नैनीताल जिले में 12 को बारिश की चेतावनी पर बंद रहे स्कूल, 13 को हुई बारिश

  • 11 की छुट्टी के लिए जिला प्रशासन ने मौसम विभाग के ‘हाई अलर्ट’ को बताया कारण, अलबत्ता मौसम विभाग ने पूरे प्रदेश के लिए हाई नहीं ‘अलर्ट’ किया था जारी, जिलों के नाम भी नहीं बताए था…
नैनीताल, 11 जुलाई 2018। नैनीताल डीएम विनोद कुमार सुमन ने बृहस्पतिवार 12 जुलाई को जनपद के कक्षा 1 से कक्षा 12 तक के सभी सरकारी, गैर सरकारी विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों में एहतियातन अवकाश घोषित किया था। लेकिन लगता है बारिश एक दिन लेट हो गयी। इधर मुख्यालय सहित कमोबेश पूरे जिले में 13 जुलाई को रात्रि से लगातार हल्की वर्षा जारी है। जबकि कल सुबह हल्की बारिश के बाद दिन में धूप भी खिली थी। उल्लेखनीय है कि सूचना विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार मौसम विभाग के द्वारा जनपद में भारी बारिश होने की संभावना जताते हुए ‘हाई अलर्ट’ की चेतावनी जारी की गयी है। साथ ही कहा है कि यदि कोई विद्यालय अवकाश के दिन खुला पाया गया और किसी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति आती है तो सम्बन्धित विद्यालयों के खिलाफ कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। 
मौसम विभाग ने इस तरह जारी किया है ‘अलर्ट’

उल्लेखनीय है कि मौसम विभाग के द्वारा जारी विज्ञप्ति में प्रदेश में लाल की जगह भूरे रंग में ‘अलर्ट’ की चेतावनी दर्शाई गयी है।जिला प्रशासन ने मौसम विभाग के ‘हाई अलर्ट’ को कारण बताया है, अलबत्ता मौसम विभाग ने पूरे प्रदेश के लिए हाई नहीं ‘अलर्ट’ किया है जारी, जिलों के नाम भी नहीं बताए हैं

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बृहस्पतिवार 14 जून को विश्व प्रसिद्ध नैनी सरोवर की सुंदरता को इस तरह प्रभावित किया है राजस्थान की धूल ने।

नैनीताल, 13 जून 2018। राजस्थान व पाकिस्तान के बलूचिस्तान की ओर से पश्चिमी विक्षोभ के साथ आई गहरी धूल हजारों किमी दूर नैनीताल सहित उत्तराखंड के पहाड़ों तक पहुंच कर आफत बन गई है। बुधवार शाम आयी आंधी व बारिश तथा इधर बृहस्पतिवार रात्रि व शुक्रवार सुबह भी हुई काफी बारिश के बावजूद यह ‘जिद्दी’ धूल हटी नहीं है। यह भी हो रहा है कि बारिश के दौरान या कभी यह ओझल हो जा रही है, तथा बाद में फिर आ जा रही है। इससे सांस लेने में परेशानी तथा दृश्यता के कम होने जैसी समस्याएं तो आ ही रही हैं, यहां नैनी झील का पानी भी इसके कारण मटमैला नजर आया।
हुआ यह कि बारिश के दौरान यह धूल बारिश के साथ नीचे आयी, जिससे बारिश भी मटमैले रंग की नजर आयी। इससे लोगों के घरों-वाहनों में साफ होने की जगह मिट्टी चढ़ गयी। कई पानी रुके स्थानों पर मिट्टी का कीचड़ बन गया, वहीं नैनी झील के पोषक नालों में भी मटमैला पानी बहने लगा, और इस कारण नैनी झील का पानी भी बारिश के दौरान मटमैला नजर आने लगा, तथा बाद तक भी इसका असर देखा गया। बावजूद यह धूल अभी हटी नहीं है, और पर्यावरण प्रेमियों के बाद आम लोगों को भी चिंता में डाल रही है।

नैनीताल, 13 जून 2018। राजस्थान व पाकिस्तान के बलूचिस्तान की ओर से पश्चिमी विक्षोभ के साथ आकर दिल्ली में प्रदूषण बढ़ाकर ‘आपातकाल’ जैसे हालात बनाने वाली धूल भरी आंधी के केस-बल बुधवार शाम अनेक क्षेत्रों में भारी तबाही के बाद भी ढीले नहीं पड़े हैं। यह गहरी धूल हज़ारों किमी दूर नैनीताल सहित उत्तराखंड के पहाड़ों तक पहुंच गई है। इससे यहां दृश्यता तो बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच ही गयी है, लोगों को स्वांस लेने में भी कठिनाई महसूस हो रही है। यहां तक कि नैनी झील बेहद करीब से भी नज़र नहीं आ रही है। वहीं आगे हिमालय पर्वत इसके निशाने पर लग रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह हिमालय सहित पूरे देश के लिये नई पर्यावरणीय चिंताएं पैदा करने वाला होगा।

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चाहरदीवारी तोड़कर सड़क पर आ गिरा राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के अहाते में खड़ा विशालकाय पांगर का पेड़

नैनीताल, 13 जून 2018। बुधवार को पूरे दिन जबर्दस्त गर्मी के बाद शाम को मौसम के बदले गियर के साथ अचानक आये आंधी-तूफान ने जनपद में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। देर शाम करीब आठ बजे आये आंधी-तूफान से हल्द्वानी में गौला पुल से गुजरना लोगों के लिये दूभर हो गया। दोपहिया वाहनों के साथ बड़े ट्रक भी पुल से गुजरने की हिम्मत नहीं जुटा पाये। वहीं आगे हल्द्वानी बाईपास पर राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के अहाते में खड़ा विशालकाय पांगर का पेड़ इस दौरान विद्यालय की चाहरदीवारी तोड़कर सड़क पर आ गिरा, जिस कारण बाईपास पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया।
वहीं आंधी-तूफान से कालाढुंगी में बौर पुल के पास भी एक पेड़ गिर गया, जिसे एसडीएम के स्तर से वन विभाग की मदद से हटवाया गया। आंधी-तूफान का प्रभाव पूरे जनपद में बताया जा रहा है, जिस कारण अनेक स्थानों पर पेड़ गिर गये हैं। कमोबेश पूरे जिले की विद्युत आपूर्ति भी इस कारण बाधित हुई है, जबकि तूफान के निपटने के बाद आपूर्ति बहाल की जा रही है। मुख्यालय में भी अत्यधिक तेज आंधी-तूफान के कारण बिजली गुल है।

नैनीताल व पहाड़ों पर ऐसे चढ़ा गर्मी, सर्दी व बरसात के मौसम का ‘कॉकटेल’

-हर दिन आधा इंच सूख रही नैनी झील का जल स्तर एक इंच बढ़ा
-मौसम वैज्ञानिकों के कहा-कुछ ही दिनों के लिए है यह स्थिति, खेती-बागवानी के लिए मानी जा रही लाभदायक

सोमवार (9 अप्रैल 2018) को बारिश के दौरान निकलती छात्राएं और कोहरे से ढकी नैनी झील व सरोवरनगरी का नजारा।

नैनीताल। बीते कुछ दिनों से पहाड़ों पर बदले मौसम के मिजाज के दौरान यह समझना मुश्किल हो रहा है मौसम गर्मियों का चल रहा है, अथवा बरसात या सर्दियों का। क्योंकि महीने के हिसाब से यह गर्मियों की शुरुआत का मौसम है, लेकिन सर्दियों की तरह लोग गर्म कपड़े पहने हुए हैं। वहीं जिस तरह से मुख्यालय सहित पहाड़ों पर कोहरा छाया हुआ है, व लगातार हल्की रिमझिम बारिश हो रही है, उससे बरसात के मौसम जैसा नजारा लग रहा है। बीते पांच अप्रैल से चल रहे इस मौसम के दौरान चार दिनों में मुख्यालय में 22 मिमी बारिश हुई है। इस बारिश की महत्ता इस तथ्य को देखते हुए समझी जा सकती है कि जनवरी माह से अब तक पूरे मौजूदा वर्ष 2018 में अब तक कुल 75.4 मिमी ही बारिश रिकार्ड हुई है। इसलिए भी यह बारिश महत्वपूर्ण है कि अब तक पिछले हर रोज आधा इंच घट रहा नैनी झील का जल स्तर इस बारिश के बाद घटना तो रुका ही है, साथ ही मामूली ही सही, 0.8 फिट से एक इंच बढ़ कर 0.9 फिट हो गया है।

मौसम के इस बदलाव के बारे में कुमाऊं विवि के दीर्घकालीन मौसम वैज्ञानिक प्रो. बीएस कोटलिया एवं राज्य के मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक आनंद शर्मा ने कहा कि मौसम में इन दिनों आया यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ का दबाव बनने की वजह से हुआ है। आगे यह अगले एक-दो और यानी 11-12 अप्रैल तक बना रह सकता है। इसके बाद फिर से गर्मी बढ़ने लगेगी। वहीं किसानों का कहना है कि यह बारिश पहाड़ों पर खेती-बागवानी के लिए हर तरह से लाभदायक है, अलबत्ता तराई-भाबर क्षेत्र में पकने लगी गेहूं की फसल को ओलावृष्टि, अंधड़ से जरूर नुकसान हो सकता है। चिकित्सक भी इस बारिश को मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बता रहे हैं।

पिछले वर्ष अब तक 208 मिमी बारिश के बावजून माइनस 4 फिट था जल स्तर
नैनीताल। इस वर्ष जिला प्रशासन के निर्देशों पर नगर में पेयजल आपूर्ति के फलस्वरूप नैनी झील का जल स्तर घटने की रफ्तार पिछले वर्ष के मुकाबले काफी कम रही है। इसे इन आंकड़ों से समझ सकते हैं कि वर्ष 2017 में 9 अप्रैल तक 208.28 मिमी बारिश हुई थी और 9 अप्रैल को जल स्तर झील नियंत्रण कक्ष के मापक पर माइनस 4 फिट था। जबकि इस वर्ष 75.4 मिमी बारिश होने के बावजूद जल स्तर 0.9 फिट के स्तर पर यानी पिछले वर्ष के मुकाबले 4.9 फिट अधिक है।

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  • ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिछी 1 से 2 इंच तक मोटी बर्फ की चादर
  • दो वर्ष बाद बर्फवारी होने से खिले लोगों के चेहरे
  • सरोवरनगरी के निचले क्षेत्रों में भी है बर्फ की मौजूदगी
  • मौसम की पहली बारिश में ही पहली बार गिरी बर्फ

नैनीताल। सरोवरनगरी में ‘देर आयद-दुरुस्त आयद’ की तर्ज पर मंगलवार की रात्रि दो वर्ष के बाद मौसम की पहली बारिश ही बर्फवारी की मनमांगी मुराद ले कर आयी। और बर्फवारी भी इतनी कि मन भर गया। नगर के निचले हिस्सों तक भी बर्फ की मौजूदगी बनी, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एक से दो इंच तक मोटी बर्फ की चादर बिछ गयी। वहीं बुधवार को नगर में सुबह से धूप खिल आयी। अलबत्ता बादलों की मौजूदगी भी बनी रही। इसके साथ ही नगर में बर्फ की मौजूदगी भी बनी रही। बर्फ पड़ने की जानकारी मिलते ही दिल्ली तक से सैलानी नगर में उमड़ पड़े और बर्फवारी का आनंद लिया। नगर के ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों में सैलानियों की अच्छी भीड़भाड़ रही और नगर के पर्यटन व्यवसायियों के चेहरे भी खिल आये।

फोटो सौजन्य : प्रशांत दीक्षित, ललित जोशी।

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