/नैनीताल के व्यापारियों का हाईकोर्ट के कूच का ऐलान, अपनी तरह की दूसरी घटना

नैनीताल के व्यापारियों का हाईकोर्ट के कूच का ऐलान, अपनी तरह की दूसरी घटना

  • अपराह्न तीन बजे से बाजार बंद किए, दूसरे दिन भी बाजार बंद रखकर सुबह 10 बजे मल्लीताल रामलीला मैदान में एकत्र होकर हाईकोर्ट कूच करने का किया ऐलान
  • हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नगर के मल्लीताल गुरुद्वारे से पंत पार्क तक के प्रतिबंधित क्षेत्र में फड़ लगने को लेकर जताया गया विरोध

नैनीताल। गत दिनों से नगर के व्यवसायियों की प्रशासन के आदेशों के खिलाफ चल रही नाराजगी, नए वर्ष की पूर्व संध्या पर नैनीताल नागरिक मंच के बैनर तले जनाक्रोश रैली की कड़ी में बुधवार को व्यापार मंडल मल्लीताल व तल्लीताल की नाराजगी नगर पालिका के विरोध-प्रदर्शन के रूप में सामने आई। और आगे कमोबेश पूरे दिन नगर पालिका के सामने चले विरोध-प्रदर्शन के आखिर में मामला 3 जनवरी 2018 को अपराह्न तीन बजे से नगर की बाजारों को बंद करने और 4 जनवरी को सुबह 10 बजे मल्लीताल रामलीला मैदान में एकत्र होकर उच्च न्यायालय का कूच करने का ऐलान किया गया। आंदोलन की अगुवाई कर रहे मल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष किशन सिंह नेगी व तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन लाल साह ने कहा कि प्रशासन उच्च न्यायालय के अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत केवल उन्हें निशाना बना रहा है, और उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद फड़ वालों को नहीं हटा रहा है। इसलिए उच्च न्यायालय के कूच का निर्णय लिया गया है। उन्होंने पूछे जाने पर आज के आंदोलन का पूर्व के आंदोलनों से संबंध न होने का दावा भी किया।

 इससे पूर्व बुधवार (3 जनवरी 2018) सुबह करीब 11 बजे ही नगर के व्यापारी नगर पालिका कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए धमक आए। इस दौरान उन्होंने पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा को ज्ञापन सोंपा, और पहले उनका करीब एक घंटे, और बाद में संयुक्त मजिस्ट्रेट अभिषेक रुहेला एएसपी हरीश चंद्र सती आदि का भी काफी देर घेराव किया। ज्ञापन में उनका कहना था कि वह कई वर्षों से और इधर नैनीताल क्लब में हुई बैठक में भी अवैध अतिक्रमणकारी फड़ वालों को हटाने की मांग प्रशासन के साथ कोर्ट कमिश्नर को भी कह चुके हैं। लेकिन इस पर कार्रवाई करने की जगह उल्टे प्रशासन द्वारा व्यवसायियों को रोड से सामान हटाने के लिए भारी जुर्माना लगाने की धमकी दी जा रही है।
इसके बाद ईओ ने पुलिस बल की मौजूदगी में फड़ हटाने निकले, जहां फड़ वालों ने उन पर व्यापारियों के दबाव में कार्य करने का आरोप लगाते हुए विरोध किया, और आगे स्वयं फड़ हटाने की बात कही। वहीं बाद में अपराह्न तीन बजे के बाद संयुक्त मजिस्ट्रेट अभिषेक रुहेला एएसपी हरीश चंद्र सती आदि के साथ व्यापारियों से वार्ता करने पहुंचे, लेकिन व्यापारियों ने प्रशासन पर दबाव में कार्य करने का आरोप लगाते हुए वार्ता नहीं की, और घेराव कर दिया। समाचार लिखे जाने तक व्यापारी कल बाजार बंद व हाई कोर्ट कूच करने के लिए बाजार में लाउड स्पीकर से घोषणा कर रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में व्यापारी नेता कमलेश ढोंडियाल, सोनू बिष्ट, विवेक साह, जीत सिंह आनंद, त्रिभुवन फर्त्याल, विक्की वर्मा, आनंद खम्पा, दिग्विजय बिष्ट, कुंदन बिष्ट सहित अनेक व्यापारी शामिल रहे।

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उत्तराखंड के इतिहास में उत्तराखंड कूच की इस तरह की घटना एक बार पहले भी 1 सितंबर 2003 को हो चुकी है, जोकि देश की अपनी तरह की पहली घटना बताई जाती है, जिसमें नैनीताल के साथ ही पूरे उत्तराखंड वासियों ने संयुक्त संघर्ष समिति के तहत उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक आदेश की खुली मुखालफत की थी, जबकि ऐसा करना न्यायालय की खुली अवमानना माना जाता है। नगर के वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह ने बताया कि तक उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति पीसी वर्मा एवं न्यायमूर्ति एमएम घिल्डियाल की खंडपीठ ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के आरोपी अनंत कुमार सिंह को दोषमुक्त करार दे दिया था। यह खबर स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि स्वयं सिंह ने दिल्ली के समाचार पत्रों में जारी करवाई थी। यह खबर लगने पर संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्य आंदोलन के खटीमा कांड की बरसी पर एक सितंबर 2003 को उच्च न्यायालय जाकर वहां इस आदेश की प्रति जलाने का ऐलान किया। इस ऐलान के तीन दिन पहले 29 अगस्त को उच्च न्यायालय ने अपने इस आदेश को वापस ले लिया। बावजूद आंदोलनकारी अपने ऐलान पर अड़े रहे। एक सितंबर को नैनीताल में पुलिस की ओेर से हर ओर से आंदोेलनकारियों का प्रवेश रोकने के प्रबंध किए गए, और नगर को छावनी में तब्दील कर दिया गया। बावजूद आंदोलनकारी तल्लीताल डांठ पर जुटे और सभा की। इस दौरान पुलिस ने आंदोलनकारियों को उच्च न्यायालय तक न जाने व माल रोड से होते हुए मल्लीताल तक शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते हुए जाने की शर्त पर मना लिया। इसके बाद मल्लीताल तक जुलूस निकाला गया, और मल्लीताल में भी सभा हुई। आगे देखने वाली बात होगी कि आज के ऐलान की परिणति किस तरह की होती है।

तत्कालीन डीएम दीपक रावत के निर्देशों पर लगे हैं फड़: ईओ
नैनीताल। उच्च न्यायालय से प्रतिबंधित नगर के पंत पार्क से गुरुद्वारा तक के क्षेत्र में फड़ लगने के बाबत पूछे जाने पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने कहा कि पूर्व में पालिका लगातार फड़ हटाती थी। लेकिन तत्कालीन डीएम दीपक रावत के निर्देशों पर पेड़ों से पीछे चार फिट की चौड़ाई में स्थानीय फड़ व्यवसायियों को दुकानें लगाने दी गयीं। आज व्यवसायियों ने फड़ हटाने को लेकर ज्ञापन दिया। प्रशासन किसी दबाव में कार्य नहीं करता है। बावजूद पालिका ने चंपावत सहित बाहरी लोगों के आठ फड़ हटवाए गए, जबकि कई स्वयं भाग गये। फड़ वालों को स्थान देने के लिए दो माह पूर्व वेंडर जोन कमेटी की कर निरीक्षक की अध्यक्षता एवं तल्लीताल व मल्लीताल व्यापार मंडल के पदाधिकारियों युक्त उपसमिति से 15 दिन के भीतर वेंडर जोन के लिए स्थल का चयन कर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन अभी उप समिति ने वेंडर जोन के लिए सर्वेक्षण ही नहीं किया है। उन्होंने विरोध का मोहन-को मार्ग की पैमाइश और व्यापार मंडल के आगामी चुनावों से जुड़ाव होने का भी अंदेशा जताया।

फड़ न लगने देने के आश्वासन के बाद टला हाईकोर्ट कूच, नैनीताल रहा बंद

-इससे पूर्व छावनी में तब्दील रहा शहर, पुलिस ने हाईकोर्ट से पहले ही व्यापारियों का कूच रोकने के लिए किए थे अभेद्य प्रबंध
-एक प्लाटून पीएसी मिलेगी नगर पालिका को, पालिका ईओ सुनिश्चित करेंगे फड़ों का न लगना
-भोटिया व तिब्बती मार्केट में व्यापारी भी हटवाएंगे अपना अतिक्रमण
नैनीताल। गत दिनों से नगर के व्यवसायियों की प्रशासन के आदेशों के खिलाफ चल रही नाराजगी, नए वर्ष की पूर्व संध्या पर नैनीताल नागरिक मंच के बैनर तले जनाक्रोश रैली की कड़ी में बृहस्पतिवार को व्यापार मंडल मल्लीताल व तल्लीताल का हाईकोर्ट कूच का ऐलान नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा के द्वारा फड़ न लगने देने के आश्वासन के बाद टल गया। अलबत्ता, नगर में दूसरे दिन भी बाजार दवाइयों की दुकानों को छोड़कर पूरी तरह से बंद रहे। पालिका को पुलिस की ओर से फड़ न लगने देने के लिए एएसपी हरीश चंद्र सती ने एक प्लाटून पीएसी उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके साथ ही नगर के भोटिया और तिब्बती बाजार क्षेत्र में दुकानों से बाहर निकले एंगलों को हटाने का व्यवसायियों की ओर से आश्वासन दिया गया।
नगर के व्यापार मंडलों के सुबह 10 बजे मल्लीताल रामलीला मैदान में एकत्र होकर उच्च न्यायालय का कूच करने के ऐलान के मद्देनजर बृहस्पतिवार को मुख्यालय सुबह से ही पुलिस द्वारा पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। खासकर उच्च न्यायालय की ओर व्यापारी कूच न कर पाएं, इस हेतु अभेद्य सुरक्षा प्रबंध और हर तरह की कार्रवाई की तैयारी कर ली गयी थी। उधर सुबह पंत पार्क से गुरुद्वारा तक के प्रतिबंधित क्षेत्र में फड़ नहीं लगने दिए गए। ऐसे में व्यापारियों ने मल्लीताल रामलीला मैदान में सभा की, और यहां से हाईकोर्ट की बजाय वे नगर पालिका की ओर जुलूस की शक्ल में आए, और कार्यालय में एडीएम बीएल फिरमाल की अध्यक्षता में वार्ता हुई। वार्ता में पालिका ईओ व एएसपी के आश्वासनों के बाद व्यापारी संतुष्ट दिखे। इस दौरान व्यापारी नेता किशन सिंह नेगी ने कहा कि व्यापारी हाईकोर्ट के अतिक्रमण विरोधी अभियान का स्वागत करते हैं, पर इसकी आढ़ में केवल व्यापारियों के विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई की जा रही थी, और पिछले छह माह से उनके कोर्ट कमिश्नर तक से कहने के बावजूद अवैध फड़ लगाने वाले अतिक्रमणकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही थी। त्रिभुवन फर्त्याल व सोनू बिष्ट ने बाहरी फड़ वालों के लगातार बढ़ती हिमाकत की ओर इशारा करते हुए भविष्य में किसी बड़ी घटना के प्रति चेताया। बताया गया कि बीती 31 दिसंबर व नव वर्ष पर सैलानियों की भारी भीड़ के बावजूद स्थानीय व्यवसायी निराश रहे। जबकि फड़ वालों ने बड़े पैमाने पर बिक्री की। इससे व्यापारी नाराज थे। प्रदर्शन-वार्ता करने वालों में व्यापारी नेता कमलेश ढोंडियाल, विवेक साह, विक्की राठौर, विवेक वर्मा, जीत सिंह आनंद, जगदीश बवाड़ी, पूरन मेहरा व कुंदन बिष्ट सहित अनेक व्यापारी शामिल रहे।

आज पार्किंग नहीं तो गाड़ी रुकवाओगे, कल गेहूं नहीं तो जहर दिलाओगे….

-सरोवनगरी में नये वर्ष के स्वागत की जगह भारी आक्रोश के साथ निकली जन आक्रोश रैली
नैनीताल। आज पार्किंग नहीं तो गाड़ी रुकवाते हो-कल गेहूं न होगा तो जहर दिलाओगे.., जाम तो एक बहाना है, अंग्रेजी शासन लाना है, रोडवेज बस शहर में आ सकती है तो पर्यटक बस क्यों नहीं, नैनीताल पर्यटन स्थल है-इसे पर्यटन स्थल रहने दो, हड़पो नहीं, नैनीताल में वीवीआईपी जमावड़ा क्यों, टैक्सी से नैनीताल प्रतिबंधित मोहर हटाओ, रोजी-रोटी पर तकरार-यह कैसा मौलिक अधिकार सरीखे नारे लिखी पट्टियों के साथ रविवार को नव वर्ष के स्वागत की जगह सरोवरनगरी ऐसे ही नारों से शाम ढलते गूंज उठी, और अंधेरा घिरने के साथ दिन में भी आंख मूंदे हुक्मरानों को रोशनी दिखाने को हाथों में मोमबत्तियां जल उठीं। लोग कदम से कदम मिलाते हुए गहरी नाराजगी के साथ मल्लीताल रामलीला मैदान से एकत्र होकर तल्लीताल तक आक्रोश के साथ गए और वापस लौटे। नैनीताल नागरिक मंच के तत्वावधान में आयोजित हुए इस प्रदर्शन में मल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष किशन सिंह नेगी, टैक्सी-ट्रेवल एसोसिएशन अध्यक्ष नीरज जोशी, होटल एसोसिएशन अध्यक्ष दिनेश साह, तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन लाल साह, विवेक वर्मा, ओमवीर सिंह, नरेंद्र नैनवाल, महावीर बिष्ट, दर्शन भंडारी, चंदन जोशी, सोनू बिष्ट, जीवंती भट्ट, जीत सिंह आनंद, कैलाश अधिकारी, भाजपा नगर अध्यक्ष मनोज जोशी व त्रिभुवन फर्त्याल सहित बड़ी संख्या में नगर वासी शामिल रहे।

यह भी देखें : स्थानीय स्तर पर तमाम नकारात्मकताओं, नाराजगी व सैलानियों के स्वागत के लिए दशकों से नगर को नववर्ष की पूर्व संध्या पर सजाने और सवा किमी. लम्बी माल रोड को संगीत व अलाव के प्रबंध के साथ ‘दुनिया के सबसे बड़े डांसिंग फ्लोर’ में तब्दील करने जैसे प्रबंध न करने के बावजूद नैनीताल में कितनी संख्या में उमड़े सैलानी और वाहन.. क्योंकि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी….

‘पीआईएल मैन’ डा. रावत के ‘आहत’ होने के निकाले जा रहे हैं निहितार्थ
डा. अजय रावत

नैनीताल। सरोवरनगरी की पारिस्थितिकी को बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर करने के लिए ‘पीआईएल मैन’ कहे जाने वाले पर्यावरण प्रेमी डा. अजय रावत द्वारा उच्च न्यायालय से अपनी बहुचर्चित जनहित याचिका वापस लेने की अर्जी दी है। खासकर ऐसे दिन जबकि नव वर्ष की पूर्व संध्या पर नगर वासी एवं नगर के पर्यटन से जुड़े लोग नये वर्ष के स्वागत और यहां हजारों की संख्या में आए सैलानियों का आतिथ्य करने के बजाय अन्य वर्षों के उलट बिना उत्साह, नगर में सजावट व संगीत का प्रबंध किये बगैर ‘कैंडल मार्च’ निकाल रहे हैं। खासकर इसे जनहित याचिका पर आ रहे अनेक ‘प्रतिबंध युक्त’ आदेशों के विरुद्ध जनता के आक्रोश के दबाव का परिणाम बताया जा रहा है तो डा. रावत का कहना है कि उन्होंने पांच वर्षों में अपनी जनहित याचिका के मूल विषयों पर कार्य न होने और इसकी जगह अन्य प्रतिबंध थोपने की स्थितियों में उठाया है। उन्होंने नगर को माथेरन की तरह ‘ईको सेंसिटिव जोन’ घोषित करने की मांग भी की है, जिसके लिए केंद्र सरकार से धनराशि मिलती है, तथा नगर में व्यवसायिक निर्माणों पर रोक लगती है, और नगर वासियों को असुविधा नहीं होती हैं।
डा. अजय रावत का कहना है कि उनकी पीआईएल संख्या 31/2012 के जरिए 2012 से ही झील विकास प्राधिकरण द्वारा हरित क्षेत्र में चिन्हित किये गए अवैध, अनियंत्रित निर्माण पर तुरंत रोक लगाने और साथ ही नैनीताल को ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने का अनुरोध किया था था, जिससे नैनीताल झील को 50 फीसद से अधिक जल उपलब्ध कराने वाले सूखाताल झील क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। लेकिन पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, अलबत्ता कई बड़े व्यवसायिक निर्माण कार्य बदस्तूर जारी रहे। वहीं नैनी झील को लगातार नुकसान होता रहा. उन्होंने अपनी जनहित याचिका को वापस लेने वाली याचिका में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि सूखाताल के ईको सेंसिटिव जोन में तत्काल रूप से निर्माण गतिविधियों पर रोक लगायी जाए, जिससे नैनी झील को पुनर्जीवित किया और नैनी झील के अस्तित्व को बचाया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उनकी जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कई नए मुद्दे जुड़ते गए और याचिका मूल विषय से दूर हो गयी।