चिंताजनक: राज्य बनने के बाद चार से पांच गुना गति से घट रहा है नैनी झील का जल स्तर

Articles Ecology Nainital
जनवरी माह के आखिर में ऐसी है नैनी झील के जल स्तर की स्थिति।

-1999 की शुरुआत में कमोबेश समान कम बारिश की स्थितियों में प्रतिदिन औसतन 5.3 मिमी की गति से गिरा था जल स्तर, जबकि इधर नवंबर में 23.3 व दिसंबर में 20.2 मिमी गिरा
-इधर जनवरी माह में पानी की रोस्टिंग के बाद भी प्रतिदिन 12.7 मिमी की दर से गिरा है जलस्तर
नवीन जोशी, नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध सरोवरनगरी की नैनी झील विश्व भर के सैलानियों को आकर्षित करने के साथ वैश्विक पहचान रखती है, साथ ही पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी इसका बड़ा महत्व है। इसलिए हमेशा से केंद्र एवं राज्य सरकारें भी इसके प्रति गंभीर होने का जुबानी दावा भी करती रहती हैं। हालिया दौर में भी इस पर केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार के मुखिया और राज्यपाल चिंता जता चुके हैं। करोड़ों रुपए भी झील के संरक्षण के लिए खर्च होते हैं, लेकिन यह भी असलियत है कि वास्तव में झील के संरक्षण के लिए जरूरी, मूल व ठोस कार्य अंग्रेजी दौर के बाद से नहीं हो पाये हैं। आंकड़े गवाह हैं कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद झील का जल स्तर गिरने की दैनिक औसत दर चार से पांच गुना तक बढ़ चुकी है। 1999 की शुरुआत में कमोबेश समान कम बारिश की स्थितियों में प्रतिदिन औसतन 5.3 मिमी की गति से इसका जल स्तर गिरा था, जबकि इधर नवंबर 2017 में 23.3 व दिसंबर में 20.2 मिमी की दर से जल स्तर गिरा। वहीं इधर जनवरी 2018 में पानी की बड़े स्तर पर हुई रोस्टिंग के बाद भी प्रतिदिन 12.7 मिमी की दर से जलस्तर गिर रहा है।

राष्ट्रीय सहारा, 1 फरवरी 2018
यह भी पढ़ें : पहली बार जनवरी में शून्य पर पहुंचा नैनी झील का जलस्तर,  क्या रूठ गयी हैं माता नंदा !

नैनी झील के जल स्तर गिरने पर अध्ययन करने पर पाया गया कि राज्य बनने के ठीक पहले 1999 में कमोबेश आज की तरह ही कम शीतकालीन वर्षा के हालात रहे। इस वर्ष जनवरी माह में मात्र 2.03 तथा फरवरी व मार्च माह में शून्य बारिश रिकार्ड की गयी। इसके साथ ही जनवरी माह के अंत में जल स्तर 10.14 फिट, फरवरी अंत में 9.6 फिट व मार्च अंत में 9 फिट रहा। इस प्रकार देखते हैं कि जनवरी 1999 में प्रतिदिन औसतन 5.38 मिमी की दर से जल स्तर गिरा। वहीं इस वर्ष नवंबर माह में 23.3 व दिसंबर माह में 201.2 तथा इधर जनवरी माह में अत्यधिक चिंताओं के बीच पेयजल की आपूर्ति प्रतिदिन 14 एमएलडी से घटाकर केवल 8 एमएलडी कर दिये जाने के बाद यह दर भी आधी होकर 12.7 मिमी रही है। इस प्रकार इस वर्ष शीतकालीन वर्षा के नाम पर जनवरी माह में केवल 6 मिमी वर्षा व 4 सेमी बर्फ गिरने की स्थितियों में माह के आखिर में नैनी झील का जल स्तर साढ़े तीन फिट के स्तर पर बना हुआ है, जबकि 2017 में यह इतिहास में पहली बार 25 जनवरी को शून्य के स्तर पर आ गया था।

….तो नहीं हो रहा नैनी झील से अतिरिक्त रिसाव
नैनीताल। नैनी झील के गिरते जल स्तर और इधर हाल में इस दिशा में किए गए प्रयासों के अध्ययन में यह बात भी उभर कर आई है कि पानी की बड़े पैमाने पर रोस्टिंग किए जाने तथा झील के गेजों को  गत दिनों अच्छी तरह से बंद कर बलियानाला में होने वाला रिसाव बंद करने के बाद जल स्तर का गिरने की दर भी पिछले महीनों के मुकाबले आधी हो गयी है। यानी झील से बड़े स्तर पर पानी का अतिरिक्त रिसाव, जिसके कि होने के बड़े स्तर पर दावे किये जा रहे हैं, नहीं हो रहा है। यह सही है कि बलियानाला क्षेत्र में पिछले वर्षों में बड़े जलस्रोत फूटे हैं, और हाइड्रोलॉजी यानी जल विज्ञान के जानकार समझते हैं कि कहीं न कहीं यह पानी सीधे न भी नहीं नैनी झील के ही जलागम क्षेत्र का है, बावजूद वैज्ञानिक अनुसंधानों में भी यह बात साफ हो गयी है कि यह सीधे तौर पर नैनी झील से रिसा हुआ पानी नहीं है। अलबत्ता इसे पंप कर वापस नैनी झील में डालने अथवा निकटवर्ती गांवों को इसकी आपूर्ति किए जाने की मांग उठ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *