/साफ़ हुआ, नैनीताल बैंक में अपनी शेयरधारिता बेचने की कोशिश में आरबीआई गया था बॉब

साफ़ हुआ, नैनीताल बैंक में अपनी शेयरधारिता बेचने की कोशिश में आरबीआई गया था बॉब

  • नैनीताल बैंक को बेचेगा नहीं, पर शेयरधारिता में बदलाव की मंशा रखता है बॉब
  • नैनीताल बैंक के चेयरमैन ने कहा बॉब के पास 98.57 फीसद शेयर हैं, इनमें कोई बदलाव हो सकता है, पर बेचने की बात गलत है
राष्ट्रीय सहारा, 13 जनवरी 2018

नैनीताल। नैनीताल बैंक को बेचे जाने के लिए इसके पैतृक बैंक-बैंक ऑफ बड़ौदा के भारतीय रिजर्व बैंक में अनुमति लेने जाने से संबंधित समाचार पर बैंक ऑफ बड़ौदा ‘बैकफुट’ पर आ गया लगता है। बॉब प्रबंधन से मिले संदेश के बाद नैनीताल बैंक के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश शर्मा ने इस संबंध में आज हुई प्रगति पर पूछे जाने पर कहा कि बैंक आफ बड़ौदा का नैनीताल बैंक में ‘मेजोरिटी स्टेक’ यानी बड़ा हिस्सा है। और बैंक ऑफ बड़ौदा अपने ‘ट्रांसफॉर्मेशन’ हेतु ‘कैपिटल’ बढ़ाने के प्रयास में है। इसी यानी ‘कैपिटल बढ़ाने’ की कोशिश में बॉब प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक गया था। आगे कुछ भी भारतीय रिजर्व बैंक एवं अन्य नियामकों से मिलने वाली स्वीकृतियों पर निर्भर करेगा। यानी बॉब जो भी करेगा, आरबीआई की स्वीकृति पर ही करेगा। कहा कि अपने खातों के सुधार के लिए बॉब को नैनीताल बैंक को बेचे जाने की बात गलत है। बैंक ऑफ बड़ौदा का नैनीताल बैंक की अपनी धारिता को बेचने की कोई योजना नहीं है, और वह नैनीताल बैंक का भविष्य में भी ‘बड़ा शेयर होल्डर बना रहेगा’। अलबत्ता, बातों में यह भी कहा कि बॉब के पास नैनीताल बैंक के 98.57 फीसद शेयर हैं, इसमें कोई बदलाव हो भी सकता है। इस प्रकार साफ़ हो गया है कि बैंक ऑफ़ बडौदा, नैनीताल बैंक को बेचने न सही बैंक में अपनी शेयरधारिता को बेचने की कोशिश में जरूर है, और इसकी अनुमति लेने के लिए ही बॉब आरबीआई गया था। इशारा समझा जा सकता है कि बैंक ऑफ़ बडौदा 50 फीसद से अधिक शेयर अपने पास रखकर भी नैनीताल बैंक का ‘मेजोरिटी स्टेक होल्डर’ रह सकता है। और इस पूरे प्रकरण में बैंक ऑफ़ बडौदा द्वारा नैनीताल बैंक को बेचने तथा इसमें अपनी हिस्सेदारी बेचने जितना मूल फर्क है।

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