उत्तराखंड में आयकर से 11000 करोड़ व कुमाऊं में 75 फीसद अधिक लक्ष्य प्राप्त

-उत्तराखंड में नये करदाताओं की संख्या में 1.35 लाख की वृद्धि, बढ़कर 5.85 लाख हुए करदाता
नैनीताल। आयकर विभाग के द्वारा बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिकारियों को जनता के बीच जाकर उनकी समस्या सुनीं। इस दौरान प्रदेश के मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष उत्तराखंड में विभाग ने आयकर के रूप में 11 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया है। कुमाऊं में लक्ष्य 202 करोड़ का था, जिसमें से 352 करोड़ यानी पिछले वर्ष के मुकाबले 75 फीसद अधिक लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। उन्होंने नाम लिये बिना बताया कि अनेक बोगस कंपनियां उत्तराखंड में पकड़ी गयी हैं, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य करदाताओं का आधार बढ़ाना भी है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उत्तराखंड में नये करदाताओं की संख्या में 1.35 लाख की वृद्धि हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल को राज्य में करदाताओं की संख्या 4.5 लाख थी, जो इस वर्ष बढ़कर 5.85 हो गया है। बताया कि आउटरीच कार्यक्रम के तहत करदाताओं को आश्वस्त कर रहे हैं कि करदाताओं के अधिनियमों के तहत अपने दायित्वों का पालन करने तक विभाग का रवैया गैर विरोधात्मक है।

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नैनीताल। ग्राम विकास विभाग के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2018 के तहत सुगम व दुर्गम स्थलों का चिन्हीकरण कर दिया गया है। खास बात यह है कि प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल के साथ ही अल्मोड़ा व टिहरी जिलों को सुगम में तथा शेष रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, पिथौरागढ़, चंपावत एवं बागेश्वर जिलों को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है। इनके अतिरिक्त सुगम प्रसार प्रशिक्षण केंद्र शंकरपुर देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर, हल्द्वानी, हवालबाग व पौड़ी के केंद्रों को भी सुगम में जबकि गोपेश्वर व धरकोट को दुर्गम की श्रेणी में राा गया है।
उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह सूचना विभाग का भी दुर्गम व सुगम का निर्धारण किया गया है, जिसमें प्रदेश के चार मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल के अलावा अल्मोड़ा व टिहरी सहित शेष सभी 9 पर्वतीय जिलों को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है।

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-प्रमोटी व मूल आईएएस में बढ़ी रार
-मामला अदालत के दरवाजे तक जाता है तो इससे प्रदेश की प्रचंड बहुमत की सरकार की छवि पर बट्टा लगना तय 

देहरादून। यूं तो प्रमोटी आईएएस व मूल आईएएस अफसरों का झगड़ा सनातन है, मगर प्रदेश के गठन के बाद पहली बार दोनों में तकरार इतनी बढ़ी है कि एक आईएस अधिकारी दूसरे प्रमोटी आईएस के खिलाफ अदालत जाने तक की धमकी दे रहीं हैं। अगर यह मामला अदालत के दरवाजे तक जाता है तो इससे प्रदेश की प्रचंड बहुमत की सरकार की छवि पर बट्टा लगना तय है, क्योंकि माना जाएगा कि उसने समय रहते भीतर-भीतर सुलग रही इस चिंगारी को शांत करने की कोशिश नहीं की और सारा मामला वरिष्ठ नौकरशाहों पर छोड़ दिया।

आईएएस एसोसिएशन की बैठक टली 

नौकरशाहों के बीच इस शीत युद्ध का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री व आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष के समक्ष अपनी नाराजगी दर्ज करने के बाद सचिव पद पर तैनात प्रमोटी आईएएस अफसर हरबंस सिंह चुघ लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। हालांकि उन्होंने अपनी छुट्टी के इस प्रकरण से जुड़े होने से इनकार किया है। आलम यह है कि आईएएस एसोसिशन में दोफाड़ की नौबत आ गई है। वहीं प्रमोटी आईएएस ने अलग एसोसिएशन बनाने की बात कही है, जिसके चलते 13 यानी शुक्रवार को होने वाली आईएएस एसोसिएशन की बैठक टाल दी गई। माना जा रहा है कि अब यह बैठक 17 अप्रैल को होगी। आईएएस अफसर एसोसिएशन के सचिव आनंद बर्धन ने भी अपरिहार्य कारणों से बैठक टलने की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि बैठक जल्द होगी।

यह है झगड़े की मूल जड़ 

प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसरों और प्रमोटी आईएएस अफसरों में सारे झगड़े की जड़ तबादले और तैनाती मानी जा रही है। प्रमोटी आईएएस का आरोप है कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही प्रमोटी आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग से वंचित रखा गया है। अहम पदों पर सीधे आईएएस अफसरों का ही कब्जा है। प्रमोशन से आईएएस बने अफसर अहम जिम्मेदारियों के लिए तरस गए हैं। पिछले एक साल से सचिवालय में तैनात प्रमोटी आईएएस अफसरों को तो सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, अल्पसंख्यक कल्याण, पुनर्गठन, प्रोटोकाल, संस्कृत शिक्षा जैसे विभाग सौंपे गए। पोस्टिंग को लेकर पीसीएस अधिकारियों में भी नाराजगी जगजाहिर हो चुकी है।

प्रमोटी आईएएस अधिकारियों में भी पोस्टिंग को लेकर नाराजगी

वर्तमान में प्रमोटी आईएएस अधिकारियों में भी पोस्टिंग को लेकर नाराजगी है। सचिव हरबंस सिंह चुघ उनसे लगातार अहम विभाग हटाए जाने से नाराज हैं। चुघ से पहले खेल विभाग हटाया गया और उसके बाद राजस्व विभाग भी वापस ले लिया गया। अब उनके पास श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग ही रह गया है। इसके बाद वे लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। इसे उनकी कथित नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमोटी आईएएस अफसर इसे खुद के साथ भेदभाव की कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि अहम पदों पर सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों का कब्जा है। खुद के साथ अन्याय महसूस कर रहे प्रमोटी अफसरों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। पिछले दिनों उन्होंने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह से ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री से शिकायत की। सूत्रों के मुताबिक एक प्रमोटी आईएएस ने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री की सचिव ही सारे ट्रांसफर पोस्टिंग के काम कर रही हैं। जिसके बाद मुख्यमंत्री की सचिव भड़क गई और इसे अपना अपमान बता कर प्रमोटी आईएएस को अदालत में घसीटने की चेतावनी दे डाली। उसके बाद बहरहाल दोनों के झगड़े के बाद प्रमोटी आईएएस के खिलाफ मूल आईएएस लामबंद होने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार आईएएस एसोसिएशन की बैठक टलना सरकार पर उनकी तरफ से अब दबाव बनाने की ही मुहिम का हिस्सा है। बहरहाल अगर यह विवाद बढ़ा तो प्रदेश में विकास कायरे पर असर भी तय है।

पोस्टिंग को लेकर पीसीएस अफसरों में भी नाराजगी 

उल्लेखनीय है कि विगत दिनों किए गए तबादलों को लेकर पीसीएस अफसरों द्वारा वरिष्ठता को नजरअंदाज कर पोस्टिंग दिए जाने पर सवाल उठाए जाने पर सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था, जबकि एक अधिकारी श्रीश कुमार की ओर से मामले में हाईकोर्ट में चुनौती देनी पड़ी थी।

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