किसानों की आत्महत्या: स्वामीनाथन कमेटी के अनुरूप तीन गुना एमएसपी दे सरकार

-साथ ही राज्य कृषक आयोग बनाने, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को पेंशन देने के लिए कोई योजना बनाने, 50 हजार तक के ऋण माफ करने, सस्ती मौसमी फसल बीमा व फसलों के खसरे युक्त मोबाइल बनाने के दिये निर्देश
नैनीताल। उत्तराखण्ड में कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या व असामयिक मौत के मामले में नैनीताल उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद शर्मा की खंडपीठ ने किसानों को एमए स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप औसत फसल लागत का तीन गुना एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य देने, उत्तराखंड में राज्य कृषक आयोग की स्थापना करने, आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को पेंशन देने के लिए कोई योजना बनाने, इंश्योरेंस कंपनियों से बात करके मौसमी फसल बीमा की योजना लागू करवाने, छोटे किसानों को 50 हजार रुपए तक के ऋण माफ करने या आसान दरों पर ऋण उपलब्ध कराने एवं केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय को राज्य में सभी फसलों का खसरा व उनमें बोयी गयी फसलों के ब्यौरे दर्ज करने योग्य मोबाइल ऐप बनाने के निर्देश दिये हैं।उल्लेखनीय है कि इस मामले में ऊधमसिंह नगर जिले के शांतिपुरी निवासी कांग्रेसी किसान नेता गणेश उपाध्याय ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को पार्टी बनाते हुए राहत की मांग की गयी थी। याचिका में कहा गया है कि राज्य में किसानों की स्थिति ब्लू ह्वेल गेम से भी अधिक ज्यादा खतरनाक हो गयी है।

गणेश उपाध्याय

इधर बृहस्पतिवार को याचिकाकर्ता एनडी तिवारी सरकार में सलाहकार रहे गणेश उपाध्याय ने पत्रकार वार्ता कर खंडपीठ के निर्णय की जानकारी दी। बताया कि खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को तीन माह के भीतर राज्य किसान आयोग बनाने, एमए स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप फसलों के औसत लागत मूल्य का तीन गुना एमएसपी देने, खाद्य भंडारण की व्यापक व्यवस्था करने आदि के निर्देश दिये हैं। साथ ही उच्च न्यायालय के इस फैसले को अन्य राज्यों के लिए भी नजीर साबित होने की बात कही।

“उत्तराखंड में पांच किसानों की मौत ब्लू ह्वेल गेम से भी अधिक खतरनाक”

नैनीताल। उत्तराखण्ड में कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या व असामयिक मौत के कथित पांच मामले उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय की दहलीज पर पहुंच गये हैं। मामले में नैनीताल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केएमजोसफ और न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को नोटीस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है । मामले में ऊधमसिंह नगर जिले के शांतिपुरी निवासी कांग्रेसी किसान नेता गणेश उपाध्याय की जनहित याचिका में केंद्र सरकार व अन्यों को पार्टी बनाते हुए राहत की मांग की गयी थी। याचिका पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में किसानों की आत्महत्या के मामले को गंभीरता से लिया और आरबीआई, केंद्र सरकार व राज्य सरकार से 21 दिन के भीतर जवाब देने को कहा है। याचिका में कहा गया है कि उत्तराखंड में सरकारी कर्ज के बोझ से दबे किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं। जून से अब तक पांच किसानों ने आत्महत्या की है।

किसानों की आत्महत्या ब्लू ह्वेल गेम से भी अधिक खतरनाक स्थिति

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नैनीताल। याचिका में कहा गया है कि राज्य में किसानों की स्थिति ब्लू ह्वेल गेम से भी अधिक ज्यादा खतरनाक हो गयी है। बैंको के कृषि ऋणों की ब्याज दरें इतनी अधिक है की किसान उसे चुकाने के लिए साहूकारों से अधिक दरों में रूपये ब्याज पर लेता है और सरकार उनकी फसलों को खरीदकर 10-10 महीनों तक उनका भुगतान नही करती है। याचिका के अनुसार हाल ही में ऊधमसिंह नगर जिले में सरकार ने 75 करोड़ रूपये का धान खरीदा जिसका भुगतान 10 महीने तक नही किया। दावा किया कि इसका बैंक ब्याज 5 करोड़ रुपया हो गया था। दूसरी ओर किसानों के द्वारा समय से भुगतान नही होंने के कारण बैंक उनको रिकवरी नोटिस दे रहे हैं, जिसके कारण वे आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। याचिका के अनुसार 2007 तक पॉपुलर के सरकारी रेट 1050 रूपये कुंतल थे, वह अभी 350 रूपये हो गये हैं, जबकि बाजार दरें तीन गुना बढ़ गयी हैं। इसका लाभ किसान को न जाकर सीधे सरकार को मिल रहा है। प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना को अभी तक प्रदेश में लागू नही किया गया है, जिसके अंतर्गत खरीफ की फसल के लिये दो, रबी के लिये 1.5 फीसद व अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिए पांच फीसद ब्याज दर पर ऋण दिया जाना चाहिए।

उत्तराखंड में इन पांच किसानों की हुई है आत्महत्या अथवा असामयिक मौत

नैनीताल। उत्तराखंड में जिन पांच किसानों द्वारा आत्महत्या किये जाने का दावा किया जा रहा है, उनमें राज्य का पहला मामला 16 जून 2017 को पिथौरागढ़ के तोक सरतोला ग्राम पुरानाथल निवासी 60 वर्षीय किसान सुरेंद्र सिंह कॉपरेटिव बैंक से ऋण संबंधी नोटिस आने के बाद एक किसान ने विषपान कर आत्महत्या करने का आया। बताया गया है कि सुरेंद्र ने करीब सवा लाख रुपए का ऋण लिया थ। वहीं इसके 10 दिन बाद ही 25 जून को खटीमा के हल्दी पछेड़ा कंचनपुरी गांव के 42 वर्षीय किसान राम अवतार ने जून माह में पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी थी। तीसरे मामले में 30 जून को बाजपुर के बांसखेड़ी ग्राम निवासी 38 वर्षीय किसान बलविंदर सिंह द्वारा 12 जुलाई को अपनी जीवन लीला समाप्त करने की खबर आई थी। बलविंदर ने बैंक ऋण से ट्रेक्टर लिया था, जिस पर बैंक नेे ₹ 7,49,896 का नोटिस दिया था। वहीं चौथे मामले में ऊधमसिंह नगर के ही ग्राम बिरियाभूड़ निवासी बुजुर्ग किसान मस्या सिंह की कर्ज के नोटिस देख सदमे से मौत होने का दावा किया गया था। मस्या सिंह पर उत्तराखंड ग्रामीण बैंक का 2.25 लाख रुपए का कर्ज था। जबकि 7 सितंबर को 65 वर्षीय राधा किशन का हृदयगति रुकने से देहांत हो गया था। उन्होंने भी कृषि ऋण लिया था और देने में असफल हो रहे थे।

उत्तराखंड में इन पांच किसानों की हुई है आत्महत्या अथवा असामयिक मौत

नैनीताल। उत्तराखंड में जिन पांच किसानों द्वारा आत्महत्या किये जाने का दावा किया जा रहा है, उनमें राज्य का पहला मामला 16 जून 2017 को पिथौरागढ़ के तोक सरतोला ग्राम पुरानाथल निवासी 60 वर्षीय किसान सुरेंद्र सिंह कॉपरेटिव बैंक से ऋण संबंधी नोटिस आने के बाद एक किसान ने विषपान कर आत्महत्या करने का आया। बताया गया है कि सुरेंद्र ने करीब सवा लाख रुपए का ऋण लिया थ। वहीं इसके 10 दिन बाद ही 25 जून को खटीमा के हल्दी पछेड़ा कंचनपुरी गांव के 42 वर्षीय किसान राम अवतार ने जून माह में पेड़ पर फांसी लगाकर जान दे दी थी। तीसरे मामले में 30 जून को बाजपुर के बांसखेड़ी ग्राम निवासी 38 वर्षीय किसान बलविंदर सिंह द्वारा 12 जुलाई को अपनी जीवन लीला समाप्त करने की खबर आई थी। बलविंदर ने बैंक ऋण से ट्रेक्टर लिया था, जिस पर बैंक नेे ₹ 7,49,896 का नोटिस दिया था। वहीं चौथे मामले में ऊधमसिंह नगर के ही ग्राम बिरियाभूड़ निवासी बुजुर्ग किसान मस्या सिंह की कर्ज के नोटिस देख सदमे से मौत होने का दावा किया गया था। मस्या सिंह पर उत्तराखंड ग्रामीण बैंक का 2.25 लाख रुपए का कर्ज था। जबकि 7 सितंबर 17 को 65 वर्षीय राधा किशन का हृदयगति रुकने से देहांत हो गया था। उन्होंने भी कृषि ऋण लिया था और देने में असफल हो रहे थे।

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