नैनीताल बैंक : अचानक विलय-विनिवेश के मुद्दे पर विरोध की जगह एक मंच पर आये अधिकारी-कर्मचारी

नैनीताल बैंक मुख्यालय में प्रदर्शन करते एनबीएसए के पदाधिकारी।

-मांग अब विनिवेश न होने, होने की स्थिति में उत्तराखंड सरकार द्वारा अंश लिये जाने की ओर मुड़ी
नैनीताल, 21 मई 2018। नैनीताल बैंक में सोमवार को विलय के मुद्दे पर अधिकारियों व कर्मचारियों के दो संगठनों के एक-दूसरे के आमने-सामने की संभावना जताई जा रही थी। किंतु कर्मचारियों के संगठन-नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन एवं अधिकारियों के एक संगठन-नैनीताल बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी तय विरोध के लिए बैंक मुख्यालय में मिले तो कुछ देर बाद एक ही मंच साझा करते नजर आये। इसे नाटकीय घटनाक्रम कहें कि दोनों के बीच लंबी संवादहीनता के बीच बने संवाद का असर, दोनों की ओर से कहा गया कि वे कमोबेश एक ही मांग कर रहे हैं। दोनों का मानना है कि नैनीताल बैंक का विरासत महत्व की पहचान बनी रहनी चाहिए। बैंक ऑफ बड़ौदा नैनीताल बैंक से जो अपनी शेयरधारिता बेचना चाहता है, उसे उत्तराखंड सरकार खरीद कर बैंक का अधिग्रहण कर ले। ऐसा न हो पाये तो अन्य बैंकों को कुछ-कुछ शेयर बेचे जाएं, या बैंक का ‘आईपीओ’ निकाला जाए, अन्यथा अंतिम विकल्प के तौर पर बैंक ऑफ बड़ौदा इसका स्वयं में विलय कर दे। बैंक को निजी हाथों में न बेचे। साथ ही बैंक का नया ‘डिजिटल वेंचर’ खोलने पर भी दोनों संगठनों के सुर विरोध में कमोबेश समान दिखे।
इससे पूर्व सोमवार सुबह अपने तय विरोध कार्यक्रम के तहत नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन-एनबीएसए के सदस्यों ने अध्यक्ष अभय गुप्ता एवं महासचिव प्रवीण साह के नेतृत्व में बैंक मुख्यालय में प्रदर्शन, नारेबाजी एवं सभा की। इस दौरान नैनीताल बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रशेखर कन्याल, सचिव पीयूष पयाल, राज वैभव, माला सोनी, दीपक सनवाल, निशा कामत, राकेश तिवाड़ी व सुमित तिवाड़ी आदि पदाधिकारी भी बैंक मुख्यालय में ही सांसद भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता वाली संसदीय याचिका समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए मौजूद थे। कुछ देर बाद पयाल ने एनबीएसए के मंच से भी अपनी बात रखी, जिस पर किसी तरह की आपत्ति नहीं देखी गयी। इस दौरान दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना था कि नैनीताल बैंक पूरे उत्तर भारत का इकलौता पब्लिक सेक्टर का बैंक है। बैंक पिछले 43 वर्षों से लगातार लाभ में हैं, एवं मौजूदा हालातों में भी इसका एनपीए सबसे कम है। वैसे नैनीताल बैंक अभी 650 करोड़ रुपए का बैंक है, जिसमें 2850 करोड़ का डिजिटल वेंचर बनाने की कोई तुक नहीं है। इसका प्रायोजक बैंक-बॉब इस हेतु नैनीताल बैंक से अपनी 30 फीसद हिस्सेदारी बेचकर 400 करोड़ रुपए प्राप्त करना चाहता है, जो कि 2850 करोड़ के मुकाबले काफी कम है। अलबत्ता, इस पूरे प्रकरण में व्यस्तता के चलते नैनीताल बैंक के चेयरमैन मुकेश शर्मा का पक्ष नहीं मिल पाया, हालांकि वे पहले कह चुके हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जाना समय की मांग है। उन्हें अभी उत्तराखंड सरकार से बेहतर बैंकिंग सेवाओं के लिए उत्तराखंड रत्न मिला है, तथा बैंक की जीएमवीएन के चारधाम यात्रियों के लिए कैश कार्ड योजना का शीघ्र ही प्रधानमंत्री मोदी शुभारंभ करने वाले हैं। इस दौरान एनबीएसए के आंदोलन में मुकेश पंत, एसके बिष्ट, आनंद बाजपेयी, प्रदीप साह, अजय बिष्ट, त्रिभुवन फर्त्याल, मुन्ना ढैला, एमसी सती सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे।
नैनीताल बैंक मुख्यालय में प्रदर्शन करते एनबीएसए के पदाधिकारी।

संसदीय याचिका समिति ने सुना नैनीताल बैंक के बाबत सभी पक्षों का पक्ष

नैनीताल, 21 मई 2018। सोमवार को तय कार्यक्रम के अनुसार स्थानीय सांसद भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता वाली संसदीय याचिका समिति ने नगर के मनु महारानी होटल में नैनीताल बैंक के विनिवेश व विलय से संबंधित नैनीताल बैंक ऑफीसर्स यूनियन एवं नैनीताल बैंक तथा बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों का पक्ष सुना। ऑफीसर्स यूनियन के सदस्य नितेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने संसदीय समिति के समक्ष अपने याचिका में उल्लेखित पक्ष को स्पष्ट किया। कहा कि किसी भी कीमत में नैनीताल बैंक का निजीकरण एवं विनिवेश नहीं होना चाहिए। यदि ऐसी स्थिति आनी जरूरी हो तो बैंक को निजी हाथों में दिये जाने के बजाय उत्तराखंड सरकार को अथवा अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों को इसे दिया जाना चाहिए, एवं यह भी संभव न हो तो नैनीताल बैंक का प्रायोजक बैंक-बैंक ऑफ बड़ौदा ही इसे स्वयं में विलय कर ले। वहीं नैनीताल बैंक एवं बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से दी गयी दलीलें पता नहीं चल पायीं। वहीं संसदीय याचिका समिति के अध्यक्ष भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि समिति की कार्रवाई गोपनीय होती है। समिति आगे केंद्रीय वित्त सचिव आदि से भी नैनीताल बैंक के विनिवेश तथा इसके द्वारा डिजिटल वेंचर खोले जाने की संभावनाओं पर पक्ष जान सकती है, तथा आखिर में अपनी रिपोर्ट संसद में रखेगी।

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नवीन जोशी, नैनीताल (19 मई 2018)। उत्तराखंड के अपने करीब एक सदी पुराने ऐतिहासिक और इकलौते वाणिज्यिक बैंक-द नैनीताल बैंक लिमिटेड को इसके पैतृक बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा में मर्जर यानी विलय एवं विनिवेश किये जाने का मामला फिर गर्म होने जा रहा है। नैनीताल बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन ने संसद की याचिका समिति के समक्ष एक याचिका दायर की है, जिसमें नैनीताल बैंक को निजी हाथों में न दिये जाने और इसकी जगह इसका इसके पैतृक बैंक-बैंक ऑफ बड़ौदा में मर्जर कर दिये जाने की मांग की गयी है। आगामी सोमवार यानी 21 मई को स्थानीय सांसद भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता वाली 14 सांसदों युक्त संसदीय याचिका समिति केवल इसी मामले पर चर्चा करने के लिए नैनीताल पहुंच रही है। वहीं दूसरी ओर नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन इसके विरोध में उतर आई है। एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को इस दिन नैनीताल बैंक मुख्यालय में विरोध करने के लिए बुला लिया है।

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राष्ट्रीय सहारा, 20 मई 2018

उल्लेखनीय है कि 1922 में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत एवं उनके साथियों के प्रयासों से स्थापित और अब 96 वर्ष के हो चले नैनीताल बैंक की देश के पांच राज्यो में 135 शाखाएं हैं। इस वर्ष भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) के द्वारा बैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2017 का निजी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ एमएसएमई यानी ‘माइक्रो एंड मीडियम स्केल इंटरप्राइज’ बैंक का पुरस्कार प्राप्त नैनीताल बैंक 1975 से देश के तीसरे सबसे बड़े बैंक-बैंक ऑफ बड़ौदा के अधीन हैं, और वर्तमान में इसके 98.57 फीसद शेयर बैंक ऑफ बड़ौदा के पास हैं। इधर हाल के दिनों में बैंक ऑफ बड़ौदा नैनीताल बैंक के जरिये अपनी ‘कैपिटल’ को बढ़ाने की कोशिश में बताया जाता है। ऐसे में सोमवार का दिन नैनीताल बैंक के लिहाज से महत्वपूर्ण होने जा रहा है, जब अधिकारियों और कर्मचारियों के एक वर्ग बैंक के मर्जर के प्रश्न पर आमने-सामने हो सकते हैं।

नैनीताल बैंक का डिजिटल फॉर्मेट पर जाना समय की मांग: चेयरमैन

नैनीताल बैंक के चेयरमैन मुकेश शर्मा

नैनीताल बैंक के चेयरमैन मुकेश शर्मा का कहना है कि आगे बैंक की 8 नई शाखाएं खोलने, एटीएम की संख्या 27 से बढ़ाकर 50 व पीओएस मशीनों की संख्या 987 को 1000 और बढ़ाने तथा फिनेकल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म पर जाकर ‘डिजिटलाइज’ होने की ओर आगे बढ़ाने की योजना है। उन्होंने पुष्टि की कि नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन ने संसदीय समिति के समय इसका बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय किये जाने को याचिका दायर की है। यदि नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन भी इस संबंध में अपनी कोई बात रखना चाहता है तो बैंक का ही अंग होने के नाते उन्हें ही अपनी बात रखने का पूरा हक है। अलबत्ता उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन के इस दौरान नैनीताल में होने की जानकारी से इंकार किया।

डिजिटल वेंचर और डिशइन्वेंस्टमेंट पर पूछेंगे सवाल: एनबीएसए
नैनीताल। सोमवार को संसदीय याचिका समिति के साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन के भी नैनीताल में होने की स्थितियों को देखते हुए नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन के महासचिव प्रवीण साह ने सोशल मीडिया के जरिये सभी वर्गों का आह्वान करते हुए याद दिलाया है कि जिस तरह वर्ष 2006 में नैनीताल बैंक के अस्तित्व को बचाने में नैनीताल की जनता की जीत हुई थी, उसी तरह 21 मई को भी बैंक को बचाने के लिए सबके सहयोग की आवश्यकता है। इस हेतु सभी से नैनीताल बैंक के मुख्यालय पहुंचने का आह्वान किया गया है। साह का कहना है कि संसदीय समिति के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा के चेयरमैन के भी नैनीताल पहुंचने की संभावना है। एसोसिएशन नैनीताल बैंक को निजी हाथों में न दिये जाने के साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय व विनिवेश भी न किये जाने की मांग करती है।

अल्मोड़ा, रानीखेत व कौसानी भी जाएगी संसदीय याचिका समिति
नैनीताल। प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय सांसद भगत सिंह कोश्यारी की अध्यक्षता वाली 14 सांसदों की सदस्यता वाली संसदीय याचिका समिति 19 से 24 मई तक प्रदेश में है। इस दौरान आगामी 21 मई को समिति नैनीताल में नैनीताल बैंक के मर्जर पर सभी पक्षों को सुनेगी। वहीं आगे 22 मई को रानीखेत में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, 23 मई को अल्मोड़ा में वन विभाग एवं 24 मई को कौसानी में पर्यावरण के विषयों पर समिति सुनवाई करेगी।

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राष्ट्रीय सहारा, 11 अप्रैल 2018

नैनीताल (12 जनवरी 2018) द नैनीताल बैंक के निजीकरण की तैयारी का विरोध कर रहे कर्मचारी-अधिकारियों ने प्रबंधन की सहमति पर मामला बैंक की बोर्ड बैठक में रखे जाने का निर्णय स्वीकार कर लिया है। इन दिनों लगातार विरोध कर रहे कार्मिकों ने शुक्रवार को बैंक प्रबंधन से वार्ता की। आंदोलित कर्मियों ने कहा कि बोर्ड के निर्णय के बाद कार्मिक आगे की रणनीति तय करेंगे। इससे पहले कर्मचारियों ने मुख्यालय में नारेबाजी कर विरोध व्यक्त किया। बता दें कि बीती 10 अप्रैल को हिन्दुस्तान में द नैनीताल बैंक के निजीकरण से संबंधित खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। जिसके बाद बैंक से जुड़े कर्मचारी व अधिकारियों के संगठनों ने इसका विरोध करते हुए कार्य बहिष्कार किया। मुख्यालय में नैनीताल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन तथा नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन के भारी विरोध के बाद शुक्रवार को प्रबंधन ने कार्मिकों के साथ वार्ता की। इस दौरान प्रबंधन ने कार्मिकों की मांगों को बैंक की आगामी बोर्ड बैठक में रखे जाने की बात कही। तय किया गया कि इसके बाद कर्मचारी-अधिकारी आगे की रणनीति तय करेंगे। कर्मचारी नेताओं के अनुसार डिजिटल वेंचर का हवाला देकर टेक्नोलॉजी को विकसित करने की बात कही जा रही है, जोकि कर्मचारियों तथा बैंक के हित में ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक शाजिश है। जिसके तहत बैंक को पिछले दरवाजे से बेचने की तैयारी की जा रही है। आरोप लगाया कि यूनियन की ओर से आवाज उठाने पर पदाधिकारियों का दूर-दराज तबादला कर दिया जा रहा है। नैनीताल बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रशेखर कन्याल ने कहा कि बैंक प्रबंधन की ओर से कर्मचारी और अधिकारियों के हित में निर्णय नहीं लिया जा रहा है। डिजिटल वेंचर के नाम पर करोड़ों का खर्चा किया जा रहा है। उन्होंने बैंक से जुड़े हर कर्मचारी को प्रमोट करने की मांग की है। चेतावनी दी है कि सकारात्मक निर्णय नहीं लिए जाने पर संगठन अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। बैंक के चेयरमैन मुकेश कुमार शर्मा के अनुसार प्रबंधन की ओर से कार्मिकों तथा बैंक के हित में निर्णय लिया जाएगा। कार्मिकों को चिंतित होने की आवश्यक्ता नहीं है। इस मौके पर महासचिव पीयूष पयाल, प्रवीण साह, निशा कामत, राज वैभव, मालासोनी, विजेता कपिल, सोनम शर्मा, सुमित भंडारी, कमलेश साह आदि मौजूद रहे।

-बैंक के चेयरमैन व सीईओ मुकेश शर्मा ने मीडिया में आई ऐसी खबरों को बताया निराधार
-कहा डिजिटल करेंगे बैंक को, इस हेतु कैपिटल जुटाने के लिए रिजर्व वैंक से लेंगे अनुमति
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के अपने करीब एक सदी पुराने ऐतिहासिक और इकलौते वाणिज्यिक बैंक नैनीताल बैंक लिमिटेड के अस्तित्व, नाम के मिटने की खबरों को बैंक के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश शर्मा ने निराधार बताया है। उन्होंने साफ कहा है कि नैनीताल बैंक की अपनी ‘ब्रांड वैल्यू’ और राज्य के लोगों का जुड़ाव है। लिहाजा नैनीताल बैंक का नाम और अस्तित्व हमेशा बना रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि नैनीताल बैंक में 98.57 फीसद हिस्सेदारी रखने वाला ‘पैरंटल बैंक’ बॉब यानी बैंक ऑफ बड़ौदा ना ही अपनी हिस्सेदारी कम करेगा, ना ही इसका मर्जर यानी अधिग्रहण करेगा। इसके साथ ही उन्होंने नैनीताल बैंक को आज और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अत्याधुनिक डिजिटल सुविधाओं से युक्त करने की बात कही। बताया कि नैनीताल बैंक ने ‘डिजिटल’ होने के लिए धनराशि जुटाने के लिए देश की शीर्ष नियामक बैंक आरबीआई यानी भारतीय रिजर्व बैंक में आवेदन किया था। आरबीआई ने उनसे इस संबंध में अपनी बोर्ड में नये सिरे से इस संबंध में विचार-विमर्श पूरी योजना युक्त प्रस्ताव लाने को कहा था। आरबीआई के निर्देशों पर नैनीताल बैंक की बोर्ड ने प्रस्ताव पारित कर दिया है। इस प्रस्ताव को अब दुबारा से आरबीआई में प्रस्तुत किया जा रहा है। आगे आरबीआई नैनीताल बैंक को डिजिटल करने के लिए धनराशि जुटाने को आईपीओ लाने या बड़े संस्थानों से धनराशि के प्रस्ताव लेने जैसी जो भी अनुमति देता है, उसके अनुरूप ही आगे कार्रवाई की जाएगी।
मंगलवार को विशेष भेंट में श्री शर्मा ने कहा कि नैनीताल बैंक का वर्तमान एवं भविष्य की बैंकिंग जरूरतों के अनुरूप पेशेवर रवैया अपनाने और डिजिटल फॉर्मेट में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त होने की आवश्यकता है। इसी कड़ी में नैनीताल बैंक ने अपने खाताधारकों को एटीएम व डेबिट कार्ड देने व एटीएम स्थापित करने तथा मोबाइल व इंटरनेट बैंकिंग आदि की शुरुआत पहले ही कर दी है, लेकिन आगे अपने उपभोक्ताओं को घर बैठे ऑनलाइन खाता खोलने, ऋणों के लिए ऑनलाइन आवेदन करने और ऋण ऑनलाइन ही स्वीकृत होने जैसी अनेक सुविधाएं देने की योजना है। इस हेतु आवश्यक धनराशि जुटाने के लिए नैनीताल बैंक के द्वारा आरबीआई से अनुमति मांगी गयी थी। इस पर आरबीआई ने अपनी बोर्ड में विचार-विमर्श कर पूरा ठोस समग्र प्रस्ताव लाने को कहा था। यह प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में स्वीकृत होने के बाद आरबीआई को भेजा जा रहा है। अलबत्ता, दावा किया कि धनराशि जुटाने में नैनीताल बैंक के पैरंटल बैंक बॉब का अपनी हिस्सेदारी कम करने, नैनीताल बैंक का अधिग्रहण करने जैसा कोई इरादा नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में मीडिया में आई खबरों के बाद ऑल इंडिया नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन के महामंत्री प्रवीण साह व ऑल इंडिया नैनीताल बैंक ऑफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीएस कन्याल भी अध्यक्ष व सीईओ से मिलकर इस संबंध में अध्यक्ष श्री शर्मा से मिले थे।

उल्लेखनीय है कि ‘नवीन समाचार’ ने ठीक तीन माह पूर्व 11 व 12 जनवरी 2018 को ‘नैनीताल बैंक’ के बारे में यह समाचार ‘ब्रेक’ किया था। इधर नैनीताल बैंक द्वारा कुछ अधिकारियों को रूटीन में इधर से उधर किया गया है, जिसके बाद मीडिया में खबर आई है कि नैनीताल बैंक मे 98.57 फीसद शेयरधारिता रखने वाला बॉब यानी बैंक ऑफ बड़ौदा अपने ‘कैपिटल गेन’ के लिए शेयर बेचने की राह पर निकलने जा रहा है। आशंका जताई गई है कि बॉब की पहले चरण में नैनीताल बैंक से अपनी 25 फीसदी शेयर बेचने की योजना है। शेयर बेचने से मिलने वाली धनराशि से बैंक को डिजिटल बैंक बनाने की बात कही जा रही है, जबकि अधिकारियों का कहना है कि बैंक पहले से ही डिजिटल होने के लिए कई कदम उठा चुका है। असल मकसद बॉब के बढ़ते एनपीए के कारण घटते लाभ को निरंतर लाभ के पथ पर प्रशस्त नैनीताल बैंक का निजीकरण करना है।
हालांकि ‘नवीन समाचार’ को यह भी जानकारी है कि देश के सर्वोच्च नियामक बैंक-भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ बड़ौदा के नैनीताल बैंक से अपनी शेयरधारिता कम करने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।

पूर्व आलेख : 12 जनवरी 2018: साफ़ हुआ, नैनीताल बैंक में अपनी शेयरधारिता बेचने की कोशिश में आरबीआई गया था बॉब

  • नैनीताल बैंक के चेयरमैन मुकेश शर्मानैनीताल बैंक को बेचेगा नहीं, पर शेयरधारिता में बदलाव की मंशा रखता है बॉब
  • नैनीताल बैंक के चेयरमैन ने कहा बॉब के पास 98.57 फीसद शेयर हैं, इनमें कोई बदलाव हो सकता है, पर बेचने की बात गलत है
राष्ट्रीय सहारा, 13 जनवरी 2018

नैनीताल। नैनीताल बैंक को बेचे जाने के लिए इसके पैतृक बैंक-बैंक ऑफ बड़ौदा के भारतीय रिजर्व बैंक में अनुमति लेने जाने से संबंधित समाचार पर बैंक ऑफ बड़ौदा ‘बैकफुट’ पर आ गया लगता है। बॉब प्रबंधन से मिले संदेश के बाद नैनीताल बैंक के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश शर्मा ने इस संबंध में आज हुई प्रगति पर पूछे जाने पर कहा कि बैंक आफ बड़ौदा का नैनीताल बैंक में ‘मेजोरिटी स्टेक’ यानी बड़ा हिस्सा है। और बैंक ऑफ बड़ौदा अपने ‘ट्रांसफॉर्मेशन’ हेतु ‘कैपिटल’ बढ़ाने के प्रयास में है। इसी यानी ‘कैपिटल बढ़ाने’ की कोशिश में बॉब प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक गया था। आगे कुछ भी भारतीय रिजर्व बैंक एवं अन्य नियामकों से मिलने वाली स्वीकृतियों पर निर्भर करेगा। यानी बॉब जो भी करेगा, आरबीआई की स्वीकृति पर ही करेगा। कहा कि अपने खातों के सुधार के लिए बॉब को नैनीताल बैंक को बेचे जाने की बात गलत है। बैंक ऑफ बड़ौदा का नैनीताल बैंक की अपनी धारिता को बेचने की कोई योजना नहीं है, और वह नैनीताल बैंक का भविष्य में भी ‘बड़ा शेयर होल्डर बना रहेगा’। अलबत्ता, बातों में यह भी कहा कि बॉब के पास नैनीताल बैंक के 98.57 फीसद शेयर हैं, इसमें कोई बदलाव हो भी सकता है। इस प्रकार साफ़ हो गया है कि बैंक ऑफ़ बडौदा, नैनीताल बैंक को बेचने न सही बैंक में अपनी शेयरधारिता को बेचने की कोशिश में जरूर है, और इसकी अनुमति लेने के लिए ही बॉब आरबीआई गया था। इशारा समझा जा सकता है कि बैंक ऑफ़ बडौदा 50 फीसद से अधिक शेयर अपने पास रखकर भी नैनीताल बैंक का ‘मेजोरिटी स्टेक होल्डर’ रह सकता है। और इस पूरे प्रकरण में बैंक ऑफ़ बडौदा द्वारा नैनीताल बैंक को बेचने तथा इसमें अपनी हिस्सेदारी बेचने जितना मूल फर्क है।

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राष्ट्रीय सहारा, 12 जनवरी 2018

-रिजर्व बैंक ने कहा, पहले अपने बोर्ड से प्रस्ताव पास करके आएं: सूत्र
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के अपने करीब एक सदी पुराने ऐतिहासिक और इकलौते वाणिज्यिक बैंक नैनीताल बैंक लिमिटेड को इसके पैतृक बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा बेचे जाने और इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक जाने की चर्चाएं हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनीताल बैंक के 98.57 फीसद शेयर धारिता वाला देश का तीसरा सबसे बड़े बैंक-बैंक ऑफ बड़ौदा अपनी घटती ‘कैपिटल’ को बढ़ाने के लिए अपने स्वामित्व वाले नैनीताल बैंक को बेचने की कोशिश में है। इस खबर के बाद नैनीताल बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों में हड़कंप मचना तय है। पूछे जाने पर नैनीताल बैंक के चेयरमैन व मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश शर्मा ने बताया कि बीती रात्रि उनके संज्ञान में भी यह बात आई है। फिलहाल वह इसकी पुष्टि करने की स्थिति में नहीं हैं। वहीं नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन के महासचिव प्रवीण साह ने आरबीआई द्वारा फिलहाल बॉब को इस संबंध में टाले जाने की बात कही।

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लाइव मिंट

उल्लेखनीय है कि इस आलेख के 11 जनवरी की सुबह प्रकाशित होने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा प्रबंधन ने मुंबई में पत्रकार वार्ता कर ‘नैनीताल बैंक को बेचे जाने के लिए आरबीआई से अनुमति लेने’ के लिए किसी तरह के प्रयास से इंकार किया, और नैनीताल बैंक प्रबंधन को भी ईमेल के जरिए इस बात से अवगत कराया। यह सही है तो अच्छा है। किंतु आशंकाएं अपनी जगह हैं कि बॉब प्रबंधन नैनीताल बैंक में किसी तरह का आंदोलन आदि न छिड़ जाने के भय से भी आखिरी समय तक इस तरह के प्रयासों से इंकार कर सकता है। इस आलेख को देश की शीर्ष आर्थिक पत्रिका ‘बिजनेस स्टेंडर्ड’ और ‘लाइव मिंट’ ने भी प्रकाशित किया है।

उल्लेखनीय है कि 1922 में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत एवं उनके साथियों के प्रयासों से स्थापित और अब 96 वर्ष के हो चले नैनीताल बैंक की देश के पांच राज्यो में 135 शाखाएं हैं। बीते माह ही भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (एसोचैम) के द्वारा नैनीताल बैंक को बैंकिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2017 का निजी क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ एमएसएमई यानी ‘माइक्रो एंड मीडियम स्केल इंटरप्राइज’ बैंक का पुरस्कार प्राप्त हुआ है। अपने कार्य क्षेत्र के आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए सुनियोजित तरीके से काम कर रहा व सर्वोत्तम ग्राहक सेवा एवं बैंक के कर्मचारियों की कार्य निष्पादन शैली के कारण अपने ग्राहकों का लोकप्रिय बैंक 1975 में बॉब के अधिकार में आया। जिसके बाद बैंक प्रबंधन में उच्च पदों पर नियुक्तियां बॉब के द्वारा ही होती हैं।

बिकने नहीं देंगे, पर बॉब से पल्ला छूटे तो अच्छा: साह
नैनीताल। नैनीताल बैंक स्टाफ एसोसिएशन (एनबीएसए) के महासचिव प्रवीण साह का कहना है कि बॉब के अधीन आने के बाद से ही बैंक पर एक तरह से अत्याचार किए जाते और 1979 से ही इसे पूरी तरह अपने कब्जे से लेकर हड़पने के प्रयास चलते रहे। 2006 में भी ऐसी कोशिश हुई, जब बड़े आंदोलन के जरिए बॉब की इस मंशा का दमन किया गया। इधर ताजा चर्चाओं पर साह ने कहा कि अभी बॉब द्वारा नैनीताल बैंक को बेचे जाने की खबरों में कुछ भी साफ नहीं है। अलबत्ता, बॉब आरबीआई में नैनीताल बैंक को बेचे जाने की अनुमति लेने के लिए गये थे। आरबीआई ने बॉब से कहा कि पहले इसे अपनी बोर्ड से पास करवाइये। इसके बाद भी आरबीआई बेचे जाने की अनुमति देता अथवा नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। इस प्रकार अभी फिलहाल आरबीआई ने इन्हें टाल दिया है। आरबीआई की हमेशा से नैनीताल बैंक पर कृपा रही है, इसलिए बैंक अब तक बच भी पाया है। कहा कि बॉब की आर्थिक स्थिति अभी ठीक नहीं है। लिहाजा वह अपने नुकसान की भरपाई अपनी संपत्तियों को बेचकर करेगा। आगे देखने वाली बात होगी कि आरबीआई क्या अनुमति देता है। यदि वह नैनीताल बैंक के आईपीओ निकालने की अनुमति मिलती है, तो अच्छा है। इससे नैनीताल बैंक का बॉब के अत्याचारों से पल्ला छूटेगा। आगे बैंक के उद्धार के लिए हमारे पास अपनी योजना है। कहा कि जो भी होगा, एनबीएसए को विश्वास में लेकर होगा, अन्यथा बिना विश्वास में लिए बॉब कुछ गलत करता है तो यूनियन 2006 के बड़े आंदोलन की तरह किसी कीमत पर होने नहीं दिया जाएगा।

चर्चा संज्ञान में, बॉब से कर रहे हैं पुष्टि: शर्मा
नैनीताल बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा ने पूछे जाने पर कहा कि कल रात्रि उनके संज्ञान में आया है। वे बैंक ऑफ बड़ौदा से इसकी पुष्टि करने का प्रयास कर रहे हैं। कहा कि बिना भारतीय निजर्व बैंक एवं भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के बैंकिंग प्रभाग की अनुमति के इतना बड़ा निर्णय नहीं हो सकता है। ऐसा कोई निर्णय होगा तो उनकी जानकारी में भी आएगा। और बॉब उन्हें भी विश्वास में लेगा, तथा भारतीय निजर्व बैंक एवं केंद्रीय वित्त मंत्रालय के बैंकिंग प्रभाग से भी इसकी जानकारी ली जाएगी।

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