उत्तराखंड में निकाय चुनाव के परिसीमन पर एकल पीठ का फैसला पलटा, सरकार को आखिर राहत

नैनीताल। आज का दिन त्रिवेन्द्र सरकार के लिए काॅफी राहत भरा रहा। कारण निकाय चुनाव को लेकर आए नैनीताल हाईकोर्ट के बड़े फैसले से त्रिवेन्द्र सरकार को आज बहुत बड़ी राहत मिली गई। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने निकायों को अपग्रेड करने और परिसीमन की अधिसूचना को सही ठहराते हुए एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट के फैसले से राज्य में निकाय चुनाव को लेकर छाया कुहासा पूरी तरह साफ हो गया है। कोर्ट के फैसले के बाद समय से चुनाव कराने की उम्मीद बढ गई है।

41 निकायों के सीमा विस्तार का था मामला
गौरतलब है कि एकलपीठ ने राज्य सरकार की परिसीमन संबंधी अधिसूचना को रद कर दिया था, जिसके बाद सरकार ने विशेष अपील दायर कर इस फैसले को चुनौती दी। त्रिवेन्द्र सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर और मुख्य स्थाई अधिवक्ता परेश त्रिपाठी द्वारा बहस की गई। जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया। आपको बता दें राज्य के 41 निकायों का सीमा विस्तार किया गया था। हाईकोर्ट के फैसले से राज्य में निकाय चुनाव को लेकर छाया कुहासा पूरी तरह साफ हो गया है। कोर्ट के फैसले के बाद समय से चुनाव कराने की उम्मीद बढ गई है।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड उच्च न्यायालय की एकलपीठ द्वारा निकायों के सीमा विस्तार की अधिसूचना रद्द किये जाने के बाद प्रदेश में निकाय यानी ‘छोटी सरकार’ के चुनाव को लेकर एक बार फिर न केवल असमंजस की स्थिति वरन चुनाव ‘लम्बा टलने’ की स्थिति पैदा हो गई है। उच्च न्यायालय के की एकलपीठ के फैसले के खिलाफ सरकार विशेष अपील दायर करने की बात कर रही है। सरकार अपना इकबाल बुलंद रखने के लिए ऐसा करेगी भी, ऐसे में चुनाव कम से कम जुलाई माह तक के लिया टल गए लगते हैं।
सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार ‘हायर बेंच’ में जल्द ही विशेष अपील दायर करेगी। उनका कहना था कि न्यायालय ने जिस पहलू को असंवैधानिक बताया है । उस प्रक्रिया को पूर्व में कभी नहीं अपनाया गया है। गौरतलब है कि विगत तीन मई को उत्तराखंड में निकायों का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है। प्रदेश में उक्त तिथि से पूर्व निकाय चुनाव करा लिए जाने चाहिए थे, लेकिन सरकार द्वारा कराए गए सीमा विस्तार के खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट में इसके खिलाफ कई याचिकाएं दायर कर दी गईं। इस बीच चुनाव आयोग ने भी सरकार पर निकाय चुनाव कराने में हीलाहवाली बरतने का आरोप लगाया था। यहां तक कि चुनाव आयुक्त ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका भी दायर कर दी थी। इसके बाद हरकत में आई सरकार ने आनन-फानन में सीमा विस्तार पर अनन्तिम अधिसूचना जारी करते हुए आरक्षण को लेकर भी हाल ही में अधिसूचना जारी कर दी थी। हाईकोर्ट के सीमा विस्तार पर फैसले के बाद अब तक सरकार की ओर से की गई कवायद धरी की धरी रह गई। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की याचिका पर सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने अगली तिथि 21 मई नियत की है। ऐसे में फिलहाल निकाय चुनाव लम्बा टलने के आसार बन गए हैं।

निकाय चुनावों को लेकर सरकार को लगा बड़ा झटका, परिसीमन की अधिसूचना खारिज 

-हाईकोर्ट ने कहा कि परिसीमन कराने के लिये अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को है न कि सरकार को, सुनवाई कीअगली तिथि 22 मई को निश्चित
नैनीताल, 14 मई 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश में निकाय चुनावों के मामले में सरकार को बड़ा झटका दिया है। उच्च न्यायालय ने आज अपने महत्वपूर्ण आदेश में निकायों के परिसीमन से संबंधित अधिसूचना को ही ख़ारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि परिसीमन कराने के लिये अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को है न कि सरकार को। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि परिसीमन की कार्यवाही लोगों पर थोपी नहीं जा सकती है। मामले की सुनवाई न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में हुई। हाईकोर्ट के इस फैसले से समस्त निकायों के विस्तारीकरण की प्रक्रिया को धक्का लगा है।
उल्लेखनीय है कि देहरादून, हरिद्वार, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, नैनीताल व उधमसिंह नगर जनपदों के कई दर्जन लोगों ने सरकार के कदम को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से 5 अप्रैल 2018 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गयी थी, जिसमें सरकार ने प्रदेश के 41 नगर निगमों, नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों के परिसीमन को हरी झंडी दी थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 243 क्यू (2) के तहत परिसीमन संबंधी अधिसूचना जारी करने का अधिकार प्रदेश के राज्यपाल को है। सरकार ने बिना राज्यपाल की संस्तुति के ही परिसीमन संबधी अधिसूचना जारी कर दी। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि परिसीमन की कार्यवाही स्थानीय गांवों की सामाजिक स्थिति, जनसंख्या, साख्यिकीय व भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है जिसको सरकार की ओर से नजरअंदाज किया गया है। ये याचिकायें कोटद्वार के मवाकोट ग्राम सभा के अलावा 35 अन्य ग्राम प्रधानों के साथ साथ कई अन्य जनप्रतिनिधियों व ग्राम प्रधानों की ओर से दायर की गयी थीं।
एकलपीठ ने अपने निर्देश में सरकार के परिसीमन संबंधी अधिसूचना को खारिज कर दिया और कहा कि परिसीमन संबंधी अधिसूचना जारी करने का अधिकार राज्यपाल को बल्कि सरकार को नहीं। पीठ ने यह भी कहा कि परिसीमन की कार्यवाही लोगों पर थोपी नहीं जा सकती है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग की चुनाव कराने संबंधी याचिका पर भी आज न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ में सुनवाई हुई। पीठ ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 22 मई को निश्चित कर दी है।

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नैनीताल, 4 मई 2018। उत्तराखंड में निकाय चुनावों को लेकर कुहासा नए निकाय बोर्ड गठित होने की समय सीमा निकल जाने, पुरानी निर्वाचित बोर्डों का कार्यकाल कल पूरा होने के बाद आज निकायों के प्रशासकों के हवाले हो जाने के बावजूद अभी भी नहीं छटा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ से आज बड़ा फैसला आने की संभावना के इतर फैसला नहीं आ पाया। साथ ही बताया गया है कि चुनाव अधिसूचना जारी करने पर लगी रोक भी किसी तरह से नहीं हटी है। साथ ही मामला कम से कम अगले मंगलवार तक के लिए और लटक गया है।
एकलपीठ ने परिसीमन व तय सीमा के भीतर चुनाव कराने सम्बंधित याचिकाओं में सुनवाई करते अगली सुनवाई के लिए 8 अप्रैल की अगली तिथि नियत कर दी। तब तक सरकार को आदेश दिए हैं कि वह अपना जवाब पेश करें, और यह भी कहा है कि चुनाव कार्यक्रम तय कराने के लिए सरकार व चुनाव आयोग आपस में तय करें। दरअसल आज सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि याचिकर्ताओं के द्वारा परिसीमन से सम्बंधित 2012 के नगर पालिका व नगर निगमों के परिसीमन के लिए नियम व शर्तों वाले शासनादेश को चुनौती नहीं दी गयी है। इसके जवाब में याचिकर्ताओं के अधिवक्ताओं का कहना था कि यह शासनादेश उन पर लागू ही नहीं होता है। संविधान के अनुच्छेद 243 क्यू में परिसीमन करने के लिए क्या-क्या नियम व शर्तें होंगी, इसका उल्लेख नहीं है। न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार से इस सम्बन्ध में जवाब पेश करने को कहा।

उत्तराखंड के नगर निकायों में आरक्षण की अनंतिम स्थिति :

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-याचिकाकर्ता ने कहा राज्यपाल को करनी थी आपत्तियां निस्तारित, सरकार ने नहीं
नैनीताल, 18 अप्रैल 2018। उत्तराखंड के नगर निकायों के परिसीमन का मामला एक बार फिर उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंच गया है। कोटद्वार के मवाकोट की 35 ग्राम सभाओं की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर कहा है कि उच्च न्यायालय के निर्देश पर डीएम और सरकार ने उनकी आपत्तियां निस्तारित करते हुए 5 अप्रैल 2018 को अधिसूचना जारी कर दी है, जो कि गलत है। याचिका में कहा गया है कि संविधान में स्पष्ट प्रावधान दिया गया है कि इस प्रकार की सभी आपत्तियां राज्यपाल द्वारा निस्तारित की जानी चाहिए थी न कि सरकार के द्वारा। मामले को सुनने के बाद न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने राज्य सरकार से आगामी 20 अप्रैल तक इस बारे में स्थिति स्पस्ट करने को कहा है, और इसी तिथि को अगली सुनवाई की तिथि 20 नियत कर दी है।

राज्य सरकार की योजना पर हाईकोर्ट की मुहर

-23 तक परिसीमन का कार्य पूरा कर चुनाव आयोग को रिपोर्ट पेश करे सरकार
नैनीताल, 17 अप्रैल 2018। उत्तराखंड में निकाय चुनाव मामले पर दायर याचिका पर एक तरह से राज्य सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। याचिका में सरकार ने निकायों का परिसीमन 24 अप्रैल तक तथा सीटो पर आरक्षण का कार्य 11 मई तक कर 12 मई को चुनाव आयोग को चुनाव कार्यक्रम सौपने की बात कही थी। इधर मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से एक दिन पूर्व 23 अप्रैल तक परिसीमन का कार्य पूर्ण कर उसकी रिपोर्ट राज्य चुनाव आयोग को देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद अगली सुनवाई की तिथि 24 अप्रैल को नियत कर दी है।
ज्ञातव्य हो कि राज्य में निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी ना करने पर चुनाव आयोग ने नैनीताल उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर कहा है कि 3 मई से पहले राज्य में निकाय चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है। लिहाजा इस हेतु राज्य सरकार को निर्देश दिये जाएं।

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साफ़ हो गया है कि उत्तराखंड में 5 मई को नई पालिकाओं का गठन करने की तय सीमा के अंदर निकाय चुनाव नहीं हो पाएंगे। जिस तरह मामला उच्च न्यायलय में ही अटका हुआ है, ऐसे में चुनाव में करीब एक माह का विलम्ब होना साफ़ नजर आ रहा है, और चुनाव जून माह से पहले हो पाएंगे, इसकी उम्मीद कम है। राज्य सरकार की ओर से चुनाव आयोग के अधिवक्ता सजंय भट्ट को जवाब देते हुए कहा है कि सरकार निकायों का परिसीमन 24 अप्रैल तक व सीटों पर आरक्षण का कार्य 11 मई तक करके 12 मई को चुनाव आयोग को चुनाव कार्यक्रम सौप देंगे।

वहीं राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार तय चुनाव कार्यक्रम के अनुसार राज्य सरकार ने 9 मार्च को चुनाव कार्यक्रम तय कर 19 मार्च को मतदाता सूची जारी कर 2-3 अप्रैल को चुनाव आयोग व सभी जिला अधिकारियो को चुनाव की अधिसूचना जारी करनी थी। राज्य में यह पहली बार है जब निकाय चुनाव कराने के लिए राज्य निर्वाचान आयोग ने न्यायालय की शरण ली है।

उत्तराखंड सरकार का नगर निकायों के परिसीमन का शासनादेश निरस्त, नए सिरे से 2 दिन के भीतर फिर से शुरू होगी प्रक्रिया

  • दो दिन के भीतर नया शासनादेश जारी कर समाचार पत्रों में छपवाने के भी दिए आदेश 
  • एक सप्ताह के भीतर संबंधित ग्राम सभाओं से आपत्तियां लेने व अगले एक सप्ताह में आपत्तियों का निस्तारण करने के दिये आदेश
  • इस प्रकार करीब पखवाड़े भर लटकी प्रदेश में निकाय चुनाव की प्रक्रिया
नैनीताल, 09 मार्च 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों के नए परिसीमन करने के लिए किये गये सभी शासनादेशों को निरस्त कर दिया है। अलबत्ता, शासनादेश की प्रक्रिया नये सिरे से अगले दो दिन के भीतर ही शुरू हो जाएगी। न्यायालय ने सरकार को 48 घंटे के भीतर नया शासनादेश जारी कर समाचार पत्रों में प्रकाशित करने उसमें सभी ग्राम सभाओं से एक सप्ताह के भीतर आपत्ति मांगने और उन आपत्तियों पर एक सप्ताह के भीतर सुनवाई करने के निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही न्यायालय ने इस संबंध में दायर सभी याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है। इस प्रकार राज्य में 4 मई से पहले निकाय चुनावों की प्रक्रिया पूरी करने की बाध्यता के बीच करीब एक पखवाड़े की अतिरिक्त प्रक्रिया अपनाने का कार्य बढ़ गया है।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने शुक्रवार को नगर पालिका और नगर निगमों के विस्तार को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओ पर एक साथ सुनवाई करते हुए सरकार द्वारा जारी समस्त शासनादेशों को निरस्त करते हुए सरकार से 48 घंटे के अंदर नए शासनादेश जारी कर उसे समाचार पत्रो में प्रकाशित करने को कहा। साथ ही यह भी कहा कि इस पर ग्राम सभाओ से एक सप्ताह के भीतर आपत्ति मांगंे और इन आपतियों पर एक सप्ताह में सुनवाई करे। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बृहस्पतिवार को न्यायालय ने महाधिवक्ता से पूछा था कि सरकार ने निकायों का परिसीमन करते वक्त याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का मौका क्यों नही दिया। इस पर महाधिवक्ता ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट करते हुए अवगत कराया कि सरकार सुनवाई का मौका देना चाहती है। न्यायालय सरकार द्वारा आपत्तियां मांगने व उनका निस्तारण करने से संबंधित प्रक्रिया से संतुष्ठ नहीं हुआ। गौरतलब है कि मामले में भवाली के संजय जोशी, हल्द्वानी के भोला दत्त भट्ट, ग्राम पंचायत बाबूगढ़, संघर्ष समिति कोटद्वार, पिथौरागढ़ के दौला बस्ते नेडा, धनोरा, टिहरी व चम्बा सहित लगभग 39 गांवों के 12 दर्जन से अधिक ग्रामीण याचिकर्ताआंे का मुख्य आरोप था कि सरकार ने परिसीमन करते वक्त उनको सुनवाई का मौका नही दिया, और विभिन्न अधिसूचनाएं जारी कर राज्य के कई गांवों का परिसीमन करके उनको नगर पालिका और नगर निगमों में शामिल किया जा रहा है, तथा ग्राम प्रधानों पर बस्ते जमा करने का दबाब भी डाला जा रहा है। पूर्व में कोर्ट ने इस सम्बंध में सरकार को यथास्थिति बनाये रखने के आदेश दिए थे।

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नैनीताल, 23 फ़रवरी 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पिछली सरकार के देहरादून के सेलाकुई को नगर पंचायत में शामिल करने से सबंधित 24 नवम्बर 2015 के नोटिफिकेशन को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को छः सप्ताह के भीतर आम जनता को सुनवाई का मौका देने के निर्देश दिये हैं। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की।

मामले के अनुसार सेंट्रल होम टाउन सेलाकुई की ग्राम प्रधान व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि सरकार द्वारा 24 नवम्बर 2015 को सरकार ने नोटिफिकेशन में सेलाकुई कस्बे से लगी ग्राम पंचायतों को शामिल कर नगर पंचायत बना दिया गया था। सेंट्रल होम टाउन सेलाकुई की ग्राम प्रधान व अन्य ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें कहा था कि सेंटल होम टाउन ग्राम सभा के लोगों को नियमानुसार बिना सुनवाई का मौका दिये नगर पंचायत में शामिल करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद सरकार के नोटिफिकेशन को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को छः सप्ताह में याचिकर्ताओ को सुनवाई का अवसर देने को कहा है।

नैनीताल नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए सामान्य महिला के लिए हो सकता है आरक्षण 

नैनीताल नगर पालिका के चुनाव के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते खटीमा विधायक पुष्कर धामी

-भाजपा में महिला उम्मीदवारों की भरमार होने से लगाये जा रहे हैं कयास 
नैनीताल। देश की ऐतिहासिक तौर पर दूसरी जिला व मंडल मुख्यालय की प्रतिष्ठित नगर पालिका में संभव है कि आरक्षण महिला उम्मीदवार के पक्ष में आये। ऐसे संकेत बृहस्पतिवार को भाजपा के तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक मंडल के समक्ष महिला उम्मीदवारों की ओर से सर्वाधिक दावेदारी होने से यह निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। अध्यक्ष पद के लिए सर्वाधिक 8 उम्मीदवारों ने दावेदारी पेश की है, वहीं महिला एससी व ओबीसी के लिए सीट आरक्षित होने की स्थिति में एक-एक उम्मीदवार ने ही अपनी दावेदारी पेश की है।
बृहस्पतिवार को भाजपा के नगर निकाय चुनावों के लिए पर्यवेक्षक खटीमा विधायक पुष्कर धामी, राजकुमारी गिरि व सुरेश परिहार में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक ली, और उन्हें निकाय चुनावों में पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए उपयोगी टिप्स दिये, साथ ही आगे क्लब के एक कक्ष में संभावित उम्मीदवारों से दावेदारी करने को कहा तथा उनके बारे में उनसे स्वयं तथा अन्य कार्यकर्ताओं से दावेदारी की परख की। बताया गया कि सीट महिला के लिए आरक्षित होने की स्थिति के लिए कुमाऊं विवि के छात्र नेता रहे विमल चौधरी की धर्मपत्नी वंदना चौधरी, पूर्व दायित्वधारी शांति मेहरा, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष जीवंती भट्ट के साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी में रही रीना मेहरा, तुलसी कठायत, ज्योति ढोंढियाल व सभासद सपना बिष्ट के अलावा महिला एससी आरक्षण होने की स्थिति में आशा आर्या ने दावेदारी की है। वहीं अनारक्षित रहने की स्थिति के लिए प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य गोपाल रावत, कुमाऊं विवि कार्यपरिषद सदस्य अरविंद पडियार, पूर्व जिला महामंत्री दयाकिशन पोखरिया तथा दोनों नगर महामंत्री भानु पंत व कुंदन बिष्ट ने, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने की स्थिति के लिए पूर्व सभासद प्रेम सागर व अतुल पाल तथा ओबीसी के लिए आरक्षण की स्थिति के लिए रईश खान ने दावेदारी पेश की है। इस मौके पर विधायक संजीव आर्य भी मौजूद रहे।

सभासद पद के लिए टिकट नहीं देगी भाजपा !

नैनीताल। भाजपा के पर्यवेक्षक मंडल ने सभासद पद के लिए दावेदारों की थाह नहीं ली। इस आधार पर माना जा रहा है कि भाजपा पिछले बुरे अनुभवों को देखते हुए इस बार सभासद पद के लिए टिकट नहीं देगी। इस बारे में पर्यवेक्षक मंडल की अगुवाई कर रहे विधायक धामी ने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए 20 से अधिक लोगों के द्वारा दावेदारी की गयी है। अलबत्ता सभासद पद के लिए दावेदारी नहीं ली गयी है। इस बारे में कोई निर्णय पार्टी हाईकमान करेगा।

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उत्तराखंड में निकाय चुनाव को लेकर फैसला 11 अप्रैल तक टल गया है।  उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग की इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से 11 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने के आदेश पारित किए हैं, और इसी दिन सुनवाई नियत कर दी है।

उल्लेखनीय है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने एक दिन पूर्व याचिका दायर करराज्य में जल्द चुनाव कराने की मांग की गई है। याचिका में कहा था कि राज्य के 2013 में गठित निकाय बोर्डों की बैठक चार मई को हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 243-य के तहत राज्य में तीन मई तक निकायों का बोर्ड गठन होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार भी यदि सरकार नियत समय में चुनाव नहीं कराती तो आयोग कोर्ट जा सकता है। साथ ही बताया कि चुनाव को लेकर आयोग द्वारा मुख्य सचिव, शहरी विकास सचिव को आधिकारिक पत्र भेजे गए, मगर अब तक सरकार द्वारा चुनाव कार्यक्रम उपलब्ध नहीं कराया गया।

अलबत्ता इधर बताया जा रहा है कि सरकार एक-दो दिन में ही निकायों में आरक्षण की स्थिति घोषित कर सकती है।

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उत्तराखंड में निकाय चुनाव इसी माह 30 अप्रैल को हो सकते हैं। राज्य सरकार ने इस बारे में खाका लगभग तय कर लिया है। हालांकि राज्य निर्वाचन विभाग 27 को मतदान व 30 को मतगणना कराने का पक्षधर बताया गया है। सूत्रों के अनुसार अगले 2-3 दिन में निकायों के सीमा विस्तार का अंतिम नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। इसके एक सप्ताह के अंदर आपत्तियों का निस्तारण कर चुनाव की प्रक्रिया अप्रैल के पहले पखवाड़े ही शुरू हो सकती है। उच्च न्यायालय से यदि इस अवधि तक किसी निकाय पर कार्रवाई पूरी नहीं हो पाती है तो केवल वहीं चुनाव टाले भी जा सकते हैं। प्रदेश के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी कह दिया है कि चुनाव तय समय से पहले करा लिये जाएंगे और सरकार चुनाव के लिये तैयार है।

चुनावों के लिए यह है भाजपा-कांग्रेस की रणनीति

आसन्न निकाय चुनावों के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों रणनीति बनाने में जुट गए हैं। नैनीताल में बृहस्पतिवार को भाजपा-कांग्रेस दोनों पार्टियों की अलग-अलग हुई बैठकों में दोनों की रणनीतियों का कुछ यूं खुलासा हुआ….

वार्डों में टिकट नहीं देगी पर प्रत्याशी लड़ाएगी कांग्रेस !

नैनीताल क्लब में कांग्रेस पार्टी की बैठक में उपस्थित सरिता आर्य व अन्य कांग्रेसी।

-वार्डवार प्रत्याशियों से दावेदारी पेश करने को कहा
नैनीताल। राज्य की विपक्षी कांग्रेस पार्टी आसन्न निकाय चुनावों के लिए अध्यक्ष पद पर तो चुनाव पार्टी सिंबल पर हड़ेगी ही, अलबत्ता वार्डों में सभासद पदों पर टिकट देना तय नहीं है, लेकिन वार्डों में भी अपनी प्रत्याशी लड़ाए जाएंगे। यह बात बृहस्पतिवार को नैनीताल क्लब में हुई बैठक के बाद महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक व पालिकाध्यक्ष सरिता आर्य ने कही। इस दौरान अध्यक्ष पद के लिए नगर कांग्रेस अध्यक्ष मारुति नंदन साह, महिला कांग्रेस व अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की गजाला कमाल तथा पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सचिन नेगी व अनुपम कबडवाल की ओर से दावेदारी पेश की गयी। बैठक में अध्यक्ष तथा सभी वार्डों के लिए वार्डवार दावेदारी पेश करने को कहा गया। दावेदारों को वार्डों की चुनाव से संबंधित कुछ जिम्मेदारियां देने की भी बात हुई, पर अधिकांश सदस्य जिम्मेदारी से बचते व दूसरों पर टालते भी नजर आए। बैठक में नगर अध्यक्ष मारुति साह, डा. हरीश बिष्ट, योगेश बिष्ट, राजेंद्र मनराल, जेके शर्मा, गोपाल बिष्ट, कृष्णा साह, रेखा, आशा, अनीता वर्मा, देवकी प्रसाद, सचिन नेगी, कैलाश मिश्रा, त्रिभुवन फर्त्याल, डीडी रुवाली, शंकर जोशी, गजाला कमाल व सभासद केलाश अधिकारी सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

भाजपा चलाएगी निकाय चुनावों के लिए युवाओं को जोड़ने का अभियान

नैनीताल। बृहस्पतिवार को नगर भाजपा की ओर से सभी प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों की नैनीताल क्लब में आयोजित बैठक में निकाय चुनावों पर चर्चा की गयी। इसके अलावा आगामी 5 मार्च को युवा मोर्चा के तत्वावधान में पहली बार मतदान करने वाले युवा मतदाताओं को पार्टी की विचार धारा से जोड़ने के लिए नैनीताल क्लब में प्रस्तावित कार्यक्रम पर भी चर्चा की गयी। नगर अध्यक्ष मनोज जोशी ने बताया कि इस सम्मेलन में 500-700 युवा मतदाताओं को लाने की कोशिश रहेगी। सम्मेलन को भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री संजय व प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट संबोधित करेंगे।
साथ ही गत दिवस विधायक संजीव आर्य के नगर के विभिन्न वार्डों में किये गए दौरान उठी मांगों आदि पर भी चर्चा की गयी। तय किया गया कि विभिन्न मांगों पर शीघ ही पार्टी कार्यकर्ता डीएम से मिलेंगे। इसके साथ ही आगामी 3 अप्रैल को भी नैनीताल क्लब में नगर भाजपा की बैठक आहूत कर दी गयी है, जिसमें आगामी 6 अप्रैल को पार्टी के स्थापना दिवस के कार्यक्रमों पर चर्चा होगी। बैठक में पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट के भी उपस्थित होने की संभावना है।

कांग्रेसी लालटेन से ढूंढेंगे विकास, मागेंगे परिवर्तन की बयार

नैनीताल। कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतीश नैनवाल ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता आगामी निकाय चुनावों के लिए वार्ड-वार्ड लालटेन लेकर भाजपा की चार वर्ष पुरानी केंद्र सरकार के विकास कार्यों को ढूढेंगे, और जनता से ‘परिवर्तन की बयार’ मागेंगे। दावा किया कि निकाय चुनाव 2019 के लोस चुनाव से पहले परिवर्तन-बदलाव की शुरुआत करने वाले साबित होंगे। कहा कि दो विधायकों से भी सरकार बना लेने वाली भाजपा निश्चित रूप से एक सदी पुरानी कांग्रेस के समक्ष बड़ी चुनौती है। इसके लिए असंतोष जता रहे युवाओं को आगामी निकाय चुनावों की बागडोर सोंपी जाएगी। वहीं महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य ने भाजपा सरकार पर विधायकों के वेतन वृद्धि करने को लेकर निशाना साधा कि सरकार को केवल अपनी चिंता है। सरकार ने गैरसेंण जाकर भी गैरसेंण की चिंता नहीं की, और बेरोजगारों का बेरोजगारी भत्ता बंद कर उल्टे उन पर देहरादून में लाठियां भांजीं, व निकायों का मनमाना परिसीमन किया। इसका जवाब जनता निकाय चुनावों में भाजपा को कांग्रेस के पक्ष में मतदान करके देगी।

अब तक नगर अध्यक्ष तय नहीं कर पाई है कांग्रेस
नैनीताल। बृहस्पतिवार को कांग्रेस पार्टी की निकाय चुनाव के लिए हुई बैठक में इससे पूर्व नैनीताल क्लब में नगर अध्यक्ष पद के लिए सर्वानुमति बनाने के लिए करीब छह माह पूर्व हुई बैठक की यादें ताजा होती नजर आईं। हल्द्वानी के पूर्व पालिकाध्यक्ष हेमंत बगडवाल की उपस्थिति में हुई उस बैठक में कार्यकर्ताओं के हंगामे व एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोपों के बीच अध्यक्ष पद के लिए सर्वानुमति नहीं बन पाई थी। ऐसी ही ‘एक अनार-सौ बीमार’ जैसी स्थिति आज भी बनती नजर आई।

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