अपने स्टॉक बेचकर लगातार तीसरे माह 300 करोड़ का कर्ज लेगा उत्तराखंड, 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी उधारी

  • मई और जून में भी सरकार ले चुकी है 300-300 करोड़ कर्ज
नैनीताल, 8 जुलाई  2018। प्रदेश सरकार लगातार तीसरे माह 300 करोड़ का कर्ज और लेगी। यह कर्ज 10 साल के भीतर यानी 2028 तक चुकाया जाएगा। कर्ज की ब्याज दर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया निविदा के आधार पर तय करेगा। ऊर्जा, कृषि, सिंचाई और उद्योग क्षेत्र की योजनाओं के वित्त पोषण के लिए उत्तराखंड सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए अपना स्टॉक बेचने का फैसला लिया है। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी के मुताबिक 29 जून को प्रदेश सरकार ने इसकी निविदा के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। सफल निविदाकर्ता को न्यूनतम ब्याज दर पर चार जुलाई तक धनराशि मुहैया करानी होगी।
उत्तराखंड सरकार जून माह में भी बाजार से 300-300 करोड़ रुपये के कर्ज ले चुकी है। और इस साल 7300 करोड़ तक का कर्ज ले सकती है। उल्लेखनीय है कि 31 मार्च 2017 तक प्रदेश पर 35209.59 करोड़ का कर्ज था, जिसमें से 10212.85 करोड़ नेशनल स्माल सेविंग फंड की सिक्योरिटीज के रूप में, 20832.29 करोड़ राज्य विकास ऋण, 3509.13 करोड़ नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपेंट के ऋण और शेष भारत सरकार के कर्ज के रूप में है। सरकार के इस कदम से प्रदेश सरकार पर कर्ज करीब 50 हजार करोड़ रुपये पार कर जाएगा। इस वक्त प्रदेश पर 41721.1152 करोड़ रुपये का कर्ज है जो कि अगले साल 31 मार्च तक 47580.4252 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। इसके अलावा 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है। 
गौरतलब है कि सूबे की खराब माली हालत के बीच कर्मचारियों के बढ़ते दबाव के चलते प्रदेश सरकार जहां उन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्ते देने की तैयारी में मई में भी सरकार 300 करोड़ रुपये कर्ज ले चुकी है। प्रदेश सरकार इस वित्तीय वर्ष में 600 करोड़ का कर्ज पहले ही ले चुकी है। अब प्रदेश सरकार अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों को भत्ते देती है तो राज्य पर करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ा दिया है जिससे सरकार पर 60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। 

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-भत्तों से साढ़े तीन सौ करोड़ रु. के अतिरिक्त बोझ का अनुमान, सरकार की 300 करोड़ कर्ज लेने की तैयारी 

किसी भी राज्य की आर्थिकी में ‘ऋणं लित्वा घृतम् पीवेत्’ की स्थिति सर्वाधिक बुरी मानी जाती है। लेकिन उत्तराखंड सरकार सूबे की खराब माली हालत के बीच कर्मचारियों के बढ़ते दबाव के चलते उन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्ते देने और 300 करोड़ रुपये कर्ज लेने की तैयारी में है। प्रदेश सरकार इस वित्तीय वर्ष में 500 करोड़ का कर्ज पहले ही ले चुकी है। अब प्रदेश सरकार अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक कर्मचारियों को भत्ते देती है तो राज्य पर करीब 350 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। प्रदेश सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर पहले से वित्तीय बोझ सहन कर रही है। बुधवार को प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ा दिया है जिससे सरकार पर 60 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। गौरतलब है कि प्रदेश के बजट का 31.55 फीसद हिस्सा कर्मचारियों के वेतन भत्तों पर खर्च होता है जबकि 12.29 फीसद पेंशन व आनुतोषिक पर जाता है। 10.67 हिस्सा ब्याज व लाभांश पर खर्च होता है और 7.81 फीसद हिस्सा निवेश ऋणों पर खर्च होता है।

दरअसल प्रदेश के कर्मचारी लंबे समय से उन्हें सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक भत्ते देने की मांग कर रहे है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने इंदु कुमार पांडे की अध्यक्षता वाली वेतन विसंगति समिति से रिपोर्ट मांगी थी जिसने काफी समय पहले सरकार को सिफारिशें सौंप दी थीं। बढ़ते दबाव के बीच बुधवार व बृहस्पतिवार को इस मुद्दे को लेकर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की वित्त विभाग के साथ बैठक हुई जिसमें सैद्धांतिक तौर पर यह फैसला लिया गया है कि सरकार कर्मचारियों को भत्ते देगी। बैठक में इस बाबत भी विचार विमर्श हुआ कि कर्मचारियों को ये भत्ते किस तरह दिए जाएं। सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने भी सातवें वेतन के भत्तों को लेकर हुई बैठकों की पुष्टि की है। 

उत्तराखंड में पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिला, टिहरी झील में कैबिनेट ने तैरते हुए लिए जमीनी फैसले

टिहरी झील में मरीना फ्लोटिंग बोट पर 16 मई 2018 को आयोजित हुई ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इनमें प्रमुख हैं :
  1. पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिला। पर्यटन से जुड़े कायाकल्प रिज़ॉर्ट, आयुर्वेद,  योगा, पंचकर्म, बंजी जंपिंग, जॉय राइडिंग, सर्फिंग, कैंपिंग, राफ्टिंग जैसे उद्यम भी एमएसएमई नीति के अंतर्गत आएंगे
  2. मेगा इंडस्ट्री इन्वेस्टमेंट नीति के अंतर्गत आयुष और वेलनेस सेक्टर सहित होटल, रिज़ॉर्ट, क्याकिंग, सी-प्लेन,आयुर्वेद, योग जैसी 22 गतिविधियां विभिन्न लाभों के लिए अनुमन्य होंगी।
  3. सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्योग क्रय-विक्रय नियमावली में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने हेतु संशोधन किया गया।
  4. 13 डिस्ट्रिक्ट 13 न्यू टूरिस्ट डेस्टिनेशन योजना को मंजूरी : प्रत्येक जनपद में 13 नये पर्यटक स्थल घोषित, अल्मोड़ा में धार्मिक पर्यटन के रूप में सूर्य मन्दिर। नैनीताल में हिमालय दर्शन के लिए मुक्तेश्वर। पौड़ी में वाटर स्पोर्टस के लिए सतपुली, खैरगढ़। चमोली में प्रस्तावित ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैण, गैरसैंण। देहरादून में महाभारत सर्किट, लाखामण्डल। हरिद्वार में पावन शान्ति पीठ। उत्तरकाशी में हैरिटेज रूप में मोरी, हरकी दून। टिहरी में टिहरी झील। रूद्रप्रयाग में चिरबिटिया। ऊधमसिंह नगर में गूलरभोज। बागेश्वर में गरूड़ घाटी। चम्पावत में देवीधूरा और पिथौरागढ़ में ईको टूरिज्म के रूप में मोस्टमानू।
  5. वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में क्याकिंग, टेरेन बाइकिंग, कैरावैन, ऐंग्लिंग, स्टार गेसिंग, बर्ड वाचिंग आदि 11 नई गतिविधियां भी शामिल
  6. वर्ष 2018 को रोजगार वर्ष के रूप मनाया जायेगा।
  7. पिरूल नीति के तहत14  मीट्रिक टन पिरूल से 150 मेगावाट बिजली बनाने तथा साठ हज़ार लोगों को हर माह 8 से 10000 रुपये तक का रोजगार देने की  योजना। कहा गया कि 25 किलो वाट बिजली के उत्पादन के लिए लगभग ढाई नाली जमीन (500 वर्ग मीटर) से लगभग 10 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा।
  8.  पण्डित दीनदयाल उपाध्याय सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 50 लाख का फण्ड बनाकर तलाक शुदा/परित्याक्ता/एकल महिलाओं तथा किन्नरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए 1 प्रतिशत की दर से 1 लाख का सहकारिता लोन।Image result for फ्लोटिंग बोट पर कैबिनेट बैठक
  9. एससी/एसटी व ओबीसी की आरक्षण गणना 1.5 के ऊपर होने पर संख्या 2 मानी जायेगी।
  10. उत्तराखण्ड राज्य के अधीन वैयक्तिक सहायक पदोन्नत पदोन्नती नियमावली को मंजूरी।
  11. अधीनस्थ सेवा सीधी भर्ती वैयक्तिक सेवा नियमावली को मंजूरी।
  12. मेंथा प्रजाति के उत्पादों के लिए मंडी शुल्क माफ कर दिया गया।
  13. एमसीआई यानी भारतीय चिकित्सा परिषद में उत्तराखंड के  पूर्व के 7 पदों को बढ़ाकर 15 किया गया
  14. वीर चन्द्रसिंह गढ़वाली योजना का दायरा बढ़ाकर इसमें कायाकल्पिंग फ्लोटिंग होटल निर्माण आदि को शामिल किया गया।
  15. मेगा इन्वेस्टमेंट इण्डस्ट्री नीति 2015 में संशोधन कर सूची बढायी गयी।
  16. रुद्रप्रयाग में वेला कोटेश्वर में ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य जगदगुरू धर्मार्थ चिकित्सालय का संचालन सरकार स्वयं करेगी।

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मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता

-उत्तराखंड में नये करदाताओं की संख्या में 1.35 लाख की वृद्धि, बढ़कर 5.85 लाख हुए करदाता
नैनीताल। आयकर विभाग के द्वारा बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अधिकारियों को जनता के बीच जाकर उनकी समस्या सुनीं। इस दौरान प्रदेश के मुख्य आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष उत्तराखंड में विभाग ने आयकर के रूप में 11 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया है। कुमाऊं में लक्ष्य 202 करोड़ का था, जिसमें से 352 करोड़ यानी पिछले वर्ष के मुकाबले 75 फीसद अधिक लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। उन्होंने नाम लिये बिना बताया कि अनेक बोगस कंपनियां उत्तराखंड में पकड़ी गयी हैं, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य करदाताओं का आधार बढ़ाना भी है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष उत्तराखंड में नये करदाताओं की संख्या में 1.35 लाख की वृद्धि हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष में एक अप्रैल को राज्य में करदाताओं की संख्या 4.5 लाख थी, जो इस वर्ष बढ़कर 5.85 हो गया है। बताया कि आउटरीच कार्यक्रम के तहत करदाताओं को आश्वस्त कर रहे हैं कि करदाताओं के अधिनियमों के तहत अपने दायित्वों का पालन करने तक विभाग का रवैया गैर विरोधात्मक है।

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नैनीताल। ग्राम विकास विभाग के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2018 के तहत सुगम व दुर्गम स्थलों का चिन्हीकरण कर दिया गया है। खास बात यह है कि प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल के साथ ही अल्मोड़ा व टिहरी जिलों को सुगम में तथा शेष रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी, पिथौरागढ़, चंपावत एवं बागेश्वर जिलों को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है। इनके अतिरिक्त सुगम प्रसार प्रशिक्षण केंद्र शंकरपुर देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर, हल्द्वानी, हवालबाग व पौड़ी के केंद्रों को भी सुगम में जबकि गोपेश्वर व धरकोट को दुर्गम की श्रेणी में राा गया है।
उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह सूचना विभाग का भी दुर्गम व सुगम का निर्धारण किया गया है, जिसमें प्रदेश के चार मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल के अलावा अल्मोड़ा व टिहरी सहित शेष सभी 9 पर्वतीय जिलों को दुर्गम की श्रेणी में रखा गया है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड आईएएस एसोसिएशन में दो-फाड़ के आसार !

-प्रमोटी व मूल आईएएस में बढ़ी रार
-मामला अदालत के दरवाजे तक जाता है तो इससे प्रदेश की प्रचंड बहुमत की सरकार की छवि पर बट्टा लगना तय 

देहरादून। यूं तो प्रमोटी आईएएस व मूल आईएएस अफसरों का झगड़ा सनातन है, मगर प्रदेश के गठन के बाद पहली बार दोनों में तकरार इतनी बढ़ी है कि एक आईएस अधिकारी दूसरे प्रमोटी आईएस के खिलाफ अदालत जाने तक की धमकी दे रहीं हैं। अगर यह मामला अदालत के दरवाजे तक जाता है तो इससे प्रदेश की प्रचंड बहुमत की सरकार की छवि पर बट्टा लगना तय है, क्योंकि माना जाएगा कि उसने समय रहते भीतर-भीतर सुलग रही इस चिंगारी को शांत करने की कोशिश नहीं की और सारा मामला वरिष्ठ नौकरशाहों पर छोड़ दिया।

आईएएस एसोसिएशन की बैठक टली 

नौकरशाहों के बीच इस शीत युद्ध का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री व आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष के समक्ष अपनी नाराजगी दर्ज करने के बाद सचिव पद पर तैनात प्रमोटी आईएएस अफसर हरबंस सिंह चुघ लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। हालांकि उन्होंने अपनी छुट्टी के इस प्रकरण से जुड़े होने से इनकार किया है। आलम यह है कि आईएएस एसोसिशन में दोफाड़ की नौबत आ गई है। वहीं प्रमोटी आईएएस ने अलग एसोसिएशन बनाने की बात कही है, जिसके चलते 13 यानी शुक्रवार को होने वाली आईएएस एसोसिएशन की बैठक टाल दी गई। माना जा रहा है कि अब यह बैठक 17 अप्रैल को होगी। आईएएस अफसर एसोसिएशन के सचिव आनंद बर्धन ने भी अपरिहार्य कारणों से बैठक टलने की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने कहा कि बैठक जल्द होगी।

यह है झगड़े की मूल जड़ 

प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अफसरों और प्रमोटी आईएएस अफसरों में सारे झगड़े की जड़ तबादले और तैनाती मानी जा रही है। प्रमोटी आईएएस का आरोप है कि प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद से ही प्रमोटी आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पोस्टिंग से वंचित रखा गया है। अहम पदों पर सीधे आईएएस अफसरों का ही कब्जा है। प्रमोशन से आईएएस बने अफसर अहम जिम्मेदारियों के लिए तरस गए हैं। पिछले एक साल से सचिवालय में तैनात प्रमोटी आईएएस अफसरों को तो सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, अल्पसंख्यक कल्याण, पुनर्गठन, प्रोटोकाल, संस्कृत शिक्षा जैसे विभाग सौंपे गए। पोस्टिंग को लेकर पीसीएस अधिकारियों में भी नाराजगी जगजाहिर हो चुकी है।

प्रमोटी आईएएस अधिकारियों में भी पोस्टिंग को लेकर नाराजगी

वर्तमान में प्रमोटी आईएएस अधिकारियों में भी पोस्टिंग को लेकर नाराजगी है। सचिव हरबंस सिंह चुघ उनसे लगातार अहम विभाग हटाए जाने से नाराज हैं। चुघ से पहले खेल विभाग हटाया गया और उसके बाद राजस्व विभाग भी वापस ले लिया गया। अब उनके पास श्रम, कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग ही रह गया है। इसके बाद वे लंबी छुट्टी पर चले गए हैं। इसे उनकी कथित नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रमोटी आईएएस अफसर इसे खुद के साथ भेदभाव की कार्रवाई के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि अहम पदों पर सीधी भर्ती के आईएएस अफसरों का कब्जा है। खुद के साथ अन्याय महसूस कर रहे प्रमोटी अफसरों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। पिछले दिनों उन्होंने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह से ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री से शिकायत की। सूत्रों के मुताबिक एक प्रमोटी आईएएस ने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री की सचिव ही सारे ट्रांसफर पोस्टिंग के काम कर रही हैं। जिसके बाद मुख्यमंत्री की सचिव भड़क गई और इसे अपना अपमान बता कर प्रमोटी आईएएस को अदालत में घसीटने की चेतावनी दे डाली। उसके बाद बहरहाल दोनों के झगड़े के बाद प्रमोटी आईएएस के खिलाफ मूल आईएएस लामबंद होने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार आईएएस एसोसिएशन की बैठक टलना सरकार पर उनकी तरफ से अब दबाव बनाने की ही मुहिम का हिस्सा है। बहरहाल अगर यह विवाद बढ़ा तो प्रदेश में विकास कायरे पर असर भी तय है।

पोस्टिंग को लेकर पीसीएस अफसरों में भी नाराजगी 

उल्लेखनीय है कि विगत दिनों किए गए तबादलों को लेकर पीसीएस अफसरों द्वारा वरिष्ठता को नजरअंदाज कर पोस्टिंग दिए जाने पर सवाल उठाए जाने पर सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था, जबकि एक अधिकारी श्रीश कुमार की ओर से मामले में हाईकोर्ट में चुनौती देनी पड़ी थी।

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