थराली का विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ेगी यह राष्ट्रीय पार्टी


सोमवार को नैनीताल क्लब में आयोजित बैठक में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते बसपा के प्रदेश प्रभारी प्रदीप कुमार जाटव।

-सभी निकायों में अध्यक्ष, पार्षद व सभासदों को टिकट देगी बसपा
नैनीताल। बहुजन समाज पार्टी प्रदेश में थराली सीट पर हो रहे विधानसभा का उपचुनाव नहीं लड़ेगी, अलबत्ता आगामी निकाय चुनावों में सभी नगर निकायों में अध्यक्ष एवं वार्डों के पार्षद व सभासदों पर पार्टी का टिकट देगी। यह दावा पार्टी के प्रदेश प्रभारी एवं यूपी के विधान परिषद सदस्य प्रदीप कुमार जाटव ने सोमवार को नैनीताल क्लब में आयोजित नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोक सभा सीट के कार्यकर्ताओं एवं निकाय चुनाव के दावेदारों की बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत में किया। उन्होंने साफ तौर पर के थराली उप चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा करते हुए प्रदेश प्रभारी जाटव ने कहा कि बसपा कभी भी उपचुनाव नहीं लड़ती है। यूपी में फूलपुर व गोरखपुर की तरह कैराना के उपचुनाव में भी पार्टी अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं कर रही है, बल्कि सपा के साथ राष्ट्रीय लोकदल प्रत्याशी का समर्थन कर रही है। कहा कि अगले कुछ दिनों में ही सभी निकायों में दावेदारों का पैनल तैयार कर लिया जाएगा, और चुनावों की घोषणा के तत्काल बाद ही पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जाएगी।
इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए निकाय चुनावों के लिए पार्टी सुप्रीमो बहन मायावती का संदेश एवं जीत के लिए टिप्स कार्यकर्ताओं को दिये। कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा का दलित प्रेम केवल चुनावों तक के लिए है। चुनाव होते ही भाजपा दलितों को भूल जाएगी। नगर अध्यक्ष रईश अहमद अंसारी ने मुख्यालय में मजबूती से निकाय चुनाव लड़ने व जीत दर्ज करने का विश्वास जताया। इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी भृगुराशन राव, प्रदेश अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह, महासचिव नारायण, सचिव हरीश सिनौली, शिव गणेश, अरविंद कुमार, सदानंद आजाद, विनोद, नितेंद्र वर्मा, जितेंद्र गौतम, शिव प्रसाद, राम प्रसाद, गोपाल आर्या, त्रिलोचन आर्या, रमेश राणा, अजय चंद्रा व विजय कुमार सहित बड़ी संख्या में पूरी लोक सभा से आये पदाधिकारी शामिल हुए।

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उत्तराखंड की राज्यसभा सीट से भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया विभाग के प्रभारी अनिल बलूनी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। गुरूवार को विधानसभा में मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की उपस्थिति में रिटर्निंग आॅफिसर मदन सिंह कुंजवाल ने बलूनी को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया। इसके बाद मुख्यमंत्री, उनके कैबिनेट मंत्रियों सहित भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायकों ने बलूनी को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने पर पर बधाई व शुभकामनाएं दी। विदित हो कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के नाम के भी तेजी से इस पद के लिए चर्चाओं में होने के बीच  त्रिवेंद्र रावत ने उनके नाम की घोषणा की थी। भाजपा ने बलूनी को राज्य सभा पहुंचा कर अब तक उठ रहे सवालों को शांत व सबको निरुत्तर कर दिया है। वे उत्तराखंड से ही हैं, साथ ही किसी राजनीतिक परिवार से भी नहीं हैं। वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पार्टी की  जिस तरह से प्रबल तरह से पैरवी करते हैं, उनसे उम्मींद की जा सकती है कि वे इसी तरह अपने राज्य उत्तराखंड की भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रबल तरह से पैरवी करेंगे। 

इससे पूर्व मूलतः पौड़ी के निवासी 45 वर्षीय बलूनी का नाम वर्ष 2017 के विधान सभा में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए भी चर्चा में आया था और वे चुनाव पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती देकर भी चर्चा में आये थे। बिहार व गुजरात के राज्यपाल रहे संघ के वरिष्ठ नेता सुंदर सिंह भंडारी के पसंदीदा व करीबी रहे बलूनी अब भाजपा अध्यक्ष अमित साह के विश्वासपात्रों में शामिल हैं ।

मालूम हो कि उत्तराखंड में राज्यसभा की कुल 3 सीटें हैं। इनमें से एक सीट (महेंद्र सिंह माहरा की) खाली हो रही है। यदि उनके विरुद्ध कोई दूसरा प्रत्याशी भी चुनाव में खड़ा होता तो 23 मार्च को चुनाव के दिन गैरसैंण में आयोजित होने जा रहे पहले बज़ट सत्र के दौरान ही राज्यसभा के लिए वोट डाले जाने का इतिहास भी बनना था। कम संख्या बल के मद्देनजर कांग्रेस ने इस चुनाव में पहले ही हार मानते हुए भाजपा को वाकओवर दे दिया है। 

अनिल बलूनी का परिचय

अनिल बलूनी त्रकारिता की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में भी सक्रिय और दिल्ली में संघ परिवार के करीब रहे। इसी बीच उन्हें संघ के जाने-माने नेता सुंदर सिंह भंडारी पसंद करने लगे। सुंदर सिंह भंडारी को जब बिहार का राज्यपाल बनाया गया तो वह बलूनी को अपना ओएसडी बनाकर ले गए। बिहार के बाद बलूनी भंडारी के साथ गांधीनगर जा पहुंचे जब भंडारी को गुजरात का राज्यपाल बनाया गया। 2002 में बलूनी देहरादून लौट आए। 26 साल की उम्र में राजनीति की ओर कदम बढ़ाते हुए उत्तराखंड की कोटद्वार सीट से चुनाव में हाथ आजमाया लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। उनका नामांकन अवैध घोषित हो गया था।

यह है राज्य की राजनीतिक स्थिति :

उत्तराखंड राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 11 विधायक हैं, जबकि दो निर्दलीय। ऐसे में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं दिखती। वजह ये कि यदि दो निर्दलीयों का समर्थन नहीं मिला और अपना कोई विधायक भी इधर-उधर हो गया तो किरकिरी हो सकती है। इस स्थिति का आंकलन कर कांग्रेस पहले ही साफ भी कर चुकी है कि वह प्रत्याशी नहीं उतारेगी।

वहीं भाजपा की बात करें तो उसके पास 1 सदस्य मगन लाल साह की मृत्यु के बाद 69 विधायकों के सदन में 56 सदस्य हैं। लिहाजा प्रचंड बहुमत होने के कारण उसकी जीत तय है। विपक्ष का कोई प्रत्याशी न उतरने पर इस सीट पर मतदान की नौबत नहीं आएगी।

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