/मोदी राज में कमाल-शीर्ष पदों पर उत्तराखंड के लाल, खरोला होंगे एयर इंडिया के नए सीएमडी

मोदी राज में कमाल-शीर्ष पदों पर उत्तराखंड के लाल, खरोला होंगे एयर इंडिया के नए सीएमडी

उत्तराखंड की प्रतिभाओं का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश के शीर्ष पदों पर पहुंचने का सिलसिला जारी है। थल सेनाध्यक्ष विपिन रावत, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रॉ चीफ अनिल धस्माना और सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी के बाद उत्तराखण्ड के एक और लाल-भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1985 बैच के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप सिंह खरोला को सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया का नया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है।

कर्नाटक काडर के अधिकारी खरोला कंपनी में पिछले तीन महीने से अंतरिम चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के तौर पर काम कर रहे राजीव बंसल का स्थान लेंगे। बता दें कि सरकार ने एयर इंडिया के प्रमुख (उत्तराखंड के ही) अश्विनी लोहनी को इस पद से हटाकर रेलवे बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त किया गया था, इसके बाद उनकी जगह पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजीव बंसल को तीन महीने के लिये एयर इंडिया का चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सीएमडी बनाया गया था। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि खरोला को एयर इंडिया का नया चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है। अभी वह बेंगलुरु मेट्रो रेल निगम के प्रबंध निदेशक हैं। एयर इंडिया में शीर्ष पद पर यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जबकि सरकार राष्ट्रीय विमानन कंपनी के रणनीतिक विनिवेश के तौर तरीकों को अंतिम रूप दे रही है।
प्रदीप खरोला देहरादून के रहने वाले हैं। उनका जन्म 1961 में देहरादून में हुआ। उनके पिता बीबीएस खरोला आर्मी से ऑर्नरी लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से रिटायर हुए। उन्होंने कैंब्रियन हॉल स्कूल से कुछ सालों तक पढ़ाई करने के बाद हायर सेकेंडरी महू से किया, और वर्ष 1977 में इंदौर से बीटेक व दिल्ली से एमटेक किया। इसी दौरान उनका अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ।

एडमिरल जोशी ने आगे बढ़ाई बीडी पांडे व विनोद पांडे की परम्परा

-मानेकशा, सोमनाथ शर्मा की परंपरा के वाहक भी रहे जोशी
नवीन जोशी, नैनीताल। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के मनोनीत राज्यपाल डीके जोशी ने इससे पूर्व देश के 21वें नौ सेनाध्यक्ष बनने के दौरान देश के पहले सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल एसएचएफजे मानेकशा, प्रथम परमवीर चक्र विजेता सोमनाथ शर्मा, पूर्व सेनाध्यक्ष डीएन शर्मा, ले. जनरल एसएन शर्मा, सैय्यद अता हसन और विक्रमजीत सिंह रावत की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए नैनीताल का नाम रोशन किया था। ये सभी सैन्य अधिकारी नैनीताल से किसी न किसी रूप में ताल्लुक रखते हैं। वहीं एडमिरल जोशी की सफलता उनसे अधिक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाती है, क्योंकि वे सरकारी स्कूल से पढ़े हैं, जबकि उनके अन्य पूर्व नगर के शेरवुड, सेंट जोसफ कॉलेज व अन्य अंग्रेजी स्कूलों से पढ़े थे। जोशी की सफलता ने इस बात को भी पुख्ता कर दिया है कि व्यक्ति में पढ़ने और अपने लक्ष्य को पाने की ललक व लक्ष्य के प्रति स्पष्ट सोच हो तो फिर शिक्षा का माध्यम कोई मायने नहीं रखता। ज्ञात हो कि जोशी ने एक दुर्घटना होने पर नैतिकता के आधार पर देश के थल सेनाध्यक्ष पद से समय पूर्व इस्तीफा देने का बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया था।

देश के पूर्व नौ सेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के राज्यपाल बनने जा रहे हैं। राज्यपाल बनते हुए वे उत्तराखंड से राज्यपाल बने पूर्व आईसीएस अधिकारी भैरव दत्त पांडे व विनोद पांडे के बाद तीसरे व्यक्ति हैं। यह संयोग है कि तीनों ही व्यक्ति कुमाऊं व अल्मोड़ा जनपद के निवासी रहे हैं। इनके अतिरिक्त उत्तराखंड के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एमएम लखेड़ा भी मिजोरम के राज्यपाल रहे हैं। एडमिरल जोशी मूलत: अल्मोड़ा जनपद के दौलाघट के निकट ग्राम लक्ष्मीपुर के निवासी हैं। उनके पिता हीराबल्लभ जोशी उस दौर में कुमाऊं के मुख्य वन संरक्षक के पद पर थे। पिता की विभिन्न पदों व स्थानों पर तैनाती के साथ देवेंद्र की प्राथमिक शिक्षा पीलीभीत व लखनऊ में हुई। लेकिन 1969 में सातवीं कक्षा से उन्होंने नैनीताल के राइंका में प्रवेश लिया और यहीं से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया, जो वर्तमान में यहीं के इंटरमीडिएट में छात्र रहे करगिल शहीद महावीर पुरस्कार प्राप्त मेजर राजेश अधिकारी के नाम पर जाना जाता है। तब जीआईसी की हाईस्कूल तक की कक्षाएं ही वर्तमान गोरखा लाइन स्थित परिसर में जबकि इंटर की कक्षाएं वर्तमान डीएसबी परिसर (तत्कालीन डिग्री कालेज) में चलती थीं। डिग्री कालेज के प्रधानाचार्य ही जीआईसी की इंटर कक्षाओं का संचालन भी देखते थे। इस प्रकार जोशी सातवीं से 12वीं कक्षा तक नैनीताल के राजकीय इंटर कालेज के छात्र रहे और उनका शिक्षानगरी कहे जाने वाले नैनीताल से गहरा संबंध रहा है। देवेंद्र हमेशा अपनी कक्षा में प्रथम आते थे और शुरू से मेधावी थे। बेहद सरल स्वभाव के वाइस एडमिरल जोशी अक्सर नैनीताल आते रहते हैं। उनके साले हरीश चंद्र पांडे यहां हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं जबकि साली नीमा बिष्ट भवाली की नगर पालिका अध्यक्ष हैं। इधर 28 फरवरी 2015 को वे राइंका में पूर्व छात्रों के मिलन समारोह में भाग लेने के लिए नैनीताल आए थे। इस दौरान वे अपने साले श्री पांडे के घर ही सादगी से रहे तथा डीएसबी परिसर के वर्तमान वनस्पति विज्ञान विभाग के बगल के उस कमरे को देखने भी गए, जहां उन्होंने जीआईसी के रूप में इंटर की शिक्षा ग्रहण की थी। बातचीत में उन्होंने कहा कि जीआईसी से उन्हें शिक्षा के साथ ही सादगी का गुण भी प्राप्त हुआ।

मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में राजनीति पर प्रशासनिक दक्षता पड़ी भारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में आखिरी अथवा द्वितीय आखिरी बताये जा रहे विस्तार में राजनीति पर प्रशासनिक दक्षता पहली बार भारी पड़ती दिखाई दी है। मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री मोदी का 4-पी (पैशन, प्रोफिशिएंसी, प्रोफेशनलिज्म तथा पॉलिटिकल अक्यूमन फॉर प्रोग्रेस) यानी अपने कार्य का जुनून, प्रवीणता तथा प्रगति के लिये व्यवसायिक व राजनीतिक कौशल पर फोकस बताया गया है। मंत्रिमंडल एक आईएफएस-हरदीप सिंह पुरी (संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व राजदूत) व एक आईएएस अल्फोंस कन्नाथनम को बिना संसद के किसी भी सदन का सदस्य होने के बावजूद सदस्य बनाया गया है। वहीं नये बनाये गये नौ मंत्रियों में से चार पूर्व आईएफएस, आईएएस व आईपीएस अधिकारी (मुंबई, पुणे व नागपुर के पुलिस कमिश्नर रहे डा. सत्यपाल सिंह, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह) भी शामिल हैं।

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इनके अलावा चार स्वतंत्र प्रभार व राज्य मंत्रियों पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट पीयूष गोयल, लंदन के एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग सोसायटी की सदस्य निर्मला सीतारमण, मोदी की उज्जवला योजना में उल्लेखनीय कार्य करने वाले धर्मेंद्र प्रधान व मुख्तार अब्बास नकवी को उनकी बेहतर कार्य दक्षता के आधार पर पदोन्नति देकर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि बालश्रम में पीएचडी धारक डा. वीरेंद्र कुमार, शिव प्रताप शुक्ल, अनंत कुमार हेगड़े, अश्विनी कुमार चौबे व गजेंद्र शेखावत को भी राज्य मंत्री बनाया गया है। इस प्रकार मोदी मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 76 हो गयी है, तथा अधिकतम संख्या 81 की पूर्ति के लिये पांच पद अभी भी रिक्त हैं। माना जा रहा है कि आगे एनडीए के सहयोगी दलों जनता दल यूनाइटेड और अन्नाद्रमुक को यह सीटें मिल सकती हैं।

अश्विनी लोहनी को बनाया गया रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैन

​ashwani lohani will be new chief of railway board​

पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, फिर सेनाध्यक्ष, फिर रॉ प्रमुख और फिर डीजीएमओ के बाद अब देश के एक और जिम्मेदार पद पर उत्तराखंडी की तैनाती हो गयी है। अल्मोड़ा के नजदीक ताकुला में स्थित सात गांव के समूह सतराली के मूल निवासी अश्विनी लोहनी को रेलवे बोर्ड का नया चेयरमैन बनाया गया है। मूलतः रेलवे के ही अधिकारी और अब तक एयर इंडिया के चेयरमैन पद पर कार्यरत रहे लोहनी अपने दायित्वों में हमेशा ही करामात कर डालने के कारण दोस्तों के बीच ‘मिस्टर टर्नअराउंड’ के नाम से चर्चित रहे हैं। उनके नाम मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल व इलेक्ट्रानिक्स यानी सभी चार ट्रेड की इंजीनियरिंग डिग्रियां हासिल होने के कारण ‘लिम्का बुक रिकॉर्ड’ भी दर्ज है। साथ ही उनके नाम 1998 में ‘फेयरी क्वीन’ का परिचालन फिर से शुरु करा कर गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने, नेशनल रेल म्यूजीयम के डारेक्टर के तौर पर काम करते हुए 1999 में दार्जीलिंग रेलवे का नाम विश्व धरोहर की श्रेणी में दर्ज कराने और आईटीडीसी के सीएमडी के पद पर रहने के दौरान 2002 में बोधगया के बोधि मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल कराने जैसी उपलब्धियां भी दर्ज हैं। यूपीए सरकार के दौर में जब कामनवेल्थ घोटाले में लगभग सभी केंद्रीय विभागों पर कैग ने सवाल उठाए थे, तब रेलवे में डिविजनल मैनेजर रहे लोहनी ही इकलौते अफसर थे, कैग ने जिनकी पीठ थपथपाई थी।

हालांकि पहाड़वासियों की यह भी नियति अथवा पीड़ा है कि ‘पलायन’ के लिए अभिशप्त यहां के प्रवासी बाहर तो बहुत नाम कमाते हैं, पर अपने घर की और लौटने, वहां के लिए कुछ करना दूर, नाम भी लेने में संकोच करते हैं। जबकि पहाड़ के लोग उन पर  गर्व करने का लोभ संवरण नहीं कर पाते। बहरहाल, शाहखर्ची रोकने में पहले खुद की नजीर पेश करने वाले लोहनी इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन यानी आईटीडीसी के मुखिया भी रहे हैं। उन्हें घाटे में चल रहे आईटीडीसी को मुनाफे में पहुंचाने का श्रेय भी दिया जाता है। रेलवे में डिविजनल मैनेजर रहते हुए लोहनी ने नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीमन स्टेशन पर व्यापक सुधार कार्य किए। इस उपलव्ब्धि पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें अपने खस्ताहाल मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम का प्रबंध निदेशक बना कर इसे उबारने का जिम्मा सोंपा। इस कार्य में लोहनी शिवराज की अपेक्षाओं से कहीं ज्यादा खरे उतरे। गलत नीतियों से मरने की कगार पर पहुंच चुका पर्यटन विकास निगम पूरी तरह जिंदा हो गया। इसकी खबर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कानों तक पहुंची, तो उन्होंने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए इंडियन रेलवे इंजीनियरिंग सर्विस के इस अफसर को यूपीए राज में कंगाल हुए एयर इंडिया को संकट से उबारने की जिम्मेदारी एयर इंडिया का सीएमडी बना कर सोंपी। आमतौर पर एयर इंडिया का मुखिया यानी सीएमडी किसी सीनियर आईएएस को ही बनाया जाता रहा है। भारतीय रेलवे इंजीनियरिंग सेवा के 1980 बैच के अफसर अश्वनी को हवाई सेवाओं का कोई अनुभव भी नहीं था। लेकिन उनमें ईमानदारी कूट-कूट कर भरी थी। इसी बल पर उन्होंने इस जिम्मेदारी को चुनौती के रूप में लेते हुए दो हजार करोड़ से ज्यादा के घाटे में चल रही इस सरकारी नागर विमान सेवा कंपनी को 105 करोड़ के मुनाफे में पहुंचाकर जहां सबको हैरान किया वहीं प्रधानमंत्री मोदी का भरोसा जीतने में सफल रहे। इस दौरान वेे 23 मार्च को सत्तारूढ़ भाजपा की सहयोगी शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ पर एक कर्मी से मारपीट करने पर 15 दिन का प्रतिबंध लगाने जैसा फैसला लेने के कारण भी चर्चा में रहे थे। दिलचस्प बात है कि एयर इंडिया का सीएमडी रहते भी वे एयर इंडिया के आलीशान बंगला छोड़कर सरदार पटेल मार्ग स्थित रेलवे कालोनी के मकान में ही निवास करते रहे। उन्हांेने अपने सामने की टेबल पर रिचर्ड बैंसन की लाइन फ्रेम कराकर रखी है-क्लाइंड डोंट कम फर्स्ट, इम्प्लाइज कम फर्स्ट। आज जबकि वे अपने मूल विभाग रेलवे में आ गये हैं, तो उम्मीद करनी होगी कि अपनी अव्यवस्थाओं से इन दिनों दुर्भाग्यशाली नजर आ रही रेलवे को उबारने में भी वे सफल होंगे।

लोहनी से पहले 1954 में कुमाऊँ के घनानंद पाण्डे भी रह चुके हैं रेलवे बोर्ड के चेयरमैन
घनानंद पाण्डे चम्पानौला अल्मोड़ा के रहने वाले थे, उनके छोटे भाई श्री भैरव दत्त पाण्डे (आइसीएस अधिकारी) कैबिनेट सेक्रेटरी और बंगाल व पंजाब के राज्यपाल रहे । श्री घनानंद पाण्डे थौम्पसन इन्जीनियरिंग कालेज (जो बाद में रुड़की यूनिवर्सिटी और आइआइटी रुड़की कहलाई) के प्रथम बैच के सिविल इन्जीनियरिंग डिग्रीधारक थे । उनको बिहार में गंगा नदी पर मौकामा रेलवे पुल बनाने का श्रेय दिया जाता है, क्योंकि इस पुल को अंग्रेज इन्जीनियर भी नही बना पाये थे । यह पुल उनकी तकनीकी योग्यता का उदाहरण माना जाता है । वे रेलवे बोर्ड के चैयरमैन पद के बाद स्टील अथौरिटी आफ इण्डिया के चेयरमैन भी रहे । उको पद्मविभूषण से भी विभूषित किया गया ।

उत्तराखंडी ‘बांडों’ के कन्धों पर देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट और आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना

-देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के हैं

-अब चाहें तो ये अधिकारी स्थानीय लोकभाषाओं में भी ‘कोडवर्ड’ की तरह बात करके दुश्मन को दाल सकते हैं मुश्किल में 

नवीन जोशी, नैनीताल। देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिये हमेशा से अपना सर्वाेच्च बलिदान देने के लिये प्रसिद्ध ‘देश के मस्तक’ कहे जाने वाले छोटे से राज्य उत्तराखंड के लोग हालाँकि हमेशा से अनेक क्षेत्रों में शीर्ष पदों पर रहते रहे हैं, किन्तु इधर उत्तराखंड वासियों के लिए गर्व से ‘सर ऊंचा’ और ‘सीना चौड़ा’ होने के अनेक कारण एक साथ आ गए हैं। उत्तराखंड के तीन सपूतों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में एकमुश्त देश के तीन सर्वाेच्च पदों के जरिये देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सोंपी गयी है। देश के ‘जेम्स बांड’ कहे जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बाद अब लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट और आईपीएस अधिकारी अनिल धस्माना ‘टीम मोदी’ में भारतीय सेना के शीर्ष पदों पर नियुक्त किये गये हैं। इससे उत्तराखंड में हर्ष होना स्वाभाविक ही है।
लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को उनसे दो वरिष्ठ अधिकारियों पर वरीयता देते हुए देश का थल सेना प्रमुख बनाने की घोषणा हुई है। वे आगामी 31 दिसंबर को दोपहर बाद इस पद को ग्रहण करेंगे। मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के द्वारीखाल विकास खंड के ग्राम सैणा निवासी लेफ्टिनेंट जनरल रावत को आईएमए देहरादून से ‘स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ सम्मान मिला था। उल्लेखनीय है कि उन्होंने यह पद अपने पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत से ‘दो कदम आगे’ बढ़ते हुए प्राप्त किया है, जो भारतीय सेना से उप थल सेनाध्यक्ष के पद से रिटायर हुए थे। यह संयोग ही है कि उनसे पूर्व उन्हीं के नाम के लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन चंद्र जोशी को ही उत्तराखंड से भारतीय थल सेना अध्यक्ष पद तक पहुंचने का गौरव हासिल हुआ था। इनके अलावा उत्तराखंड के एडमिरल डीके जोशी देश के नौ सेना प्रमुख बने थे।

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वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की तरह ही एक और ‘बांड’ कहे जाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट को डीजीएमओ यानी डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन पद पर नियुक्ति दी गई है। मेजर जनरल के रूप में अति विशिष्ट सेवा मैडल प्राप्त, उत्तराखंड के टिहरी जिले के कीर्तिनगर विकास खंड के ग्राम खतवाड़ निवासी भट्ट की पाक अधिकृत कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा पांच जगहों पर सर्जिकल स्ट्राइक यानी लक्षित हमले किये जाने में उल्लेखनीय भूमिका रही है। वर्तमान में उनका परिवार मसूरी में रहता है। उनके पिता सत्यप्रसाद भट्ट ने भी फौज में रह देश की सेवा की है।

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इनके अलावा केन्द्र सरकार ने उत्तराखंड के एक और लाल अनिल धस्माना को रॉ यानी रिसर्च एंड एनैलिसिस विंग के प्रमुख की जिम्मेदारी सोंपी है। उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार के निकट तोली गांव निवासी धस्माना अब तक रॉ में नंबर दो की हैसियत रखते हैं, और उन्हें बलूचिस्तान और आतंकवाद निरोधी अभियानों का लंबा अनुभव है। अपने गांव से पढ़ाई करने वाले मध्य प्रदेश कैडर के 1981 बैच के आईपीएस अधिकारी धस्माना की पहचान भी एक ‘बांड’ के रूप में रही है। वे अजीत डोभाल के करीबी व विश्वासपात्र भी हैं। माना जा रहा है कि अब इन दोनों की जुगलबंदी फिर कोई नया गुल खिला सकती है। उन्हें पाकिस्तान और अफगानिस्तानाक के साथ ही लंदन सार्क में काम करने का भी लंबा अनुभव है। बताया जाता है कि अपनी पहली नियुक्ति में ही एक दबंग एसपी के रूप में उन्होंने माफिया राज के लिये लिये कुख्यात मध्य प्रदेश के इंदौर की बंबई बजार में, जहां पुलिस घुस भी नहीं पाती थी, केवल 20 मिनट की कार्रवाई कर पुलिस का इकबाल बुलंद किया था, और बंबई बाजार को एक ‘पिकनिक स्पॉट’ में तब्दील कर दिया।
इस बारे में करगिल युद्ध के दौरान डिप्टी डीजीएमओ व भारतीय सेना के प्रवक्ता रहे लेफ्टिनेंट जनरल मोहन सिंह भंडारी ने कहा कि उत्तराखंड के इन तीन सैन्य अधिकारियों के शीर्ष पर पहुंचने से उत्तराखंड का मान बढ़ा है, साथ ही हर उत्तराखंडी का सिर गर्व से ऊंचा और सीना चौड़ा हो गया है। इससे साबित हो गया है कि उत्तराखंड देश का मस्तक और मस्तिष्क है। 13 लाख सैनिकों वाली विश्व की सबसे बड़ी भारतीय सेना के बल पर ही देश सुरक्षित है, और उत्तराखंड के वीरों के हाथों में देश की सेना के शीर्ष पद आ रहे हैं, इससे हम कह सकते हैं कि देश की सीमाएं और राष्ट्रीय सुरक्षा सुरक्षित हाथों में हैं।

अब रक्षा मंत्रालय के वार रूम (गोपनीय कक्ष जहां योजना बनती है) मे high level meetings काल्पनिक तौर पर गढवाली मे ऐसे हो सकती हैं :

डीजीएमओ भट्ट : भैजी ब्याली उ कमिना नवाज शरीफ’न 25 आदिम भेजया छया बोडर पर, आतंकवाद फैलाण का वास्ता।

एनएसए डोभाल  : यार भुला तू भी न, चुप किलै रै तू ये तरफा बे गोली बारूद चलाण छा तुमून पिछनै बे लात्ती की यन चोट मान्न छै कि वैकु बुबा याद रखदु।

रॉ के प्रमुख धस्माना : अरे भैजी हमारू आदिम बताणू छ कराचि बटिन, कि यों सुंगरूं कु बडू ट्रैनिग सैंटर खोलयू च बोडर पार, बडू हमला कन चाणा च मिल्यौम्यरा खूब जासूस लगाया छन वख, मुशर्रफ का  मामाक्वोट मा भी 9 आदिम भेज्यां छन म्येरा ।

थल सेनाध्यक्ष जनरल रावत : भैजि अब मि भि ऐ ग्यौं, कारगिल अर 71 मा यन भंजोड्या छया मिन इ पाकिस्तानी कि यों ते अपड़ु बुबा याद एगि छो…

एनएसए डोभाल : अर सुण भुला रावत, पाकिस्तान मा एक बटैलियन गढवाल रैफल का खुफिया जवान भेजी कि वख नरसिंग भैरों भी थोपी द्येण, पूरी पाकिस्तान फौज पर छौल लगे द्यौण । अर ऊं जु दाणी दाणी 3 -3 फुट का चीनी छन ऊं का भी घुण्डा फोड़ द्येण अबेरी दौं हमून।

रक्षा मंत्री परिकर जी : ??? 🤔

प्रधानमंत्री मोदी जी : 😯 खंडूरी जी, आ सू बोले छे ??

भारत की रक्षा समिति के अध्यक्ष खंडूरी जी : भुला इन च, तुम लोग अपडू काम करा, मौक़ा मिल्यू च देश सेवा करा, अर भुला विपिन जादा सोचण नी, सिदा टमकै द्येण जखिमु दिख्यंदा ई कुकूरा ग बच्चा। मोदी – परिकर तैं मि समझै ल्येलू।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव खुल्बे, भारतीय कोस्टगार्ड के डीजी राजेंद्र और एयरक्राफ्ट के डीजी भी उत्तराखंड के

नैनीताल। छोटे से राज्य उत्तराखंड के लिये यह भी गर्व की बात है कि तीन सैन्य अधिकारियों के शीर्ष पदों पर सुशोभित होने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सचिव नैनीताल निवासी भास्कर खुल्बे और कोस्टगार्ड के महानिदेशक राजेंद्र सिंह भी उत्तराखंड के हैं। वहीँ उत्तराखंड के एक ‘कुलदीप’, उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के सुल्तानपुर पट्टी के करीब ग्राम पिपलिया निवासी एयर मार्शल कुलदीप शर्मा अपने नाम के अनुरूप अपने परिवार और देश-प्रदेश के कुलदीपक साबित हुए हैं। उन्हें दो जनवरी 2017 को भारतीय वायुसेना में एयरक्राफ्ट का डायरेक्टर जनरल बनाया गया है। सुल्तानपुर पट्टी के राइंका से हाइस्कूल, काशीपुर के उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज से इंटर और पंतनगर विश्वविद्यालय से बीटेक कर 1981 में वायुसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले कुलदीप को विशिष्ट सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा जा चुका है।

अल्मोड़ा के केसी पांडे बने भारतीय तटरक्षक बल के एडीजी

अल्मोड़ा के खज़ान पांडे बने भारतीय तटरक्षक बल के एडीजी

भारतीय समुद्री सीमाओं की कमान देवभूमि उत्तराखंड के जांबाजों के हाथ में है। अल्मोड़ा निवासी खज़ान चन्द्र पांडे को भारतीय तटरक्षक बल (आइसीजी) के अतिरिक्त महानिदेशक (पूर्व) के रूप में नियुक्त किया गया है। पिछले वर्ष देहरादून जिले के चकराता निवासी राजेंद्र सिंह भारतीय तटरक्षक बल (इंडियन कोस्ट गार्ड) के महानिदेशक (डीजी) बने थे। राजेंद्र सिंह के डीजी बनने के बाद पिथौरागढ़ निवासी डीआइजी सुरेंद्र सिंह डसीला को देश के सबसे आधुनिक पोत आइएनएस सूर की कमान दी गई। अब अल्मोड़ा के केसी पांडे को भारतीय तटरक्षक बल (आइसीजी) के अतिरिक्त महानिदेशक (पूर्व) के रूप में नियुक्त किया गया है। चेन्नई में क्षेत्रीय मुख्यालय (पूर्व) और कोलकाता में क्षेत्रीय मुख्यालय (उत्तर-पूर्व) के तटीय-पूर्वी समुद्र तट की कमान उनके पास रहेगी। उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया है।

ऋषभ पंत बने भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम का हिस्सा

नैनीताल। इधर पांच जनवरी 2017 को (स्वयं को कभी भी उत्तराखंड का बताने से परहेज करने वाले) महेंद्र सिंह धौनी ने सीमित ओवरों की भारतीय क्रिकेट टीम से इस्तीफा दिया, वहीं अगले दि नही उत्तराखंड का एक और लाल-हरिद्वार में जन्मे ऋषभ पंत भारतीय टी-20 क्रिकेट टीम का हिस्सा बन गये। 1997 में जन्मे ऋषभ के खाते में 2005 में अपने क्रिकेट कैरियर की शुरुआत करते ही दिल्ली की ओर से नेपाल के विरुद्ध रिकार्ड सबसे तेज अर्धशतक, फिर नामीबिया के खिलाफ शतक, आगे आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स द्वारा 10 लाख आधारमूल्य के बावजूद 1.9 करोड़ रुपये में खरीदे जाने, इधर हाल में रणजी ट्राफी मैच में महाराष्ट्र के खिलाफ 308 रनों की पारी खेलकर तिहरा शतक बनाने वाले सबसे युवा और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ऐसा करने वाले देश के चौथे क्रिकेटर बनने के अलावा नवंबर 2016 में रणजी में झारखंड के खिलाफ 48 गैंदों पर रणजी के इतिहास का सबसे तेज शतक जड़ने जैसी अनेक उपलब्धियां दर्ज हैं।

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उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के बल्लेबाज मनीष पांडे पहले ही श्रीलंका के खिलाफ देश के लिये टी-20 मैच खेल चुके हैं। वहीं पिथौरागढ़ के उन्मुक्त चंद कप्तानी करते हुए देश को अंडर-19 विश्व कप-2012 का खिताब दिला चुके हैं। इनके अलावा रानीखेत के निवासी पवन नेगी भी देश के लिये टी-20 मैच खेल चुके हैं। यह तब है, जबकि उत्तराखंड में प्रथम श्रेणी क्रिकेट ही नहीं खेला जाता है।

योगी आदित्यनाथ के उत्तराखंड के अजय सिंह से योगी बनने की रोचक कहानी

यूपी के नए सीएम बने योगी आदित्यनाथ किसी परिचय के मोहताज नहीं, बहुत कम उम्र में ही उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल की हैं वो बेमिसाल हैं।मूल रूप से उत्तराखंड के राजपूत परिवार में जन्मे आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है। योगी गोरखपुर से लगातार पांचवीं बार बीजेपी के सांसद हैं. पहली बार उन्होंने 1998 में लोकसभा का चुनाव जीता तब उनकी उम्र महज 26 साल थी। इसके बाद आदित्यनाथ 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी लगातार सांसद चुने जाते रहे। वे गोरखपुर के गोरखनाथ मठ के महंत हैं। योगी आदित्यनाथ का एक धार्मिक संगठन भी है-हिंदू युवावाहिनी जिसका पूर्वी उत्तर प्रदेश में खासा दबदबा है। 5 जून 1972 उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) के पौड़ी जिला स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचूर गांव के राजपूत परिवार में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ था। 1977 में टिहरी जिले के गजा स्कूल से स्कूल में पढ़ाई शुरू की, और 1987 में यहीं से  दसवीं की परीक्षा पास की। 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए एबीवीपी से जुड़े। उन्होंने गढ़वाल विश्विद्यालय से गणित में बीएससी किया है। पढ़ाई के बाद वो गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ (संभवतया उनके मामा) के संपर्क में आए। मंहत ने दीक्षा देकर अजय को योगी आदित्यनाथ का नाम दिया। अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया तो योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

नैनीताल की बेटी अभिलाषा जोशी बनी वैंकुवर में भारतीय दूतावास जनरल

नवीन जोशी। नैनीताल। केंद्र में मोदी सरकार से एक और उत्तराखंडी को शीर्ष पद मिला है। नैनीताल की बेटी अभिलाषा जोशी को भारत सरकार ने कनाडा के वैंकुवर स्थित भारतीय दूतावास में काउनसलेट जर्नल ऑफ इंडिया के पद पर तैनात किया है।
उल्लेखनीय है कि अभिलाषा का बचपन नैनीताल में बीता है। उनके पिता गोविंद टम्टा यहां श्रम विभाग में कार्यरत थे, और परिवार माल रोड में इंडिया होटल के समीप आनंद निवास में रहता था। इसलिये उनकी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल के सैंट मेरीज कॉन्वेंट कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से हुई, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम महिला कॉलेज से आगे की शिक्षा ग्रहण की। वह सेंट मेरीज कान्वेंट कॉलेज में कक्षा एक से पढ़ीं और १९८७ में यहीं से दसवीं और १९८९ में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम महिला कॉलेज से स्नातक तथा दिल्ली विश्वविध्यालय से मनोविद्यान विषय में स्नातकोत्तर किया। १९९५ में उन्होंने भारतीय विदेश सेवा की कठिन परीक्षा पास करके सबको चौंका दिया था। इसके बाद भारतीय विदेश सेवा में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों के बाद अभिलाषा को एक मई २०१४ को ब्राजील के साओ पोलो स्थित भारतीय दूतावास में काउंसल जनरल-कॉमर्श बनाकर भेजा गया था । इस कार्यकाल में उन्होंने ब्राजील ओलम्पिक में भारत की भागीदारी में अहम भूमिका निभाई थी। माना जा रहा है कि इसी भूमिका के फलस्वरूप उन्हें कनाडा के वैंकुवर में काउनसलेट जर्नल ऑफ इंडिया जैसे महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया गया है, जहां वह वरिष्ठ काउनसलेट जर्नल दिनेश भाटिया के साथ कार्य करेंगी। इससे पूर्व वे श्रीलंकाउल्लेखनीय है कि अभिलाषा का विवाह नौसेना अधिकारी नितिन जोशी से हुआ, जिनसे उनकी एक पुत्री व एक पुत्र है। उनके बड़े भाई संजय टम्टा अमेरिका में इंजीनियर और उनकी बड़ी बहन रश्मि श्रीवास्तव बैंक अधिकारी रही हैं, और अब अपनी माता हीरा रानी के साथ रहती हैं।

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