खुशखबरी : नैनी झील में होगी ‘विंड सर्फिंग’

-एनसीसी की नेवल यूनिट राष्ट्रीय प्रतियोगिता की विजेता बनने पर पुरस्कृत
नैनीताल। नैनी झील में जल्द एनसीसी के 5 यूके नेवल यूनिट के कैडेट विदेशों की तरह विदेशी उपकरणों पर विंड सर्फिंग करते हुए नजर आएंगे, और नगरवासी तथा सैलानी इसका आनंद उठा पाएंगे। नैनीताल की 5 यूके नेवल यूनिट ने अपनी 1962 में स्थापना के बाद से पहली बार वर्ष 2017 में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन कर उत्तराखंड की छोटी यूनिटों में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के तोहफे के तौर उन्हें यह सुविधा शीघ्र मिल सकती है।

राष्ट्रीय सहारा, 26 मई 2018

उल्लेखनीय है कि 5 यूके नेवल यूनिट उत्तराखंड बनने के बाद से पहली बार राष्ट्रीय नौसैनिक शिविर में शीर्ष 10 में, नौवें स्थान पर रही। साथ ही ऑल इंडिया सेलिंग रिगाटा में देश भर में दूसरे बोट पुलिस व लाइन एरिया में भी स्वर्ण पदक सहित कुल 17 स्वर्ण पदक एवं एक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक प्राप्त किये। खास बात यह भी रही कि इनमें से 14 पदक अकेले डीएसबी परिसर के कैडेटों ने जीते थे। इसके अलावा रानीबाग में आयोजित हुए शिविर में इस यूनिट को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था, तथा राजपथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस की परेड में भी यहां के खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया था। इस बेहतरीन प्रदर्शन पर 5 यूके नेवल यूनिट को उत्तराखंड राज्य डायरक्टरेट में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।

5 यूके नेवल यूनिट को ट्रॉफी प्रदान करते अपर महानिदेशक मेजर जनरल सी मणि।

शुक्रवार को इस उपलब्धि पर उत्तराखंड नेवल डायरक्टरेट के अपर महानिदेशक मेजर जनरल सी मणि ने शुक्रवार को यूनिट को ट्रॉफी प्रदान की। इस उपलब्धि के तोहफे के रूप में यहां नेवल कैडेटों को नैनी झील में पहली बार नैनी झील में विंड सर्फिंग करने के लिए विदेश से उपकरण एवं नई नौकाएं तथा अन्य उपकरण दिये जाने की मेजर जनरल मणि ने घोषणा की। इस अवसर पर सीओ ले. भुवन राणा, पूर्व सीओ विकास धस्माना, रीतेश साह, राकेश थपलियाल, शैलेंद्र चौधरी, सीपीएस नेगी, शिवशंकर व राजेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में कैडेट मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन के केन्द्र के रूप में विकसित होगा ज्योलीकोट

-सीएम ने की है घोषणा, प्रशिक्षण के लिए पंजाब व अन्य प्रांतों में भेजे जायेंगे यहां के कृषक

शहद के लिये प्रसिद्ध फूलो का गांव - ज्योलीकोट
शहद के लिये प्रसिद्ध फूलो का गांव – ज्योलीकोट

नैनीताल। जनपद के सीडीओ प्रकाश चन्द्र ने जनपद के ज्योलीकोट को मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन का केन्द्र विकसित किये जाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये। बताया कि क्षेत्र के मौन पालकों को आधुनिक प्रशिक्षण दिये जाने के लिये पंजाब व अन्य प्रांतों में भेजा जायेगा, ताकि वे मधुमक्खी पालन की आधुनिकतम तकनीकी का ज्ञान हासिल कर सकें। उन्होंने बताया कि बीती 20 मई को राजधानी देहरादून में विश्व मधुमक्खी दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस संबंध में घोषणा की है। इसी संबंध में उन्होंने बुधवार को ज्योलीकोट में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की, एवं उनकी समस्याएं सुनने के साथ उन्हें इस क्षेत्र में बेहतर अवसरों की जानकारी भी दी। साथ ही वरिष्ठ कीटविद् एससी तिवारी को सभी मौन पालकों का बायोडाटा तैयार करने और खादी ग्रामोद्योग आयोग के प्रतिनिधि को मौनपालकों को आधुनिकतम प्रशिक्षण की व्यवस्था के साथ ही सभी मौन पालक को 10-10 बक्से उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ज्योलीकोट के आस-पास लगभग 500 मौन पालक हैं। कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों के आर्थिक विकास के साथ ही उनकी आय को दुगुना करने में मौन पालन महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। कहा कि मौन पालन का विस्तार वन पंचातयों एवं महिला स्वयंसहायता समूह के माध्यम से भी किया जायेगा। इसके साथ ही मौनपालकों को वित्तीय सहायता मनरेगा के माध्यम से भी उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने मौनपालकों से कहा कि अपने क्षेत्र के लोगों के विकास खंड से जॉब कार्ड बनवा लें तथा गांव वासियों को भी मौन पालन से जोड़ें ताकि गांव वालों को भी मौनपालक के जरिये वर्षभर रोजगार मिल सके। इसके अलावा उन्होंने उद्यान विभाग एवं मौनपालन केन्द्र के प्रभारी को सभी मौनपालकों केा अनिवार्य रूप से परिचय पत्र उपलब्ध कराने कहा। वहीं अपनी ओर से विपरीत मौसम में मौन पालकों को चीनी आवंटन के लिये आयुक्त गन्ना विकास से वार्ता तथा मौन पालन के बक्सों को जंगलों में रखे जाने की अनुमति के लिये वन महकमे के अधिकारियों से वार्ता करने का आश्वासन दिया। अध्यक्षता जिला पंचायत सदस्य डा. हरीश बिष्ट ने स्थानीय शहद की ब्रांडिंग करने एवं शहद का उत्पादन बढ़ाने के लिये लीची, जामुन, शहतूत व अन्य फलदार पौंधों का रोपण युद्धस्तर पर करने तथा मौनपालकों को आधुनिकतम प्रशिक्षण दिलाये जाने गोष्ठी में परियोजना निदेशक बालकृष्ण, डीडीओ रमा गोस्वामी, उप निदेशक सूचना योगेश मिश्रा, एपीडी संगीता आर्या के साथ ही बड़ी संख्या में काश्तकार एवं मौनपालक उपस्थित रहे।

30 के दशक में अल्मोड़ा के शीतलाखेत में हुई थी मौन पालन की शुरुआत
नैनीताल। बैठक में सीडीओ ने बताया कि वर्ष 1935-36 में स्व. पं. राजेन्द्र नाथ मुट्टू ने जनपद अल्मोड़ा के शीतलाखेत में मौन पालन का कार्य प्रारम्भ किया था। बाद में उन्होंने ही नैनीताल मेें रामगढ़ में भूपेन्द्र एपियरी नाम से मौनालय स्थापित किया। आगे 1938 में जनपद नैनीताल के ज्योलीकोट में मौन पालन केन्द्र की और 1939 में अखिल भारतीय मौन पालन संघ की स्थापना की गयी थी। ज्योलीकोट की भौगौलिक परिस्थितियों के अनुरूप श्री मुट्टू ने ही यहां भारतीय मौन के लिये एक मौन गृह विकसित किया, जिसे ज्योलीकोट बिलेजर मौनगृह के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड में व्यवसायिक स्तर पर भारतीय एवं इटेलियन मौन वंशों का पालन किया जा रहा है।

नैनीताल के बीडी पाण्डेय जिला अस्पताल में राज्य सरकार ने रचा इतिहास: इतिहास में पहली बार जिला चिकित्सालय में स्वीकृत पदों से अधिक चिकित्सक

-सभी 24 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 25 चिकित्सक हुए तैनात, इनमें से दो अनुपस्थित, लिहाजा 23 चिकित्सक हुए कार्यरत
-बिना पद के निष्चेतक के अन्य पद पर मनोचिकित्सक भी हुए तैनात, एक नये पैथोलॉजिस्ट ने भी किया कार्यभार ग्रहण
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड में हमेशा से अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी का रोना रोया जाता है। लेकिन आज 15 मई का दिन जिला व मंडल मुख्यालय स्थिति बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के इतिहास में बहुत ही खास और हमेशा के लिये याद रखने वाला रहेगा, जब यहां चिकित्सकों के स्वीकृत 24 पदों के सापेक्ष एक अतिरिक्त यानी 25 चिकित्सक तैनात हो गये हैं। यह अलग बात है कि इनमें से दो चिकित्सक तैनाती के बावजूद कार्य नहीं कर रहे हैं, फिर भी 24 पदों पर 23 चिकित्सकों का कार्य करना भी ऐतिहासिक है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में लम्बे समय के बाद चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के तहत चयनित 421 डॉक्टरों को तैनाती दी गई है। 
जिला चिकित्सालय ने दो चिकित्सकों, मनोचिकित्सक डा. गिरीश चंद्र पांडे एवं पैथोलॉजिस्ट डा. प्रियांशु श्रीवास्तव ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उल्लेखनीय है कि जिला चिकित्सालय में मनोचिकित्सक का पद स्वीकृत ही नहीं है, लिहाजा उन्हें निष्चेतक के पद के सापेक्ष भेजा गया है। जबकि निष्चेतक के पद पर चिकित्सालय में अभी संविदा पर डा. एससी भट्ट कार्यरत हैं, जो कि स्वीकृत पद पर नियमित नियुक्त हो जाने के बाद से एक तरह से अतिरिक्त हो गये हैं, अलबत्ता उनके पद की आवश्यकता भी चिकित्सालय में सर्जरी-ऑपरेशन आदि के समय जरूरी है। वहीं मनोचिकित्सक पद पर चिकित्सक की तैनाती की गंभीरता को इस बात से समझा जा सकता है कि प्रदेश में इस दक्षता के गिने-चुने ही चिकित्सक उपलब्ध हैं। नयी नियुक्तियों में राज्य को केवल दो मनोचिकित्सक मिले हैं, जिनमें से एक की नियुक्ति देहरादून एवं दूसरे की नैनीताल में की गयी है।

राज्य बनने के बाद बढ़े हैं चिकित्सकों के तीन पद
नैनीताल। जिला चिकित्सालय के स्वीकृत पदों की बात करें तो राज्य बनने से पूर्व यहां चिकित्सकों के 21 पद थे। राज्य बनने के बाद हड्डी रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन एवं सर्जन के एक-एक यानी कुल तीन बढ़कर 24 पद हो गये हैं। इन पदों के सापेक्ष अब तक जिला चिकित्सालय में संविदा पर कार्यरत निश्चेतक सहित 23 चिकित्सक नियुक्त थे, अलबत्ता हृदय रोग विशेषज्ञ के एक स्वीकृत पद पर नियुक्त डा. जोशी कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत लंबे अवकाश पर चले गये हैं। बताया गया है कि उन्होंने वीआरएस के लिए भी शासन से अनुरोध किया था, जिसे स्वीकारा नहीं गया है, बावजूद वे अवकाश पर हैं, वहीं हड्डी रोग विशेषज्ञ के पद पर नियुक्त चिकित्सक ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। स्वीकृत से अधिक पदों पर चिकित्सकों की तैनाती पर जिला चिकित्सालय के प्रभारी पीएमएस डा. राजेश साह ने कहा कि ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ है। दो नये चिकित्सकों के आने के बाद अब चिकित्सालय में पैथोलॉजिस्ट के दोनों पद भर गये हैं, वहीं मनोचिकित्सक के अन्य पद पर नियुक्त होने से अवसाद, तनाव आदि के मौजूदा दौर में पूरे कुमाऊं मंडल वासियों को इस पद का लाभ मिलने की उम्मीद है।

अच्छी खबर : केंद्र सरकार नैनीताल जिले में खोलेगी एक वृद्धाश्रम

-केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने अधिकारियों को दिये प्रस्ताव तैयार भेजने के निर्देश
नैनीताल। नैनीताल जनपद में शीघ्र ही एक वृद्धाश्रम खोला जाएगा। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बुधवार को मुख्यालय स्थित नैनीताल क्लब में डीएम, पुलिस व समाज कल्याण अधिकारी के साथ बैठक करते हुए जनपद में वृद्धाश्रम खोलने हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश अधिकारियों को दिये। इसके साथ ही उन्होंने बैठक में भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति जनजाति हेतु संचालित कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की, और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत लंबित प्रकरणों की जानकारी लेते हुये अधिनियम के अन्तर्गत वादों में शीघ्रता से एफआईआर दर्ज करते हुये पीड़ित पक्ष को आर्थिक सहायता हेतु शीघ्र प्रपत्र संबंधित अधिकारी को भेजने के निर्देश दिये।

यह भी पढ़ें : ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम की भांति प्रारम्भिक जांचें भी करेंगी आशा बहनें

-दिये जाएंगे आवश्यक प्रशिक्षण एवं उपकरण
नैनीताल। ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत आशा कार्यकत्रियां आगे से एएनएम की तरह कार्य करेंगी। इस हेतु उन्हें ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, हिमोग्लोबिन तथा बुखार आदि की प्रारम्भिक जांचें करने के लिये आवश्यक प्रशिक्षण तथा उपकरण दिये जायेंगे। डीएम विनोद कुमार सुमन ने मंगलवार को जिला कलक्ट्रेट सभागार में स्वास्थ्य महकमे की बैठक लेते हुए इस बाबत आवश्यक निर्देश दिये।
इसके साथ ही उन्होंने बैठक में आगामी गर्मी व बरसात के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मलेरिया, व डेंगू की संभावनाओं के मद्देनजर मच्छरों के लारवा को नष्ट करने के लिये जून माह से आवश्यक रसायनों का छिड़काव करने, गरीबों के स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का व्यापक प्रचार प्रसार करने, चिकित्साधिकारियों से कम से कम पांच गांवों का निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के साथ ही आशाओं एवं एएनएम के कार्यो की समीक्षा करने, कन्या भ्रूण हत्या की संभावनाओं के मद्देनजर अल्ट्रासाउन्ड केन्द्रों की नियमित जांच करने, गर्भवती व धात्री महिलाओं तथा सभी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करने आदि के निर्देश भी दिए। उन्होंने धारी प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र को प्रदेश में प्रथम स्थान पाने पर बधाई दी। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि जनपद में 102 कुष्ठरोगी चिन्हित किये गये है। डीएम ने जनपद में संचालित कुष्ठ आश्रमों में स्वास्थ विभाग की टीमों से जाकर उनका स्वास्थ परीक्षण करने और निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराने को भी कहा। बैठक में सीएमओ डा. एमएम तिवारी, एसीएमओ डा. टीके टम्टा, डीपीएम मदन मेहरा, डीओओ अरूण जोशी, डीईओ देवेश तिवारी, सतीश सिंह, अंजू बुडलाकोटी, जगदीश पांडे, पंकज पंत, डीएएम डीएस कालाकोटी, बीएलए महेश गोस्वामी, बीपीएम रामगढ़ दिनेश कुमार, बीएएम पंकज आर्या, डीईओ बेतालघाट विजयपाल सिंह, बीएएम लक्ष्मीकांत, विजेन्द्र सिंह, बीपीएम बीएम पाठक, जीसी पांडे, विनय जोशी, शशि कान्डपाल, बीएएम रितेश पांडे, विजेन्द्र सिंह सहित अनेक अधिकारी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : एलईडी स्ट्रीट लाइटों से जगमगाने लगा नैनीताल

-इस सप्ताह से एलईडी लाइटें लगाने का कार्य प्रारंभ, मार्च मध्य तक 2500 लाइटें लगाने का कार्य पूरा करने की है समय सीमा
नैनीताल/एसएनबी। सरोवरनगरी अमृत योजना के तहत एलईडी लाइटों से जगमगानी प्रारंभ हो गयी है। नगर में इसी सप्ताह से पीपीपी मोड में 40 वाट की एलईडी लाइटें लगाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। बताया गया है कि अब तक करीब 80 लाइटें लग गयी हैं, और 500 लाइटें पहुंच चुकी हैं, और हर रोज 20-30 लग रही हैं। उल्लेखनीय है कि नगर में योजना के तहत 2500 स्ट्रीट लाइटें करीब मार्च माह के मध्य तक लगाई जानी हैं।

नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा ने बताया कि अमृत योजना के अंतर्गत आने वाले नगर निकायों को पीपीपी मोड में एलईडी लाइटें लगाकर बिजली व ऊर्जा की बचत करती है। लिहाजा बीते नवंबर माह में गाजियाबाद की ईको ड्राइव पावर सॉल्यूशन कंपनी के साथ अनुबंध किया गया है, जो बिना कोई शुल्क लिये 2.5-2.5 वाट के 18 बल्बों युक्त उच्च गुणवत्ता के एलईडी लाइटें लगा रहे हैं। आगे अनुबंध के अनुसार यह लाइटें लगाने से पालिका के मौजूदा करीब ढाई-तीन लाख के विद्युत बिल में जो भी बचत होगी, उसका 20 फीसद भी पालिका को मिलेगा। साथ ही कंपनी नगर पालिका के वाहनों का प्रयोग करने पर उनमें ईधन भी खुद भरवाएगी, और अगले 10 वर्षों तक शिकायत आने पर 24 घंटे के भीतर लाइटों की मरम्मत भी करेगी, और इस हेतु अपने कर्मचारी भी रखेगी। इसमें कोताही बरतने पर कंपनी से कार्य वापस लिया और उसकी धरोहर राशि जब्त की जा सकती है। बताया कि इस पहल से न केवल नगर पालिका स्ट्रीट लाइटें जलाने की जिम्मेदारी से काफी हद तक मुक्त होगी, बल्कि नई लाइटें मुफ्त में लगेंगी, बिजली के बिल में 20 फीसद की कमी आएगी और इस कार्य में लगने वाले कर्मचारी यहां से हटाकर अन्य कार्य में लगाए जा सकेंगे। बताया गया है कि एलईडी लाइटें लगाने से करीब 60 फीसद तक बिजली बचेगी।

गणतंत्र दिवस पर कम रोशनी के बल्ब लगाकर बचाई जाएगी बिजली
नैनीताल। बिजली व ऊर्जा बचाने की मुहिम इस वर्ष राष्ट्रीय पर्व गणतन्त्र दिवस के अवसर पर भी दिखाई देगी। बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय पर्व के कार्यक्रमों की तैयारी के सिलसिले में सीडीओ प्रकाश चंद्र द्वारा ली गयी बैठक में खास तौर पर कहा गया कि इस दौरान हर वर्ष की तरह जनपद के सभी सरकारी, अर्धसरकारी भवन 25 जनवरी की शाम से ही कम वोल्टेज के बल्ब लगाकर प्रकाशमान किये जायेंगे, ताकि बिजली-ऊर्जा बचाई जा सके।

स्वच्छता एप में नैनीताल प्रदेश में तीसरा, देश में 537वां
नैनीताल। स्वच्छ भारत सर्वेक्षण के तहत ‘स्वच्छता ऐप’ को नगर वासियों द्वारा डाउनलोड कर इसका उपयोग करने एवं इसमें दर्ज शिकायतों के निस्तारण के मामले में नैनीताल बृहस्पतिवार तक उत्तराखंड के शहरों में तीसरे और देश में 537वें स्थान पर है। नगर पालिका ईओ रोहिताश शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड में नैनीताल से पहले चंबा पहले और मुनि की रेती दूसरे स्थान पर है। उल्लेखनीय है कि इस सर्वेक्षण में देश के 4041 शहर प्रतिभाग कर रहे हैं। बीती चार जनवरी से केंद्रीय टीम भी नगर की व्यवस्थाओं का सर्वेक्षण कर गयी है। जिसके आधार पर आगे रैंकिंग की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 2017 के स्वच्छता सर्वेक्षण में नैनीताल देश के 434 शहरों में 330वें पायदान पर रहा था।

स्वच्छता एप को यहाँ से डाउनलोड करें.

 

 

आउटसोर्सिंग से नियमानुसार नियुक्त कर्मियों को नियमित करना होगा बाध्यकारी

-ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों में उपनल आदि के माध्यम से नियुक्त संविदा कर्मियों के बाबत औद्योगिक न्यायाधिकरण ने दिया फैसला, करीब चार हजार उपनल कर्मचारियों को दीपावली से पहले मिल सकती है पक्की नौकरी  
-सर्वोच्च न्यायालय के बहुचर्चित उमा देवी प्रकरण के मामले में नजीर बन सकता है यह फैसला
नैनीताल। औद्योगिक न्यायाधिकरण ने ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों में उपनल आदि के माध्यम से नियुक्त संविदा कर्मियों के बाबत महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि यदि ऐसे कर्मचारी विनियमितीकरण नियमावली 2011 के अंतर्गत नियमितीकरण की श्रेणी में नहीं आते हैं, तो निगम इन पदों के सापेक्ष संगत सेवा नियमों के अंतर्गत नियमित चयन प्रक्रिया की कार्यवाही में लाए जाने पर इन कर्मचारियों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने का विधिक रूप से बाध्य हैं। साथ ही यदि इनमें से कुछ कर्मचारी प्रतियोगी परीक्षा में प्रतिभाग करने के लिये आयु के कारण अनर्ह हो गए हैं तो उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के उमा देवी व स्टील अथौरिटी ऑफ इंडिया के प्रकरणों की तरह आयु सीमा में व तकनीकी पदों को छोड़कर शैक्षिक योग्यता में छूट देने के लिये भी विधिक रूप से बाध्य हैं। यह भी कहा गया है कि जो कर्मचारी विनियमितीकरण नियमावली की परिधि में नहीं आते हैं, वे इन निममों के ही दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं, और इस कारण वे उमा देवी व अन्य के प्रकरण में दिये गए दृष्टांत कके तहत बराबर वेतन वृद्धि, वेतन व डीए आदि लाभ प्राप्त करने के भी अधिकारी हैं।
बताया गया है कि ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों के कर्मचारी अपने यहां उपनल आदि के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को रखने के खिलाफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय की शरण में गए थे। उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने इस मामले में वर्ष 2013 में इनके पक्ष में फैसला सुनाया था। जिसे सरकार ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ में चुनौती दी थी। खंडपीठ ने मामले को औद्योगिक न्यायाधिकरण का बताते हुए न्यायाधिकरण से मामले को जल्द निपटाने के निर्देश दिये थे। इसी मामले में आज न्यायाधिकरण का यह फैसला आया है। फैसले को संविदा व आउटसोर्स कर्मियों के लिहाज से उमा देवी व अन्य के मामले के आलोक में भविष्य के लिहाज से दूरगामी व ऐतिहासिक फैसला तथा ठीक दीवाली से पूर्व तोहफे की तरह माना जा रहा है।

कुमाऊं विवि छात्र संघ चुनाव में इस बार अनुकरणीय छात्र नेता

छात्र संघ के प्रत्याशी अभिषेक मेहरा, विकास कत्यूरा व आकांक्षा तिवाड़ी।
  • छात्रा उपाध्यक्ष प्रत्याशी आकांक्षा तिवाड़ी कर चुकी हैं देहदान की घोषणा 
  • छात्र उपाध्यक्ष प्रत्याशी विकास कत्यूरा बना चुके हैं संस्कृति व पलायन की समस्या पर तीन लघु फिल्में
  • अध्यक्ष प्रत्यासी अभिषेक मेहरा की याचिका पर ही मिला स्थानीय छात्र-छात्राओं को अधिमान अंकों का लाभ, रहे हैं कॉलेज के सर्वश्रेष्ठ जिमनास्ट, जिमनास्टिक के कोच भी हैं, और कर चुके हैं अखिल भारतीय अंतरविश्वविद्यालीय कयाकिंग व कनोइंग प्रतियोगिता में कुमाऊं विवि का प्रतिनिधित्व 

नवीन जोशी, नैनीताल। छात्र संघ चुनावों में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें लागू होने के बाद व खासकर इसके एक ही बार चुनाव लड़ने के प्राविधान से छात्र राजनीति में गिरावट आने के आरोप अक्सर लगते रहते हैं। इस कारण सभी प्रत्याशी पहली व आखिरी बार ही चुनाव लड़ते हैं, यानी अनुभवी नहीं होते, और उनका एक वर्ष का कार्यकाल भी कुछ करने की जगह सीखने में ही चला जाता है। ऐसे में छात्र गुट हावी हुए हैं, और एक तरह से वे ही हर वर्ष अपने प्रत्याशी खड़े करके अपनी प्रतिष्ठा पर चुनाव लड़ाते हैं। लेकिन कुमाऊं विश्व विद्यालय के डीएसबी परिसर के छात्र संघ चुनावों में परिणाम चाहे जो हों, लेकिन इस चुनाव में जैसे कुछ प्रत्याशी स्वयं अपने पूर्व कार्यों व पहचान के दम पर चुनाव मैदान में खड़े होने जा रहे हैं। वे पारंपरिक तौर पर बीए ही नहीं, बीकॉम, बीएससी व एमएससी की कठिन पढ़ाई भी कर रहे हैं। इसे छात्र राजनीति के लिये सुखद व अनुकरणीय कहा जा सकता है।

राष्ट्रीय सहारा, 20 सितम्बर 2017, पेज-10

डीएसबी परिसर के छात्र संघ चुनाव में छात्रा उपाध्यक्ष पद पर एक प्रत्याशी हैं-आकांक्षा तिवाड़ी। आकांक्षा बीएससी के पांचवे सेमेस्टर यानी अंतिम वर्ष की छात्रा हैं, और पिछले दो वर्षों में 65 फीसद से अधिक अंकों से उत्तीर्ण हुई हैं। किंतु यही उनका पूरा परिचय नहीं है। बल्कि वे पिछले दिनों अपनी माता, नगर के सेंट जेवियर कॉलेज में हिंदी की शिक्षिका लता तिवाड़ी और सहेली अर्चना कुमारी के साथ देहदान की घोषणा कर सुर्खियां बटोर चुकी हैं। डीएम के समक्ष यह घोषणा करते हुए उनका कहना था कि मानव सभ्यता के उत्थान, खासकर देश में मेडिकल के छात्र-छात्राओं को प्रायोगिक कार्यों के लिये मानव देह की कमी की समस्या के मद्देनजर वे यह पहल कर रही हैं। वहीं छात्र उपाध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी विकास कत्यूरा प्रथम श्रेणी में बीकॉम की परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत पत्रकारिता एवं जन संचार में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। विकास तीन लघु फिल्में-अपनी संस्कृति को न भूलने का संदेश देती गुमराज एक जिंदगी तथा राज्य से पलायन की विभीषिका को प्रदर्शित करती पहला कदम व मेरा उत्तराखंड बना चुके हैं, और इधर बाबा नींब करौरी पर एक लघु फिल्म के निर्माण की प्रक्रिया में हैं। इन दोनों उपाध्यक्ष प्रत्याशियों का कहना है कि वे अब तक परिसर की समस्याओं को दूसरी ओर से देखते आये हैं, लेकिन अब उन्होंने ठाना है कि दूसरी ओर जाकर स्वयं उन समस्याओं का निदान करें। विकास कहते हैं वे जीते तो अपने चुनाव पूर्व वादों पर हर तीन माह में हुई प्रगति को सार्वजनिक करेंगे। वहीं अध्यक्ष पद पर एक प्रत्याशी हैं अभिषेक मेहरा। अभिषेक एमएससी प्रथम वर्ष के छात्र हैं। वे अभी हाल में कुमाऊं विवि द्वारा स्थानीय छात्रों को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए एनसीसी, एनएसएस व खेल आदि के अधिमान अंक देने से मना करने के बहुचर्चित मामले में तब चर्चा में आये, जब उन्होंने इस मामले को उच्च न्यायालय में न केवल चुनौती दी, वरन जीते भी। इसके बाद ही स्थानीय छात्र-छात्राओं को अधिमान अंकों का लाभ देने का रास्ता साफ हुआ। इसके अलावा भी अभिषेक का परिचय एक खिलाड़ी के रूप में भी है। वे कयाकिंग व कनोइंग में अखिल भारतीय अंतरविश्वविद्यालीय प्रतियोगिता में कुमाऊं विवि का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। साथ ही फुटबाल के भी अच्छे खिलाड़ी हैं, और पढ़ाई करने के साथ ही नगर के सेंट मेरीज कान्वेंट स्कूल के जिमनास्टिक के कोच भी हैं, और स्वयं अपने सेंट जोसफ कॉलेज के सर्वश्रेष्ठ जिमनास्ट रह चुके हैं। वे कहते हैं, लोग केवल छात्र राजनीति के ‘गंदी’ हो जाने पर चिंता जताते हैं। उनकी कोशिश है, इसमें घुसकर इसे साफ करेंगे। आज तक किसी के द्वारा न सोचे गए, हिंदी माध्यम के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिये अंग्रेजी माध्यम में अपनी बात रखने एवं प्रोत्साहन के लिये प्रेरणास्पद लेक्चर रखवाने जैसे प्रयास करेंगे।

लिंगदोह समिति की प्रमुख सिफारिशें :
  • – उम्र सीमा यूजी में 22 वर्ष, पीजी के लिए 25 वर्ष व शोध छात्र के लिए 28 वर्ष।
  •  – चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी।
  • – चुनाव लड़ने के लिए नियमित छात्र होना जरूरी।
  • – आपराधिक रिकॉर्ड, मुकदमा, सजा या अनुशासनात्मक कार्रवाई पर चुनाव से बैन।
  • – एक प्रत्याशी का अधिकतम खर्च पांच हजार रुपये।
  • – प्रिंटेड पोस्टर, पम्फलेट या प्रचार सामग्री के प्रयोग की अनुमति नहीं।
  • – कैंपेन में लाउड स्पीकर, वाहन एवं जानवरों का प्रयोग अनुबंधित।
मां-बेटी और सहेली ने लिया देहदान का संकल्प
अंगदान के लिये डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी को संकल्प पत्र सोंपती मां-बेटी और सहेली।

नैनीताल। सरोवरनगरी की एक बेटी ने अपनी मां और अपनी सहेली के साथ देहदान का संकल्प लिया है। तीनों ने इस आशय का एक पत्र देहदान की सुविधा युक्त हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज को भेजा है, और इसकी प्रति डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी को भी सोंपी है। अंगदान का संकल्प लेने वाली लता तिवाड़ी पेशे से शिक्षिका हैं। लता ने यह घोषणा करते हुए कहा कि मृत्यु के उपरांत निर्जीव मानव शरीर के अंतिम संस्कार से नदियां प्रदूषित होती हैं। इससे अच्छा है कि इसका सदुपयोग किया जाए। वे मानव सभ्यता की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिये कुछ कर रही हैं, इससे मन को काफी संतोष प्राप्त हो रहा है। वहीं उनकी पुत्री आकांक्षा तिवाड़ी ने कहा कि भारत में 0.01 फीसद लोग ही अंगदान व देहदान करते हैं, जबकि विदेशों में यह आंकड़ा 80 से 90 फीसद तक है। इस कारण भारत में चिकित्सा विज्ञानियों और छात्र-छात्राओं को शरीर विज्ञान में शोध एवं अध्ययन के लिये मानव शरीर नहीं मिल पाते हैं। इसलिये भारत में चिकित्सा विज्ञान विदेशों के मुकाबले कहीं पीछे है। यही सोचकर उन्होंने मृत्यु उपरांत देहदान का संकल्प लिया है। वहीं उनकी सहेली अर्चना कुमारी का कहना है कि लोग मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति की कामना के लिये तीर्थाें की यात्रा करते हैं। यदि उनके बाद उनका शरीर किसी काम आता है तो यही उनके लिये मोक्ष की प्राप्ति होगी।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व जनपद के शिक्षक संतोष मिश्र व तीलू रौतेली पुरस्कार विजेता वरिष्ठ साहित्यकार आशा शैली भी देहदान का संकल्प कर चुकी हैं। गौरतलब है कि एनॉटमी की पढ़ाई के लिये मानव के मृत शरीरों की जरूरत पड़ती है। इन दिनों दो साध्वियों से दुराचार के आरोप में जेल भेजे गये गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा पर अपने डेरे में लोगों की हत्या कर शवों को देश के अन्य राज्यों के साथ उत्तराखंड के चिकित्सालयों में भी इस हेतु बेचे जाने की चर्चाएं हैं। ऐसे में एक बेटी द्वारा अपनी मां और सहेली के साथ देहदान का संकल्प लेना समाज के लिये अनुकरणीय उदाहरण है। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने भी उनकी पहल की सराहना की है, तथा इस पहल को अन्य लोगों के लिये भी अनुकरणीय बताया है।

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