‘कार्बन न्यूट्रल’ होगा गौलापार हल्द्वानी में प्रस्तावित देश का पहला अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर

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पांच सौ करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्राणी उद्यान में आधुनिक अस्पताल भी होगा जहां जानवरों के इलाज के साथ-साथ पहली दफा सर्जरी की भी व्यवस्था होगी

  • वन्य जीव सफारी, मांसाहारी व शाकाहारी जीवों को अलग-अलग खंड, जैव विविधता पार्क और जुरासिक पार्क भी बनेंगे 
  • वन्य जीवों के वासस्थल सीमेंट और कंक्रीट की बजाय लकड़ियों एवं हरित प्रणाली से तैयार किये जाएंगे

रविन्द्र देवालियल, नैनीताल (वार्ता)। वन्य जीवों के शौकीनों के लिये एक अच्छी खबर है। अफ्रीकी एवं यूरोपीय देशों की तरह देश में एक आधुनिक सुविधाओं से युक्त अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान जल्द अस्तित्व में आने वाला है जहां न केवल अफ्रीकी देशों की तर्ज पर वन्य जीव सफारी होगी बल्कि विदेशी जीव जंतु भी आकर्षण का केन्द्र होंगे। पांच सौ करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्राणी उद्यान में आधुनिक अस्पताल भी होगा जहां जानवरों के इलाज के साथ-साथ पहली दफा सर्जरी की भी व्यवस्था होगी। अलग-अलग प्रकृति के जीवों को अलग-अलग खंडों में रखा जाएगा। मांसाहारी व शाकाहारी जीवों को अलग-अलग खंडों में रखा जाएगा। यही नहीं, यहां पक्षियों की भी अलग दुनिया होगी, साथ ही वन्य जीवों व पर्यटकों के लिए आधुनिक सुख सुविधायें भी मौजूद होंगी।

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हल्द्वानी के गौलापार में 412 हेक्टेयर में बनाया जा रहा यह प्राणी उद्यान इसलिये भी अपनी तरह का पहला अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान होगा कि यह कार्बन न्यूट्रल जू होगा। यह संपूर्ण रूप से प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित होगा। प्रकाश और ऊर्जा के लिए पवन और सौर ऊर्जा का प्रयोग किया जाएगा। इसको इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यहां से कार्बन उत्सर्जन कम से कम हो और जानवरों तथा पर्यटकों को यहां साफ सुथरा वातावरण मिल सके। इसके लिये यहां उसी प्रकार की तकनीक इस्तेमाल की जाएगी और संयत्र लगाये जाएंगे। वन्य जीवों के वासस्थल सीमेंट और कंक्रीट की बजाय लकड़ियों एवं हरित प्रणाली से तैयार किये जाएंगे। इस प्राणी उद्यान में पर्यटकों के मनोरंजन के लिये कई तरह की सुविधाएं होंगी। इसके बीचो बीच 5.5 एकड़ में कृत्रिम झील का निर्माण भी किया जा रहा है जहां पर्यटक नौकायन का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके अलावा मोनो रेल और बच्चों के लिए टॉय ट्रेन भी संचालित की जाएगी।

वन्य जीवों के अलावा उद्यान का आकर्षण का केन्द्र यहां बनने वाला जैव विविधता पार्क और जुरासिक पार्क भी होगा। बच्चों के मनोरंजन के लिये चिल्ड्रन पार्क एवं घूमने के शौकीनों के लिए जॉगिंग पार्क अलग से तैयार किया जाएगा। पर्यटक इस प्राणी उद्यान में शेर, बाघ, तेंदुआ, भालू और हिरणों की अलग-अलग सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह कि देश के अन्य प्राणी उद्यानों की तरह यहां वन्य जीव कैद नहीं रहेंगे। वे विचरण करते रहेंगे। यहां देशी वन्य जीवों के साथ आस्ट्रेलियाई, अमेरिकी और यूरोपीय वन्य जीव भी देखने को मिलेंगे और इनके लिये अलग-अलग जोन बनाये जाएंगे। पक्षियों और रेंगने वाले जीवों का भी यहां अपना अलग संसार होगा। खासकर सांप और मगरमच्छों की अलग दुनिया होगी। साथ ही वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अलग से वृहद ब्रीडिंग सेंटर भी तैयार किया जा रहा है।

प्राणी उद्यान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वन संरक्षक डा. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि प्राणि उद्यान अलग-अलग चरणों में बनाया जाएगा और यह दो साल के अंदर अस्तित्व में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वन्य जीवों के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए आधुनिक सुविधाओं वाला अस्पताल बनाया जा रहा है जिसमें छोटे-बड़े हर जीव का इलाज किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आधुनिक तरीके से सर्जरी भी की जा सकेगी। इसके साथ ही एक रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की ओर से इन दोनों सेंटर को बनाने के लिए साढ़े 11 करोड़ की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।

बिन्दुवार कुछ विशेषताएं :

अलग अगल प्रकृति के जीवों के लिये अलग जोन
सेण्ट्रल जू अथाॅरिटी की ओर से इस प्राणि उद्यान का निर्माण किया जा रहा है। यह प्राणि उद्यान हल्द्वानी के गौलापार में 412 हेक्टेअर में बनाया जाएगा। यह देश का अपनी तरह का पहला अंतर्राष्ट्रीय प्राणि उद्यान होगा। इसमें सभी प्रकार के वन्य जीवों का समावेश होगा। बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार की प्रजाति के वन्य जीव यहां मिलेंगे। मांसाहारी व शाकाहारी जीवों को अलग अलग खंडों में रखा जाएगा। यही नहीं यहां चिड़ियाओं की भी अलग दुनिया होगी।
देश का पहला कार्बन न्यूट्रल प्राणि उद्यान
इस प्राणि उद्यान की खासियत है कि यह कार्बन न्यूट्रल जू होगा। साथ ही यह संपूर्ण रूप से प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित्त होगा। प्रकाश व उर्जा के लिए पवन उर्जा व सोलर उर्जा का प्रयोग किया जाएगा। इस प्राणि उद्यान को ऐसा डिजायन किया गया है कि यह कार्बन उत्सर्जन न कर सके और जानवरों व पर्यटकों को यहां साफ सुथरा वातावरण व उर्जा मिल सके। इसके लिये यहां उसी प्रकार की तकनीक इस्तेमाल की जाएगी व संयत्र लगाये जाएंगे। वन्य जीवों के वासस्थल सीमेंण्ट व कंकरीट के बजाय लकड़ियों व हरित प्रणाली से तैयार किये जाएंगे।
वन्य जीवों के लिये होगा देश का पहला आधुनिक अस्पताल
यह प्राणि उद्यान देश में अपनी शैली का पहला प्राणि उद्यान होगा। इसमें वन्य जीवों के लिए जहां आधुनिक तकनीक का अस्पताल होगा वहीं अत्यंत सुख सुविधाओं से युक्त राहत केन्द्र बनाया जा रहा है। अब देश व आसपास के जंगलों में कोई भी जीव कुत्ते की मौत नहीं मारा जाएगा। मनुष्यों की तरह वन्य जीवों का संपूर्ण इलाज यहां किया जाएगा। यहां तक कि जरूरत पड़ने पर जानवरों की सर्जरी भी की जाएगी।
नौका विहार के लिये होगी झील व मोनो रेल
 देश में अभी तक बड़े बड़े प्राणि उद्यानों व पार्कों में ऐसी सुविधायें उपलब्ध नहीं हैं। इसके साथ ही इस प्राणि उद्यान के बीचोंबीच 5.5 एकड़ में कृत्रिम झील का निर्माण भी किया जा रहा है। पर्यटक यहां बोटिंग का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके अलावा यहां आने वाले वन्य जीवों के लिए मोनो रेल व बच्चों के लिए टाॅय ट्रेन भी संचालित की जाएगी।
जैव विविधता पार्क के साथ ही होगा जुरासिक पार्क
वन्य जीवों के अलावा उद्यान का आकर्षण का केन्द्र यहां बनने वाला जैव विविधता पार्क व जुरासिक पार्क भी होगा। बच्चों के मनोरंजन के लिये चिल्ड्रन पार्क व घूमने के शौकीनों के लिये जाॅगिंग पार्क अलग से तैयार किया जाएगा। पर्यटक इस प्राणि उद्यान में शेर, बाघ, तेंदुआ, भालु व हिरनों की अलग अलग सफारी का लुत्फ ले सकेंगे। इसके लिए अलग अलग हिस्सों में अलग अलग वन्य जीवों के वास स्थल बनाये जायेंगे। शेर, बाघ भालु व हिरन सफारी होंगी। यही नहीं यहां अफ्रीकन सफारी भी मौजूद रहेगी।
देश ही नहीं विदेशी जानवर भी रहेंगे मौजूद
सबसे बड़ी बात यह कि देश के अन्य प्राणि उद्यानों की तरह यहां वन्य जीव यहां कैद नहीं रहेंगे। वे विचरण करते रहेंगे। यहां देशी वन्य जीवों की तरह ऑस्ट्रेलियन, अमेरिकन व यूरोपियन वन्य जीव भी देखने को मिलेंगे और इनके लिये अलग अलग जोन बनाये जायेंगे।
पक्षियों का होगा अलग संसार
इस प्राणि उद्यान में पक्षियों व रेंगने वाले जीवों का भी यहां अपना अलग संसार होगा। खासकर सांप व मगरमच्छों की अलग दुनिया होगी। साथ ही वन्य जीवों के संरक्षण के लिए अलग से वृहद ब्रीडिंग सेंटर भी तैयार किया जा रहा है। प्राणि उद्यान के अंतर्गत अलग हिस्से में पक्षियों की अलग दुनिया बसायी जा रही है। इसमें देश दुनिया के सभी पक्षी कलरव करते नजर आयेंगे।
दो साल में आ जाएगा अस्तित्व में
प्राणि उद्यान के सीईओ व वन संरक्षक डा0 पराग मधुकर धकाते ने बताया कि प्राणि उद्यान अलग अलग चरणों में बनाया जाएगा और यह दो साल के अंदर अस्तित्व में आ जाएगा। उन्होंने कहा कि सबसे पहले वन्य जीवों के संरक्षण व सुरक्षा के लिए एक आधुनिक सुख सुविधाओं से युक्त व्यापक अस्पताल बनाया जा रहा है। जिसमें छोटे से लेकर बड़े हर जीव का इलाज किया जाएगा व आवश्यकता पड़ने पर आधुनिक तरीके से सर्जरी भी की जा सकेगी। इसके साथ ही एक रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है। केन्द्र सरकार की ओर से इन दोनों सेंटरों को बनाये जाने के लिए साढे़ ग्यारह करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गयी है। डा0 धकाते के अनुसार यह देश का पहला अंतर्राष्ट्रीय व कार्बन न्यूट्रल प्राणि उद्यान होगा।
आकर्षण के प्रमुख केन्द्र
1. जैव विविधता पार्क,
2. जुरासिक थीम पार्क,
3. मोनो रेल,
4. टाॅय ट्रेन,
5. चिल्ड्रन पार्क,
6. इको केफेटेरिया,
7. बायोडाइवरसिटी पार्क,
8. वन्य जीव सफारी ( शेर, बाघ, तेंदुआ, भालू व हिरन),
9. अफ्रीकन सफारी,
10. ऑस्ट्रेलियन, यूरोपियन तथा अमेरिकन वन्य जीव जोन,
11. पक्षियों की दुनिया

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