सीबीआई जांच के दायरे में आईं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रधानाचार्या व वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री

उत्तराखंड उच्च न्यायालय

-उनकी प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति और राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए हुए नामांकन से संबंधित अधिकारी भी आ सकते हैं जांच के दायरे में
नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रामनगर के गोमती पूरन प्रसाद आर्य कन्या इंटर कालेज में विभिन्न पदों के लिए हुई भर्ती की प्रक्रिया में धांधली के आरोपों पर सीबीआई को चार माह के भीतर जांच कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं। मामले में दिलचस्प तथ्य यह भी है कि विद्यालय की प्रधानाचार्य हरिप्रिया सती वर्ष 2014 के राष्ट्रपति पुरस्कार से 5 सितंबर 2015 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं, तथा वर्तमान में सेवानिवृत्ति की आयु पूरी होने के बाद राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने पर मिलने वाले दो वर्ष के सेवा लाभ के तहत ही पद पर कार्यरत हैं। साथ ही वे 35 वर्षों से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी वरिष्ठ नेत्री भी हैं। इधर उन्होंने रामनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भी दावेदारी की हुई है।
इन तथ्यों से इतर यदि विश्वस्त सूत्रों की मानें तो श्रीमती सती की प्रधानाचार्या के रूप में नियुक्ति भी नियम विरुद्ध हुई है। उनके विद्यालय में जब प्रधानाचार्य सेवानिवृत्त हुए, तब वे अपने विद्यालय की सर्वाधिक अनुभवी प्रवक्ता जरूर थीं, परंतु प्रधानाचार्य पद के लिए जरूरी अनुभव संबंधी योग्यता ही नहीं रखती थीं। ऐसी स्थिति में प्रधानाचार्य के पद के लिए भी खुली भर्ती निकाले जाने के प्राविधान को दरकिनार कर तत्कालीन शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत के जरिये उन्हें न केवल प्रधानाचार्य बना दिया गया, वरन प्रधानाचार्य पद पर नियमित नियुक्ति न होने के बावजूद  इस प्राधिकारी पद को छोड़कर अन्य पदों के लिए भर्ती की प्रक्रिया करवाई गई, जिसमें धांधली के बाद उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने सीबीआई जांच के आदेश दिये हैं। लिहाजा माना जा रहा है कि सीबीआई जांच होने पर उनके नियमविरुद्ध प्रधानाचार्या बनने और राष्ट्रपति पुरस्कार हेतु राज्य से नामांकित होने के यह तथ्य तथा संबंधित अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

गौरतलब है कि बेहद तेजतर्रार मानी जाने वाली प्रधानाचार्या हरिप्रिया सती गत नौ अप्रैल को नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस पार्टी के नेताओं के द्वारा हल्द्वानी के स्वराज आश्रम में की गयी रायशुमारी के दौरान टिकट न मिलने पर कांग्रेस से 35 वर्ष के जुड़ाव को त्यागने की धमकी देने के कारण भी चर्चा में आयी थीं।

कांग्रेस नेत्री के रूप में गत 9 अप्रैल को प्रधानाचार्या हरिप्रिया सती की कथित ‘दहाड़’ !

उल्लेखनीय है कि इस मामले में रामनगर निवासी अंजू अग्रवाल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि गोमती पूरन प्रताप आर्य कन्या इंटर कालेज में 9 पदों हेतु 23 मई 2014 को विज्ञप्ति निकाली गयी थी, इनमें से चयन प्रक्रिया के उपरांत 5 सितंबर 2016 को चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गयी। अंजू का कहना है कि उन्होंने सहायक लिपिक पद हेतु आवेदन किया था। विज्ञप्ति की शर्तो के अनुसार लिपिक पद हेतु मान्यता प्राप्त संस्था से कम्प्यूटर टाइपिंग का सर्टिफिकेट होना आवश्यक था। लेकिन जिस नेहा शर्मा नाम की अभ्यर्थी का चयन किया गया उसके पास कम्प्यूटर टाइपिंग का सर्टिफिकेट नही था। अंजू का आरोप है कि विद्यालय के प्रबंधक व मुख्य शिक्षा अधिकारी नैनीताल की मिलीभगत से नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली हुई है। मामले में जनपद के मुख्य शिक्षा अधिकारी कमलेश कुमार, विद्यालय के प्रबंधक शरद जिंदल, प्रधानाचार्या हरिप्रिया सती व कोटाबाग के खण्ड शिक्षा अधिकारी भास्करानंद पांडे न्यायाल में पेश हुए। खंडपीठ ने मामले को सुनने के बाद संदेह के आधार पर सीबीआई से जांच करने और चार माह के भीतर जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं।

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