कुमाऊं के लोक देवी-देवता

देवभूमि उत्तराखंड की दो में से से एक व पुरानी कमिश्नरी कुमाऊं अंचल की अपनी अनेक विशिष्टताएं हैं। उत्तर में उत्तुंग हिमाच्छादित नंदादेवी, नंदाकोट व त्रिशूल की सुरम्य पर्वत मालाएं, पूर्व में पशुपति नाथ व…

भारत के खिलाफ ‘बृहत्तर नेपाल’ के नाम पर…

[caption id="" align="alignnone" width="960"] फेसबुक पर 'ग्रेटर नेपाल' पेज से[/caption] -1815 की सुगौली की संधि को नकारते हुए पूरे उत्तराखंड सहित हिमांचल प्रदेश को बिलासपुर तक बताया जा रहा ‘ग्रेटर’ नेपाल का हिस्सा -भारत के…

बिन पटाखे, कुमाऊं में ‘च्यूड़ा बग्वाल’ के रूप…

-कुछ ही दशक पूर्व से हो रहा है पटाखों का प्रयोग -प्राचीन लोक कला ऐपण से होता है लक्ष्मी का स्वागत और डिगारा शैली में बनती है महालक्ष्मी नवीन जोशी, नैनीताल। वक्त के साथ हमारे…

कुमाउनी ऐपण: शक, हूण सभ्यताओं के साथ ही…

नवीन जोशी, नैनीताल। लोक कलाएं संबंधित क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ ही उस संस्कृति के उद्भव और विकास की प्रत्यक्षदर्शी भी होती हैं। उनकी विकास यात्रा में आने-जाने वाली अन्य संस्कृतियों के प्रभाव…

प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ सदृश रामायण-महाभारतकालीन द्रोणगिरि वैष्णवी…

हिमालय की गोद में बसे आध्यात्मिक महिमा से मंडित और नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दूनागिरि शक्तिपीठ का अपार महात्म्य है। जम्मू के प्रसिद्ध वैष्णो देवी शक्तिपीठ की तरह ही यहां भी वैष्णवी माता की…

1830 में मुरादाबाद से हुई कुमाउनी रामलीला की…

[caption id="attachment_3243" align="alignnone" width="300"] Kumaoni Ramlila[/caption] -कुमाऊं की रामलीला की है देश में अलग पहचान नवीन जोशी, नैनीताल। प्रदेश के कुमाऊं मंडल में होने वाली कुमाउनी रामलीला की अपनी मौलिकता, कलात्मकता, संगीत एवं राग-रागिनियों में…

फोटोग्राफी की पूरी कहानी

फोटोग्राफी या छायाचित्रण संचार का ऐसा एकमात्र माध्यम है जिसमें भाषा की आवश्यकता नहीं होती है। यह बिना शाब्दिक भाषा के अपनी बात पहुंचाने की कला है। इसलिए शायद ठीक ही कहा जाता है ‘ए…

उत्तराखंड : सर्वप्रथम 1897 में उठी थी अलग…

[embed]https://youtu.be/C3AxtuHhpSY[/embed] [caption id="attachment_5599" align="alignnone" width="300"] दो अक्टूबर 1994 को दिल्ली रैली में उमड़ा राज्य आन्दोलनकारियों का रेला, काशी सिंह ऐरी (लाल घेरे में)[/caption] -एक शताब्दी से अधिक लम्बे संघर्ष से नसीब हुआ उत्तराखंड राज्य -सर्वप्रथम…

पुराने चित्रों में नैनीताल की चिर युवा अद्वितीय…

18 नवम्बर : आज के दिन से ही 'बनना और बिगड़ना' शुरू हुआ था नैनीताल [embed]https://youtu.be/_7ifDFqQ2YY[/embed] -आज के ही दिन यानी 18 नवंबर 1841 को अंग्रेज शराब व्यवसायी पीटर बैरन के यहां पड़े थे कदम…

इतिहास के झरोखे से कुछ महान उत्तराखंडियों के…

[caption id="attachment_5857" align="alignleft" width="240"] टिंचरी माई[/caption] वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली – पेशावर कांड के नायक इन्द्र मणि बडोनी: उत्तराखंड का गाँधी देवकी नंदन पांडे: कुमाऊँ का गाँधी अनुसुया प्रसाद बहुगुणा: गढ़ केसरी बद्री दत्त पांडे:…

नैनीताल लवर्स के लिए : नैनीताल क्या नहीं,…

लिंक क्लिक कर संबंधित पेज पर जाएं: नैनीताल से संबंधित आलेख  नैनीताल की पुरानी तस्वीरों का समग्र विश्व प्रसिद्ध नैनी झील शिक्षा नगरी के रूप में नैनीताल नैनीताल के प्रतीक पर्यटन नगरी के रूप में…

नैनीताल में ऐसे मनाया गया था 15 अगस्त…

अब वतन आजाद है................................. रिमझिम वर्षा के बीच हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था माल रोड पर पेड़ों पर भी चढ़े थे लोग आजादी की नई-नवेली सांसें लेने.................. नवीन जोशी, नैनीताल। अंग्रेजों के द्वारा…

कला की नगरी नैनीताल में नाटक परंपरा का…

कला की नगरी कही जाने वाली सरोवरनगरी नैनीताल में नाटक परम्परा का इतिहास 1895 में ग्रीष्मकालीन राजधानी व बंगाल आर्मी का मुख्यालय बनने के साथ ही बताया जाता है। कहा जाता है कि 1920 तक…