300 करोड़ के एनएच-74 घोटाला मामले में आरोपित डीपी बोले-लुटाए नहीं 400 करोड़ बचाए, नाम बताऊं तो छाप नहीं पाएगा मीडिया

नैनीताल, 2 अप्रैल 2018। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में प्रमुख आरोपित बताए जा रहे नैनीताल जिला कारागार में बंद पूर्व विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह को रविवार शाम साढ़े सात बजे बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए लाया गया, और प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती कर लिया गया। जिला चिकित्सालय की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. तारा आर्या ने बताया कि उन्हें सीने व पेट में दर्द व उच्च रक्तचाप की समस्या बताई गयी। प्राथमिक जांच के उपरांत उनके पेट का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया और बाद में चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. एमएस दुग्ताल व हृदय रोग विशेषज्ञ ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दी। डा. पवार ने बताया कि उन्हें सिर दर्द, डी हाई टेन्सन व हाइपर टेंसन की समस्याएं भी हैं। उनकी हृदय रोग संबंधी ईसीजी आदि जांचें भी की गयी हैं। एनएच मुआवजा घोटाला में जेल में बंद होने के कारण उन्हें अनुमन्य सुरक्षा भी उपलब्ध करायी गयी है।

लुटाए नहीं सरकार के 400 करोड़ बचाए, नाम बता दूं तो छाप नहीं पाएगा मीडिया: डीपी
नैनीताल। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान एनएच मुआवजा घोटाले के आरोपित डीपी सिंह ने कहा कि उन्होंने सरकार के करीब 400 करोड़ रुपए बचाए हैं, इसके सबूत दे सकते हैं। इसके लिए पूरी व्यवस्था से लड़े हैं। मौके पर मौजूद उनकी पत्नी भी बोलीं, सरकार जीरो टॉलरेंस की बात कर रही है तो मंत्री व आईएएस अधिकारी क्यों नहीं जांच के दायरे में आ रहे हैं। इस मामले में खुली बहस कर सकते हैं। उलाहना दी कि यदि असली गुनाहगारों के नाम बताएंगे तो मीडिया छाप नहीं पाएगा। लेकिन वह मीडिया के बहुत कुरेदने के बावजूद खुद ही नाम बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। अलबत्ता सीबीआई जांच न होने पर भी सवाल उठाए। 

बिल्डर प्रिया शर्मा-सुधीर चावला से पूछताछ के लिए पुलिस ने मांगी 4 दिन की रिमांड,पर मिली सिर्फ 2 दिन की

नैनीताल, 22 मार्च 2018। प्रदेश के बहुचर्चित करीब 300 करोड़ के एनएच-74 घोटाले से ही संबंधित एक मामले में शामिल ‘एलाइड इंफ्रा प्लस एंड अदर्स’ की एमडी प्रिया शर्मा एवं उनके साझीदार सुधीर चावला की न्यायिक हिरासत की अवधि विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 14 दिन यानी 6 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के साथ ही दो दिन की पुलिस हिरासत भी मंजूर कर दी है। उल्लेखनीय है कि पुलिस ने अदालत से मामले के तथ्यों के अनावरण के लिए चार दिन की हिरासत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने दो दिन यानी 48 घंटे की पुलिस हिरासत ही मंजूर की। इससे पूर्व प्रिया शर्मा व सुधीर चावला को शनिवार को मामले की जांच कड़ी सुरक्षा में जिला न्यायालय लाया गया।

उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय से प्रिया शर्मा की पुलिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज होने, कोर्ट द्वारा गैरजमानती वारंट जारी होने के बावजूद उनके द्वारा न्यायालय में समर्पण नहीं करने के बाद पुलिस ने न्यायालय के आदेशों पर दोनों के घरों की कुर्की भी की गयी थी, और इसके बाद 20 मार्च को काशीपुर पुलिस ने दोनों को गुरुग्राम के सेक्टर 29 से एक मॉल के बाहर से गिरफ्तार किया। दोनों पर धोखाधड़ी, मनीट्रेल एवं बिजली चोरी के आरोपों में भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218, 219, 409, 465, 467, 463, 471, 474, 120 बी व 34 के तहत मुकदमा दर्ज हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच कर रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह ने 26 जनवरी 2018 को रुद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने एनएच घोटाले में शामिल काशीपुर के डाटा एंट्री आपरेटर जीशान के बयानों के अनुसार जीशान से कंपनी के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये संबंधित अधिकारी को कमीशन पहुंचाने के लिए लिये थे। हालांकि प्रिया शर्मा ने यह कहा कि यह रकम उन्होंने एक भूखंड के बयाने के तौर पर ली थी। एफआईआर की विवेचना सीओ काशीपुर राजेश भट्ट को सौंपी गई थी। सीओ ने विवेचना में पाया कि प्रिया जिस भूखंड का इकरारनामा करने की बात कह रही हैं वह उनके नाम ही नहीं था। जिस पर जमीन के स्वामी से पूछताछ की गई। जमीन के स्वामी ने प्रिया से उस जमीन का इकरारनामा करने की बात से इंकार कर दिया। उसके बाद से प्रिया शर्मा व सुधीर चावला फरार हो गए। इधर न्यायालय से जेल के लिए निकलते हुए प्रिया शर्मा ने आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि उन्हें फंसाया गया है। घोटाले के असली गुनाहगार कोई और हैं। अलबत्ता वे कौन हैं, इसका उन्होंने खुलासा नहीं किया।

एनएच 74 घोटाले में आरोपी एलाइड इंफ्रा प्लस की एमडी प्रिया शर्मा और उनके पार्टनर सुधीर चावला को पुलिस ने किया गिरफ्तार

बिल्डर प्रिया शर्मा

गुरुग्राम 20 मार्च 2018। एनएच 74 घोटाले में शामिल एलाइड इंफ्रा प्लस एंड अदर्स की एमडी प्रिया शर्मा एवं उनके पार्टनर सुधीर चावला को काशीपुर पुलिस ने गुरुग्राम के सेक्टर 29 से गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रिया शर्मा पर धोखाधड़ी, मनीट्रेल एवं बिजली चोरी के कई मुकदमे दर्ज हैं। लंबे समय से फरार चल रहीं प्रिया व सुधीर के घर की पुलिस कोर्ट के आदेश पर पुलिस कुर्की कर चुकी है। उधमसिंह नगर के एसएसपी डा. सदानंद शंकर राव दाते ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों को कल कोर्ट में पेश किया जाएगा।

लंबे समय से फरार चल रही प्रिया शर्मा एवं सुधीर चावला तक काशीपुर पुलिस सर्विलांस के जरिए पहुंच पाई। सूत्र बताते हैं कि दोनों ने अपने पुराने मोबाइल नंबरों को बंद कर दिया था तथा एक नए मोबाइल नंबर से वह कुछ खास लोगों से फोन पर बातचीत कर रहे थे। पुलिस ने लोकेशन खंगाली तो उनकी लोकेशन गुरुग्राम में मिली। जिस पर पुलिस गुरुग्राम पहुंच गई। बताया जाता है कि दोनों को गुरुग्राम के डीएलएफ मॉल से गिरफ्तार किया गया।

यहां बता दें प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के खिलाफ एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच कर रहे पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह ने 26 जनवरी को रुद्रपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने एनएच घोटाले में शामिल काशीपुर के डाटा एंट्री आपरेटर जीशान के बयानों के अनुसार जीशान से कंपनी के खाते में डेढ़ करोड़ रुपये संबंधित अधिकारी को कमीशन पहुंचाने के लिए लिये थे। हालांकि प्रिया शर्मा ने यह कहा कि यह रकम उन्होंने एक भूखंड के बयाने के तौर पर ली थी। एफआईआर की विवेचना सीओ काशीपुर राजेश भट्ट को सौंपी गई थी। सीओ ने विवेचना में पाया कि प्रिया जिस भूखंड का इकरारनामा करने की बात कह रही हैं वह उनके नाम ही नहीं था। जिस पर जमीन के स्वामी से पूछताछ की गई। जमीन के स्वामी ने प्रिया से उस जमीन का इकरारनामा करने की बात से इंकार कर दिया। उसके बाद से प्रिया शर्मा व सुधीर चावला फरार हो गए। इस दौरान प्रिया के खिलाफ अन्य मुकदमे भी दर्ज किए गए। कोर्ट ने उनका गैरजमानती वारंट जारी किया, मगर उन्होंने न्यायालय में समर्पण नहीं किया। इसके बाद पुलिस ने न्यायालय से कुर्की वारंट हासिल किया। दोनों के घरों की कुर्की भी पुलिस ने की, मगर दोनों का कुछ पता नहीं चला। कल ही कोर्ट से प्रिया शर्मा की पुलिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज हो गई थी।

बिल्डर प्रिया व चावला के खिलाफ ‘एनवीडब्लू’ जारी

नैनीताल, 28 फरवरी, 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायाल के बुधवार के आदेशों के क्रम में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने एनएच 74 भूमि घोटाले से सम्बंधित एक अन्य मामले में लिप्त बताई गयी आरोपित एलाइड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड की एमडी-बिल्डर प्रिया शर्मा व निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिये हैं। इससे पूर्व उच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद मामले के विवेचक सीओ काशीपुर राजेश भट्ट की ओर से न्यायालय में गैर जमानती वारंट जारी करने हेतु प्रार्थना पत्र देते हुए कहा गया कि रुद्रपुर में इनके आवासों पर दबिश देने के बावजूद ये नहीं मिले, और फरार चल रहे हैं। इस पर न्यायालय ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिये। उल्लेखनीय है कि इस मामले में एनएच 74 भूमि घोटाले के विवेचनाधिकारी स्वतंत्र कुमार ने एलाइड इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी की एमडी प्रिया शर्मा व निदेशक सुधीर चावला के खिलाफ भूमि मुआवजा घोटाले से सम्बंधित मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 व 471 के तहत बीती 26 जनवरी को रुद्रपुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ में मामले की आरोपी प्रिया शर्मा व सुधीर चावला केस में सुनवाई के दौरान कुछ दस्तावेजो में फर्जी हस्ताक्षर पाये गए, इस पर न्यायालय ने शपथकर्ता व याची के अधिवक्ता से इकरारनामे  की मूल कॉपी को कोर्ट में पेश करने को कहा। कहा-यदि मूल कॉपी पेश नही की जाती है तो रजिस्ट्रार जनरल इस सम्बन्ध में  जाँच करें और कोर्ट की ओर से मुकदमा दर्ज किया जाये। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने आरोपी सुधीर चावला को 28 फरवरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए थे परन्तु वे उपस्थित नही हुए। कोर्ट ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानते हुए उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने, और साथ में सुधीर चावला को 8 मार्च को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने, नही मिलने पर उनकी सम्पति जब्त करने के साथ ही कहा कि यदि एसआईटी चाहे तो प्रिया शर्मा को भी गिरफ्तार कर सकती है। साथ ही न्यायालय ने  याचिकर्ताओ की गिरफ्तारी से बचने सम्बंधित प्रार्थना पत्र को निरस्त कर अगली सुनवाई को 8 मार्च की तिथि नियत की।

₹ 211.85 करोड़ के एनएच मुआवजा मामले में आरोपित पीसीएस अधिकारी शुक्ला की जमानत अर्जी 2 हफ्ते लटकी

नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाले के एक और आरोपित पीसीएस अधिकारी अनिल शुक्ला ने नैनीताल उच्च न्यायालय में जमानत के लिये प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति वीके बिष्ठ की एकलपीठ ने पूरे मामले को सुनने के बाद राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 2 हफ्तों का समय दिया। इस प्रकार आरोपित की जमानत अर्जी पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टल गयी है। न्यायालय अब शुक्ला की जमानत याचिका पर 2 अप्रैल को सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि एनएच घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने अनिल शुक्ला को आरोपी बनाया है। शुक्ला पर आरोप है कि उसने पुरानी तिथियों पर जमीनों के कागज तैयार कर भूमि का मुआवजा कई गुना बढा दिया। निचली अदालत से याचिका खारिज होने के बाद अब अनिल शुक्ला ने उच्च न्यायालय की शरण ली है। इससे पूर्व एक अन्य पीसीएस अधिकारी डीपी शुक्ला भी उच्च न्यायालय में जमानत अर्जी दाखिल कर चुका है, उस पर भी न्यायालय से सरकार से जवाब मांगा हुआ है।

कांग्रेस की गर्दन तक पहुंची घोटाले की जांच

उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 के चौड़ीकरण में उजागर 211.85 करोड़ रुपये के भूमि मुआवजा घोटाले की जांच में किसानों व नौकरशाहों पर लग रहे आरोपों पर सवाल उठ रहे थे कि राजनेताओं तक जांच कब पहुंचेगी। इस मामले में बुधवार 21 फरवरी को विशेष जांच दल (एसआईटी) की दो सदस्यीय टीम ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से उनके आवास पर करीब एक घंटे तक पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक उपाध्याय से घोटाले की राशि का चुनाव प्रचार-प्रसार में खर्च के संबंध में पूछताछ हुई। इस प्रकार जांच राजनेताओं तक पहुँच गयी है। इसके बाद आगे शीघ्र ही एसआईटी तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत व मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के साथ ही कांग्रेस के बैंक खातों से जुड़े लोगों से भी पूछताछ कर सकती है।

विदित हो कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस घोटाले के संबंध में शुरू से ऐसे आरोप सामने आये थे कि भूमि मुआवजा के तौर पर बंटी राशि में से कांग्रेस पार्टी के चुनावी खाते में 5.54 करोड़ सहित अन्य खातों में भी बड़ी धनराशि जमा हुई थी, और इस का इस्तेमाल 2017 में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस पार्टी के द्वारा चुनाव प्रचार के लिए भी किया गया था। इसके लिए चुनाव से पहले कांग्रेस ने बैंक खाते खुलवाये थे। वर्ष 2017 विधानसभा चुनावों के समय उपाध्याय प्रदेश पार्टी की कमान संभाल रहे थे और एसआईटी ने उनसे इसी के मद्देनजर पूछताछ की। उपाध्याय ने एसआईटी की टीम द्वारा उनसे पूछताछ किये जाने की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने एसआईटी से कहा है कि वह उन्हें इस संबंध में कानूनी नोटिस दे, जिसके बाद वह सभी प्रश्नों का जवाब देने को तैयार हैं।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में मुख्य आरोपित डीपी पहुंचा हाईकोर्ट व निलंबित घूसखोर ‘आरके’ दूसरे मामले में पहुंचा जेल

नैनीताल। एनएच 74 मुआवजा घोटाले का मुख्य आरोपित तत्कालीन भूमि अध्यापित अधिकारी डीपी सिंह निचली अदालत से कई जमानत खारिज होने के बाद जमानत के लिए उत्तराखंड उच्च न्यायालय की शरण में पहुंच गया है। डीपी ने उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र लगाया है, जिस पर सोमवार को न्यायाधीश वीके बिष्ट की एकलपीठ में सुनवाई होगी। उल्लेखनीय है कि अब तक 211.85 करोड़ के इस घोटाले में 15 मार्च को ऊधमसिंह नगर जिले के एडीएम प्रताप सिंह साह की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले में एसआइटी की ओर से अब तक 12 लोगों के खिलाफ 5804 पन्नों के आरोप पत्र भी न्यायालय में दाखिल कर दिए गए हैं। मुख्य आरोपित डीपी सिंह ने 23 नवंबर को एसएसपी ऊधम सिंह नगर डॉ. सदानन्द दाते के दफ्तर में आत्मसमर्पण किया था। जिसके बाद 24 नवंबर को उसे न्यायालय के आदेश पर जेल भेजा गया था।

वहीं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत ने एनएच मुआवजा घोटाला मामले में गत दिनों निलंबित गदरपुर के रजिस्ट्रार कानूनगो हेमराज सिंह चौहान को एक अन्य मामले में घूसखोरी का दोष साबित होने पर साढ़े चार साल की जेल और 20 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुना दी है। आरके हेमराज पर आरोप है कि उसने गदरपुर निवासी ताहिर हुसैन को उसकी जमीन का सीलिंग प्रमाण पत्र करने की प्रक्रिया में जमीन को उसकी माता खूबी बेगम की ओर से पुत्रों के नाम हस्तांतरित करने की रिपोर्ट लगाने के ऐवज में दो हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। इसकी शिकायत ताहिर ने विजिलेंस से की, जिस पर 23 जून 2012 को विजिलेंस की टीम द्वारा कानूनगो हेमराज चौहान को दो हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। मामले में अभियोजन की ओर से आरोप साबित करने के लिए नौ जबकि बचाव पक्ष की ओर से तीन गवाह पेश किए गए। आरोपित को बीती 12 फरवरी को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की अदालत ने दोषी करार दिया था।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में सहायक चकबंदी अधिकारी गिरफ्तार, जेल भेजा

शुक्रवार को चकबंदी अधिकारी निरंजन को गिरफ्तार कर अदालत ले जाते एसआईटी कर्मी।

-चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन को न्यायालय ने पेशी के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा, एसआईटी ले सकती है रिमांड में
नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 मुआवजा घोटाला में शुक्रवार को एसआईटी ने एक और चकबंदी अधिकारी गणेश प्रसाद निरंजन को गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कुमकुम रानी की अदालत में पेश किया। जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद जेल भेज दिया गया। बताया गया है कि निरंजन को बृहस्पतिवार को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था। एसआईटी उसे जल्द ही आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर ले सकती है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बृहस्पतिवार को ही एसआईटी ने एक और चकबंदी अधिकारी अमर सिंह तथा पीसीएस अधिकारी नंदन सिंह नगन्यालय को गिरफ्तार विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद देर शाम जेल भेज दिया गया। अब सभी आरोपितों के मामले में अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी। निरंजन की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में तीन पीसीएस अधिकारियों सहित कुल 18 लोग गिरफ्तार किये जा चुके हैं।

एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में पीसीएस अधिकारी नगन्याल सहित दो गिरफ्तार
08 फ़रवरी 2018 को एसडीएम नगन्याल (लाल घेरे में) को न्यायालय लाते एसआईटी के जवान।

-चकबंदी अधिकारी अमर सिंह भी गिरफ्त में, न्यायालय ने पेशी के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा
नैनीताल/एसएनबी। प्रदेश के बहुचर्चित 211.85 करोड़ रुपए के एनएच-74 मुआवजा घोटाला में बृहस्पतिवार को एसआईटी ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मामले में वांछित पीसीएस अधिकारी नंदन सिंह नगन्याल एवं चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त कर ली। दोनों को विशेष प्रभारी न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेशों के बाद देर शाम जेल भेज दिया गया। उल्लेखनीय है कि इस प्रकार मामले में कुल 3 पीसीएस अधिकारियों सहित 17 लोग सींखचों के पीछे आ गये हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी।
बृहस्पतिवार को इस मामले की विवेचना कर रहे विशेष जांच दल यानी एसआईटी की टीम के सदस्य अपराह्न में एसडीएम रहे पीसीएस अधिकारी नगन्याल व चकबंदी अधिकारी अमर सिंह को गिरफ्तार कर विशेष प्रभारी न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अरविंद कुमार की अदालत में पेश करने के लिए लाई। इस दौरान मुख्यालय में मौजूद ऊधम सिंह नगर जिले के एसएसपी डा. सदानंद दाते ने बताया कि एफएसए की रिपोर्ट आने के बाद नगन्याल को रुद्रपुर से गिरफ्तार किया गया। नगन्याल पर आरोप है कि बाजपुर तहसील में एक ही दिन में पुरानी तिथियों पर जेडएलआरए अधिनियम की धारा 143 के तहत बहुत सारे मामलों में कृषि भूमि को अकृषक कर किसानों को करोड़ों रुपए का अतिरिक्त मुआवजा दिलाया गया था, और इसके ऐवज में अधिकारियों ने कमीशन भी लिया था। इनमें वह भी शामिल हैं। आगे अन्य कार्रवाइयां भी की जा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि नगन्याल के खिलाफ कुर्की वारंट भी न्यायालय से जारी होकर उसके घर पर चस्पा कर दिया गया था। बताया गया है कि इसके बाद नगन्याल बृहस्पतिवार को खुद ही जांच कर रही पंतनगर पुलिस चौकी चला गया था, जहां से पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पूरा मामला जानने को यह भी पढ़ें : एनएच-74 घोटाला मामले में 12 को सुनाये आरोप, तीन की रिमांड 14 दिन बढ़ी, जमानत अर्जी खारिज

-अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि तय
नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में हल्द्वानी व नैनीताल की जेलों में बंद 15 में से 12 आरोपितों को शनिवार को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें बताया कि उनके विरुद्ध जांच एजेंसी ने आरोप पत्र पेश कर दिये हैं, और अदालत उन पर लगे आरोपों का संज्ञान ले रही है। इस पर आरोपितों की ओर से उनके अधिवक्ता ने कहा कि उनके विरुद्ध जांच एजेंसी ने गलत साक्ष्य प्रस्तुत किये हैं, जबकि उनके ऊपर कोई आरोप नहीं बनते हैं, वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने आरोपों को पूरी तरह सही बताया। इसके साथ आरोपितों के विरुद्ध नियमित सुनवाई शुरू हो गयी, तथा अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 28 फरवरी नियत कर दी। बताया कि 28 को इन्हें मामले से संबंधित प्रपत्रों की नकलें दी जाएंगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्य आरोपित नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह व निलंबित एसडीएम भगत सिंह फोनिया, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पड़लिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भूरे लाल, पेशकार विकास चौहान, संग्रह अमीन अनिल कुमार, डाटा इंट्री ऑपरेटर अर्पण कुमार, स्टांप वेंडर जीशान, अनुसेवक राम समझ, राजस्व अहलमद संजय कुमार तथा काश्तकार ओम प्रकाश व चरण सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167, 218 व अन्य के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिये गये हैं।

तीन आरोपितों की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ी, जमानत अर्जी खारिज
नैनीताल। उपरोक्त आरोप पत्र पेश हुए 12 आरोपितों के अतिरिक्त इसी मामले में जेल में बंद तीन आरोपित एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह व पेशकार संत राम के खिलाफ विवेचना अभी जारी है। शनिवार को अदालत ने जेल से ही वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इनकी सुनवाई की, और इनकी न्यायिक हिरासत की अवधि को 14 दिन के लिए आगे बढ़ा दिया। इसके अलावा शनिवार को एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह के द्वारा न्यायालय में पेश जमानत प्रार्थना पत्र पर भी सुनवाई हुई। अदालत ने अभियोजन पक्ष के प्रबल विरोध के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी।

मामले से संबंधित सील युक्त सामग्री भी अदालत में पेश
नैनीताल। शनिवार को न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान एसआईटी द्वारा विवेचना के दौरान कब्जे में ली गयी सामग्री को भी सील-मोहर हालत में न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने सील का अवलोकन कर व सील को सही पाते हुए अपनी सील लगा कर कब्जे में ले लिया।

यह भी पढ़ें : 211.85 करोड़ के एनएच-74 घोटाला मामले में दो पीसीएस अधिकारियों सहित 12 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट

नैनीताल। प्रदेश के बहुचर्चित एनएच-74 मुआवजा घोटाला मामले में हल्द्वानी व नैनीताल की जेलों में बंद 15 में से 12 आरोपितों के विरुद्ध विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने शुक्रवार 2 फ़रवरी 2018 को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुमकुम रानी की अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिये हैं। गौरतलब है कि आरोप पत्र आरोपितों को जेल में 89 दिन होने पर दाखिल किये गये हैं, जबकि एक दिन बाद ही यानी 90 दिन के भीतर आरोपितों के विरुद्ध जांच एजेंसी के चार्जशीट न्यायालय में दाखिल नहीं करने की स्थिति में जमानत मिले बिना हाी आरोपितों के बॉंड के जरिये न्यायालय से बाहर आने का प्राविधान है। इस तरह जांच एजेंसी की देर से की गयी इस कार्रवाई से जेल में बंद आरोपितों की जेल से बाहर आने की उम्मीदों को झटका लगा है। इसके साथ ही अदालत ने शनिवार को सभी आरोपितों को न्यायालय में पेशी के लिए तलब कर लिया है।

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को तय अवधि के भीतर ही एसआईटी ने मामले के मुख्य आरोपित नैनीताल व ऊधमसिंह नगर जिले के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी, पीसीएस अधिकारी डीपी सिंह व भगत सिंह फोनिया, प्रभारी तहसीलदार मदन मोहन पड़लिया, सेवानिवृत्त प्रभारी तहसीलदार भूरे लाल, करन सिंह, विकास चौहान, अनिल कुमार, अनुपम कुमार, ओम प्रकाश, जीशान, राम समझ व संजय कुमार के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 167 व 218 के तहत आरोप पत्र दाखिल कर दिये हैं। जबकि जेल में बंद शेष बचे तीन आरोपित एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह व पेशकार संत राम के खिलाफ विवेचना जारी है। इनमें से छह आरोपित नैनीताल और नौ हल्द्वानी जेल में बंद हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जेल में बंद सभी आरोपितों की न्यायिक हिरासत की अवधि शनिवार को खत्म हो रही है, लिहाजा न्यायालय ने शनिवार को सभी आरोपितों को न्यायालय में पेश होने के लिए तलब कर लिया है। साथ ही एसडीएम अनिल शुक्ला, तहसीलदार मोहन सिंह के द्वारा न्यायालय में जमानत का प्रार्थना पत्र भी दिया गया है। इस पर भी शनिवार को न्यायालय में सुनवाई होगी।

211 करोड़ 85 लाख का घोटाला अब तक साबित
नैनीताल। जिला शासकीय अधिवक्ता शर्मा ने बताया कि अभी तक 211 करोड़ 85 लाख का घोटाला साबित हो चुका है, जबकि मामले में विवेचना अभी जारी है। वहीं कई आरोपित फरार चल रहे हैं, जबकि कई के खिलाफ वारंट जारी किये गये हैं, वे भी अभी एसआईटी के कब्जे में नहीं आये हैं।

एनएच-74 घोटाला एक नजर में
उल्लेखनीय है कि करीब 211.85 करोड़ रुपए के बताये जा रहे 17 वर्ष की उम्र के उत्तराखंड राज्य का यह सब से बड़ा घोटाला पिछली सरकार के दौर में ही प्रकाश में आ गया था। इस घोटाले के लिए सड़क किनारे की भूमि को योजनाबद्ध तरीके से साजिश के तहत कृषि भूमि से पिछली तिथियों में धारा 143 के तहत अकृषक करा कर राजकीय कोष से कई गुना अधिक मुआवजा किसानों को बांटा गया। पिछली सरकार भी इस मामले में तब निशाने पर आ गयी थी, जबकि घोटाले का पैंसा सत्तारूढ़ दल के खाते में जाने की बात प्रकाश में आई थी। बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त डी सेंथिल पांडियन के निर्देश पर हुई जांच के बाद एनएच मुआवजा घोटाला सार्वजनिक हुआ था, और मामले में एडीएम प्रताप शाह की ओर से 10 मार्च 2017 को थाना पंतनगर में इस बाबत मुकदमा दर्ज कराया गया था। किंतु तभी पांडियन के स्थानांतरण और फिर मुख्यमंत्री की सीबीआई जांच कराने की घोषणा पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के यह कहते हुए ‘वीटो’ लगाने पर कि इससे उत्तराखंड में कार्य कर रहे अधिकारियों का मनोबल गिरेगा और राज्य में अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण के कार्यों में भी शिथिलता आयेगी, सरकार को जांच अपनी एसआईटी से करानी पड़ी। लेकिन इसके बाद राज्य की एसआईटी इस मामले में अपेक्षित से भी बेहतर कार्य करती दिखाई दी है। मामले में अब तक मुख्य आरोपित बताये जा रहे तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह तथा एक अन्य विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सहित कुल छह पीसीएस अधिकारी निलंबित, और तीन गिरफ्तार तथा एक अन्य के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है, वहीं मामले में आठ गैर जमानती वारंट जारी हो चुके आरोपितों के गायब होने और इनमें से कम से कम एक के विदेश भागने की खबर भी है।

मामले के 8 आरोपित गायब, विदेश भागने की आशंका

  • रेड कॉर्नर व लुक आउट नोटिस कराने की कोशिश में पुलिस
  • जरूरत पड़ने पर इंटरपोल की मदद भी लेंगे, पर कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा: एसएसपी

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के बहुचर्चित, पिछली सरकार के दौर में हुए और नयी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहे राष्ट्रीय राजमार्ग-74 के चौड़ीकरण मामले में अवैधानिक तरीके से किसानों को अधिक मुआवजा देने के अब तक 200 करोड़ रुपए से अधिक के प्रकाश में आ चुके घोटाले में बड़ी खबर आ रही है। राज्य सरकार जहां इस मामले में अब तक मामले के मुख्य आरोपित बताये जा रहे तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह तथा एक अन्य विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी सहित कुल छह पीसीएस अधिकारी निलंबित, और इनमें से तीन को गिरफ्तार करने तथा एक अन्य के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी कर संतोष जता रही है, वहीं मामले में आठ गैर जमानती वारंट जारी हो चुके आरोपितों के गायब होने और इनमें से कम से कम एक के विदेश भागने की खबर है। उत्तराखंड पुलिस भी आठ के गायब होने की पुष्टि कर रही है, जबकि एक के विदेश भागने की खबर पर फिलहाल पुलिस पुष्ट सूचना न होने की बात कहते हुए बच रही है। बहरहाल, अभी देश में कहीं भूमिगत चल रहे आरोपित विदेश न भाग जाएं, इस हेतु उनकी धरपकड़ के लिए मामले की जांच कर रहे पुलिस के विशेष जांच दल-एसआईटी ने ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ और जिनके गैर जमानती वारंट जारी हो चुके हैं, उन्हें दबोचने के लिए ‘लुक आउट नोटिस’ जारी करने के प्रयास शुरू कर दिये गये हैं।
मामले की जांच में पल-पल की नजर रख रहे ऊधमसिंह नगर जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा. सदानंद दाते ने कहा कि आठ आरोपितों के विदेश भागने की आशंका है। ये गैर जमानती वारंट यानी एनवीडब्लू जारी होने के बाद यहां नहीं हैं। संभवतया अपने मूल पंजाब अथवा कहीं अन्य चले गये हैं। एक के विदेश भागने की सूचना पर उन्होंने कहा कि अभी यह पुष्ट नहीं है। जब तक पता नहीं चल जाता है कि वह कहां पर है, तब तक यह कहना सही नहीं होगा। विदेश न जाएं इसके लिए उनके ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ और जिनके एनवीडब्लू जारी हो चुके हैं, उनके ‘लुक आउट नोटिस’ जारी करने की कोशिश में हैं। लेकिन फिर भी यदि कोई विदेश चला गया हो तो उसकी गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से भी मदद ली जा सकती है। किंतु दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वहीं डीआईजी पूरन सिंह रावत ने कहा कि इस मामले में आरोपित सैकड़ों किसानों के सत्यापन कराये जा रहे हैं, एक संदिग्ध शायद के विदेश भागने की बात उनके संज्ञान में भी आई है, किंतु प्रामाणिक तौर पर भागने की जानकारी नहीं है।

 

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