/कुमाऊं विवि में विकसित हो रही ‘नैनो दुनियां’, सोलर सेल बनाने को बढ़े कदम

कुमाऊं विवि में विकसित हो रही ‘नैनो दुनियां’, सोलर सेल बनाने को बढ़े कदम

राष्ट्रीय सहारा, 1 अक्टूबर 2016, पेज-1

राष्ट्रीय सहारा, 1 अक्टूबर 2016, पेज-1

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया मिशन’ परियोजना से भी जुड़ी है यह सफलता
-कुमाऊं विवि के डीएसबी कॉलेज स्थित नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र ने प्लास्टिक के कूड़े, बोतलों आदि से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन, पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की अपने उपकरण-‘स्वयंभू-2021’ को कराया पेटेंट
-साथ ही एक्पायरी हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने का ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम’ भी कराया पेटेंट
नवीन जोशी, नैनीताल। 1972 में स्थापित कुमाऊं विवि ने अपने 44 वर्ष के इतिहास में पहली बार एक साथ अपने दो अनुसंधानों को पेटेंट कराकर इतिहास रच डाला है। कुमाऊं विवि के डीएसबी कॉलेज स्थित नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र ने प्लास्टिक के कूड़े, बोतलों आदि से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन के साथ ही पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की अपनी स्वयं बनाये गये प्रबंध-‘स्वयंभू-2021’ के साथ ही कालातीत यानी एक्पायरी हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने के ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम” का पेटेंट फाइल कर दिया है। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया मिशन” परियोजना से भी जुड़ी है। प्रयोग का धरातल पर लाभ मिलने लगे तो शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से न केवल निजात मिल सकती है, वरन मोटी आय भी प्राप्त की जा सकती है।

कुमाऊं विवि में कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी के प्रयासों एवं पूर्व राज्य सभा सांसद तरुण विजय द्वारा अपनी सांसद निधि के पूरे 50 लाख रुपयों से स्थापित नैनो साइंस सेंटर में सेंटर के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू ने बताया कि उनके केंद्र में केवल आठ हजार रुपए की लागत से तैयार भट्टी में पुरानी बोतलों, टूटी प्लास्टिक की बाल्टी या दूध की खाली थैलियों आदि की करीब 20 किग्रा प्लास्टिक से कार्य शुरू किया गया। इसमें खास नई तकनीकों से बोतलों को जलाकर सर्वप्रथम भट्टी में इकट्ठा होने वाले कार्बन से ग्रेफीन, फिर बचे पदार्थ से पेट्रोलियम उत्पाद और आखिर में सीमेंट-कंक्रीट के साथ मिलाकर निर्माण कार्यों में प्रयुक्त किये जाने वाले पदार्थ को तैयार किया जा रहा है, और इस प्रकार औसतन एक बोतल से करीब 90 रुपए की आय प्राप्त की जा रही है। इस भट्टी को ही ‘स्वयंभू-2021’ नाम दिया गया है, और इसे ही पेटेंट कराया गया है। इसके अलावा कालातीत हो चुकी खांसी की पीने वाली दवाई को फिर से उपयोगी बनाने का ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम” भी पेटेंट कराया गया है। दोनों पेटेंट कराने वाली टीम में सुनील ढाली, विनयदीप पुनेठा, संदीप पांडे, मनोज काराकोटी व पवन आदि शोध छात्र भी शामिल हैं। विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने इस उपलब्धि के लिये केंद्र के प्रभारी डा. नंद गोपाल साहू व उनकी टीम को बधाई दी है।

जर्मानेन बनाने के लिए प्रो. साहू को मिला प्रथम गर्वर्नर्स अवार्ड

उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने बेहतर शोध कार्य के लिए कुमाऊं विवि के तीन प्रोफेसरों को सम्मानित किया है। वर्ष 2013 से कुविवि के नैनो साइंस सेंटर के प्रभारी डॉ. नंद गोपाल शाहू को द्वि-ज्यामितीय नैनो पदार्थ-जर्मानेन को प्लास्टिक से प्राप्त करने के लिये प्रथम पुरस्कार मिला है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी प्रो. साहू का दावा है कि भारत में पहली बार जर्मानेन को प्रयोग शाला में तैयार करने में सफलता मिली है। इसका प्रयोग अत्यंत छोटे की-डायोड बनाने में किया जाएगा, और इससे भविष्य में सौर बैटरियां बनाने में मदद मिलेगी। ऊर्जा के क्षेत्र में यह बड़ी उपलब्धि है। वहीं वर्ष 2000 से कुविवि के भीमताल स्थित जैव तकनीका विभाग की प्रभारी के रूप में कार्यरत डा. वीना पांडे को पहाड़ी झाड़ी किलमोड़ा के औषधि गुणों को निकालने की बेहतर प्रक्रिया तैयार करने के लिये द्वितीय पुरस्कार और शोध छात्र अनूप कुमार को हिमालय की गुफाओं में प्राकृतिक तरीके से बनने वाली शिवलिंग जैसी आकृतियों पर लंबी अवधि के प्राकृतिक बदलावों व मौसम से जुड़ी घटनाओं पर आधारित शोध कार्य के लिए तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

कुमाऊं विवि में विकसित हो रही भविष्य की ‘नैनो दुनिया’, किया प्लास्टिक की एक खाली बोतल से 90 रुपए कमाने का इंतजाम

-कुमाऊं विवि के नैनो साइंस सैंटर में प्लास्टिक की बोतलों से बन रहे नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन, पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, यह सच है। बोतल बंद पानी की प्लास्टिक की जिस खाली बोतल को हमें कबाड़ में बेचने पर 10-15 पैंसे भी नहीं मिल पाते हैं, उससे 90 रुपए यानी 500-600 गुना तक अधिक कीमत कमाई जा सकती है। ऐसा होना बहुत दूर भी नहीं है, वरन कुमाऊं विवि के इसी सत्र में स्थापित नैनो साइंस सेंटर में ऐसा सफलता पूर्वक किया जा रहा है। यहां एक प्लास्टिक की बोतल से करीब 80 हजार रुपए प्रति किग्रा के भाव मिलने वाले अभी 2010 में ही खोजे गये कार्बन नैनो पदार्थ-ग्रेफीन (वैज्ञानिक नाम SP-2) में बदला जा रहा है, साथ ही वैकल्पिक पेट्रोलियम ईधन एवं सीमेंट-कंक्रीट के साथ प्रयुक्त हो सकने वाले दो अन्य पदार्थ भी सफलता पूर्वक तैयार किए जा रहे हैं। अभी यह प्रायोगिक स्तर पर है, और जल्द ही इसके व्यवसायिक व बड़े स्तर पर होने की राह खुली हुई है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया” परियोजना से जोड़कर भी देखा जा रहा है। प्रयोग का धरातल पर लाभ मिलने लगे तो शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से भी निजात मिल सकती है।
Grefeen

हम जानते हैं, भविष्य को नैनो तकनीकी का युग कहा जा रहा है। यह नैनो तकनीकी पदार्थों को बहुत छोटा-पतला, विज्ञान की भाषा में एक मिमी के 10 की घात ऋण नौ यानी एक अरबवें हिस्से के आकार के कणों की है। इसे इस तरह भी समझ सकते हैं ग्रेफाइट से बनी पेंसिल की भीतरी या खराब बैटरी की काली छड़ों के एक परमाणु में 10 हजार परतें होती हैं, जबकि इधर केवल पांच वर्ष पूर्व ही नोबल पुरस्कार प्राप्तकर्ता खोज नैनो पदार्थ ग्रेफीन के एक परमाणु में केवल एक ही परत होती है। यह परत इतनी महीन है कि इसकी दुनिया की किसी भी अन्य वस्तु से इतर त्रि-ज्यामितीय (3 Dimensional) होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है, और इसे द्वि-ज्यामितीय (2 Dimensional) कहा जाता है। ग्रेफीन में दुनिया की सर्वाधिक चालकता, तनन क्षमता, संकुचित करने और न टूटने की क्षमता युक्त परत भविष्य में कभी मैले न होने वाले व सामान्य वस्त्रों को भी बुलेट-प्रूफ जैकेट जैसी क्षमता प्रदान करने का गुण रखती है। इसके बने पेंट दीवारों पर एक बार लगाने पर मौसम और धूल व अन्य गंदगी से मुक्त होंगे। इसकी बनी नैनो चिप से इलेक्ट्रानिक उपकरणों की दुनिया और अधिक संकुचित होने जा रही है। कुमाऊं विवि में कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी के प्रयासों से स्थापित नैनो साइंस सेंटर में सेंटर के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू ने बताया कि कुमाऊं विवि के नैनो साइंस सेंटर में केवल आठ हजार रुपए की लागत से तैयार भट्टी में पुरानी बोतलों, टूटी प्लास्टिक की बाल्टी या दूध की खाली थैलियों आदि की करीब 20 किग्रा प्लास्टिक से कार्य शुरू किया गया है। इसमें खास नई तकनीकों से बोतलों को जलाकर सर्वप्रथम भट्टी में इकट्ठा होने वाले कार्बन से ग्रेफीन, फिर बचे पदार्थ से पेट्रोलियम उत्पाद और आखिर में सीमेंट-कंक्रीट के साथ मिलाकर निर्माण कार्यों में प्रयुक्त किये जाने वाले पदार्थ को तैयार किया जा रहा है, और इस प्रकार औसतन एक बोतल से करीब 90 रुपए की आय प्राप्त की जा रही है।

समय लाइव पर भी पढ़ें : प्लास्टिक की खाली बोतल 90 रुपये में बिकेगी!

प्लास्टिक की खाली बोतलों से बिजली बनाने का प्रोजेक्ट मंजूर

कुमाऊं विवि के नैनो साइंस सेंटर को हिमालयन पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल से मिला दो करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट

केंद्र में पहले ही प्लास्टिक की खाली बोतलों से बन रहे हैं नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन, पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं विविद्यालय का नैनो साइंस सेंटर प्लास्टिक की खाली बोतलों से बिजली उत्पादन के प्रोजेक्ट पर कार्य करने जा रहा है। इस अति महत्वाकांक्षी योजना के लिए कुमाऊँ विवि के नैनो साइंस सेंटर को भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के ‘नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज’ कार्यक्रम के तहत अल्मोड़ा जिले के कोसी कटारमल स्थित हिमालयन पर्यावरण संस्थान से करीब दो करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।उल्लेखनीय है कि इस केंद्र में पूर्व से ही प्लास्टिक की एक खाली बोतल से करीब 80 हजार रुपये प्रति किग्राके भाव मिलने वाले और अभी 2010 में ही खोजे गये कार्बन नैनो पदार्थ-ग्रेफीन (वैज्ञानिक नाम एसपी-2) के साथ ही वैकल्पिक ‘‘हाई वैल्यूड’ पेट्रोलियम ईधन एवं सीमेंट-कंक्रीट के साथ प्रयुक्त हो सकने वाले दो अन्य पदार्थ (एड्हीसिव्स) भी सफलतापूर्वक तैयार किये जा रहे हैं। इस प्रकार एक खाली बोतल से करीब 90 रुपये यानी 500-600 गुना तक अधिक कीमत के उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कुमाऊं विवि का नैनो साइंस सेंटर की स्थापना में राज्यसभा सांसद तरुण विजय का बड़ा योगदान है, जिन्होंने सांसद निधि के 50 लाख रुपये इस केंद्र को दिये थे।इस केंद्र ने शुरू में केवल आठ हजार रुपये की लागत से तैयार भट्टी में पुरानी बोतलों, टूटी प्लास्टिक की बाल्टी या दूध की खाली थैलियों आदि की करीब 20 किग्राप्लास्टिक से कार्य शुरू किया और खास नई तकनीकों से बोतलों को जलाकर सर्वप्रथम भट्टी में इकट्ठा होने वाले कार्बन से ग्रेफीन, फिर बचे पदार्थ से पेट्रोलियम उत्पाद और आखिर में सीमेंट-कंक्रीट के साथ मिलाकर निर्माण कायरे में प्रयुक्त हो सकने वाला पदार्थ तैयार किया। इस प्रकार केंद्र में औसतन एक बोतल से करीब 90 रुपये की आय प्राप्त की जा रही है।कुमाऊं विवि में कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने बताया कि नैनो साइंस सेंटर के एक करोड़ 97 लाख 88 हजार 800 रुपये के एक प्रोजेक्ट को हिमालय पर्यावरण संस्थान ने स्वीकृत कर दिया है। नैनो साइंस सेंटर के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से पुराने कामचलाऊ उपकरण की जगह बेहतर अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किया जाएगा तथा यहां कार्य करने वाले युवा वैज्ञानिक बेहतर सुविधाओं के साथ कार्य कर सकेंगे। प्रोजेक्ट में बेकार प्लास्टिक की बोतलों से बिजली का उत्पादन होगा, जिसका उपयोग ईधन के रूप में किया जा सकेगा। प्रयोग का धरातल पर लाभ मिलने लगे तो शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से न केवल निजात मिल सकती है, वरन मोटी आय भी प्राप्त की जा सकती है।

तरुण विजय ने पूरा किया कुमाऊं विवि में नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र का सपना, कुमाऊं विवि में स्थापित हुआ नैनो टेक्नोलॉजी साइंस सेंटर

Nano Science Technology Centre

-सांसद निधि के 38 लाख रुपए से हुई है स्थापना 
-जंतु, रसायन, जैव प्रोद्योगिकी विभाग करेंगे संचालित
-सूचना प्रोद्योगिकी, नैनो हर्बल एवं दवाइयों के क्षेत्र में होंगे नैनो तकनीकी पर शोध
नैनीताल। कुमाऊं विवि से जुड़े लोगों का रविवार (22.02.2015)  को जैसे एक सपना सच हो गया। विवि के कुलपति प्रो.एचएस धामी ने इसे अपना सपना सच होना ही बताया। विवि में आज नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (एनएसएनटी) का शुभारंभ राज्य सभा सांसद तरुण विजय के हाथों किया गया। श्री विजय ने ही इस केंद्र की पहल के लिए अपनी सांसद निधि से 50 लाख रुपए की धनराशि जारी की है। केंद्र की स्थापना कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर के रसायन विभाग में की गई है। इस प्रस्तावित केंद्र में कुमाऊं विवि के जंतु विज्ञान व जैव प्रोद्योगिकी सहित विज्ञान संकाय से संबंधित अन्य विभागों के साथ ही अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर आदि के सहयोग से कार्बनिक तत्व ग्रेफाइट से ग्रेफीन को अलग कर सस्ती सौर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए नैनो चिप प्रकार के इलेक्ट्रोड तैयार करने तथा दवाओं के लिए जर्मनीन नामक तत्व तैयार करने के कार्य किए जाएंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि इस केंद्र से नैनो इनर्जी, नैनो हर्बल और नैनो मेडिसिन के क्षेत्र में कार्य कर करोड़ों रुपए की आय भी पैदा की जाएगी, तथा युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी दिलाए जाएंगे।
रविवार को डीएसबी परिसर में राज्य सभा सांसद तरुण विजय ने कुलपति प्रो. एचएस धामी, केंद्र के समन्वयक डा. नंद गोपाल साहू, परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता एवं पूर्व छात्र महासंघ अध्यक्ष दीपक मेलकानी आदि के साथ दीप प्रज्वलित नैनो टेक्नोलॉजी सांइस संेटर का विधिवत शुभारंभ किया। कहा कि उत्तराखंड विश्व का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र बनने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके उलट, राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में यहां शिक्षा का निरंतर ह्रास हो रहा है। सरकार का ध्यान शिक्षा का व्यवसायीकरण करने पर अधिक है, जबकि उसे रोजगारपरक शिक्षा देने पर कार्य करना चाहिए था। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को अणु में ब्रह्मांड के दर्शन कराकर सर्वप्रथम ज्ञान प्राप्त कराने वाले जनपद के काकड़ीघाट से आगे अल्मोड़ में भगिनी निवेदिता और मायावती आश्रम सहित प्रदेश के विवेकानंद से जुड़े 11 स्थानों को जोड़कर विवेकानंद साधना पथ बनाए जाने की मांग भी रखी। बताया कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी विवेकानंद के भक्त थे। राजीव ने ही विवेकानंद के जन्म दिवस 12 जनवरी को युवा दिवस घोषित किया था, लेकिन मौजूदा कांग्रेस सरकार इस बारे में राजनीतिक नफा-नुकसान देख रही है।

इस अवसर पर केंद्र के समन्वयक डा. नंद गोपाल साहू ने बताया कि यह उत्तराखंड का अपनी तरह का पहला केंद्र है, जिसमें नैनो तकनीकी से संबंधित अत्याधुनिक उपकरण व मशीनें उपलब्ध होंगी। कुलपति प्रो. एचएस धामी एवं पूर्व छात्र महासंघ अध्यक्ष दीपक मेलकानी के प्रयासों से राज्य सभा सांसद तरुण विजय ने इसके लिए 50 लाख की धनराशि उपलब्ध करवाई है। सेंटर को पूरी तरह से तैयार होने में करीब एक वर्ष का समय लगेगा। इसके बाद यहां एमएससी एवं शोध उपाधि के पाठ्यक्रम प्रारंभ हो सकेंगे, तथा विद्यार्थियों को अब तक विदेशों में ही उपलब्ध इस तरह की शिक्षा को प्राप्त करने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उच्च गुणवत्ता की दवाएें तथा नैनो ऊर्जा के उत्पादन की राहें भी खुल सकेंगी। इस अवसर पर कुलपति प्रो. धामी ने विवि में कैंसर संस्थान की स्थापना किए जाने की इच्छा भी जताई। कार्यक्रम में प्रो. आशीष तिवारी, प्रो. गंगा बिष्ट एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे।

पहली बार किसी सांसद ने किसी कार्य को एकमुश्त दिए सांसद निधि के 50 लाख

नैनीताल। प्रदेश के राज्य सभा सांसद तरुण विजय ने गत 13 दिसंबर 2014 को कुमाऊं विवि के स्थापना दिवस कार्यक्रम के मौके पर कुलपति प्रो. एचएस धामी की मांग पर कुमाऊं विवि को अपनी वर्ष भर की पूरी सांसद निधि के 50 लाख रुपए देकर यहां नैनो टेक्नोलॉजी साइंस सेंटर बनाने की घोषणा की थी। तब किसी को इस पर सहसा विश्वास नहीं हुआ था। लेकिन केवल दो माह के बाद ही जिस तरह सांसद की यह घोषणा धरातल पर उतरने जा रही है, उससे हर कोई सांसद तरुण विजय की कार्यशैली का कायल हो गया है। बताया गया कि इस हेतु सांसद ने खास तौर पर अनुमति भी मांगी है, जिसके बाद ही पूरी धनराशि देना संभव हुआ। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. धामी ने केंद्र की स्थापना पर कहा कि यह उनके लिए अपना स्वप्न सच होने जैसा है।

नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इस वर्ष दुनिया में 891 अरब डॉलर तक अनुमानित बाजार होने और 1.2 करोड़ नए रोजगार उपलब्ध होने का है अनुमान

Nano Technology

नवीन जोशी, नैनीताल। नैनो टेक्नोलॉजी को भविश्य की तमाम समस्याओं का समाधान बताया जा रहा है। नेसकॉम की हालिया रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में नेनो टेक्नोलॉजी का अनुमानित बाजार 2015 तक 2014 के 180 अरब डॉलर से सीधे बढ़ कर 891 अरब डॉलर हो जाएगा, तथा दुनिया भर में 1.2 करोड़ नए रोजगार पैदा होंगे, जिसमें एक बड़ा हिस्सा भारत का बताया जा रहा है। अमेरिका, जापान और चीन के बाद भारत इस क्षेत्र में शोध पर सबसे अधिक निवेश करने वाला देश है। देश में फिलहाल 400 से अधिक कंपनियां इस प्रौद्योगिकी पर आधारित 1000 से अधिक वस्तुएं बाजार में उतार चुकी हैं, और 21वीं सदी के बारे में कहा जा रहा है कि वह नैनो सदी बनने जा रही है। इस प्रकार इस तकनीकी का केंद्र खोलकर एक तरह से कुमाऊं विवि ने भविष्य के साथ कदमताल शुरू कर दी है।
नैनो का अर्थ ऐसे पदार्थों से है जो एक मीटर के एक अरबवें हिस्से यानी अति सूक्ष्म आकार वाले तत्वों से बने होते हैं। इस प्रकार नैनो टेक्नोलॉजी अणुओं व परमाणुओं की इंजीनियरिंग है, जो भौतिकी, रसायन, बायो इन्फर्मेटिक्स व बायो टेक्नोलॉजी जैसे विषयों को आपस में जोड़ती है।

इस प्रौद्योगिकी से विनिर्माण, बायो साइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, क्योंकि इससे किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाया जा सकता है। छोटे आकार, बेहतर क्षमता और टिकाऊपन के कारण मेडिकल और बायो इंजीनियरिंग में नैनो टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है। अत्यधित सूक्ष्म कणों की वजह से इस तकनीकी के प्रयोग से इंजन में कम घर्षण होता है, जिससे मशीनों का जीवन बढ़ जाता है। साथ ही ईंधन की खपत भी कम होती है। दूसरे संदर्भों में नैनो विज्ञान अति सूक्ष्म मशीनें बनाने का विज्ञान है। ऐसी मशीनें इंसान के जिस्म में उतर कर, उसकी धमनियों में चल-फिर कर वहीं रोग का ऑपरेशन कर सकती हैं। इनकी मदद से मोबाइल फोन को मनुष्य के नाखून से भी छोटे आकार में बनाया जा सकता है। इस तकनीक से ऐसी धातु बन सकती है जो भार में तो स्टील से दस गुना हल्की हो, किंतु मजबूती में सौ गुना अधिक मजबूत हो। यानी ऐसी धातु के सिर्फ कुछ इंच के खंभों से पुल का बोझ सहा जा सकता है। इसकी मदद से धागे जैसे छोटे किंतु केमिकल या जैवीय हमलों को झेलने में सक्षम कपड़े व हथियार बनाने की परिकल्पना की जा रही है। इसके अलावा खाद पदार्थों को डिब्बा बंद करेने, कपडों, कीटाणुनाशकों और घरेलू यंत्रों, सौंदर्य प्रसाधन, पेंट, चिकित्सा व जैव तकनीक के क्षेत्र में भी नैनो तकनीकी के अनेक उपयोगों की संभावना हैै। अपनी इसी अति सूक्ष्म आकार के साथ बेजोड़ मजबूती और टिकाऊपन के कारण नैनो तकनीक के प्रयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिसिन, ऑटो, बायोसाइंस, पेट्रोलियम, फारेंसिक साइंस और रक्षा जैसे तमाम क्षेत्रों में असीम संभावनाएं बन रही हैं। कुमाऊं विवि में नैनो टेक्नोलॉजी साइंस सेंटर की स्थापना से खासकर नैनो इनर्जी, नैनो हर्बल और नैनो मेडिसिन के क्षेत्र में कार्य कर करोड़ों रुपए की आय पैदा करने की उम्मीद भी की जा रही है।

अभाविप ने मांगे थे 15 लाख, मिले 60 लाख

नैनीताल। ऐसा कम ही होता है कि देने वाला मांगने वाले की सोच से कहीं अधिक दे जाता है। ऐसा ही सांसद तरुण विजय ने भी किया। अभाविप की सोच रास सांसद से केवल विवेकानंद स्मारक, शौचालय और पुस्तकों के लिए पांच-पांच लाख रुपए मांगने तक सीमित थी, लेकिन सांसद ने नैनो टेक्नोलॉजी साइंस सेंटर के लिए 50 लाख और विवेकानंद स्मारक व शौचालय के लिए पांच-पांच मिलाकर कुल 60 लाख देने की घोषणा कर दी। इस पर भी उन्होंने यह कहने का बड़प्पन दिखाया कि अभाविप की मांग पर ही यह सब दे रहे हैं।

नैनो साइंस सेंटर को धन की दरकार
नैनीताल। वर्तमान में कुमाऊं विवि का नैनो साइंस सेंटर राज्य सभा सांसद तरुण विजय द्वारा अपने कोटे के पूरे 50 लाख रुपए देने से चल रहा है। लेकिन इस धनराशि के खर्च होने के बाद क्या होगा, इसकी चिंता अभी से शुरू हो गई है। केंद्र में वर्तमान में स्नातकोत्तर स्तर के 11 छात्र भी जुड़कर अतिमहत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने कहा कि नैनो साइंस सेंटर को आगे जरूरी धन उपलब्ध कराने की चिंता उन्हें है, और उन्होंने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं।

कुमाऊं विवि के पूर्व छात्र ने बना डाला रमन युनिवर्सल फोटो स्पेक्टोमीटर

Raman Photo Spectometer

-अब कुमाऊं विवि के साथ इसके बड़े स्तर पर निर्माण के लिए किया करार
-यह यंत्र नैनो कणों का कर सकता है अध्ययन
नैनीताल। कुमाऊं विवि के ही एक पूर्व छात्र डा. आरपी जोशी ने अपने सिगरौली मध्य प्रदेश निवासी साथी कुलदीप पटेल के साथ मिलकर देश में पहली बार स्वयं खोज कर पूरी तरह भारतीय तकनीकी से नैनो कणों को देखना और उनके गुणों की पहचान करने वाले ‘रमण प्रभाव’ पर आधारित यंत्र ‘रमण स्पैक्टो फोटो मीटर” का निर्माण कर लिया है। खास बात यह भी है कि डा. जोशी का यंत्र अब तक दुनिया में मौजूद अलग तकनीक के ऐसे यंत्रों (कीमत करीब डेढ़ करोड़) के मुकाबले करीब छठे-सातवें हिस्से यानी करीब 20-25 लाख रुपए की कीमत पर उपलब्ध है, और उनके बनाए यंत्र पिछले करीब सात माह में ही हार्वर्ड विवि, एनयूएस सिंगापुर सहित देश के कमोबेश सभी आईआईटी और कुमाऊं विवि में लग चुके हैं। आगे डा. जोशी इस यंत्र के बड़े स्तर पर निर्माण व पेटेंट आदि औपचारिकताओं के लिए कुमाऊं विवि से करार करने जा रहे है।
सोमवार (30.11.15) को कुमाऊं विवि में कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी की उपस्थिति में उनके पूर्व छात्र रहे डा. जोशी की कंपनी आरआई इंस्ट्रूमेंट्स एंड इन्नोवेसन इंडिया एवं कुमाऊं विवि के नैनो साइंस सेंटर के प्रभारी डा. नंद गोपाल साहू के बीच प्रारंभिक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। कुलपति प्रो. धामी ने उनके प्रयास को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया” की पहल का अनुकरणीय उदाहरण बताया तथा अपने विवि से जुड़ने के ‘घर वापसी” जैसे प्रयास की भी मुक्त कंठ से प्रशंशा की। डा. जोशी ने बताया कि उन्होंने एक यंत्र अमेरिका की मशहूर अंतरिक्ष संस्था नासा को भी भेंट किया है। आगे उनकी योजना एक वर्ष में ट्रांसमिशन इंलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप बनाने की भी है। उन्होंने यह भी कहा, अभी का दौर जो दिखता है-वह बिकता का है, किन्तु भविष्य जो नहीं दिखता (यानी न दिखने वाली नैनो तकनीकी का)-उसके बिकने का है।

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  27. वाह क्या खूब, मोबाइल फोन से बना डाली पूरी फिल्म
  28. दुनिया की नजरें फिर महा प्रयोग पर
  29. सूखाताल से आता है नैनी झील में 77 प्रतिशत पानी 
  30. बारिश का पानी बचाने पर उत्तराखंड देगा ‘वाटर बोनस
  31. कैंब्रिज विवि का दल जुटा सूखाताल झील के परीक्षण में
  32. ‘डायलिसिस’ से बाहर आ सकती है नैनी झील
  33. समय से पता लग जाएगा कैंसर, और हो सकेगा सस्ता इलाज
  34. ‘मीथेन सेंसर’ खोलेगा मंगल में जीवन की संभावनाओं का राज 
  35. दुनिया की ‘टीएमटी” में अपनी ‘टीएमटी” का ख्वाब भी बुन रहा है भारत
  36. सूर्य पर भी मनाई जा रही ‘बड़ी दिवाली’, उभरा पृथ्वी से 14 गुना बड़ा ‘सौर कलंक’
  37. बेहद खतरनाक हो सकता है किसी और का रक्त चढ़ाना
  38. अब बच्चों को लगेगा केवल एक “पेंटावैलेंट टीका”