह बात भी उभर कर आई है कि पानी की बड़े पैमाने पर रोस्टिंग किए जाने तथा झील के गेजों को  गत दिनों अच्छी तरह से बंद कर बलियानाला में होने वाला रिसाव बंद करने के बाद जल स्तर का गिरने की दर भी पिछले महीनों के मुकाबले आधी हो गयी है। यानी झील से बड़े स्तर पर पानी का अतिरिक्त रिसाव, जिसके कि होने के बड़े स्तर पर दावे किये जा रहे हैं, नहीं हो रहा है। यह सही है कि बलियानाला क्षेत्र में पिछले वर्षों में बड़े जलस्रोत फूटे हैं, और हाइड्रोलॉजी यानी जल विज्ञान के जानकार समझते हैं कि कहीं न कहीं यह पानी सीधे न भी नहीं नैनी झील के ही जलागम क्षेत्र का है, बावजूद वैज्ञानिक अनुसंधानों में भी यह बात साफ हो गयी है कि यह सीधे तौर पर नैनी झील से रिसा हुआ पानी नहीं है। अलबत्ता इसे पंप कर वापस नैनी झील में डालने अथवा निकटवर्ती गांवों को इसकी आपूर्ति किए जाने की मांग उठ रही है।

Leave a Reply

Loading...