आज से ‘कॉपी-पेस्ट’ मैसेज भेजने वालों पर लगेगा 28 प्रतिशत जीएसटी !

1 अप्रैल यानी नया वित्त वर्ष 2018-19 आज से शुरू हो गया है। इसी के साथ उन लोगों के लिए राहत भरी खबर है जो गुड मॉर्निंग, गुड नाईट, आज मंगलवार है, फलां जगह नागराज मिले, यह मैसेज 10 लोगों को भेजो जैसे मैसेज कॉपी-पेस्ट कर सोशल मीडिया पर एक से दूसरे ग्रुप में भेजकर अपना और दूसरों का कीमती समय बरबाद करने वालों से परेशान हैं। केंद्र सरकार ने ऐसे कॉपी-पेस्ट मैसेज भेजने वालों पर 28% जीएसटी लगाने का प्रावधान लागू कर दिया है। यह टैक्स आज सुबह से ही प्रभावी भी हो गया है। और जो लोग ऐसे मैसेज किसी भी माध्यम से कर रहे हैं, उनसे यह टैक्स वसूला जाएगा। खबर पढ़कर यकीनन आप चौंक गए होंगे। चलिए अब थोड़ा हंस दीजिए, क्योंकि आपका ‘अप्रैल फूल’ बन चुका है।

अलबत्ता, आप इस बात के पक्षधर जरूर होंगे कि दूसरों का समय बरबाद करने वाले ऐसे लोगों पर जरूर इस तरह के बड़े कर का प्राविधान होना चाहिए।

चलिये अब लगे हाथ यह भी जान लीजिये कि अप्रैल क्यों बनाया जाता है और इसकी परंपरा कब से है ?

1 अप्रैल को अप्रैल फूल डे मनाया जाता है। अप्रैल फूल को मूर्ख दिवस भी कहा जाता है। इस दिन लोग अपने मित्रों और सगे-सम्बन्धियों को मूर्ख बनाकर खुश होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अप्रैल फूल क्यों मनाया जाता है। आइए हम आपको अप्रैल फूल के बारे कुछ जानकारी देते हैं।

अप्रैल फूल डे केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मनाया जाता है। कुछ देशों में 1 अप्रैल को छुट्टी भी होती है। लेकिन भारत सहित कुछ देशों में अप्रैल फूल के दिन कोई छुट्टी नहीं होती है। 1 अप्रैल को हर तरह का मजाक करने की छूट होती है। यही नहीं जिनके साथ मजाक होता है वह बुरा भी नहीं मानते।

मूर्ख दिवस या अप्रैल फूल डे अलग-अलग देशों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। कुछ देशों- आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन में अप्रैल फूल डे केवल दोपहर तक मनाया जाता है। इन देशों में अप्रैल फूल डे दोपहर तक मनाए जाने के पीछे यह वजह है कि यहां के अखबार केवल सुबह के अंक में मुख्य पेज पर अप्रैल फूल डे से जुड़े विचार रखते हैं। जबकि कुछ देशों- जापान, रूस, आयरलैंड, इटली और ब्राजील में पूरे दिन मूर्ख दिवस मनाया जाता है।

पहली बार अप्रैल फूल डे कब मनाया गया इसके बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि फ्रेंच कैलेंडर में होने वाला बदलाव भी अप्रैल फूल डे मनाने का कारण हो सकता है। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय की एनी से सगाई के कारण अप्रैल फूल डे मनाया जाता है। कुछ लोग इसे हिलारिया त्यौहार से भी जोड़ कर देखते हैं।   हिलारिया एक त्यौहार है जो प्राचीन काल में रोम में मनाया जाता था। इस त्यौहार में देवता अत्तिस की पूजा होती थी। हिलारिया त्यौहार में उत्सव का भी आयोजन किया जाता था। इस उत्सव के दौरान लोग अजीब-अजीब कपड़े पहनते थे। साथ ही मास्क लगाकर तरह-तरह के मजाक करते थे। उत्सव में होने वाली इस गतिविधि के कारण ही इतिहासकारों ने इसे अप्रैल फूल डे से जोड़ दिया।  दुनिया में कई ऐसे देश भी हैं जहां अप्रैल फूल डे तो मनाया ही जाता है।

साथ ही एक दूसरा दिन भी मूर्ख दिवस के रूप में होता है। डेनमार्क में 1 मई माज-काट के रूप में मनाया जाता है। डेनमार्क का माज-काट अप्रैल फूल डे के समान ही होता है। पोलैंड में अप्रैल फूल डे प्राइमा एप्रिलिस के नाम से जाना जाता है। पोलैंड में इस दिन मीडिया और सरकारी संस्थान हाक्स तैयार करते हैं।  ईरानी लोग अपने त्यौहार नौरोज के तेरहवें दिन हंसी-मजाक करते हैं जो सामान्यतः 1 या 2 अप्रैल को पड़ता है। कोरिया में साल के पहले दिन स्रोवी डे मनाया जाता है। इस दिन लोग एक दूसरे से झूठ बोलते हैं या हंसी-मजाक करते हैं। स्कॉटलैंड में अप्रैल फूल डे को हंट द गौक डे कहा जाता है। फ्रांस, इटली और बेल्जियम में अप्रैल फूल डे को कागज की मछली बनाकर दोस्तों के पीछे चिपका दिया जाता है। इस तरह ये लोग दूसरों का मजाक बनाकर मस्ती करते हैं।

बता दें कि अप्रैल फूल डे की शुरुआत फ्रांस से हुई थी। पॉप ग्रेगरी 13 ने वर्ष 1582 में हर यूरोपियन देश को जूलियन कैलेंडर छोड़कर ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार चलने को कहा था।
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मालूम हो कि ग्रेगोरियन कैलेंडर में नया साल 1 अप्रैल नहीं बल्कि 1 जनवरी से शुरू होता है। कई लोगों ने इसे मानने से इनकार तो कई लोगों को इस बात की जानकारी तक नहीं थी इस कारण वह नया साल 1 अप्रैल को ही मनाते थे।
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इस वजह से जो लोग जनवरी में नया साल मनाते थे वो अप्रैल में नया साल मनाने वालों को अप्रैल फूल कहने लगे। लोग प्रैंक कर के एक-दूसरे को बेवकूफ बनाने लगे और धीरे-धीरे कर के ये प्रथा पूरे यूरोप में फैस गई।
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