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नैनीताल के श्रेष्ठ शिक्षण संस्थान

अपने ‘सुपर-डुपर जूनियर’ के ‘जबरा फैन’ हुए सदी के महानायक, अपूर्व ने कुछ ‘अपूर्व’ कर बढ़ाया ‘गौरव’

अपूर्व गौरव शाह

अपूर्व गौरव शाह

-शेरवुड कॉलेज के छात्र अपूर्व की कविता से अभिभूत होकर मांगा वीडियो, कहा अपने फेसबुक तथा अन्य सोशल साइटों पर करेंगे कविता का प्रचार
नवीन जोशी, नैनीताल। व्यक्ति की महानता अपनी नहीं दूसरों में प्रशंसा में निहित होती है। एक दिन पूर्व ही फिल्म ‘ठग ऑफ हिंदुस्तान’ के लिये स्वयं के बजाय अपने सह कलाकार आमिर खान को ‘महान’ बताने वाले सदी के महानायक-बिग बी यानी अमिताभ बच्चन अब अपने एक ‘सुपर-डुपर जूनियर” के मानो ‘जबरा फैन’ हो गये हैं। एक राष्ट्रीय चैनल द्वारा सीधे प्रसारित हो रहे एक कार्यक्रम में अमिताभ को उनके पूर्व विद्यालय रहे शेरवुड कॉलेज नैनीताल के नौवीं कक्षा के छात्र अपूर्व गौरव शाह ने स्वच्छता अभियान पर लिखी हुई कविता सुनाते हुए कुछ ऐसा ‘अपूर्व’ कर ‘गौरव’ बढ़ाया कि उसकी प्रशंशा करते हुये अमिताभ ने टिप्पणी की-ऐसी कविता उन्होंने आज तक कभी नहीं सुनी। उन्होंने अपूर्व का उत्साहवर्धन करते हुए उनसे उनकी कविता का वीडियो भी मांगा और कहा कि वह अपने फेसबुक तथा अन्य सोशल साइटों पर इस कविता को अपलोड कर इसका प्रचार करेंगे।

फिर अपने ‘सुपर जूनियर’ की कविता के कायल हुए ‘सीनियर बच्चन’

नैनीताल। अपने कवि पिता हरवंश राय बच्चन की तरह स्वयं भी कवि हृदय बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार पुनः अपने शेरवुड कॉलेज के ‘सुपर जूनियर’ अपूर्व गौरव की कविता के एक बार फिर से कायल हो गये, और उन्होंने एक टीवी चैनल पर बीती 2 अक्टूबर 2017 को सीधे जुड़ते हुए अपूर्व की स्वच्छता से संबंधित कविता की तालियां बजाकर सराहना की, और इस कविता की प्रति उन्हें अलग से भेजने को कहा। उल्लेखनीय है कि अमिताभ पूर्व में भी इसी चैनल के एक ऐसे ही कार्यक्रम में अपूर्व की स्वच्छता पर ही एक अन्य कविता सुन और सराह चुके हैं। गौरतलब है कि कि अपूर्व मूलतः बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के रामनगर कस्बे का निवासी है। अपनी नयी कविता में अपूर्व ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर सफाई करने वालों को देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की तरह बड़ा काम करने वाला बताया है। गौरतलब है कि अपूर्व की कविता सुनने के बाद तत्कालीन डीएम दीपक रावत ने भी उसे स्वच्छता अभियान के लिये जनपद का ब्रांड एंबेसडर बनाने की बात कही थी, हालांकि बात आगे बढ़ती नहीं दिखाई दी है। अपनी ताजा कविता से भी अपूर्व ने एक बार फिर अपने नाम के अनुरूप अपने विद्यालय व नगर का ‘गौरव’ बढ़ाया है। गत दिवस वे अपने विद्यालय में आयोजित हुई अखिल भारतीय वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेता भी चुने गए थे।

अपूर्व की अमिताभ के सम्मुख प्रस्तुत कविता को यहाँ क्लिक कर के देख सुन सकते हैं।

भूलना न होगा कि अमिताभ अपने दौर के महान कवि हरवंश राय बच्चन के पुत्र हैं। वह स्वयं भी कविता करते रहे हैं, और कई बार फिल्मों तथा अन्य मंचों पर स्वयं की तथा अपने पिता की प्रसिद्ध कविता मधुशाला के कई छंदों को खास अंदाज में स्वर भी देते रहे हैं। फिल्म ‘कभी-कभी’ में शीर्षक गीत ‘कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है’ हो या फिल्म अग्निपथ का शीर्षक गीत, उसे कविता के रूप में अमिताभ ने अपने स्वर देकर हमेशा के लिये अपने प्रशंसकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है। लेकिन उनकी वास्तविक महानता अपने प्रशंसकों की प्रशंसा करने में भी निहित है, जो यहां लाइव प्रसारित हो रहे टीवी कार्यक्रम के दौरान दिखी। उन्होंने अपूर्व की कविता के शब्दों-‘यदि निकला सफाई करने, संकल्प कड़ा मानें हम, कचरा उठाने की शर्मिंदगी से, देश बड़ा मानें हम।” को एकटक सुनते हुये आखिर में अपने खास अंदाज में जमकर तालियां बजायीं। अमिताभ ने कहा, ‘उन्होंने ऐसी कविता न कभी सुनी और न ही कभी बनाई। उन्होंने अपूर्व से पूछा, कहां से उसने यह सब सीखा और कहां से इतना आत्म विश्वास उसके अंदर आया। हमारे जमाने में तो ऐसा कुछ भी नहीं होता था।’ साथ ही उन्होंने गर्व जताया कि वह खुद शेरवुड कलेज के विद्यार्थी रहे हैं। इसके बाद अमिताभ से प्रशंसा के बोल सुनकर गदगद हुये मूल रूप से बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले के रामनगर निवासी अपूर्व ने कहा कि उनके क्षेत्र के एक दशरथ मांझी जब पहाड़ काट सकते हैँ तो हजारों-लाखों लोग भारत को स्वच्छ क्यों नहीं बना सकते। उसने बताया कि वह बचपन से ही कविता का शौक रहा है। वह पहले भी वाद विवाद समेत कई अन्य प्रतियोगिताएं जीतकर विद्यालय का नाम रोशन कर चुका है। अपूर्व के प्रधानाचार्य अमनदीप संधु ने कहा कि अमिताभ द्वारा उनके विद्यालय के छात्र की सराहना करना बेहद गर्व की बात है। इधर डीएम दीपक रावत ने अपूर्व को स्वच्छता अभियान के लिये नैनीताल जिले का ब्रांड एंबेसडर बनाने की घोषणा की।

अपनी कविता से अमिताभ बच्चन से प्रशस्ति पा चुके शेरवुड के अपूर्व गौरव रहे प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ वक्ता

नैनीताल/एसएनबी। नगर के शेरवुड कॉलेज में चल रही पांचवी लेवलिन अखिल भारतीय अंतरविद्यालयी वाद-विवाद प्रतियोगिता मेजबान शेरवुड कॉलेज ने जीत ली, जबकि अजमेर राजस्थान का मेयो कॉलेज उपविजेता रहा। वहीं प्रतियोगिता के दौरान ही आयोजित हुई क्विज ट्रॉफी सैनिक स्कूल घोड़ाखाल को प्राप्त हुई, जबकि हिमांचल प्रदेश का पाइनग्रोव स्कूल उपविजेता रहा। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार शेरवुड के अपूर्व विक्रम शाह को चुना गया। उल्लेखनीय है कि अपूर्व पूर्व में स्वच्छता पर अपनी एक कविता से एक टीवी चैनल पर लाइव शो के दौरान इसी विद्यालय के छात्र अमिताभ बच्चन को प्रभावित कर उनसे हौंसला अफजाई प्राप्त कर चुके हैं। उनके अतिरिक्त नई दिल्ली के वसंत वैली स्कूल की अद्वया गुलाती को विपक्ष की सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार दिया गया। इससे पूर्व मेयो कॉलेज अजमेर की फाल्गुनी जोशी सेमी फाइनल की सर्वश्रेष्ठ वक्ता रहीं और अवंतिका छोडा को एक्सीलेंस अवार्ड प्राप्त हुआ।

शिक्षा नगरी के रूप में नैनीताल

नैनीताल को यूं ही शिक्षा नगरी के रूप में नहीं जाना जाता है। दरअसल, इसके अंग्रेज निर्माताओं ने यहां की शीतल व शांत जलवायु को देखते हुऐ इसे विकसित ही इसी प्रकार किया। १८ नवंबर १८४१ को आधिकारिक रूप से खोजा गया यह नगर अंग्रेजों को अपने घर जैसा लगा और उन्होंने इसे ‘छोटी बिलायत” के रूप में बसाया। सर्वप्रथम १८५७ में अमेरिकी मिशनरियों के आने से यहां शिक्षा का सूत्रपात हुआ। उन्होंने मल्लीताल में एशिया का पहला मैथोडिस्ट चर्च बनाया, तथा इसके पीछे ही नगर के पहले अमेरिकन मिशनरी स्कूल की आधारशिला रखी, जो वर्तमान में सीआरएसटी स्कूल के रूप में नऐ गौरव के साथ मौजूद है। १८६९ में यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में वर्तमान के शेरवुड कालेज एवं लड़कियांे के लिए यूरोपियन डायसन गल्र्स स्कूल भी खुला, जो वर्तमान में ऑल सेंट्स कालेज के रूप में विद्यमान है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन शेरवुड कालेज व सैम बहादुर जनरल मानेकशॉ जैसी हस्तियां यहां के छात्र रहे। इसके अलावा १८७७ में ओक ओपनिंग हाइस्कूल के रूप में वर्तमान बिड़ला विद्या मंदिर, १८७८ में वेलेजली गल्र्स हाइस्कूल के रूप में वर्तमान कुमाऊं  विश्व विद्यालय का डीएसबी परिसर, १८८६ में सेंट एन्थनी कान्वेंट ज्योलीकोट तथा १८८८ मंे सेंट जोजफ सेमीनरी के रूप में वर्तमान सेंट जोजफ कालेज की स्थापना हुई। इस दौर में यहां रहने वाले अंग्रेजों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते थे, और उन्हें अपने देश से बाहर होने या कमतर शिक्षा लेने का अहसास नहीं होता था। इस प्रकार आजादी के बाद २०वीं सदी के आने से पहले ही यह नगर शिक्षा नगरी के रूप में अपनी पहचान बना चुका था। यह परंपरा आज भी जारी है। नगर के द होली एकेडमी, अमेरिकन किड्ज व वृंदावन पब्लिक स्कूल आदि छोटे बच्चों के प्रिपरेटरी स्कूल और बिड़ला विद्या मंदिर, लोंग व्यू पब्लिक स्कूल, राधा चिल्ड्रन एकेडमी, ओकवुड स्कूल, रामा मांटेसरी, होली एंजिल्स स्कूल, द मदर्स हर्ट, बिशप शॉ इंटर कॉलेज, अम्तुल्स पब्लिक स्कूल व वसंत वैली पब्लिक स्कूल आदि स्कूल भी शिक्षा नगरी की इस प्रतिष्ठा को बढ़ाने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा रहे हैं। खास बात यह भी है कि यहां के स्कूलों ने आजादी के बाद भी अपना स्तर न केवल बनाऐ रखा, वरन ‘गुरु गोविंद दोउं खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद बताय” की विवशता यहां से निकले छात्र छात्रााओं में कभी भी नहीं दिखाई दी। आज भी दशकों पूर्व यहां से निकले बच्चे वृद्धों के रूप मंे जब यहां घूमने भी आते हैं तो नऐ शिक्षकों में अपने शिक्षकों की छवि देखते हुऐ उनके पैर छू लेते हैं।जाना जाता है। दरअसल, इसके अंग्रेज निर्माताओं ने यहां की शीतल व शांत जलवायु को देखते हुऐ इसे विकसित ही इसी प्रकार किया। १८ नवंबर १८४१ को आधिकारिक रूप से खोजा गया यह नगर अंग्रेजों को अपने घर जैसा लगा और उन्होंने इसे ‘छोटी बिलायत” के रूप में बसाया। सर्वप्रथम १८५७ में अमेरिकी मिशनरियों के आने से यहां शिक्षा का सूत्रपात हुआ। उन्होंने मल्लीताल में एशिया का पहला मैथोडिस्ट चर्च बनाया, तथा इसके पीछे ही नगर के पहले अमेरिकन मिशनरी स्कूल की आधारशिला रखी, जो वर्तमान में सीआरएसटी स्कूल के रूप में नऐ गौरव के साथ मौजूद है। १८६९ में यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में वर्तमान के शेरवुड कालेज एवं लड़कियांे के लिए यूरोपियन डायसन गल्र्स स्कूल भी खुला, जो वर्तमान में ऑल सेंट्स कालेज के रूप में विद्यमान है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन शेरवुड कालेज व सैम बहादुर जनरल मानेकशॉ जैसी हस्तियां यहां के छात्र रहे। इसके अलावा १८७७ में ओक ओपनिंग हाइस्कूल के रूप में वर्तमान बिड़ला विद्या मंदिर, १८७८ में वेलेजली गल्र्स हाइस्कूल के रूप में वर्तमान कुमाऊं  विश्व विद्यालय का डीएसबी परिसर, १८८६ में सेंट एन्थनी कान्वेंट ज्योलीकोट तथा १८८८ में सेंट जोजफ सेमीनरी के रूप में वर्तमान सेंट जोजफ कालेज की स्थापना हुई। इस दौर में यहां रहने वाले अंग्रेजों के बच्चे इन स्कूलों में पढ़ते थे, और उन्हें अपने देश से बाहर होने या कमतर शिक्षा लेने का अहसास नहीं होता था। इस प्रकार आजादी के बाद २०वीं सदी के आने से पहले ही यह नगर शिक्षा नगरी के रूप मंे अपनी पहचान बना चुका था। यह परंपरा आज भी जारी है। नगर के द होली एकेडमी, अमेरिकन किड्ज व वृंदावन पब्लिक स्कूल आदि छोटे बच्चों के प्रिपरेटरी स्कूल और बिड़ला विद्या मंदिर, लोंग व्यू पब्लिक स्कूल, राधा चिल्ड्रन एकेडमी, ओकवुड स्कूल, रामा मांटेसरी, होली एंजिल्स स्कूल, द मदर्स हर्ट, बिशप शॉ इंटर कॉलेज, अम्तुल्स पब्लिक स्कूल व वसंत वैली पब्लिक स्कूल आदि स्कूल भी शिक्षा नगरी की इस प्रतिष्ठा को बढ़ाने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा रहे हैं। खास बात यह भी है कि यहां के स्कूलों ने आजादी के बाद भी अपना स्तर न केवल बनाऐ रखा, वरन ‘गुरु गोविंद दोउं खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद बताय” की विवशता यहां से निकले छात्र छात्रााओं में कभी भी नहीं दिखाई दी। आज भी दशकों पूर्व यहां से निकले बच्चे वृद्धों के रूप मंे जब यहां घूमने भी आते हैं तो नऐ शिक्षकों में अपने शिक्षकों की छवि देखते हुऐ उनके पैर छू लेते हैं।राधा चिल्ड्रन अकेडमी& साकार हुआ शिक्षा का सपनाराधा चिल्ड्रन अकेडमी की स्थापना सरोवरनगरी के संस्थापकों में शुमार स्वर्गीय मोती राम शाह के वंशज युवा शिक्षा प्रेमी दीपक शाह व उनके साथियों ने वर्ष १९९९ में छात्र-छात्राओं को महंगी शिक्षा से इतर सस्ती व गुणवत्तापूर्वक शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई। कम समय में ही स्नोभ्यू स्थित राधा चिल्ड्रन अकेडमी की पहचान गरीब बच्चों को अच्छी व गुणवत्तापूर्वक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए नगर भर में बन गई है, और इस क्षेत्र में यह विद्यालय अभिभावकों की पहली पसंद बन गया है। यहां पर आसपास के क्षेत्रों के करीब ढाई सौ से अधिक बच्चों को कुशल व अनुभवी शिक्षक-शिक्षिकाओं के द्वारा पढ़ाया जाता है। बेहतर क्लास रुम, कंप्यूटर लैब आदि की सुविधाएं स्कूल में उपलब्ध कराई गई हैं। आज विद्यालय के बच्चे नगर में आयोजित होने वाले विभिन्न प्रतियोगिताओं में सर्वश्रेष्ठ स्थानों पर अपना नाम दर्ज करा रहे हैं।

नगर के आम बच्चों की पहली पसंद बिशप शॉ इंटर कॉलेज

नगर का तल्लीताल डांठ जैसे सर्वाधिक सुगम स्थान पर स्थित बिशप शॉ इंटर कालेज नगर के आम निम्न एवं मध्यम वर्ग के बच्चों एवं उनके अभिभावकों की पहली पसंद है। मार्च १९७१ में स्थापित विद्यालय चार वर्ष पूर्व से उत्तराखंड बोर्ड के अंतर्गत बेहद कम शुल्क पर सीबीएसई पैटर्न पर इंटरमीडिएट तक की अंग्रेजी माध्यम से गुणवत्ता युक्त शिक्षा दे रहा है। यही नहीं विद्यालय में नैतिक शिक्षा एवं कम्प्यूटर शिक्षा भी दी जाती है। विद्यालय में विज्ञान वर्ग की शिक्षा भी उपलब्ध है। प्रबंधक नीलम दानी एवं प्रधानाचार्य जे.ए. विल्सन के कुशल निर्देशन में विद्यालय के विद्यार्थियों को खेल तथा नगर में होने वाली निबंध, चित्रकला, भाषण आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने और पढ़ाई के साथ ही चहुमुंखी व सर्वांगीण विकास करने का मौका उपलब्ध होता है। विद्यालय उत्तरोत्तर विकास के पथ पर अग्रसर है। इधर बीते वर्ष यहां के चंदन जोशी ने इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में उत्तराखंड राज्य में १७वां और कुलदीप सिंह कुरिया ने १९वां स्थान प्राप्त किया।

प्रगति पथ पर वसंत वैली पब्लिक स्कूल

वसंत वैली वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित वसंत वैली पब्लिक स्कूल की स्थापना वर्ष १९९८ में की गई थी। विद्यालय कान्वेंट शिक्षित एवं नैनीताल के शेरवुड कालेज के साथ दिल्ली के स्कूलों में शिक्षण कर चुकी एमए, एलएलबी व बीएड की उच्च शिक्षा प्राप्त प्रधानाचार्या श्रीमती नीरज सिंह के सफल निर्देशन में उत्तरोत्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्तमान में उत्तराखंड शासन की मान्यता प्राप्त यह स्कूल नर्सरी से आठवीं कक्षा तक की उच्च स्तरीय शिक्षा उपलब्ध करा रहा है, तथा शीघ्र ही सीबीएसई बोर्ड से दसवीं तक की मान्यता प्राप्त करने जा रहा है। बच्चों को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के लिए किताबी ज्ञान के अलावा यहां समय समय पर खेल-कूद, वाद-विवाद, कला तथा संगीत की प्रतियोगिताऐं आयोजित की जाती हैं। समाज के कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा का महादान देने के लिये इस विद्यालय की अलग पहचान है।

गौरवशाली शेरवुड कालेज

शेरवुड कालेज को नगर के सबसे पुराने प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल के रूप में जाना जाता है। १८५९ में इस विद्यालय की स्थापना यूरोपियन डायसन बॉइज स्कूल के रूप में हुई थी। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, देश के पहले थल सेनाध्यक्ष जनरल सैम मानेकशॉ सहित कई जानी मानी हस्तियों को शिक्षा व अनुशासन के साथ चर्तुर्दिक ज्ञान की दीक्षा देने वाले इस विद्यालय का अपना करीब डेढ़ शताब्दी लंबा गौरवशाली इतिहास रहा है। एटकिंसन लिखित प्रतिष्ठित ‘हिमालयन गजेटियर” में विद्यालय का उल्लेख है, जिससे इसकी प्रतिश्ठा का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अपनी प्रतिश्ठा के अनुरूप दिनों दिन अत्याधुनिकता से कदमताल करता हुआ विद्यालय पठन पाठन के साथ विद्यार्थियों के चतुर्दिक विकास के महायज्ञ में जुटा हुआ है। इस प्रगति का श्रेय नि:संदेह विद्यालय के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू की नेतृत्व क्षमता और अनुशासन प्रियता को जाता है, जिन्होंने ‘ब्रांड’ बन चुके ‘शेरवुडियन्स’ में पुरानी बेहतरीन छवि के साथ जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का नयां जज्बा और जोश भरा है। विगत वर्ष विद्यालय में पत्नी जया, पुत्र अभिषेक, बहु ऐश्वर्या के साथ पधारे महानायक अमिताभ बच्चन के साथ ही इस वर्ष उनके भाई अजिताभ बच्चन, बॉलीवुड-हॉलीवुड कलाकार कबीर बेदी से भी श्री संधू को इन्हीं गुणों के लिए दिल खोलकर मिली प्रशंशा से इसकी पुष्टि हो गई।

शैक्षणिक उत्कृष्टता के नित नऐ मानदंड स्थापित करता बिड़ला विद्या मंदिर

शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं मूल्यों पर आधारित शिक्षा के समन्वय के बिना एक अच्छे समाज एवं उन्नत देश के निर्माण की कल्पना नहीं की जा सकती। १९७७ में स्थापित नगर के बिड़ला विद्या मंदिर नैनीताल का सतत प्रयास है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ ही उनके शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावात्मक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास के भरपूर अवसर दिऐ जाऐं। यही कारण है कि यहां से पढ़े हुऐ विद्यार्थी अपने निजी जीवन में अत्यंत सफल रहने के साथ ही प्रशासनिक, इंजीनियरिंग, मेडिकल, सैन्य बलों तथा रंगमंच, राजनीति एवं अभिनय जैसे क्षेत्रों में अपनी सफलता के झंडे गाड़ते रहते हैं। यह विद्यालय अत्यंत योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों से युक्त होने के साथ-साथ बच्चों के विकास के लिए जरूरी सभी खेल-कूद सुविधाओं से संपन्न हैं। यहां कक्षा दस एवं बारह के बोर्ड परिणाम प्रति वर्ष अत्यंत उत्कृष्ट कोटि के होते हैं। यहां के विद्यार्थी हर वर्ष ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की मेरिट में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करते हैं। विद्यालय में एक बार पुन: पदार्पण करने वाले विद्वान एवं लंबा शैक्षणिक अनुभव रखने वाले प्रधानाचार्य एके शर्मा का मानना है कि बच्चों में शैक्षणिक उत्कृष्टता,