‘हरित पहलों’ व ‘स्वचालन’ की ओर बढ़ाए कुमाऊं विश्वविद्यालय ने कदम

राष्ट्रीय सहारा के सभी संस्करणों में 30 अप्रैल 2018 को विशेष ‘स्मार्ट एडुकेशन’ पेज पर प्रकाशित.. क्लिक करके बड़ा करके पढ़ें

1973 में स्थापित उत्तराखंड का कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल आईआईटी रुड़की से आए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल के नेतृत्व में निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इधर यूजीसी के ‘नैक’ यानी राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यानन परिषद से वर्ष 2016 में वर्ष 2021 तक के लिए ‘ए’ ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, प्रगति व भावी योजनाओं पर प्रस्तुत है प्रो. नौड़ियाल के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

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प्रश्न: कुमाऊं विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में कुछ बताएं।
प्रो. नौड़ियाल: कुमाऊं विश्वविद्यालय की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष प्रो. बीना पांडे ने इसी माह उत्तराखंड की एक जड़ी-बूटी किल्मोड़ा (दारुहरिद्रा) से मधुमेह के उपचार के लिए प्राकृतिक व रसायन रहित आर्युवेदिक औषधि बनाने का फॉर्मूला अमेरिकी संस्था ‘इंटरनेशनल पेटेंट सेंटर’ से पेटेंट प्रमाण पत्र प्राप्त किया है, जबकि विश्वविद्यालय के नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र नैनीताल ने प्लास्टिक के कूड़े व खाली बोतलों से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ‘ग्रेफीन’ के साथ ही पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट-कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की मशीन ‘स्वयंभू’ तथा कालीतीत यानी ‘एक्सपायर’ हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने की ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम’ के दो पेटेंट फाइल करवा कर साढ़े चार दशक की उम्र में इतिहास रच डाला है। इधर विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. जेएस रावत को बीते 5 वर्षों में वैश्विक रूप से उभरती हुई ‘हाई-टेक जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी’-जीआईएस का शासन में नियोजन और प्रशासनिक कार्यों में त्वरित, पारदर्शी संपादन और प्राकृतिक संसाधनों के विकास व प्रबंधन में प्रयोग के लिए किये गए उत्कृष्ट कार्यो के लिए भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित ‘नेशनल जियोस्पेशियल चेयर प्रोफेसरशिप अवार्ड’ से नवाजा गया है। इस अवार्ड के तहत प्रो. रावत को सेवानिवृत्त होने तक प्रति माह 25 हजार रुपए एवं सेवानिवृत्ति के उपरांत 3 वर्ष तक प्रति माह एक लाख रुपए प्राप्त होंगे। प्रो. रावत के प्रयासों से अभी हाल ही में अल्मोड़ा जिले में कोसी नदी के पुर्नजीवीकरण के कार्य भी प्रशासनिक स्तर से प्रारंभ हुए हैं।

प्रश्न: कुमाऊं विश्वविद्यालय में आपदा विजन क्या है ?
प्रो. नौड़ियाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की तरह ही हमारा मानना है कि ‘ऑटोमेशन’ यानी स्वचालन के जरिये विश्वविद्यालय की अनेकों समस्याओं का हल किया जा सकता है। स्वचालन में हमने ‘ग्रीन इनीशिएटिव्स’ यानी हरित पहलों को भी जोड़ा गया है। इसके तहत विश्वविद्यालय में करीब सवा लाख से अधिक विद्यार्थियों के प्रवेश ऑनलाइन कराये गए हैं, और परीक्षा की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है। इस तरह हम अपनी ओर से लाखों कागज और हजारों पेड़ों को बचाने में योगदान दे रहे हैं। इसी कड़ी में हम आगे ‘एनएसडीएल’ यानी ‘नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड’ व ‘एनएडी’ यानी ‘नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी’ के माध्यम से विश्वविद्यालय की सभी पीएच.डी. डिग्रियों और अंकपत्रों को इंटरनेट पर अपलोड करने की पहल करने जा रहे हैं, जिसके बाद इन डिग्रियों को कहीं से भी ऑनलाइन डाउनलोड करने के साथ ऑनलाइन ही सत्यापन भी किया जा सकेगा। इसके अलावा हम विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन तथा नैनीताल और अल्मोड़ा परिसरों को एक बड़ी कंपनी के माध्यम में बिना किसी खर्च के सौर ऊर्जा से जगमगाने और तीनों को गर्म रखने के लिए ‘सेंट्रल हीटिंग सिस्टम’ लगाने जा रहे हैं। यह कंपनी अपने खर्च पर सौर ऊर्जा के उपकरण लगाकर विवि को केवल 2 रुपए प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा विवि के नैनीताल व अल्मोड़ा परिसरों में 1-1 ‘स्मार्ट क्लास रूम’ तथा प्रशासनिक भवन को ‘हाई-टेक मॉडर्नाइज्ड स्मार्ट ऑफिस’ में तब्दील करने तथा विश्वविद्यालय के लेखा विभाग का भी स्वचालन करने की योजना है। विश्वविद्यालय के नैनीताल व अल्मोड़ा परिसरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी व फ्री वाई-फाई देने की शुरुआत भी जल्द होने जा रही है।

प्रश्न: शोध कार्य किसी भी विश्वविद्यालय की प्रगति के मुख्य मानक होते हैं। इस दिशा में क्या कर रहे हैं ?
प्रो. नौड़ियाल: इस हेतु विश्वविद्यालय में पहली बार ‘स्पॉसर्ड रिसर्च एंउ इंडस्ट्रियल सेल’ यानी प्रायोजित शोध एवं औद्योगिक परामर्श केंद्र की स्थापना की गयी है। इस केंद्र के जरिये विश्वविद्यालय के शोध विद्यार्थी देश के शीर्ष संस्थानों से शोध परियोजनाएं प्राप्त कर सकते हैं, तथा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक देश के अन्य संस्थानों में सलाहकार के रूप में सेवाएं दे सकते हैं। पीएच.डी. विद्याथियों की थीसिस के मूल्यांकन की प्रक्रिया को तेज करने, अधिकतम 5-6 माह में यह प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया भी बनायी गयी है। इसके अलावा अन्य छात्रों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय के परीक्षा प्रभाग का भी स्वचालन किया जा रहा है, जिसके बाद विवि में किसी भी छात्र को अपने छात्र जीवन में केवल प्रवेश के समय एक बार फॉर्म भरने की जरूरत होगी। इस दौरान उसे एक ‘यूनीक आईडी’ दी जाएगी। इसके बाद उसे अगली कक्षाओं में कोई फार्म नहीं भरने पड़ेंगे। (नवीन जोशी)

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प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट

प्रो. सतपाल बिष्ट को मिला ‘उत्तराखंड रत्न’ सम्मान

कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर के प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट को रविवार को देहरादून स्थित श्री देव सुमन सुभारती मेडिकल कॉलेज मे ‘उत्तराखंड रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया। तीन दशक पुरानी ‘ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटलेक्चुअल्स’ के द्वारा उनके कार्योें को देखते हुए उन्हें यह पुरस्कार प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत के हाथों प्रदान किया गया। प्रोफेसर सतपाल बिष्ट कुविवि के अलावा मिजोरम की आइजॉल यूनिवर्सिटी, उड़ीसा की बरहामपुर यूनिवर्सिटी में भी सेवाएं दे चुके हैं, तथा फिलीपींस के सेंट लुकास मेडिकल सेंटर व बरहामपुर यूनिवर्सिटी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं।

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